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मासूम बेटी को कार में बैठाकर आग से जूझता रहा ये अफसर

Written By News Today Time on Tuesday, May 3, 2016 | 9:27 PM

      नीमच।। मध्य प्रदेश के नीमच में स्टेशन रोड पर लगी खाद्य तेल के पैकेजिंग प्लांट में लगी भीषण आग और तेल के डिब्बों में हो रहे धमाकों के बीच एक अफसर अपनी तीन साल की मासूम बेटी को साथ लेकर मौके के पर आग बुझाने का काम करते रहे.
    आईआरएस अफसर और ओपियम एन्ड अलक्लाइड फैक्ट्री के जीएम एचएन मीणा को सुबह पांच बजे आग लगने की सूचना मिली थी. उस वक्त वह अपने तीन साल की बेटी रावी के साथ घर पर अकेले थे.
    स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने आग बुझाने में फैक्ट्री में तैनात सीआईएसएफ के विशेष फायर फाइटर दस्ते की मदद मांगी थी. उन्होंने तय किया कि वो भी अपने जवानों के साथ मौके पर जाएंगे.
    वहां रखे करीब एक करोड़ के तेल में आग लगने से काफी धुआं उठ रहा था. ऐसे में उन्होंने अपनी बेटी को एक गाडी में सुरक्षित रूप से बैठा दिया और वे खुद अपनी फैक्ट्री के सीआईएसएफ के 40 जवानों के साथ आग बुझाने लग गए. उनकी तीन साल की बेटी करीब चार घंटे तक गाडी में बैठी रही.
     गौरतलब है की आईआरएस मीणा ने नीमच में बीते एक माह से फायर सेफ्टी एजुकेशन देने का अभियान चलाया हुआ है. वे स्कूलों में जाकर खुद अपनी टीम के साथ फायर सेफ्टी के गुर सिखा रहे हैं. अभी तक करीब 10 हज़ार बच्चों को वे ये ट्रेनिंग दे चुके हैं.
   उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर बीते आठ साल से बेटी बचाओ अभियान चला रखा हैं. यह अभियान वे अपने निजी खर्च से चलाते हैं.
9:27 PM | 0 comments | Read More

मास्टरनी को पाने के लिए पार की सारी हदें, राज खुला तो हो गया बंटाधार

      राजगढ़।। कहते हैं प्यार तो ठीक है, लेकिन जब यही जुनून बन जाए तो वह आफत लेकर आती है. ऐसा ही एक मामला मध्‍य प्रदेश में सामने आया. यहां एक युवक का दिल स्कूल की मास्टरनी पर आ गया. इस मास्टरनी को पाने के लिए युवक ने सारी हदें पार कर दी. शुरुआत में तो वह अपनी इस योजना में सफल भी हो गया. आरोप है कि युवक ने जाल बुनकर मास्टरनी के साथ शरीरीरिक संबंध भी बना लिए. लेकिन, भला झूठ की बुनियाद पर प्यार की परवान कितने दिनों तक चढ़ती, वो पल आ ही गया जब सारा माजरा खुल गया और सब बंटाधार हो गया.
     मध्यप्रदेश के राजगढ़ में एक प्रायवेट जॉब करने वाले युवक ने खुद को आईएएस अफसर बताकर एक मास्टरनी से संबंध बनाए और उसके साथ दुष्कर्म किया. आरोपी एक मामूली निजी कंपनी में काम करता था लेकिन खुद को आईएएस अफसर बताता था. एक सरकारी स्कूल में प्राध्यापिका उसके संपर्क में आ गई और दोनों के बीच दोस्ती हो गई.
     जानकारी के मुताबित युवक का नाम रामदास है और वह इंदौर की एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था. वह राजगढ़ में अक्सर टूर करता रहता था. यहीं पर उसकी मुलाकात सरकारी स्कूल की प्राध्यापिका से हुई. युवक ने खुद को आईएएस अफसर बताया और युवती को अपने जाल में फंसा लिया. धीरे-धीरे दोनों नजदीक आ गए.
    रामदास ने प्राध्यापिका को झांसा दिया कि उसका आईएएस में चयन हो गया है. युवती उसके इस झूठ से अंजान थी. वह आंख बंद कर उसकी सारी बाते मान गई. प्राध्यापिका शादीशुदा नहीं थी तो अचानक एक दिन रामदास ने उसके सामने शादी का प्रस्ताव रख दिया. रामदास के शादी के प्रस्ताव पर प्राध्यापिका ने सहमति दे दी और दोनों के बीच इस दौरान शारीरिक संबंध भी बन गए.
     पहले तो युवती रामदास के झूठ से अंजान थी लेकिन सच कितने दिन छिपता. एक दिन रामदास की पोल खुल गई. सच सामने आने पर युवती का भरोसा पूरी तरह टूट गया. रामदास की असलियत सामने आने पर पीड़िता ने उसपर दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया. राजगढ़ की अदालत ने रामदास को दस साल की सजा सुनाई.


9:22 PM | 0 comments | Read More

भाजपा बंद करे जनसुनवाई का ढोंग : पायलट

     जयपुर।। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री सचिन पायलट ने राज्य सरकार द्वारा भाजपा कार्यालय में आयोजित होने वाली जनसुनवाई को जनता की परेशानी का सबब करार देते हुए इसे भाजपा द्वारा जनता को भ्रमित करने वाला बताया है।
    श्री पायलट ने आज एक बयान जारी कर कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार जनता को जनसुनवाई के नाम पर गुमराह कर रही है। प्रदेश की जनता गत् सवा दो सालों में भाजपा की वादाखिलाफी से परेशान है। लोग उम्मीद के साथ प्रदेश के दूर-दराज क्षेत्रों से अपनी परेशानियों के समाधान के लिए जनसुनवाई के लिए आते हैं परन्तु उन्हें किसी प्रकार की कोई राहत आज तक नहीं मिली है। भाजपा कार्यालय में बैठकर मंत्री अपनी विफलताओं का ठीकरा विपक्ष पर फोडऩे का काम कर रहे हैं। प्रदेश की समस्याओं के निदान के लिए सरकार के पास कोई रोडमैप नहीं है। उन्होंने कहा कि इसीलिए भाजपा के मंत्री अपनी सरकार की विफलताओं पर पर्दा डालने के लिए पाँच साल के जनादेश को कम बता रहे हैं और अपने चयन के निर्धारित कार्यकाल की सच्चाई को भी झुठलाना चाहते हैं।
    उन्होंने कहा कि सभी को जनादेश पाँच साल के लिए मिलता है और इस दौरान ही निर्वाचित सरकार को जनता की कसौटी पर खरा उतरना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 19 से ज्यादा जिले सूखे का सामना कर रहे हैं और ऐसी विकट परिस्थितियों के बावजूद जलदाय विभाग ने जनता को राहत पहुँचाने के मद्देनजर कोई अग्रिम व्यवस्थाएं नहीं की है। सरकार जब सामूहिक जनसमस्याओं के निदान के मोर्चे पर विफल है तो व्यक्तिगत समस्याओं का निराकरण कैसे होगा, समझ से परे है।
     उन्होंने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ जिलों से लोग अपनी परिवेदनाओं के निस्तारण के लिए सरकार के जनसुनवाई कार्यक्रम में पहुँचते है और हताश होकर लौट रहे हैं जिसमें उनके अमूल्य समय और पैसे की बर्बादी निश्चित है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह ढोंग जनता पर भारी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई के दौरान बेरोजगारों व संविदाकर्मियों को अपनी मांग रखने पर लाठियां खानी पड़ी है और आम जनता को दुव्र्यवहार का सामना करना पड़ा है। अनेकों बार एक ही समस्या के लिए फरियाद करने के बावजूद समाधान का समाधान नहीं होने के कारण जनसुनवाई में लोगों की भागीदारी भी ना के बराबर रह गई है। उन्होंने कहा कि भाजपा दिखावे की राजनीति को छोडक़र ठोस नीतियों को धरातल पर उतारे क्योंकि पानी की कमी से जूझ रहे प्रदेशवासी लचर सरकारी कार्यप्रणाली से पूरी तरह निराश हो चुके है।
9:21 PM | 0 comments | Read More

जाने मंदिर की परिक्रमा क्यों करते हैं हम?

Written By News Today Time on Friday, April 29, 2016 | 7:20 PM

       कभी आपने सोचा है कि प्राचीन मंदिरों में कुंआ या कोई जलाशय क्यों होता है? कभी इस बात पर विचार किया है कि हम परिक्रमा क्यों लगाते हैं और यह परिक्रमा एक खास दिशा में ही क्यों होती है? इन सबके पीछे वैज्ञानिक कारण हैं। जानते हैं सद्‌गुरु से:
    प्रदक्षिणा का अर्थ है परिक्रमा करना। उत्तरी गोलार्ध में प्रदक्षिणा घड़ी की सुई की दिशा में की जाती है। इस धरती के उत्तरी गोलार्ध में यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। अगर आप गौर से देखें तो नल की टोंटी खोलने पर पानी हमेशा घड़ी की सुई की दिशा में मुडक़र बाहर गिरेगा। अगर आप दक्षिणी गोलार्ध में चले जाएं और वहां नल की टोंटी खोलें तो पानी घड़ी की सुई की उलटी दिशा में मुडक़र बाहर गिरेगा। बात सिर्फ पानी की ही नहीं है, पूरा का पूरा ऊर्जा तंत्र इसी तरह काम करता है।
      इस संस्कृति में हम ईश्वर से मिलना नहीं चाहते, हम स्वर्ग जाकर उसके साथ खाना नहीं खाना चाहते। यहां तो हम खुद ही ईश्वर बन जाना चाहते हैं। हम बड़े महत्वाकांक्षी लोग हैं।उत्तरी गोलार्ध में अगर कोई शक्ति स्थान है और आप उस स्थान की ऊर्जा को ग्रहण करना चाहते हैं तो आपको घड़ी की सुई की दिशा में उसके चारों ओर परिक्रमा लगानी चाहिए। अगर आप ज्यादा फायदा उठाना चाहते हैं तो आपके बाल गीले होने चाहिए। इसी तरह और ज्यादा फायदा उठाने के लिए आपके कपड़े भी गीले होने चाहिए। अगर आपको इससे भी ज्यादा लाभ उठाना है तो आपको इस स्थान की परिक्रमा नग्न अवस्था में करनी चाहिए। वैसे, गीले कपड़े पहनकर परिक्रमा करना नंगे घूमने से बेहतर है, क्योंकि शरीर बहुत जल्दी सूख जाता है, जबकि कपड़े ज्यादा देर तकगीले रहते हैं। ऐसे में किसी शक्ति स्थान की परिक्रमा गीले कपड़ों में करना सबसे अच्छा है, क्योंकि इस तरह आप उस स्थान की ऊर्जा को सबसे अच्छे तरीके से ग्रहण कर पाएंगे।
     यही वजह है कि पहले हर मंदिर में एक जल कुंड जरूर होता था, जिसे आमतौर पर कल्याणी कहा जाता था। ऐसी मान्यता है कि पहले आपको कल्याणी में एक डुबकी लगानी चाहिए और फिर गीले कपड़ों में मंदिर भ्रमण करना चाहिए, जिससे आप उस प्रतिष्ठित जगह की ऊर्जा को सबसे अच्छे तरीके से ग्रहण कर सकें। लेकिन आज ज्यादातर कल्याणी या तो सूख गए हैं या गंदे हो गए हैं।

      सूर्य कुंड, सूर्य मंदिर जब आप घड़ी की सुई की दिशा में घूमते हैं तो आप कुछ खास प्राकृतिक शक्तियों के साथ घूम रहे होते हैं। कोई भी प्रतिष्ठित स्थान एक भंवर की तरह काम करता है, क्योंकि उसमें एक कंपन होता है और यह अपनी ओर खींचता है। दोनों ही तरीकों से ईश्वरीय शक्ति और हमारे अंतरतम के बीच एक संपर्क स्थापित होता है। इसके पीछे सोच यह है कि इस संस्कृति में हम ईश्वर से मिलना नहीं चाहते, हम स्वर्ग जाकर उसके साथ खाना नहीं खाना चाहते। यहां तो हम खुद ही ईश्वर बन जाना चाहते हैं। हम बड़े महत्वाकांक्षी लोग हैं। हमारा मकसद ईश्वर से मिलना नहीं है, बल्कि हम तो खुद ईश्वर हो जाना चाहते हैं। इसीलिए हम अपनी आंखें बंद रखते हैं। ऐसे में किसी प्रतिष्ठित स्थान में रहने का अर्थ है कि हम इस संपर्क को लगातार बनाये रखना चाहते हैं, जिससे धीरे-धीरे यह शरीर एक मंदिर बन जाए। अगर आप चाहें तो इस शरीर को किसी जानवर जैसा रख सकते हैं और चाहें तो इसे एक मंदिर की तरह रख सकते हैं।
      शक्ति स्थान की परिक्रमा गीले कपड़ों में करना सबसे अच्छा है, क्योंकि इस तरह आप उस स्थान की ऊर्जा को सबसे अच्छे तरीके से ग्रहण कर पाएंगे।घड़ी की सुई की दिशा में किसी प्रतिष्ठित स्थान की परिक्रमा करना इस संभावना को ग्रहण करने का सबसे आसान तरीका है। खासतौर से भूमध्य रेखा से 33 डिग्री अक्षांश तकयह संभावना काफी तीव्र होती है, क्योंकि यही वह जगह है जहां आपको अधिकतम फायदा मिल सकता है। आपने इस बात को महसूस किया होगा कि जैसे-जैसे आप उत्तर की ओर बढ़ते जाते हैं, आपको ऐसे मंदिर मिलते हैं, जिनका निर्माण खासतौर से पूजा और उपासना के लिए ही किया गया है। दक्षिण में पूजा और उपासना वाला पहलू तो है ही, लेकिन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि उन मंदिरों को खास वैज्ञानिक तरीकों से बनाया गया है और उन्हें बनाने में कई पीढ़ियों का योगदान है।
      कई मंदिर तो ऐसे हैं जिनके निर्माण में कई पीढ़ियों को अपना योगदान देना पड़ा। उदाहरण के लिए एल्लोरा का कैलाश मंदिर, जिसका निर्माण राष्ट्रकूटों ने कराया था उसे बनने में 135 साल का लंबा वक्त लगा। इसका मतलब है कि मंदिर की इस योजना पर बिना कोई भी बदलाव किए चार पीढ़ियों ने काम किया। यह एक अलग तरह की मानवता है। आज दुनिया में एक बीमारी है। दुनिया के ज्यादातर लोग ऐसे हो गए हैं कि आप उन्हें कुछ भी दे दीजिए, वे उसमें कुछ जोड़ घटा देंगे, उसमें अपनी मूर्खता जरूर जोड़ देंगे। हालांकि इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनका यह बदलाव कितना मूर्खतापूर्ण है, बात बस इतनी है कि वे हर चीज पर अपना निशान छोड़ना चाहते हैं। पुराने समय में इतने भव्य मंदिरों का निर्माण किया गया, लेकिन किसी ने उसमें कहीं भी अपना नाम नहीं खुदवाया। उन्होंने बस उस मंदिर के लिए काम किया और बिना उसे पूरा किए चल बसे। इसके बाद अगली पीढ़ी ने उस अधूरे काम को आगे बढ़ाया और उसे बिना पूरा किये वे भी चल बसे। लेकिन उन्हें इस बात का भरोसा था कि कोई न कोई इस काम को पूरा अवश्य करेगा।

     कैलाश मंदिर, एल्लोरा यह अलग तरह की मानवता है। हम उस तरह के लोगों को पैदा करना चाहते हैं, क्योंकि उस तरह के लोग वास्तव में मानवता के लिए उपयोगी हैं। वे देवता जैसे थे। जब मैं कहता हूं देवता समान, तो जरा देखिए कि ईश्वर ने दुनिया की कितनी शानदार रचना की है, लेकिन क्या उसने कहीं भी अपना कोई हस्ताक्षर छोड़ा है। कहीं नहीं? उसने तो अपनी रचना से खुद को इस हद तक अलग कर लिया कि आज हम बैठकर यह बहस तककरते हैं कि वह है भी या नहीं।
     तो इस तरह से चीजें बनीं और वक्त के साथ ये हमारी संस्कृति में आ गईं। ऐसा इसलिए नहीं हुआ, क्योंकि लोगों ने इन्हें मनमाने ढंग से बनाया, बल्कि इसलिए क्योंकि उन लोगों ने जीवन का गहराई से अवलोकन किया था। उन्होंने देखा कि यही वह जगह है, जहां यह सबसे अच्छे तरीके से काम करती है। यही वह तरीका है जो सबसे अच्छे ढंग से काम कर सकता है। इसी को ध्यान में रखकर उन्होंने इन मंदिरों का निर्माण किया।
7:20 PM | 0 comments | Read More

स्मृति ईरानी की दो टूक - 'अपनी किताब से आतंकी शब्द हटाए DU'




     दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के इतिहास के पाठ्यक्रम में शामिल एक किताब में भगत सिंह को एक क्रांतिकारी आतंकवादी बताए जाने पर परिजनों की आपत्ति के बाद यह मामला संसद में उठ गया। संसद में मामला उठते ही केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय हरकत में आ गया है। आनन फानन में मंत्रालय ने डीयू को यह फरमान जारी कर दिया कि पुस्तक से आतंकवादी शब्द तत्काल हटा दिया जाए।
     मानव संसाधन मंत्रालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इस बारे में रिपोर्ट मांगी है। डीयू की किताब में भगत सिंह को आतंकी लिखने के मामले को लेकर केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने आज डीयू से किताब में संशोधन करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि भगत सिंह के लिए किताब में लिखा आतंकी शब्द को हटाए।
      प्रख्यात इतिहासकार बिपिन चन्द्रा और मृदुला मुखर्जी द्वारा स्वतंत्रता के लिए भारत का संघर्ष शीर्षक से लिखी इस पुस्तक के 20वें अध्याय में भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, सूर्य सेन और अन्य को क्रांतिकारी आतंकवादी बताया गया है।
      इतना ही नहीं, पुस्तक में चटगांव आंदोलन को भी आतंकी कृत्य करार दिया गया है, जबकि सैंडर्स की हत्या को आतंकी कार्रवाई कहा गया है। भगत सिंह के परिवार ने मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को एक पत्र लिखकर इस संबंध में हस्तक्षेप करने और पुस्तक में उचित बदलाव करने की मांग की है।
     भगत सिंह के परिजनों ने डीयू के कुलपति योगेश त्यागी से भी मुलाकात की जिन्होंने उन्हें इस मामले को देखने का आश्वासन दिया था।
     स्वतंत्रता सेनानी के भतीजे अभय सिंह संधु ने कहा था कि आजादी के 68 साल के बाद भी देश को आजाद कराने में अपने जीवन का बलिदान देने वाले क्रांतिकारियों के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। भगत सिंह को फांसी पर लटकाने वाले अंग्रेजों ने अपने फैसले में उन्हें सच्चा क्रांतिकारी बताया और यहां तक कि उन्होंने भी आतंक या आतंकवादी जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया।


6:52 PM | 0 comments | Read More

2000 करोड़ के ड्रग केस में ममता कुलकर्णी का नाम...

     मुंबई।। बीते जमाने की अभिनेत्री ममता कुलकर्णी का नाम एक ड्रग्स रैकेट के मामले में उजागर हुआ है। पिछले महीने ठाणे से 2000 करोड़ की ड्रग एफेड्रीन पकड़ी गई थी। ठाणे पुलिस को शक है कि ममता इंटरनेशनल ड्रग मार्केट का चेहरा हो सकती है। ममता का नाम तब सामने आया जब ड्रग स्मगलिंग के सरगना विक्की गोस्वामी के नाम का पता चला।
     फिलहाल ये दंपत्ति केन्या में रहता है। इस ड्रग की बिक्री भारत में बैन है। इसी जांच में पुलिस को बड़ी सफलता तब मिली जब उसने मंगलवार को ठाणे से पुनीत श्रृंगी को अरेस्ट किया. उसने बताया कि एक फर्म डायरेक्टर मनोज जैन भी विकी के साथ इस रैकेट में शामिल है, और उसने केन्या जाकर विकी से कई बार मुलाकात की थी।
     ठाणे पुलिस के मुताबिक, भारत, पौलेंड और दूसरे यूरोपियन देशों की गैंग 20 टन एफीड्रन कन्साइंनमेंट को मुंबई से गुजरात के रास्ते ईस्टर्न यूरोप भेजने की प्लॉनिंग कर रही थी. इस मामले पुलिस को पुनीत श्रृंगी समेत तीन लोगों की तलाश थी, दरअसल पुलिस को ममता पर इसलिए शक है क्यों कि इस इंटरनेशनल रैकेट का सरगना विक्की है।
     इंटरपोल अलर्ट के बाद विक्की केन्या से बाहर नहीं निकल सकता था. इसलिए क्लाइंट से मिलने के लिए वह ममता को दुबई, सिंगापुर, साउथ अफ्रीका और यूएस भेजता रहता था. ममता महाराष्ट्र में ड्रग नेटवर्क के साथ बिजनेस डील भी करती थी. इसके अलावा विकी पैसो के लेनदेन के लिए ममता के बैंक अकाउंट का इस्तेमाल भी करता था।
    ये कपल हवाला के जरिए ड्रग डील का पैसा दूसरे देशों में भेजता था. विकी का ड्रग स्मगलिंग में लंबा इतिहास रहा है. 1997 में दुबई में उसे अरेस्ट किया गया था, जहां उसे 15 साल की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद वो ममता के साथ केन्या चला गया. यूएस और ठाणे की पुलिस उसे ढूंढ रही है. केन्या में भी उसके खिलाफ कई केस चल रहे है।
    बता दें कि एफेड्रीन की भारत में मांग इसलिए ज्यादा है, क्यों कि इससे अस्थमा और ब्रोनकाइटिस के इलाज में मदद मिलती है। डिमांड अधिक होने के कारण यह महंगा बिकता है और मुनाफा ज्यादा है।
6:27 PM | 0 comments | Read More

विश्व का एकमात्र मंदिर जो संतान प्राप्ति की देता है गारंटी !

मंदिर में है एक रहस्यमयी फल
अगर आप पिछले काफी समय से संतान सुख प्राप्ति के लिए जगह-जगह भटक रहे हैं तो यह खबर आपके लिए ही है.
    भारत में इस तरह के कई चमत्कार आसानी से मिल सकते हैं जहाँ डाक्टर नहीं भगवान की रहमत से घर में खुशियाँ आई हैं. तो ऐसा ही एक चमत्कारी मंदिर है तमिलनाडु के विल्लुपुरम में स्थित इंदुम्बन मंदिर. यहाँ के बारे में कहा जाता है कि यहाँ बाँझ औरतों को इस कलंक से मुक्ति प्राप्त हो जाती है. मंदिर में आने वाले अधिकतर लोग या तो संतान सुख प्राप्ति के लिए यहाँ आते हैं या फिर सन्तान के स्वास्थ्य को सही कराने आते हैं.
     मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यहाँ आने वाले हर व्यक्ति की मुराद भगवान जरुर सुनते हैं. मंदिर में आने वाले भक्त अपने साथ फल लाते हैं जो भगवान को अर्पित करने से प्रसाद बन जाते हैं. बाद में यही फल खाने से घर के दुःख खत्म हो जाते हैं. कई बार इस तरह के चमत्कार भी हुए हैं कि 10 साल से बिछड़े लोग भी घर वापस आ गये हैं.
नींबू का प्रसाद
     मंदिर वैसे जिस बात के लिए सबसे ज्यादा फेमस है वह बात है यहाँ मिलने वाले अनोखे नींबू. मंदिर के नींबू चमत्कारी हैं ऐसा माना जाता है. सबसे बड़ी बात यह है कि मंदिर में इन नींबू के लिए बकायदा बोली लगती है. कई बार एक नींबू 60 हजार रुपैय तक भक्तों द्वारा ख़रीदा जाता है.
    यह नींबू चमत्कारी बताया जाता है. अक्सर इस नींबू को वही लोग खरीदते हैं जिनके संतान नहीं हो रही होतो है. इस फल की खासियत है कि वह कई दिनों बाद तक भी हरा ही रहता है और सूखता नहीं है.
मंदिर पर हर साल लगता है एक मेला
    ‘Balathandayuthapani temple ‘ स्थानीय लोग मंदिर को इस नाम से भी पुकारते हैं. वैसे इस नाम के कई मंदिर तमिलनाडु में हैं इसलिए अलग पहचान देते हुए मंदिर का नाम इंदुम्बन मंदिर रख दिया गया है. यहाँ पर एक मेला लगता है. जिसमें 9 दिनों तक पूजा द्वारा पहले नींबू को चमत्कारी बनाया जाता है और मेले के 11 दिन इनकी बोली लगाई जाती है. वैसे बोला जाता है कि जिस व्यक्ति ने भी यह प्रसाद ख़रीदा है वह कभी भी निराश नहीं हुआ है.  उसके घर खुशियाँ जरूर आई हैं.


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अनोखा शिवलिंग – हिन्दू – मुस्लिम दोनों करते हैं पूजा

     भारत सांस्कृतिक देश है, और यहां हर जगह विभिन्न संस्कृति का दर्शन हो ही जाता है। विविधताओं से भरे इस देश में भाईचारे की हजारों मिसालें सामने आती हैं जहां पर सौहार्द देखने को मिलता है। भारत में भले ही बहुत धर्म हों पर सांस्कृति तो एक ही है इसलिए भारत देश आज भी बहुत सुंदर देश है और इसकी सभ्यता उतनी ही महान है। आज हम बात कर रहे हैं एक अनोखे शिवलिंग की जो बहुत पुराना है और इसकी पूजा हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्मों के लोग करते हैं। आईये जानते हैं इसके बारे में।।
     गोरखपुर से 25 किमी दूर खजनी कस्‍बे के पास एक गांव है सरया तिवारी। यहां पर महादेव का एक अनोखा शिवलिंग स्‍थापित है जिसे झारखंडी शिव कहा जाता है। मान्‍यता है कि यह शिवलिंग कई सौ साल पुराना है और यहां पर इनका स्वयं प्रादुर्भाव हुआ है। यह शिवलिंग हिंदुओं के साथ मुस्लिमों के लिए भी उतना ही पूज्‍यनीय है क्योंकि इस शिवलिंग पर एक कलमा (इस्लाम का एक पवित्र वाक्य) खुदा हुआ है। माना जाता है कि यह वाक्य खुद महमूद गजनवी ने शिवलिंग पर खुदवाया था।
    लोगों के अनुसार महमूद गजनवी ने इसे तोड़ने की कोशिश की थी, मगर वह सफल नहीं हो पाया। इसके बाद उसने इस पर उर्दू में ‘लाइलाहाइल्लललाह मोहम्मदमदुर्र् रसूलुल्लाह’ लिखवा दिया ताकि हिंदू इसकी पूजा नहीं करें। तब से आज तक इस शिवलिंग की महत्ता बढ़ती गई और हर साल सावन के महीने में यहां पर हजारों भक्‍तों द्वारा पूजा अर्चना किया जाता है।
Shiv ling 2    आज यह मंदिर साम्प्रदायिक सौहार्द का एक मिसाल बन गया है क्योंकि हिन्दुओं के साथ-साथ रमजान में मुस्लिम भाई भी यहाँ पर आकर अल्लाह की इबादत करते है।
     कहते है की यह एक स्वयंभू शिवलिंग है। लोगों का मानना है कि इतना विशाल स्वयंभू शिवलिंग पूरे भारत में सिर्फ यहीं पर है। शिव के इस दरबार में जो भी भक्‍त आकर श्रद्धा से कामना करता है, उसे भगवान शिव जरूर पूरी करते हैं।
माना जाता है कि पोखरे में नहाने से ठीक हो जाता है रोग

     मंदिर के  पुजारी आनंद तिवारी, शहर काजी वलीउल्लाह और श्रद्धालु जेपी पांडे के मुताबिक इस मंदिर पर कई कोशिशों के बाद भी कभी छत नही लग पाया है। यहां के शिव खुले आसमान के नीचे रहते हैं। मान्‍यता है कि इस मंदिर के बगल मे स्थित पोखरे के जल को छूने से एक कुष्‍ठ रोग से पीड़ित राजा ठीक हो गए थे। तभी से अपने चर्म रोगों से मुक्ति पाने के लिये लोग यहां पर पांच मंगलवार और रविवार स्नान करते हैं और अपने चर्म रोगों से निजात पाते हैं।
5:35 PM | 0 comments | Read More

इस मंदिर में पिछले 16 सालों से रोज नाग आकर के करता है भगवान शिव की पूजा

      भगवान शिव को नाग बहुत प्रिय हैं, और पुराणों में उनके गले में नाग को लिपटा हुआ दिखाया जाता है। भगवान शिव के वेसे तो भारत और विश्व में बहुत मंदिर हैं जहां रोज लोग पूजा करते हैं और अपनी मनोकामना पूरी करते हैं, पर एक मंदिर बहुत विचित्र है, इस अनोखे मंदिर में पिछले 16 सालों से लगातार एक नाग भगवान शिव की खास पूजा करने आता है।
     उत्तरप्रदेश के आगरा के पास स्थित एक गांव है – सलेमाबाद। गांव में एक प्राचीन शिव मंदिर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां पिछले करीब 16 वर्षों से एक नाग रोज आकर भगवान शिव को नमन करता है।
     इस मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु शिवजी की पूजा करने आते हैं लेकिन नाग का इस तरह आना जिज्ञासा का विषय बना हुआ है। यह नाग रोज मंदिर में आता है और करीब 5 घंटे तक यहां रुकता है।
     नाग सुबह 10 बजे आता है और शाम को 3 बजे वापस लौट जाता है। इस अवधि में यह शिवलिंग के पास ही बैठा रहता है। यहां आसपास के गांवों में भी इस नाग की चर्चा है। इससे श्रद्धालुओं को कोई भय नहीं है और न इसने कभी किसी को नुकसान पहुंचाया।
     हालांकि नाग के मंदिर में प्रवेश करने के बाद मंदिर के द्वार बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान कोई और व्यक्ति मंदिर में प्रवेश नहीं करता। 3 बजने के बाद नाग वहां से चला जाता है।
     उसके बाद ही लोग मंदिर में भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने जाते हैं। किसी सर्प का इतनी लंबी अवधि से रोज मंदिर में आकर शिवलिंग के पास रुकने को यहां के लोग आश्चर्य से ज्यादा श्रद्धा का विषय मानते हैं।      पुराणों की मानें तो एक तथ्य यह भी हो सकता है कि शायद यह नाग कोई दिव्य आत्मा हो जिसे कोई श्राप मिला हुआ हो, कहना असंभव है पर संभावना और पुर्व काल की कथाऐं तो यहीं बताती हैं कि क्योंकि कोई साधारण नाग इस प्रकार भगवान शिव की पूजा करता हो ऐसा देखने में नहीं मिलता है। पुराणों में कथा है कि एक राजा गिरगिट बनाये गये थे, तो काकभुसंणी जी को तौ कौआ बनाया गया था। खुद भरत एक बार हिरण बने थे, तो कहा जा सकता है कि यह भी कोई दिव्य आत्मा ही होंगे जो नाग के रूप में भी मानवों की तरह भगवान का सानिध्य प्राप्त कर रहे हैं।


5:20 PM | 0 comments | Read More

IPS बनने की कहानी : रात में पुलिस ने रोका था इनका रिक्शा, मांगी थी रिश्वत

     झांसी।। आईपीएस गरिमा सिंह को हाल ही में झांसी जिले की कमान सौंपी गई है। महज 25 की उम्र में आईपीएस बनीं गरिमा की यह पहली पोस्टिंग है। आइए जानते हैं एक छोटे-से गांव कथौली की रहने वाली गरिमा की सक्सेस स्टोरी।
पुलिस वाले ने रात में घूमने पर मांगी थी रिश्वत...
बात उन दिनों की है जब गरिमा दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहीं थीं।
- गरिमा बताती हैं, "डीयू में पढाई के दौरान मैं एक मॉल से रात में दोस्तों के साथ होस्टल लौट रही थी। रात ज्यादा हो चुकी थी। तभी चेकिंग के लिए तैनात पुलिसवाले ने हमारा रिक्शा रोक लिया।"
- "रात में कहां से आ रही हो, कहां जाना है जैसे सवाल पूछने के बाद पुलिस वाले ने हमसे 100 रुपए मांगे। जब हमने मना किया तो मेरे पापा को फोन कर रात में घूमने की शिकायत करने की धमकी देने लगा।"
- थोड़ी बहस के बाद पुलिस वाले ने उन्हें जाने तो दिया, लेकिन इस वाक्ये ने गरिमा के मन में पुलिस के प्रति नेगेटिविटी भर दी।
कैसा रहा शुरुआती करियर
- आईपीएस गरिमा सिंह इन दिनों झांसी की सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही हैं।
- वे बलिया जिले के गांव कथौली की रहने वाली हैं।
- गरिमा का सपना हमेशा से आईपीएस बनने का नहीं था, वो एमबीबीएस की पढ़ाई कर डॉक्टर बनना चाहती थीं।
- गरिमा बताती हैं, "मेरे पापा ओमकार नाथ सिंह पेशे से इंजीनियर हैं। वे चाहते थे कि मैं सिविल सर्विसेज में जाऊं। सिर्फ उनके कहने पर मैंने तैयारी शुरू की।"
- गरिमा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफन कॉलेज से बीए और एमए (हिस्ट्री) की पढ़ाई की है।
- उन्होंने पहली बार 2012 में सिविल सर्विसेज का एग्जाम दिया था और तभी उनका सिलेक्शन आईपीएस में हो गया।
ऐसे पुलिस ने जीता दिल
- रिश्वत वाले वाक्ये ने गरिमा के मन में पुलिस के लिए कड़वाहट भर दी थी, लेकिन जल्द ही उनका नजरिया बदल गया।
- वह बताती हैं, "एक बार डीयू में मेरा फोन गायब हो गया था। मैंने इसकी शिकायत पुलिस में की। पुलिस ने जिस तेजी से एक्शन लेते हुए मेरा फोन खोज निकाला, उसने मेरा नजरिया बदल दिया।"
इंजीनियर से की शादी
- गरिमा की शादी पिछले साल 25 जनवरी को ही हुई है।
- उनका बर्थडे 14 फरवरी को आता है।
- गरिमा के पति राहुल रॉय पेशे से इंजीनियर हैं।
- राहुल ने आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और अब नोएडा में पोस्टेड हैं।
झांसी में हो रही हैं पॉपुलर
- लखनऊ में 2 साल तक अंडरट्रेनिंग एएसपी के तौर पर रहीं गरिमा झांसी में एसपी सिटी के रूप में लोकप्रिय हो रही हैं।
- समस्याग्रस्त लोगों से बेहद शिष्ट तरीके से पेश आकर उनकी परेशानी सुनना उन्हें लोकप्रिय बना रहा है।
- उनका टैलेंट देखते हुए उन्हें लखनऊ के बहुचर्चित मोहनलाल गंज रेप केस की जांच टीम में शामिल किया गया था।
- उन्होंने इस केस पर रात-रात भर जागकर काम किया।
- इसके अलावा उन्होंने महिला हेल्पलाइन 1090 को स्थापित करने में भी योगदान दिया।
ऐसे होती है गरिमा के दिन की शुरुआत
- गरिमा सिंह के दिन की शुरुआत अच्छे थॉट्स के साथ होती है।
- ऑफिस में उनकी टेबल पर पॉजिटिव थॉट्स पेपर पर लिखे रखे रहते हैं।
- सबसे पहले वे यही पेपर पढ़ती हैं जिससे उन्हें सकारात्मक होने में मदद मिलती है।
- ये थॉट्स उन्होंने पेपर पर खुद लिखकर रखे हैं।
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अब अपने बैंक बैलेंस की जानकारी एक मिस कॉल से लीजिये

Written By News Today Time on Thursday, April 28, 2016 | 5:47 PM

   सभी बैंक ने यह सुविधा शुरू की है… आपको अपने बैंक खाते के साथ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से अपने बैंक के निचे दिए गए मोबाइल नंबर पर कॉल करनी है कॉल अपने आप कट जाएगी और आपके बैंक बैलेंस की जानकारी आपके फ़ोन पर SMS में आ जाएगी | अब आपको अपने बैंक बैलेंस जानने के लिए अपने ATM की ट्रानसेक्शन को व्यर्थ करने की जरुरत नहीं है
1. Axis Bank – 09225892258
2. Andhra Bank – 09223011300
3. Allahabad Bank – 09224150150
4. Bank of Baroda – 09223011311
5. Bhartiya Mahila Bank – 09212438888
6. Dhanlaxmi Bank – 08067747700
7. IDBI Bank – 09212993399
8. Kotak Mahindra Bank – 18002740110
9. Syndicate Bank – 09664552255
10. Punjab National Bank -18001802222
11. ICICI Bank – 02230256767
12. HDFC Bank – 18002703333
13. Bank of India – 02233598548
14. Canara Bank – 09289292892
15. Central Bank of India – 09222250000
16. Karnataka Bank – 18004251445
17. Indian Bank – 09289592895
18. State Bank of India – Get the balance via IVR 1800112211 and 18004253800
19. Union Bank of India – 09223009292
20. UCO Bank – 09278792787
21. Vijaya Bank – 18002665555
22. Yes Bank – 09840909000
23. South Indian Bank-0922300848
24. Bank of Maharashtra-9222281818




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सत्ता में आई तो बांग्लादेश से घुसपैठ रोक देगी भाजपा : शाह



     भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बुधवार को कहा कि अगर उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल की सत्ता में आती है कि बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ पर रोक लगा दी जाएगी.
      शाह ने कोलकाता में एक चुनावी सभा में कहा, ‘‘न तो तृणमूल कांग्रेस और न ही माकपा बांग्लादेश से भारत में होने वाली घुसपैठ को रोक पाई है क्योंकि यह वोटबैंक तैयार करने के लिए उनके एजेंडे का हिस्सा है.’’
    उन्होने कहा कि भाजपा घुसपैठ रोकने के लिए भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाना चाहती है.
    शाह ने कहा, ‘‘अगर यहां भाजपा की सरकार बनती है तो कोई एक बांग्लादेशी भारत में प्रवेश नहीं कर सकेगा. इसलिए हमने बांग्लादेश के साथ सीमा समझौता किया था. हम सीमा पर बाड़ लगाना चाहते हैं ताकि कोई घुसपैठ नहीं हो.’’
    माकपा नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य के साथ मंच साझा करने वाले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि ये दोनों पार्टियां केरल में एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं, जबकि यहां साथ हैं.



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भारत का अपना देसी जीपीएस का सपना पूरा, नेविगेशन सैटेलाइट हुआ लॉन्च

    नई दिल्ली।। आज श्रीहरिकोटा से PSLV सातवें और आखिरी नेविगेशन सेटेलाइट को लेकर उड़ान भरी। इसके साथ ही भारत का अपना देसी जीपीएस का सपना पूरा हो गया। इस सैटेलाइट का नाम IRNSS-1G है।
    अभी 6 नेविगेशन सेटेलाइट्स 24 घंटे अपने सिग्नल उपलब्ध करा रहे हैं। ये सुविधा भारतीय इलाके में ठीक वैसी ही होगी जैसे अमेरिकी जीपीएस सुविधा देती है। इस सैटेलाइट को 12.50 मिनट पर आज इस लॉन्च किया गया।
    ये क्षमता हासिल करने वाला भारत दुनिया का तीसरा देश होगा। एक ऐसी सुविधा जिसका भारतीय सेना को एक लंबे समय से इंतजार था, हालांकि इसके कई और भी फायदे हैं।
देसी जीपीएस की ख़ासियत
सेटेलाइट का डाटा स्मार्टफोन सीधे इस्तेमाल कर सकेंगे
20 मीटर से भी कम की सटीक जानकारी का दावा
1500 किलोमीटर के दायरे के मुताबिक डिजाइन
वजन 1425 किलो, एक दशक से ज्यादा काम करेगा
पहले से ही 6 नेविगेशन सेटेलाइट काम कर रहे हैं
 बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस लॉन्च को खुद बैठकर टीवी पर देखा। इस मौके पर देशवासियों को संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत ने आज अपना सातवां सैटेलाइट लॉन्च किया है। आज भारत दुनिया के उन पांच देशों में गर्व के साथ खड़ा हो गया जिसमें उसका अपना जीपीएस तैयार हो गया है।
    आज तक हम इसके लिए अन्य देशों की व्यवस्थाओं पर निर्भर थे। आज हम आत्मनिर्भर हो गए हैं। हमारे रास्ते हम तय करेंगे। अब अपनी तकनीक के आधार पर हम यह करेंगे। भारत के वैज्ञानिकों ने देशवासियों को अनोखा तोहफा दिया है। इस तकनीक का बहुत रोल है।




4:45 PM | 0 comments | Read More

कबाड़ से छात्र ने बनाया ड्रोन, NASA ने भेजा बुलावा


      अमरोहा।। अमरोहा जिले के गजरौला कस्बे का रहने वाला 11वीं के छात्र ने कबाड़ से 55 फीट ऊंचाई तक उड़ने वाले ड्रोन का एक मॉडल तैयार किया. जिसका मॉडल नासा के इंटरनेशनल स्पेस सोसाइटी की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया था. इस मॉडल को स्पेस सेटलमेंट स्टूडेंट डिजाइन कॉम्पटीशन के तहत चयनित कर लिया गया है.
      नासा ने उसे इंटरनेशनल स्पेस डेवलपमेंट सेमिनार के तहत 18 से 22 मई तक अमेरिका में होने वाले ओरल प्रजेंटेशन के लिए अमंत्रित किया है. विशाल ने बताया कि, अमरोहा की बाजारों में ड्रोन कैमरा बनाने के लिए समान नहीं मिला तो उसने दिल्ली के जामा मस्जिद स्थित कबाड़ी की दुकान पर गया.
    यहां से कैमरे संबंधि‍त उपकरण लेकर आया और अन्य जगहों से पुराने उपकरणों लाकर ड्रोन कैमरा तैयार किया है.
    विशाल ने बताया कि यह ड्रोन कैमरा डिफेंस के बहुत काम आ सकता है. क्योकि इस कैमरे में एक लिपो बैट्री लगी है. भारत में पेपर बैट्री मिलती नहीं है, नहीं तो इसमें पेपर बेट्री लगता. पेपर बेट्री लगाने से यह 24 घंटे तक चार्ज रहता और देश सीमा पर हम इसके माध्यम से 24 घंटे तक निगरानी रख सकते है.


4:41 PM | 0 comments | Read More

खाना मत पकाओ, पकाया तो होगी जेल : बिहार सरकार का विचित्र फरमान

    पटना।। चिलचिलाती गर्मियों में बिहार में आग की वजह पिछले दो हफ्तों में करीब 66 लोग और 1200 जानवरों की मौत हो चुकी है। राज्य सरकार ने इससे निपटने का विचित्र समाधान खोजा है, खाना न बनाएं।
सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक खाना बनाने की इजाजत नहीं
     यहां के इलाकों में सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक खाना बनाने की इजाजत नहीं है, अगर किसी ने यह नियम तोड़ा तो उसे 2 साल की जेल हो सकती है। आग से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों पर भी बैन लगा दिया गया है।
नीतीश सरकार का तर्क
    नीतीश कुमार सरकार का तर्क है कि खाना पकाने के दौरान चूल्हे में जल रही आग से चिंगारी हवाओं में उड़कर झोपड़ियों में आग लग रही है।
दो दिन पहले 300 झोपड़ियां हुईं जलकर खाक
     ताजा घटना बेगूसराय की है, जहां दो दिन पहले 300 झोपड़ियां जलकर खाक हो गई थीं। मुद्दा यह है कि सैकड़ों का जीवन खतरे में है। यह आदेश एक विस्तृत सर्वेक्षण के आधार पर दिया गया है, जो कि ये आग कैसे शुरू होती है पर आधारित था।
'मैंने आग के कारण अपना घर खोया'
     हाल ही में आग में अपनी झोपड़ी को गंवाने वाले बिहार के जहानाबाद के सतेंदर ने कहा कि यह ठीक लगता है, लेकिन बात यह है कि कितने लोग इसका पालन करेंगे। लोग कई व्यवहारिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। हां, ये सच है कि मैंने अपना घर आग में खोया है और यह आग किसी के खाना बनाने के दौरान भड़की थी।
पुलिस का बयान
    इस गांव के पुलिसवालों का कहना है कि इस तरह के आदेश को लागू करना कठिन है, लेकिन सजा के डर से गांव वाले खुद ही इस नियम का पालन करेंगे।




4:39 PM | 0 comments | Read More

हाईकोर्ट ने पूछा, ज्यादा फीस तो नहीं ले रहे शिक्षण संस्थान

       शिमला।। हाईकोर्ट ने निजी शिक्षण संस्थानों में मूलभूत सुविधाओं और मान्यता की जांच के लिए कमेटी गठित करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश दिए कि वे कमेटी गठित करें जो हर स्तर के निजी शिक्षण संस्थान जैसे स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटर, किसी भी नाम से चलने वाले एक्सटेंशन सेंटर और विश्वविद्यालय की जांच तीन माह के भीतर पूरी करेंगे। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने कहा कि कमेटी एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करे। इसमें ये स्पष्ट किया गया जाए कि क्या निजी संस्थान के पास पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षित स्टाफ, अध्यापक-अभिभावक संघ आदि हैं।
संस्थानों की 11 जानकारी वेबसाइट पर डालें
      हाईकोर्ट ने प्रधान शिक्षा सचिव को आदेश दिए हैं कि वे निजी संस्थानों से जुड़ी कम से कम 11 जानकारियां अपनी वेबसाइट और संस्थान के मुख्य द्वार पर लगाएं। इन जानकारियों में वो बताए कि उनके संस्थान में फैकल्टी सदस्यों की योग्यता एवं काम का अनुभव, इंफ्रास्ट्रक्चर का विवरण, मान्यता प्रमाण पत्र, इंटर्नशिप और प्लेसमेंट का विवरण, फीस का संपूर्ण विवरण अन्य गैर शैक्षणिक गतिविधियों की संपूर्ण जानकारी, अध्यापक अभिभावक संघ की पूर्ण जानकारी, परिवहन सुविधाओं की विस्तृत जानकारी, संस्थान की आयु व उपलब्धियां, छात्रवृत्तियों की जानकारी और पूर्व छात्रों का पता फोन नंबर समेत सूची में शामिल हो।
ज्यादा हो रही फीस वसूली
     बिजनेस इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडी की याचिकाओं को निपटाते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश में धड़ल्ले से चल रहे निजी शिक्षण संस्थानों की मनमानी पर आपत्ति प्रकट करते हुए कहा कि निजी संस्थान नाजायज ढंग से फीस वसूल कर अपने संसाधन बढ़ा रहे हैं। शिक्षा का स्तर गिराते हुए इसे व्यवसायिक बना दिया गया। हर संस्थान की जवाबदेही है और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।
फीस लौटाने के आदेश
     कोर्ट ने याचिकाओं को खारिज करते हुए प्रार्थी निजी शिक्षण संस्थान को 10 हजार की कॉस्ट भी लगाई। रेगुलेटरी कमीशन विवि ने बिजनेस इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडी को उन छात्रों की फीस लौटने के आदेश दिए जो संस्थान से एमबीए और पीजीडीएम कोर्स कर रहे थे। इन छात्रों ने आरोप लगाया था कि संस्थान की ओर से वसूली जा रही फीस हद से ज्यादा है। ये कोर्स मान्यता प्राप्त भी नहीं है।




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भारत के खिलाफ F-16 जेट विमान का इस्तेमाल कर सकता है पाकिस्तान

    वाशिंगटन।। शीर्ष अमेरिकी सांसदों ने पाकिस्तान को आठ एफ-16 लड़ाकू जेट विमान बेचने के ओबामा प्रशासन के फैसले पर चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि इन विमानों का इस्तेमाल आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में नहीं, बल्कि भारत के खिलाफ किया जा सकता है। उन्होंने इस संबंध में ओबामा प्रशासन से अपने फैसले की समीक्षा करने का अनुरोध किया है।

भारत के खिलाफ होंगा इस्तेमाल
     सांसद मैट सैल्मन ने कल कांग्रेस में सुनवाई के दौरान कहा, मेरे साथ-साथ कांग्रेस के कई सदस्यों ने इस फैसले और इस बिक्री के समय पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा भारत एवं पाकिस्तान के बीच तनाव अब भी बढ़ा हुआ है। हालांकि पाकिस्तान ने कहा है कि कि वह इसका इस्तेमाल आतंकवादियों के खिलाफ करेगा, कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या एफ 16 विमानों का इस्तेमाल आतंकवादियों के बजाए भारत या अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के खिलाफ अंतत: किया जा सकता है।
कई अन्य सांसदों ने भी जताई सहमति
     हाउस ऑफ फॉरेन अफेयर्स समिति की एशिया एवं प्रशांत मामलों की उप समिति की ओर से अफगानिस्तान और पाकिस्तान के मुद्दे पर आयोजित कांग्रेस में सुनवाई के दौरान सैल्मन के साथ कई अन्य सांसदों ने सहमति जताई जबकि अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान के विशेष अमेरिकी प्रतिनिधि रिचर्ड ओल्सन ने ओबामा प्रशासन का प्रतिनिधित्व किया।
भारत के खिलाफ युद्ध के लिए हथियार देने की जरूरत नहीं
     अमेरिकी सांसद ब्रैड शर्मन ने कहा, हमें यह सोचने की जरूरत है कि पाकिस्तान को मुहैया कराई गई सैन्य सहायता और जो एफ-16 लड़ाकू विमान हैं वे कम खर्चीले हैं या नहीं और क्या यह आतंकवादियों के खिलाफ पाकिस्तानी वायु सेना के लिए सबसे प्रभावी तरीके के साथ भारत एवं पाकिस्तान के बीच शक्ति संतुलन के लिए बहुत कम विध्वंसक हथियार प्रणाली होगी। शर्मन ने कहा, हमें पाकिस्तान को ऐसे अत्याधुनिक हथियार आतंकवादियों की तलाश के लिए देने की जरूरत है, न कि भारत के खिलाफ युद्ध के लिए। अमेरिकी सीनेट ने हाल में पाकिस्तान को करीब 70 करोड़ डॉलर की राशि वाले आठ एफ-16 लड़ाकू विमान देने के ओबामा प्रशासन के फैसले पर तत्काल रोक लगाई है। सैल्मन ने ओल्सन से इसके मूलभूत उद्देश्य और उक्त बिक्री के समय पर स्पष्टीकरण मांगते हुए पूछा कि कैसे यह अमेरिका के बेहतर हित में है।
पाकिस्तान में आतंकी संगठन बेखौफ गतिविधियां जारी रखे हुए हैं
    उन्होंने कहा, 9/11 के हमले के बाद आतंकवाद से मुकाबले के लिए वर्षों से पाकिस्तान को 25 अरब डॉलर से अधिक की सहायता राशि देने के बावजूद आतंकवादी संगठन पाकिस्तान में बेखौफ अपनी गतिविधि जारी रखे हुए हैं। उन्होंने कहा, पाकिस्तान ने आतंकवाद का राज्य के हथियार के रूप में और आतंकी परोक्ष समूह के तौर पर इस्तेमाल किया है ताकि पाकिस्तानी सेना भारत के अंदर घातक हमले कर सके। उप समिति की अध्यक्ष इलियाना रोजलेटिनेन ने भी पाकिस्तान को एफ-16 की बिक्री पर चिंता जाहिर की है।




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दूसरी शादी रचाने आए दूल्हे की बारात में पहुंची पहली पत्नी



    सारण।। नगरा प्रखंड के खैरा गांव में मंगलवार की रात शादी के दौरान अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई। शादी समारोह की जोर-शोर से तैयारी हो रही थी। कुछ ही समय में बारात दरवाजे पर लगने वाली थी। अभी बारात दरवाजे पर पहुंची ही थी कि दूल्हे ही पहली पत्नी दो बच्चों के साथ पहुंच गई। उसने दुल्हन के परिजनों को सारी बातें बताईं। मामला समझते ही दुल्हन के परिजनों ने दूल्हा उसके परिजनों को बंधक बना लिया। इधर मामला बिगड़ता देख बारातियों ने भागने में ही अपनी भलाई समझी। चारों ओर अफरा-तफरी मच गई।
दूल्हा बिन दुल्हन बैरंग लौटा
      खैरा गांव निवासी सुदामा चौरसिया की शादी बनियापुर थाना के पिठौरी गांव के सच्चिदानंद चौरसिया की पुत्री के साथ होनी थी। बारात आने के बाद दरवाजा लगाने की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान दूल्हे की पहली पत्नी अपने दो बच्चों के साथ वहां पहुंच गई और सारी बात दुल्हन के परिजनों से बताई। यह सुनकर दुल्हन के परिजनों ने दूल्हे तथा उसके परिजनों को बंधक बना लिया। इस दौरान अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बारातियों ने भाग कर अपनी जान बचाई।
सभी खर्चा लौटाने के लिए तैयार हुए दूल्हे के परिजन
    सूचना मिलते ही थाना प्रभारी रवींद्र कुमार दलबल के साथ मौके पर पहुंचे तथा दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर शांत कराया। इसके बाद पंचायत बुलाई गई। पंचायत में लड़का के पिता ने तिलक से बारात तक का सभी खर्च की राशि लड़की के पिता को लौटाने की बात स्वीकार की, तब जाकर मामला शांत हुआ। आपसी सहमति बनने के बाद दूल्हा बिन दुल्हन बैरंग लौट गया। इसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में होती रही।



4:14 PM | 0 comments | Read More

भगत सिंह को ‘क्रांतिकारी आतंकवादी’ बताने पर लोकसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच नोकझोंक

      नई दिल्ली।। दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई जा रही मृदुला मुखर्जी और विपिन चंद्रा की एक पुस्तक में शहीद ए आजम भगत सिंह को कथित रूप से ‘क्रांतिकारी आतंकवादी’ और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को ‘करिश्माई नेता’ बताये जाने को लेकर लोकसभा में आज सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच काफी नोकझोंक हुई। सदन में शून्यकाल के दौरान भाजपा सदस्य अनुराग ठाकुर ने यह मामला उठाते हुए कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने अपने शासनकाल के दौरान देश की शिक्षा को खत्म करने और इतिहास को तोड़ने मरोड़ने का प्रयास किया है जिसके लिए देश उसे कभी माफ नहीं करेगा।
     कांग्रेस सदस्यों के कड़े प्रतिवाद के बीच ठाकुर ने कहा कि इस पुस्तक के लेखकों में से एक मृदुला मुखर्जी के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं की जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि मृदुला और विपिन चंद्रा की पुस्तक ‘इंडियाज स्ट्रगल फार इंडीपेंडेंस’ में भगत सिंह को ‘क्रांतिकारी आतंकवादी’ बताया जाना बेहद आपत्तिजनक है और उससे भी आपत्तिजनक यह बात है कि कथित दो विचारधाराओं के नाम पर ऐसी पुस्तक दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई जा रही है। भाजपा सदस्य ने कहा कि इसी पुस्तक में राहुल गांधी को ‘करिश्माई नेता’ बताया गया है जो अपने आप में एक मजाक है क्योंकि उनके नेतृत्व में इस बार कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव लड़ा और इतिहास में अब तक की सबसे कम 44 सीटें ही उनकी पार्टी को मिली। ठाकुर की इन टिप्पणियों पर कांग्रेस सदस्यों ने कड़ा प्रतिवाद किया और हंगामे के बीच ही अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सदन की बैठक भोजनावकाश के लिए स्थगित कर दी।
12:19 PM | 0 comments | Read More

11 वर्षीय बच्चे के निधन पर दुनिया ने गर्व से सिर झुकाया

    बीजिंग।। इस बच्चे के साहस के बारे में जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे। ये बच्चा मरने के बाद भी कई लोगों को जिंदगी देकर मरा है। जी हां आपको बता दें कि ब्रेन कैंसर से लड़ रहे 11 साल के लियांग याओई की आखिरी इच्छा थी कि मरने के बाद उसके सभी कारगर अंग दान कर दिए जाएं। जिसके लिए उसके माता-पिता तैयार नहीं थे। लेकिन माता-पिता को लियांग की आखिरी इच्छा पूरी करनी पड़ी। लियांग के आखिरी पलों में उसके माता-पिता और उसके बीच हुई बातचीत के दौरान डॉक्टर भी वहां थे।
     चीन के झांगशन यूनिवर्सिटी अस्पताल में लियांग ने कई लोगों को नई सांसें देकर आखिरी सांस ली। उसके शव को जब वार्ड से बाहर लाया गया तो डॉक्टरों सहित वहां के स्टाफ ने तीन बार झुक कर उसे श्रद्धांजलि दी। इंटरनेट पर सबसे ज्यादा चर्चा इस बच्चे के अंगदान करने के साहस को लेकर रही।।
11:06 AM | 0 comments | Read More

दिल्ली यूनिवर्सिटी की किताब में शहीद भगत सिंह को बताया ‘आतंकवादी’

     दिल्ली यूनिवर्सिटी की किताब में एक बड़ी तथ्यात्मक गलती सामने आई है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदी माध्यम कार्यान्वयन निदेशालय की तरफ से प्रकाशित ‘भारत का स्वतंत्रता संघर्ष’ पुस्तक के एक अध्याय में भारतीय क्रांतिकारी भगत सिंह को आतंकवादी कहकर सम्बोधित किया गया है।
    भगत सिंह के परिजनों ने इसका कड़ा विरोध किया है। वहीं, कई इतिहासकार और नेताओं ने इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। अंग्रेजी हुकूमत को झकझोर कर रख देने वाले ‘चटगांव कांड’ को इस किताब में एक ‘आतंकी घटना’ करार दिया गया है। वहीं, सांडर्स की हत्या को भी ‘आतंकवादी घटना’ के तौर पर लिखा गया है।
    पुस्तक के 20वें अध्याय में शहीद भगत सिंह और उनके साथियों सूर्य सेन, चंद्र शेखर आजाद और कईयों को ‘क्रांतिकारी आतंकवादी’ कहकर सम्बोधित किया गया है। भगत सिंह के भांजे अभय सिंह संधू का इस पूरे मामले को लेकर कहना है:
    “भगत सिंह आंतकवादी नहीं थे। उन्हें सजा देने वाले जजों ने अपने फैसले में उन्हें ट्रू रिवोल्यूनशरी (सच्चा क्रांतिकारी) बताया था। कही भी आंतकवाद की बात नहीं आई। संधू ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से किताब वापस लेने की मांग की।”
    इस पुस्तक का पहला संस्करण 1990 में प्रकाशित हुआ था। यह किताब मशहूर इतिहासकार बिपिन चंद्र, मृदुला मुखर्जी, आदित्य मुखर्जी व सुचेता महाजन ने मिलकर लिखी है। भगत सिंह के छोटे भाई सरदार कुलबीर सिंह के पोते यादवेंद्र सिंह ने इस पुस्तक में संशोधन को लेकर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को पत्र लिखा है।
    भगत सिंह के परिजनों का कहना है कि इस पुस्तक में जगह-जगह भगत सिंह को आतंकवादी कहकर संबोधित किया गया, जिससे सभी लोग आहत हैं। किताब से उस शब्द को हटाया जाए। इससे पहले NCERT की किताब में भी भगत सिंह को आतंकवादी कहा गया था। जिसमें भगत सिंह ने जो भी कुछ किया था उसे ‘क्रांतिकारी आतंकवाद’ बताया गया था।
    इस तथ्यात्मक गलती के सामने आने के बाद इसका कड़ा विरोध हो रहा है, इतिहासकारों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जल्द से जल्द पुस्तक की गलतियों को हटाने की मांग की है।
10:37 AM | 0 comments | Read More

बशीर की बकरी ने दिया इंसानी बच्चे को जन्म लोग हुए हैरान


     मलेशिया में एक बकरी ने इंसान जैसे दिखने वाले बच्चे को जन्म दिया था। उसकी फोटोज देखकर सब हैरान रह गए। यह बच्चा कुछ ही घंटे जिंदा रह सका पर उसकी डेडबॉडी के भी कई कद्रदान मौजूद थे।
    द सन के मुताबिक, इसके मालिक को कई लोग डेड बॉडी के बदले पैसा देना चाहते थे, पर उसने बॉडी उन लोगों को ना देकर कुछ एक्सपर्ट्स को दे दिया जो उसपर रिसर्च करना चाहते थे।
    जिसके घर इस बकरी के बच्चे का जन्म हुआ था उनका नाम इब्राहिम बशीर है। 63 साल के बशीर ने बताया कि वह उसे देखकर खुद भी चौंक गया थे। वह बोले, ‘मैंने देखा कि उसका चेहरा हम इंसानों से मिलाता जुलता था, आंख हमारे जैसी, हाइट भी बकरी के बच्चे के मुकाबले छोटी और बॉडी इंसानी बच्चे की तरह मुलायम। बस उसकी बॉडी पर मौजूद ब्राउन कलर के बालों से वह बकरी माना जा सकता था।’
    फिलहाल तो उसपर रिसर्च चल रही है पर, बशीर का कहना है कि बच्चे की मां ने जन्म के वक्त उसको कुचल दिया था जिसकी वजह से ऐसा हुआ। खैर, असल बात क्या है वह शोधकर्ता ही पता करके बता पाएंगे।

10:35 AM | 0 comments | Read More

महज 25 की उम्र में बन गई एसपी

Written By News Today Time on Wednesday, April 27, 2016 | 8:07 PM


     झांसी।। आईपीएस गरिमा सिंह को हाल ही में झांसी जिले की कमान सौंपी गई है। महज 25 की उम्र में आईपीएस बनीं गरिमा की यह पहली पोस्टिंग है।
    बात उन दिनों की है जब गरिमा दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहीं थीं। गरिमा बताती हैं, "डीयू में पढाई के दौरान मैं एक मॉल से रात में दोस्तों के साथ होस्टल लौट रही थी। रात ज्यादा हो चुकी थी। तभी चेकिंग के लिए तैनात पुलिसवाले ने हमारा रिक्शा रोक लिया। रात में कहां से आ रही हो, कहां जाना है जैसे सवाल पूछने के बाद पुलिस वाले ने हमसे 100 रुपए मांगे। जब हमने मना किया तो मेरे पापा को फोन कर रात में घूमने की शिकायत करने की धमकी देने लगा। थोड़ी बहस के बाद पुलिस वाले ने उन्हें जाने तो दिया, लेकिन इस वाक्ये ने गरिमा के मन में पुलिस के प्रति नेगेटिविटी भर दी।
कैसा रहा शुरुआती करियर -
     आईपीएस गरिमा सिंह वे बलिया जिले के गांव कथौली की रहने वाली हैं। गरिमा का सपना हमेशा से आईपीएस बनने का नहीं था, वो एमबीबीएस की पढ़ाई कर डॉक्टर बनना चाहती थीं। गरिमा बताती हैं, "मेरे पापा ओमकार नाथ सिंह पेशे से इंजीनियर हैं। वे चाहते थे कि मैं सिविल सर्विसेज में जाऊं। सिर्फ उनके कहने पर मैंने तैयारी शुरू की। गरिमा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफन कॉलेज से बीए और एमए (हिस्ट्री) की पढ़ाई की है। उन्होंने पहली बार 2012 में सिविल सर्विसेज का एग्जाम दिया था और तभी उनका सिलेक्शन आईपीएस में हो गया।
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सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने जर्जर खेती से बना डाले चार महीने में एक करोड़

      कंप्यूटर के लिए सॉफ्टवेयर बनाने वाले हाथों ने खेतों में जादू बो दिया। उसने अपनी अक्लमंदी से जर्जर खेतों में जांन फूंक दी जिससे माटी सोना और फसलें हीरा-मोती हो गईं। किसानों के चेहरे खिल उठे। बड़े इलाके की किस्मत बदल गई। इस कहानी के जरिए आप भी उन तमाम सुझावों और विचारों से वाकिफ हो सकते हैं, जिनके जरिए किसानों को कर्ज से उबारने, उन्हें जीने की राह दिखाने में मदद की जा सकती है। महज चार महीने में एक शख्स ने एक करोड़ रुपए की सेल कर किसानों के चेहरों पर से मायूसी को मुसकुराहट में बदल दिया है।साल भर पहले पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर मधुचंदन सी. अमेरिका के कैलीफोर्निया में बतौर आईटी प्रोफेशनल लक्जरी लाइफ बिता रहे थे। लेकिन अपने देश के किसानों के हालात देख उनके सीने में ठीस उठी और वे सबकुछ छोड़ इंडिया वापस आ गए। साइबर सिटी बेंगलुरु से महज 100 किलोंमीटर के फासले पर जुलाई 2015 तक 20 गन्ना किसान कर्ज और हालातों के बोझ तले दबकर आत्महत्या कर चुके थे। 2014-15 के बीच बैंकों से लिया 1200 करोड़ का कर्ज, फसल के दामों में गिरावट और सरकारी उदासीनता मौत का रास्ता चुनने की बड़ी वजहें बनीं। ये सब उस इलाके में हो रहा था जहां सिंचाई के संसाधन भी पर्याप्त कहे जाते हैं।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर की अक्लमंदी कमाल कर गई
      37 वर्षीय मधुचंदन मूलरूप से कर्नाटक के मांड्या से ही हैं। वे अमेरिका में काम जरूर कर रहे थे लेकिन उनकी आत्मा बसती मांड्या में ही थी। किसान के परिवार से ही ताल्लुक रखते हैं इसलिए बचपन खेत-खलिहानों में खेलते बीता। पिता बेंगलुरु के कृषि विश्वविद्यालय में वाइस चांसलर थे। विश्वविद्यालय के आस-पास करीब 300 एकड़ में खेत फैले थे। मधु ने पेशा सॉफ्ट इंजीनियरिंग का चुना। दुनिया के कोने-कोने में काम किया। वेरीफाया कॉरपोरेशन बनाने में सह-संस्थापक रहे। कॉरपोरेशन तमाम कंपनियों को ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर टेस्टिंग सॉल्युशन देती है। लेकिन मधु का दिल था कि किसानों की तरह और किसानों के लिए धड़कता रहा। आखिरकार साल 2014 में मधु ने किसानों और उनके खेतों के लिए कुछ कर गुजरने की ठानी और सबकुछ छोड़कर मांड्या आ गए।मधु कहते हैं कि किसान हमेशा होलसेल में बेचता है, लेकिन उसे हमेशा फुटकर खरीदना पड़ता है। वे अपनी और अपने परिवारों की देखभाल नहीं कर पाते हैं। आखिर में भारी कर्ज तले वे आत्महत्या कर लेते हैं। यह एक दिल को कंपा देने वाली स्थिती है। किसानों को खुशहाल करने की जरूरत है ताकि कोई इस पेशे को छोड़े नहीं।विकट परिस्थितियों के अध्ययन दौरान मधु ने मांड्या के खेतों का रुख किया। मधु ने पाया कि कुछ ही किसान ठीक से खेती कर पा रहे थे। ज्यादातर जमीन सुनसान पड़ी थी। उन्होंने पाया कि कृषि संबंधित जानकारियों और सही बाजार का अभाव इन हालातों के लिए जम्मेदार है।
किसानों-ग्राहकों को एक प्लेटफॉर्म पर लाकर तय किया सफलता का रास्ता
     मधु ने सबसे पहले जुझारू लोगों को इकट्ठा किया। इनमें ज्यादातर लोग उनके साथ काम करने वाले और दोस्त थे। सबने मिलकर एक करोड़ रुपए लगाकर मांड्या ऑर्गैनिक फार्मर्स को-ऑपरेटिव सोसायटी बनाई। पहले फेज में करीब 240 किसानों को साथ लिया। सोसायटी के पंजीकरण और तमाम सरकारी औपचारिकताओं के पूरा होने में करीब आठ महीने का वक्त लगा। इस दौरान ऑर्गैनिक मांड्या ब्रैंड बनकर तैयार हुआ जिसके अंतर्गत किसान खुद की उगाई फसलों और खाद्य पदार्थों को बेचने लगे।मधु कहते हैं कि उन्होंने बहुत विचार किया कि बेंगलुरू में ऑर्गैनिक दुकानों की चैन खोलें या ई-कॉमर्स वेबसाइट बनाएं या फिर रेस्टोरेंट बनाएं और उनके जरिए जैविक उवर्रकों और कृषि संबंधी जरूरी चीजों की बिक्री करें। लेकिन इनमें से कोई ऐसा नहीं लगा कि जिसमें किसानों का ग्राहकों से सीधा संपर्क स्थापित होने की गारंटी होती हो। मधु कहते हैं कि जब तक ग्राहकों को इस बात का इल्म नहीं होगा किसान कितनी मेहनत के साथ उनके लिए चीजें उगाते हैं और किसानों को ग्राहकों की डिमांड की समझ नहीं होगी तब तक खेती के दिन उबरने वाले नहीं हैं।मधु ने बेंगलुरु और मैसूर को जोड़ने वाले मांड्या हाईवे पर लोगों का ध्यान खींचने के लिए ऑर्गैनिक रेस्टोरेंट खोला। इसी में एक कोने में जैविक चीजों की दुकान भी बनाई। मधु के मुताबिक उन्हें लगा था कि वहां से आने-जाने वाले लोग कम से कम खाने-पीने के बहाने वहां ठहरेंगे और कभी-कभार जैविक दुकान की ओर भी रुख कर लेंगे। लेकिन एक महीने बाद सूरत ही बदल गई। लोग पहले उस ऑर्गेनिक दुकान में घुसते फिर खाने के लिए जाते।
वाह! खेती भी, मुनाफा भी और पर्यटन भी
      मधु की मानें तो ऑर्गेनिक मांड्या की असली खूबसूरती है ग्राहकों और किसानों का मेल। मधु कहते हैं कि ग्राहक को ऑर्गैनिक चीजों से हिचकिचाहट होती है, वहीं एक 24 साल का किसान ज्यादा केमिकल की वजह से कैंसर से दम तोड़ देता है तो ऐसे में जैविक खेती के लिए सामंजस्य बैठाना बड़ा मुश्किल होता है। इसके लिए ग्राहकों और किसानों को एक कॉमन प्लेटफॉर्म पर आना बेहद जरूरी है ताकि दोनों मिलकर समस्या का हल खोज सकें। इसी को ध्यान में रखकर कंपनी ने ऑर्गैनिक टूरिज्म यानी जैविक पर्यटन की शुरुआत की। स्वेट डोनेशन कैंपेन, फार्म शेयर, टीम एट फार्म जैविक टूरिज्म के हिस्सा हैं।स्वेट डोनेशन यानी मेहनत का योगदान इसके लिए मधु उन लोगों को आमंत्रित करते हैं जो खेती-किसानी में रुचि रखते हैं और वीकेंड में जैविक मांड्या फार्म्स की सैर करना चाहते हैं। मधु उन्हें किसानों के खेतों में बतौर वॉलंटियर काम करने को कहते हैं और वे खुशी-खुशी इसे करते भी हैं। इसके लिए वे फेसबुक पेज पर वॉलंटियरों जुटा लेते हैं। अब तक बेंगलुरु से करीब 1000 वॉलंटियर इस स्वेट डोनेशन से जुड़ गए हैं, जिनमें भारी संख्या मधु के सहकर्मियों, छात्रों, आईटी इंजीनियरों और रिटायर्ड लोगों की है। मधु उदाहरण देते हैं कि 60 वर्षीय एक किसान को खेत में मजदूरों को काम करवाने के लिए एक दिन में 3000 रुपए खर्च करने की जरूरत थी। उस काम को उनके 24 वॉलंटियरों ने आधे दिन में ही कर दिया।
मांड्या के मधु से सीख लेने की जरूरत
     टीम एट फार्म टीम एट फार्म की पहल कुछ कंपनियों को इतनी पसंद आई के वे अपने कर्मचारियों को एक दिन के टूर पर भेजने लगीं। इस दौरान कंपनियों के कर्मचारी करीब से खेती-किसानी देखते और सीखते हैं। किसानों का हाथ बंटाते हैं। पेड़ पौधे लगाते हैं। गांवों में खेले जाने वाले खेल कबड्डी, गिल्ली डंडा और लागोरी का लुत्फ लेते हैं। इस टूर के लिए एक दिन की फीस 1300 रुपए रखी गई है।6 महीनों में जैविक मांड्या सफलता का स्वाद चखने लगा है। 500 पंजीकृत किसान 200 एकड़ जमीन में दाल, चावल, खाद्य तेल, पेय पदार्थ, मसालों और हेल्थ केयर उत्पादों समेत तमाम चीजों की 70 अलग-अलग किस्में पैदा कर रहे हैं। इन सभी चीजों की बिक्री से चार महीने में एक करोड़ की बिक्री हुई है। सबसे बड़ी बात अब मांड्या में पलायन कर जा चुके किसान वापस आने लगे हैं। अब तक 57 किसानों की अपनी जमीन पर वापसी हुई है।अगले एक साल में मधु ने 10 हजार परिवारों के लिए खेती कर 30 करोड़ के खाद्य पदार्थों की सप्लाई करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 1000 रुपए सालाना देकर वे परिवार पंजीकरण करा सकते हैं। इसके जरिए वे हर उत्पाद पर भारी छूट पाएंगे और उन्हें हेल्दी ईटिंग प्रेक्टिस से रूबरू कराया जाएगा।साल 2020 तक पूरे मांड्या जिले में कृषि की सफलता के झंडे गाड़ना मधु का सपना है। मधु की तरह आप भी खेत-खलिहानों और किसानों के चेहरे पर फिर से रौनक ला सकते हैं
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पति की हत्या कर 2 दिन सोई शव के साथ, इसके बाद किए शव के 10 टुकड़े

    बहादुरगढ़/झज्जर।। दिल्ली से सटे बहादुरगढ़ के आसंडा गांव में एक दिन पहले पत्नी द्वारा पति की हत्या के मामले में नया खुलासा हुआ है। पुलिस पूछताछ में पत्नी ने कबूला है कि उसने अपने प्रेमी और उसके साथियों के साथ मिलकर 24 अप्रैल को पति की हत्या की थी। इसके बाद 2 रात शव के साथ गुजारी और तीसरे दिन शव को खुर्द-बुर्द करने के लिए उसके टुकड़े कर दिए।
ब्रिफकेस में बंद कर दी धड़, सिर दबा दिया था गड्ढ़े में
- आरोपी पत्नी पूजा ने बताया कि उसका 35 वर्षीय पति बलजीत दिल्ली जल बोर्ड में ठेके पर नौकरी करता था।
- 24 की रात वह अपने प्रेमी आशु के साथ घर में सो रही थी, तभी उसका पति आ गया। इस दौरान प्रेमी और पति में झगड़ हुआ।
- इसके बाद उसका प्रेमी आशु घर से भाग गया। ऐसे में पूजा ने बलजीत को दही में नींद की गोली खिला दी और अपने प्रेमी को वापिस बुला लिया।
- आशु अपने तीन अन्य साथियों के साथ पूजा के घर पहुंचा और सभी ने मिलकर चुन्नी से गला दबाकर बलजीत की हत्या कर दी।
- पूजा बलजीत के शव के साथ 24 व 25 अप्रैल की रात को सोई। 26 अप्रैल को दिन में पूजा ने अपने प्रेमी आशु के साथ मिलकर बलजीत के शव के 10 टुकड़े कर दिए।



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हाईकोर्ट का एतिहासिक निर्णय: 15 जजों को जबरन Retirement देकर घर भेजा

    इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खण्‍डपीठ के इतिहास में यह पहला अवसर है जब गंभीर आरोपों के चलते न्‍यायिक सेवा के 15 अधिकारियों को एकसाथ कंपलसरी Retirement देकर घर बैठा दिया गया।
संदिग्‍ध आचरण के आरोपों पर जबरन सेवानिवृत्‍त किए गए ये सभी अधिकारी एडीजे और एसीजेएम स्‍तर के हैं।
     इन अधिकारियों को जबरन सेवा निवृत्‍त करने का निर्णय इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच ने एक फुल कोर्ट मीटिंग के बाद इसी महीने की 14 तारीख को लिया।
       उच्‍च न्‍यायालय के चीफ जस्‍टिस डी वाई चंद्रचूण द्वारा लिए गए निर्णय से उत्‍तर प्रदेश सरकार को अवगत कराते हुए इन सभी 15 अधिकारियों के अधिकार छीन लिए गए और अधिकारी के रूप में इनकी सभी गतिविधियों पर तत्‍काल प्रभाव से रोक लगा दी गई।
      इस बात की जानकारी इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्‍ट्रार जनरल शिवेन्‍द्र कुमार सिंह ने दी। जिन अधिकारियों को जबरन सेवा निवृत्‍त करने का इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एतिहासिक निर्णय लिया है, उनमें एडीजे सिद्धार्थनगर शैलेश्‍वर नाथ सिंह, एडीजे इटावा बंसराज, एडीजे आजमगढ़ राममूर्ति यादव, एडीजे (एंटी करप्‍शन) लखनऊ ध्रुव राज, एडीजे मुरादाबाद जगदीश द्वितीय, एडीजे सोनभद्र नरेश, एडीजे सोनभद्र विमल प्रकाश काण्‍डपाल, फैमिली कोर्ट जज कुशीनगर ए. के. गणेश, एडीजे गाजीपुर अरविंद कुमार प्रथम, एडीजे मेरठ अविनाश चंद्र त्रिपाठी, एडीजे मुरादाबाद अविनाश कुमार द्विवेदी, एडीजे फर्रुखाबाद मोहम्‍मद मतीन खान, एडीजे कांशीराम नगर किशोर कुमार द्वितीय, एसीजेएम पीलीभीत श्‍याम शंकर सिंह द्वितीय तथा एसीजेएम हरदोई श्‍याम शंकर द्वितीय शामिल हैं।
      इनमें से ए. के. गणेश करीब 5 साल पहले मथुरा में एडीजे थर्ड के पद पर काबिज हुए थे। मूल रूप से दक्षिण भारत के रहने वाले न्‍यायिक सेवा के इस अधिकारी ने धर्म की नगरी मथुरा में रहकर न केवल अपने अधिकारों का भरपूर दुरुपयोग किया बल्‍कि कानून के साथ यथासंभव खिलवाड़ किया।
      ए. के. गणेश ने मथुरा में तैनाती के दौरान मुख्‍य रूप से अपना हथियार सीआरपीसी की धारा 319 को बनाया। धारा 319 के लिए जज को यह विशेष अधिकार प्राप्‍त है कि वह किसी आपराधिक मुकद्दमे में किसी भी ऐसे व्‍यक्‍ति को इस धारा का इस्‍तेमाल करके तलब कर सकता है जिसका नाम पुलिस एफआईआर में न हो अथवा जिसका नाम पुलिस ने तफ्तीश के बाद यह मानते हुए एफआईआर से निकाल दिया हो कि उसकी उक्‍त घटना में संलिप्‍तता नहीं थी।
      ए. के. गणेश ने इस धारा को हथियार बनाकर एक ओर जहां वादी पक्ष से इस बात का पैसा लिया कि वह उसके बताए किसी भी व्‍यक्‍ति को 319 का नोटिस भेजकर आरोपी बना देगा, वहीं आरोपी बनाए गए निर्दोष व्‍यक्‍तियों से उन्‍हें जमानत देने के नाम पर भरपूर लूट की।
      ए. के. गणेश ने यह सब तब किया जबकि सुप्रीम कोर्ट ने धारा 319 के मामले में इस आशय के स्‍पष्‍ट आदेश व निर्देश दे रखे हैं कि 319 के तहत किसी व्‍यक्‍ति को तभी तलब किया जाए जब उसके खिलाफ संबंधित आपराधिक घटना में लिप्‍त होने के पर्याप्‍त सबूत हों और वो सबूत उसे सजा दिलाने के लिए पर्याप्‍त हों।
      सुप्रीम कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 319 का अधिकारियों द्वारा दुरुपयोग रोकने के लिए ऐसे निर्देश भी दे रखे हैं कि 319 के तहत जारी किए गए तलबी आदेश पर खुद जज के हस्‍ताक्षर होने चाहिए न कि उनके बिहाफ पर किसी अधीनस्‍थ के हस्‍ताक्षर से नोटिस जारी कर दिया जाए।
ए. के. गणेश ने मथुरा में एडीजे के पद पर रहते हुए सुप्रीम कोर्ट के इन आदेश-निर्देशों की जमकर धज्‍जियां उड़ाईं और अपने कुछ खास दलालों के माध्‍यम से लाखों रुपए वसूले।
      ए. के. गणेश की मथुरा में मनमानी का आलम यह था कि उसके मुंह से रिश्‍वत की जो रकम एकबार निकल जाती थी, वह उससे पीछे नहीं हटता था और तब तक लोगों को प्रताड़ित करता था जब तक रकम की पूरी वसूली नहीं कर लेता था।
     ऐसा नहीं है कि ए. के. गणेश अपने अधिकारों का दुरुपयोग करने वाला अकेला अधिकारी था या दूसरे न्‍यायिक अधिकारी उसकी इस कार्यप्रणाली से वाकिफ नहीं थे किंतु बोलता कोई कुछ नहीं था क्‍योंकि अधिकांश अधिकारियों की कार्यप्रणाली उससे मेल खाती थी और वो उसी कार्यप्रणाली के कायल थे।
      अब जबकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ए. के. गणेश जैसे 15 न्‍यायिक अधिकारियों को एतिहासिक निर्णय देकर सबक सिखाया है तो उम्‍मीद की जानी चाहिए कि समूचे न्‍यायिक अधिकारियों में एक भय व्‍याप्‍त होगा और वह अपने विशेष अधिकारों का दुरुपयोग करने तथा पैसा वसूलने के लिए किसी निर्दोष को फंसाने से पहले एक बार सोचेंगे जरूर।
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कई गुल खिला रहा नकाब


    पर्दे के पीछे पर्दानशी है.......... किसी फिल्म के गाने के यह अल्फाज यही वंया कर रहे है कि पर्दे में छिपाया हुआ चेहरा लडकी का ही है। नकाबपोशी का यह अंदाज मुस्लिम वर्ग की महिलाओ मे बुरका से शुरू होकर आज सर्वजन में झलक रहा है। कभी मौसम तो कभी गोरे रंग को बचाने का बहाना, या फिर कभी बीमारी से बचने का उपाय, इन सभी का आॅप्शन सिर्फ एक और वह था नकाब। मगर जनबा अब तो नकाब से चेहरा छिपाने के पीछे राज कुछ जुदां है। कुछ युवाओं ने इसे फैशन में शुमार कर लिया है। इसके अलावा प्रेमिकायें अपने प्रेमी से मिलने को नकाब लगाने लगी तो युवक छेडखानी करने के दौरान पहचाने न जा सके इसलिये नकाब लगाने लगे। यही नही अपराधिक क्षेत्र में भी यह नकाब गुल खिला रहा है। नकाब का बढता के्रज सवाल खडा कर रहा है कि आखिर राज क्या है चेहरो के इन नकाब का़.........।
      लडका हो या लडकी ,पहनावा लगभग सेम टू सेम । वालो का अन्तर भी लगभग हो चुका है खत्म । अब बचा चेहरा तो उसे भी कर लिया नकाब मे कैद। अब भला नकाबपोश को पहचाने तो कैसे कि आखिर वह लडका है या लडकी। मानो हर नकाबपोश यह कहता हुआ नजर आ रहा है कि पहनावा कौन........।
      गर्मी की तपिश से स्किन को सेफ रखने के लिये हालांकि कई काॅस्मेटिक है मगर नकाब ही पहली पसन्द क्यों। अब तो मौसम भी गर्म हो चला है लेकिन अब तो नकाब उतरने का सबाल ही नही उठता। आखिर चेहरा छिपाने का क्रेज क्यो युवाओ मे तेजी से बढा। इसके पीछे के गहराई को जाना तो समझ में आया कि यह नकाब न जाने कितने गुल खिलाने में माहिर है। कालेज में युवतियाॅ नकाब लगाकर अपने लवर के साथ लाॅग ड्राइव पर सबके सामने निकल जाती है और किसी को पता नही चलता कि वह कौन था या फिर कौन थी। यदि कपडो के पहनावे से यह समझ भी आ जाये कि वह लडकी ही है तो फिर यह नही पहचान सकते कि वह बीना थी या फिर रीमा। सभ्य समाज से लेकर आपराधिक किस्म के लोग भी इस नकाव का खूब फायदा उठा रहे है। बहाने भले ही अलग-अलग हो लेकिन नकाब को समाज के लिये सुरक्षित नही माना जा सकता है। आज के बदलते युग में जब युवाओ की सोच और जीवन शैली में बडा परिवर्तन आने लगा है तब यह नकाब उनके कई अनुचित कार्यो में भी मददगार साबित हो रहे है।

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कही भी टॉयलेट-बाथरूम का उपयोग करने से पहले यह जरूर जांच ले

Ladies इस पोस्ट को ज़रूर पढ़ें-
    जब हम टॉयलेट, बाथरूम, होटल के कमरों में कपडे तबदील करने के लिए जाते हैं
     तो हमे किस तरह पता चले कि दिवार पर लटका हुआ आम सा शीशा है या ऐसा शीशा है जिससे आपको खुद को देख ही पा रही हैं और दूसरी तरफ से आपको कोई देख रहा है जिसमे से वह आपकी तस्वीर और vedio बना सकता है। 
   यानि डबल स्टैंडर्ड वाला शीशा है। इस बात का यकीन आप महज़ देख कर नही कर सकतीं। ऐसे बहुत से मामलात पेश आ चुके हैं। खुद को महफूज़ करने के लिए ये एक सादा सा टेस्ट ज़रूर करें।
    शीशे पर अपने नाख़ून की नोक रख कर देखें। अगर नाख़ून की नोक और अक्स (शीशे में नज़र आने वाले नाख़ून) के दरमियान कुछ दूरी है। तो ये एक सादा सा आम शीशा है। और अगर आपके नाख़ून और अक्स के दरमियान कोई फ़ासला नही है तो इस से बचें। यह एक डबल स्टैंडर्ड शीशा है। और आपको दूसरी तरफ से देखा जा सकता है। और उस जगह को छोड़ दें।
    और अब जब भी किसी को इस बारे में यकीन ना हो तो नाख़ून वाला टेस्ट कर के देख लें। पोस्ट अच्छा लगे तो प्लीज लाईक कॉमेंट्स व शेयर करना मत भूलना मेरे दोस्तो।
5:38 PM | 0 comments | Read More

आप ठगिए... 8 करोड़ लोग तैयार हैं पैसा लेकर

     251 रुपए वाले दुनिया के सबसे सस्ते स्मार्टफोन की पहली डिलेवरी अप्रैल के आखिरी सप्ताह में देने की बात कही गई थी. करीब 8 करोड़ लोग इंतजार में हैं. लेकिन कहीं कोई सुगबुगाहट नहीं है.
      महज 251 रुपये में स्मार्टफोन खरीदने का ऑफर मिला और लगभग 8 करोड़ लोगों ने इसे हांथो-हांथ लपकने के लिए पैसे बढ़ा दिए. यदि कोई 500 रुपये में हेलीकॉप्टर बेचने का ऑफर लेकर आता तो? यकीन मानिए इस रकम पर हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए इससे भी ज्यादा हांथ लपक जाते. मतलब साफ है, देश में लांच होने वाली किसी भी पॉन्जी स्कीम का भविष्य उज्ज्वल है.
      फरवरी में दिल्ली से सटे नोएडा में स्थित एक कंपनी रिंगिंग बेल्स ने दुनियाभर में अपने ऑफर से तहलका मचा दिया. देसी मीडिया तो अपनी जगह अमेरिका और इंग्लैंड के अखबार और टेलीवीजन इस लांच की खबर लगाने को मजबूर हो गए. कई वेबसाइट पर तो ये तक समझाया जा रहा था कि दुनिया की इस सबसे सस्ते फोन को अपना बनाने के लिए क्या करें.
फ्रीडम 251 स्मार्टफोन का लांच
     मीडिया, टेक्नोलॉजी के जानकार, माबाइल कंपनियों समेत देशभर से पोटेंशियल खरीदार सब के जहन में बस एक सवाल. आखिर कैसे कोई कंपनी कम से कम 4 से 5 हजार रुपये में मिलने वाले किसी स्मार्टफोन को महज टॉकटाइम के दाम पर बेच सकती है. यह और रोचक तब हो गया जब मार्च आते आते एक मोबाइल कंपनी एडकॉम ने खुलासा किया कि रिंगिंग बेल्स ने अपने लांच के लिए उनसे 3600 रुपये में स्मार्टफोन खरीदा है. इन सबके बावजूद देश में पढ़े-लिखे लोगों की कमी नहीं है. कपंनी के वादों को सुना, देखा और आंक लिया कि महज 251 रुपये में फोन देने वाली कंपनी अगर मुकर भी जाए तो नुकसान कोई बड़ा नहीं है. ट्राय करने में क्या जाता है.
     देश में स्पीक एशिया हो या शारदा चिटफंड जैसी पॉजी स्कीम, वह भी ग्राहकों की इसी मानसिकता के इर्द-गिर्द अपना रेवेन्यू मॉडल बुनती है. रिंगिंग बेल्स ने भी झटपट कमाई के लिए एक ‘स्कीम’ के तहत दुनिया का सबसे सस्ता स्मार्टफोन फ्रीडम 251 लाने का सपना दिखा दिया.
यदि कंपनी फोन नहीं भी देगी तो भी कोई कोर्ट नहीं जाएगा, क्योंकि...
     मीडिया में छप रही खबरों के मुताबिक कंपनी के पास फ्रीडम 251 के लिए 7.35 करोड़ एडवांस बुकिंग मौजूद है. इसमें से शुरुआती बुकिंग में लिए गए ऑर्डर को कंपनी ने एडवांस पेमेंट लेकर किया. हालांकि कुछ दिनों की बुकिंग के बाद जब कंपनी की नीयत पर शक उठने लगा तब रिंगिंग बेल्स ने ग्राहकों को पेमेंट ऑन डिलेवरी का ऑफर देते हुए उन ग्राहकों का पैसा जल्द लौटाने का वादा कर लिया. लिहाजा मान लेते हैं कि कंपनी ने कुल बुकिंग के आधे पर एडवांस पेमेंट प्राप्त किया है या कहें 4 करोड़ फोन के लिए वह ग्राहकों से पैसा वसूल चुकी है (कंपनी की तरफ जारी वास्तविक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं).
कुल फोन की एडवांस बुकिंग 4 करोड़
251 रुपये की दर से प्राप्त कुल रकम 1004 करोड़
1 लाख रुपये पर प्रति माह ब्याज 900 रुपये
1 करोड़ पर मासिक ब्याज 90 हजार रुपये
1004 करोड़ पर मासिक ब्याज 9.03 करोड़ रुपये
     उपर्युक्त हिसाब से साफ है कि रिंगिंग बेल्स कंपनी को प्रति माह ब्याज में 9 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई हो रही है यदि वह पूरी रकम महज बैंक में रख दे. ग्राहकों से जुटाए लगभग 1 हजार करोड़ पर बैंक से ब्याज की आमदनी कारोबारी दुनिया में न्यूनतम रहती है. वहीं 1 हजार करोड़ रुपये के फंड के जरिए स्टॉक मार्केट, कमोडिटी मार्केट, सोना और अन्य प्रेशस मेटल्स, रियल स्टेट और हवाला जैसे कारोबार में छोटी अवधि के निवेश में भी रिटर्न 20 फीसदी से 100 फीसदी तक मिल सकता है.
       इस स्थिति में यदि दुनिया का यह सबसे सस्ता मोबाइल फोन ग्राहकों तक नहीं पहुंचता और कंपनी को कुछ ग्राहकों को पैसे लौटाने भी पड़ते हैं तो इतना साफ है कि पूरी स्कीम में उसके पास एक बड़ी रकम बतौर मुनाफे के मौजूद रहेगी. वहीं कंपनी ने इस स्कीम में अपने प्रोडक्ट की कीमत महज 251 रुपये रखी है. यदि कंपनी न फोन दे और न ही यह पैसा लौटाए तो भी ग्राहक अपना पैसा वापस पाने के लिए कोर्ट नहीं जाएगा. 251 रुपये पाने के लिए उससे इससे कहीं ज्यादा पैसे और समय खर्च करने पड़ेंगे.
     यानी रिंगिंग बेल्स की स्कीम सफल है. और वह प्रेरणा देती रहेगी कई लोगों को. जिनमें से हो सकता है कोई 500 रुपये में हेलिकॉप्टर बेचने आ जाए. 8 करोड़ लोग तैयार बैठे हैं खरीदने के लिए.
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यह है मैग्नेट मैन पूरे शरीर में चिपक जाती है लोहे की वस्तुएं

    मध्य प्रदेश के इस मैग्नेट मैन के शरीर में लोहे की चीजें ऐसे चिपकती हैं, जैसे कोई चुबंक उन्हें अपनी ओर खींच रही हो। सागर जिले के ग्राम ढाना निवासी अरूण रायकवार इन दिनों चर्चा व कौतूहल बने हुए हैं। इसकी वजह है उनके शरीर से निकलने वाली चुम्बकीय शक्ति।
     पिछले 10-12 दिनों से अरुण का शरीर चुम्बक की तरह काम कर रहा है। लोहे की हर चीज उनके शरीर से चिपक रही है। इस 'मैग्नेट मैन' के शरीर में लोग की चीजें चिपका देखकर लोग भी हैरान हैं। ग्राम ढाना निवासी 50 वर्षीय अरुण रायकवार पेशे से फोटोग्राफर हैं। फोटोग्राफी करके ही वे परिवार का पालन-पोषण करते हैं।
     उनकी जिन्दगी में सब कुछ सामान्य तरीके से चल रहा था। लगभग 12 दिन पहले उनके शरीर पर पास में रखी कील चिपक गई, जिसे देख वे हैरान रह गये। उन्होंने लोहे की अन्य वस्तुओं को छुआ, तो वे भी शरीर से चिपक गईं।अरूण के शरीर में लोहे की चीज चिपकने की खबर आसपास के गांव में फैल गई।
     लोग उन्हें देखने के लिए आने लगे। अरुण बताते हैं कि उनके शरीर पर लोहे की कील, सरोंता, चाकू, उस्तरा, चम्मच व लोहे की अन्य चीजें ऐसी चिपक जाती हैं, मानो शरीर चुम्बक हो। उनके मुताबिक, कुछ दिन पहले तक सब सामान्य था।
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जाने मनी प्लांट के बारें में

   मनी प्लांट शुक्र ग्रह का कारक है। घर में लगाने से पति-पत्नी के संबंध मधुर होते हैं। और घर में धन का आगमन व सुख-समृद्धि में इजाफा होता है। 
    मनी प्‍लांट को घर, बगीचे व केवल पानी में भी लगाया जा सकता है, लेकिन अनेक बार मनी प्लांट को लगाने के बाद भी धनागमन में कोई अंतर नहीं होता है, तो इसके अनेक कारण है। मनी प्लांट की सूखी हुई पत्तियों को तुरंत हटा देना चाहिए. इससे नकारात्मक ऊर्जा फैलती है, व यह मानसिक/धन परेशानी देता है.
    मनी प्लांट का पौधा लगाने के लिए आग्नेय दिशा यानी दक्षिण-पूर्व को उत्तम माना गया है। आग्नेय दिशा के देवता गणेश जी हैं और प्रतिनिधि ग्रह शुक्र है। गणेश जी अमंगल का नाश करते हैं और शुक्र सुख-समृद्धि का कारक होता है। बेल और लता का कारक शुक्र होता है इसलिए आग्नेय दिशा में मनी प्लांट लगाने इस दिशा सकारात्मक प्रभाव प्राप्त होता है।
   मनी प्लांट के लिए सबसे नकारात्मक दिशा ईशान यानी उत्तर पूर्व को माना गया है। इस दिशा में मनी प्लांट लगाने पर धन वृद्धि की बजाय आर्थिक नुकसान हो सकता है। ईशान का प्रतिनिधि ग्रह बृहस्पति है। शुक्र और बृहस्पति में शत्रुवत संबंध होता है क्योंकि एक राक्षस के गुरू हैं तो दूसरे देवताओं के गुरू। शुक्र से संबंधित चीज इस दिशा में होने पर हानि होती है।
     अन्य दिशाओं में मनी प्लांट का पौधा लगाने पर इसका प्रभाव कम हो जाता है। मनी प्लांट का पौधा हमेशा ऊपर की ओर चढ़ाना चाहिए. जमीन पर फैलती बेल से नकारात्मक ऊर्जा फैलती है और घर मे क्लेष कराती है।
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घरवालों को पानी की किल्लत से बचाने के लिए 17 वर्षीय यूवक ने घर में ही खोदा कुंआ

Written By News Today Time on Tuesday, April 26, 2016 | 9:04 PM

     देश के कई राज्य आज सूखे की मार झेल रहे हैं. सरकारें काम तो कर रही हैं, पर वो भी बस फाइलों में ही दिखाई देता है. बेशक टेलीविज़न और मीडिया बंगाल चुनाव के अलावा मोदी जी की अगली विदेश यात्रा को लेकर मशरूफ रहे, फिर भी सूखे की मार झेलते प्रदेशों और वहां के लोगों के हालातों के बारे में खबर आती ही रहती है.
     इस सूखे के पीछे किसका दोष है और किसका नहीं, इस बात को लेकर कई चैनलों पर प्राइम टाइम में बहस होती रहती है. पर उसके अंत में भी बस एक सवाल ही रह जाता है कि क्या इन बहसों से उन लोगों का कुछ हित होगा, जो सूखे की वजह से अपने घर और ज़मीन को छोड़ कर जाने पर मजबूर हैं.
    खैर इस सब के बीच आशा की एक किरण Nethravathi के रहने वाले 17 वर्षीय पवन कुमार के रूप में दिखाई देती है, जिनका परिवार कुछ समय पहले पानी के लिए कोसों दूर चल कर जाता था.
     कर्नाटक के सत्तीसरा गांव में कई ऐसे परिवार हैं, जो अपने घरों में कुंए बनवाने के खर्च का वहन कर सकते हैं. पवन कुमार के परिवार के पास इतनी ज़मीन तो थी पर कुंए की खुदाई पर होने वाले खर्च को वो वहन करने में असमर्थ थे.
    इसे लेकर पवन चिंतित नहीं हुए और उन्होंने खुद ही कुंए को खोदने का निर्णय किया. इसके लिए पवन ने स्थानीय हाइड्रोलॉजी एक्सपर्ट की मदद ली और उस जगह को चिन्हित किया, जहां पानी मिलने के आसार थे.
     अभी उनकी खुदाई को 10 दिन हुए ही थे कि पवन के एग्जाम बीच में आ गए, जिसके लिए इसे कुछ दिनों के लिए रोकना पड़ा. एग्जाम खत्म होने के बाद पवन ने दोबारा खुदाई शुरू की और 45 दिनों की मेहनत के बाद आख़िरकार उनकी पानी की तलाश खत्म हुई.
     इस कुंए की खुदाई के बारे में पवन का कहना है कि "तेज गर्मी के बीच पथरीली ज़मीन को खोदना वाकई मुश्किलों भरा काम था, 53 फ़ीट खोदने के बाद पानी के आसार दिखने लगे थे, दो फ़ीट और खोदने के बाद साफ पानी आ गया था. मुझे इस बात की ख़ुशी है कि अब मेरी मां को पानी के लिए दूर जा कर पानी नहीं लाना होगा".
   पवन कुमार का ये साहस उन लोगों के लिए आशा की एक किरण की तरह है, जो पानी के अभाव में अपने घर और गांव को छोड़ने पर मजबूर हैं.
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यह चायवाला है ‘कोहिनूर हीरे’ का असली वारिस, खुद को कोलंबस का वंशज बताता है

  कोहिनूर हीरा दुनिया का बेशकीमती हीरा है. फ़िलहाल ये ब्रिटेन के पास है. भारत सरकार इस हीरे पर कई बार दावा कर चुकी है, लेकिन अभी तक इसमें सफ़लता नहीं मिली है. वहीं भारत के मध्य प्रदेश में एक ठेलेवाले ने दावा किया है कि कोहिनूर उसकी अपनी खानदानी संपत्ति है. कोहिनूर से जुड़े कई और तथ्य हैं, जिन्हें जान कर आप भी विश्वास नहीं करेंगे.
क्रिस्टाफेर कोलंबस का है वंशज
     मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले स्टेनली जॉन लुईस का दावा है कि कोहिनूर भारत सरकार की नहीं, बल्कि उनकी खानदानी संपत्ति है. लुईस कहते हैं कि वे क्रिस्टाफेर कोलंबस के वंशज हैं. आपको बता दें कि कोलंबस ने ही अमेरिका की खोज की थी.
कोहिनूर के लिए कानूनी लड़ाई
     कोहिनूर के लिए लुईस ने 2008 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की. इस याचिका में उन्होंने भारत व ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सहित अन्य को पक्षकार बनाया है. इस याचिका की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने जनहित याचिका के स्थान पर डब्ल्यूपी दायर की, जिसके जरिए वह कोहिनूर को बजाए भारत के अपनी प्राइवेट संपत्ति साबित करने में जुटे हैं.
कोहिनूर से संबंधित तथ्य
कोहिनूर हीरे की कीमत 150 हजार करोड़ रुपए है.
यह कोहिनूर हीरा 105 कैरेट का है.
इस हीरे को ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के ताज में सजाया गया है.
वहीं लुईस के अनुसार, यदि इस हीरे को बेचा जाए तो उससे 700 सालों तक सारी दुनिया को खाना खिलाया जा सकता है.
इंटरनेशनल कोर्ट तक जाएंगे
    कोहिनूर के लिए लुईस सुप्रीम कोर्ट और इंटरनेशनल कोर्ट जाएंगे. उनका कहना है कि ख़ानदान की निशानी के लिए वो कुछ भी करने को तैयार हैं.

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इस मुस्लिम शख्स ने 'मां' की मौत पर कराया मुंडन, गंगा में विसर्जित की अस्थियां

    जोधपुर।। रामेश्वर नगर क्षेत्र में दोस्ती की ऐसी मिसाल देखी गई है जिसमें बेगाने ने अपने की तरह फर्ज निभाया है। इस दोस्ती में धर्म-मजहब का कोई दस्तूर नहीं है। जी हां 25 वर्षीय दो युवकों प्रवीण दैय्या और फराज खान की ऐसी ही दोस्ती सांप्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल बनी हुई है।
    दोनों बचपन से दोस्त हैं। प्रवीण के परिजनों के समझाने पर फराज ने मांसाहार छोड़ शाकाहार बन गया। पिछले दिनों 15 अप्रैल को जब प्रवीण की मां कौशल्या देवी की किडनी फेल होने से मृत्यु हो गई तो फराज ने न केवल अपना मुंडन करवाया, बल्कि अंतिम संस्कार में भाग लेकर हरिद्वार में अस्थियां विसर्जन करने भी गया। अब प्रवीण और उसके परिजनों के साथ गरुड़ पुराण भी सुन रहा है।
   चार साल पहले प्रवीण की मां कौशल्या की किडनी फेल हो गई और वे डायलिसिस पर रहने लगीं। फराज कौशल्या को अपनी मां की तरह मानता था। वह उन्हें किडनी देने को तैयार हो गया, लेकिन किडनी मैच नहीं होने से डाक्टर्स ने मना कर दिया। वह प्रतिदिन प्रवीण की मां को फोन कर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेता था उनकी सलामती के लिए उसने ख्वाजा साहब की मजार पर चादर पेश की, तो सिद्धि विनायक मंदिर में माथा भी टेका। आखिर प्रवीण की मां नहीं रही, लेकिन फराज ने दोस्ती का धर्म निभाया। फराज का कहना है कि मित्रता का धर्म ही सबसे बढ़ कर है।
     प्रवीण के पिता सुखदेव दैय्या जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी में ड्राइवर है जबकि फराज के पिता बैंक में मैनेजर हैं। दोनों ने छठी कक्षा से बीटेक तक की पढ़ाई साथ में की। पढ़ाई के दौरान दोनों में घनिष्ठता बढ़ी, एक-दूसरे के घर आना-जाना चलता रहा। प्रवीण के परिजनों की बातों से प्रभावित होकर फराज ने मांसाहार त्याग दिया। 
     दोनों ही परिवार आपस में अच्छा मेल-मिलाप व प्रेम रखते हैं, सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहते हैं। दीपावली, होली और ईद भी साथ मनाते हैं। फराज खान पढ़ाई के बाद मुंबई में बस गया। वहां टीवी सीरियल में काम करने लगा।
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शमशाद रोज़ 50 गायों को पानी पिलाता है

     प्यास का अहसास क्या होता है, ये हमें उस समय पता चलता है, जब हम बहुत ही ज्यादा प्यासे होते हैं, और हमारे पास पानी की कमी होती है. इस समय देश के कई हिस्सों में इंसानों को पानी मुश्किल से मिल रहा है. कई इलाके सूखे की मार झेल रहे हैं, तो कई जगहों पर पानी माफियाओं का जाल बिछा है. इंसान मुश्किलों और चुनौतियों का सामना कर अपनी प्यास बुझा रहे हैं, लेकिन बेजुबान प्यासे ही मरते जा रहे हैं. सरकार बेहाल जनता की सुध नहीं ले रही है, तो इनकी सुध क्यों ले? ऐसे में इन जानवरों की प्यास बुझाने के लिए 25 वर्षीय शमशाद नाम का एक शख़्स आता है, जो इनके लिए भगवान का ही एक रूप है. आइए इस साधारण इंसान की असाधारण कहानी बताते हैं.
      दिल्ली से सटे देवली में इन दिनों पानी की कमी चल रही है. पानी पर माफियाओं ने कब्ज़ा कर रखा है. प्यास से परेशान जनता पैसे देकर पानी ख़रीदने को मजबूर है. लेकिन सड़कों पर रहने वाली गायों के पास पैसे नहीं है, इस कारण उनकी प्यास नहीं बुझती है. पर जैसे ही ये गायें शमशाद का चेहरा देखती हैं, इनके चेहरे पर चमक आ जाती है.
साइकिल वाला बना भगवान
    देवली स्थित बी-ब्लॉक में शमशाद की एक साइकिल की दुकान है. उन्होंने अपनी दुकान के बाहर गायों के लिए विशेष प्रकार की थर्माकोल की दो टंकियां बना रखी हैं. प्रतिदिन 40 से 50 गायें इनकी दुकान पर आकर पानी पीती हैं.
शमशाद की सेवा
    देश में इन दिनों 'गाय की राजनीति' इस क़दर हावी है कि लोग गाय के नाम से भी घबराने लगे हैं. लेकिन शमशाद को देख कर मालूम होता है कि इनके लिए इंसानियत मायने रखती है. निस्वार्थ सेवा से काम करने वाले शमशाद को हमारा सलाम.
     हमारे बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि गाय को रोटी खिलाना पुण्य का काम है. तो सोचिए ज़रा! गाय को पानी पिलाने से कितना पुण्य मिल सकता है.
8:31 PM | 0 comments | Read More

खुद पैरों पर खड़े नहीं हो सकते, लेकिन छात्रों को अपने पैरों पर खड़े करने का बीड़ा उठाया है इन्होंने

मैं क़तरा होकर भी तूफां से जंग लेता हूं,
मेरा बचना समंदर की ज़िम्मेदारी है.
दुआ करो कि सलामत रहे मेरी हिम्मत,
यह एक चिराग कई आंधियों पर भारी है.
    कुछ ऐसा ही हिम्मती है यह नौजवान सुनील. शारीरिक लाचारी और आर्थिक संकट के बीच जीवन बिता रहे हायर सेकेंडरी पास सुनील पटेल के हौसले ने उनकी बेबसी के आगे हथियार नहीं डाले. 16 साल पहले पेड़ से गिरने के कारण निःशक्त हो गए सुनील की ज़िन्दगी बिस्तर पर ही गुजर रही है. इसलिए उन्होंने 10वीं और 12वीं के बच्चों को निःशुल्क ट्यूशन पढ़ाने का बीड़ा उठाया. वे पिछले 2 सालों से बच्चों को ट्यूशन पढ़ा रहे हैं. उनके इस हौसले और जज़्बे की तारीफ़ हर ज़ुबान पर है.
     छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला निवासी 32 वर्षीय सुनील पटेल के साथ किस्मत ने बेहद निर्दयी खेल खेला. साल 2000 में सुनील अपने दोस्तों के साथ आम तोड़ने गए थे. पेड़ पर चढ़ कर आम तोड़ते समय वह अचानक जमीन पर गिर गए. सुनील के पिता झगरू राम पटेल और माता सरोज बाई ने बताया कि अपने बेटे के इलाज में उन्होंने कोई कमी नहीं रखी. खेत बेचकर इलाज में खर्च कर डाला, लेकिन डॉक्टरों ने कह दिया कि सुनील अब जीवन भर चल नहीं पाएगा. मजबूरन सुनील को अपने हालात से समझौता करना पड़ा.
    सुनील कहते हैं कि पिछले 2 सालों से वे 10वीं, 12वीं के विद्यार्थियों को अपने पास बुलाकर उन्हें निःशुल्क कोचिंग दे रहे हैं. इससे उनका समय कट जाता है, साथ ही इस बात की खुशी होती है कि वह बच्चों में ज्ञान बांटने का काम कर रहे हैं. अपनी निःशक्तता को धता बता कर युवाओं को नई प्रेरणा देने के सुनील के फ़ैसले का हर कोई कायल हो गया है.
राशन कार्ड भी छिन गया
    सुनील पटेल ने बताया कि निःशक्त होने पर उन्हें राशन कार्ड प्राप्त हुआ था. बाद में निरीक्षण के समय उनका राशन कार्ड यह कहकर निरस्त कर दिया गया कि शासन द्वारा राशन कार्ड का मुखिया महिला को बनाने का आदेश है. चूंकि निःशक्तजनों के लिए अलग से राशन कार्ड देने का प्रावधान है, इसलिए उन्हें राशन कार्ड भी मिलना चाहिए. सरकार की ओर से इस परिवार को आर्थिक मदद की दरकार है.


8:28 PM | 0 comments | Read More

भूखे-प्यासे 40 घंटे तक बंधक बने रहे मंदबुद्धि दूल्हे राजा

     साजिश के तहत मंदबुद्धि लड़के को अच्छी लड़की के मत्थे मढ़ने की सजा दूल्हे और उसके परिजनों को भुगतनी पड़ी। शादी मंडप पर इसका खुलासा होते ही वधु पक्ष के लोगों ने दूल्हे और उसके परिजनों को बंधक बना लिया। 40 घंटे तक भूखा-प्यासा रखा। सोमवार दोपहर पंचायती में दूल्हे के चाचा धनेश्वर महतो ने शादी में खर्च हुए पैसे लौटाने के बाद दूल्हे को मुक्त किया गया।
    जैंतपुर के रेपुरा मिश्रौलिया निवासी स्व.बिन्देश्वर महतो के पुत्र नंदलाल की शादी करजा के मकदुमपुर कोदरिया निवासी बैद्यनाथ महतो की पुत्री से तय हुई थी। शनिवार की रात बारात आयी और वरमाला भी हुई। दूल्हे को मंडप पर में ले जाया गया तो कई महिलाएं उससे सवाल-जवाब करने लगी। दूल्हा जबाव देने के बजाय हंसता रहा।
     लड़की के पिता ने स्वयं दूल्हे से सवाल पूछना शुरू किया, लेकिन दूल्हा हंसता रहा। दूल्हा मंदबुद्धि निकला। सारी बात जब लड़की को बतायी गयी तो उसने ने शादी से इनकार कर दिया। इस बीच दोनो पक्षों में जमकर हंगामा किया। लड़की के पिता शादी में हुए खर्च लौटाने पर अड़ गये।




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केंद्र सरकार ने चीन से आयात होने वाले दूध. दूध के उत्पाद एवं मोबाइल फ़ोन पर लगाया प्रतिबन्ध

     लगता है कि चीन को संयुक्त राष्ट्र में आतंकवादी अजहर मसूद का वीटो पावर के जरिये बचाव करना बहुत महंगा पड़ने वाला है | केंद्र सरकार लगातार चीनी सामानों की भारत में बिक्री को मुश्किल बनाती जा रही है | कुछ दिन पहले खबर आई थी कि केंद्र सरकार चीनी कंपनियों के लिए सिक्योरिटी क्लीयरेंस के नियम कड़े करने पर विचार कर रही है और अब इस नयी खबर के अनुसार केंद्र सरकार ने चीन से आयात होने वाले दूध, दूध के अन्य उत्पाद एवं कई मोबाइल फ़ोन की भारत में बिक्री पर प्रतिबन्ध लगा दिया है | हालाँकि केंद्र सरकार ने इस की वजह इन सामानों का घटिया क्वालिटी का होना एवं इन सामानों का अंतर्राष्ट्रीय नियमों के अनुसार न बनाया जाना बताया है |
      लेकिन कहीं न कहीं ये सब कुछ चीन द्वारा संयुक्त राष्ट्र में किये गए भारत विरोधी काम का ही असर है | भारत दुनिया के सबसे बड़े उपभक्ताओं के देशों में से एक है | यदि किसी कंपनी से ये बाजार छीन लिया जाये तो उस कंपनी का क्या हाल होगा ये आप समझ ही सकते हैं | ये प्रतिबन्ध एवं सिक्योरिटी क्लीयरेंस के कड़े नियम आने वाले समय में चीन की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर डाल सकते हैं |
    वैसे ऐसा करना अब अत्यन्त आवश्यक भी हो गया है क्योंकि अब तक चीनी कंपनियों को भारत का बाजार उपलब्ध कराकर हम चीनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रहे थे | चीन हर साल कितना ज्यादा पैसा भारत विरोधी ताकतों को देकर भारत का नुकसान करता है ये भी सभी को पता है | यानि कि हमसे ही पैसा कमाओ और हमें ही बर्बाद करो | अब चीन को ये समझना होगा कि भारत में नयी सरकार के बनने के बाद माहौल काफी बदल गया है और चीन को अब भविष्य में भारत की ओर से और भी कड़े विरोधों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए |
    केंद्र सरकार द्वारा चीन पर दवाब डालने की दिशा में अब तक उठाये कदम सराहनीय हैं | ख़ुशी हुई ये देखकर कि अब इस देश में सिर्फ कड़ी निंदा नहीं की जाती बल्कि खुलकर बिना किसी दवाब के कड़ी कार्रवाही की जाती है |
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सऊदी अरब में हेरोइन की तस्करी करने वाले पाकिस्तानी का सर कलम

     रियाद।। गुरुवार को सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के अनुसार शाह ज़मान खान सईद पर देश में हेरोइन तस्करी करने की कोशिश का अपराध साबित हुआ था। ज़मान खान को मृत्युदंड राजधानी रियाद में दिया गया ।
     इससे इस साल सऊदी अरब में मौत की सजा की संख्या 86 हो गई है। इनमें से 47 की मौत पर एक ही दिन में लागू हुआ था जिस पर ‘आतंकवाद’ का अपराध था।
    सऊदी अरब में मौत की सजा पाने वाले अपराधियों में से अधिकांश के सिर कलम किए जाते हैं।
    एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि सऊदी अरब पिछले साल मौत को लागू करने वाले देशों में तीसरे नंबर पर रहा। जिन लोगों की सजा पर अमल हुआ उनकी संख्या कम से कम 158 है।
   दूसरी ओर इस सूची में दूसरे स्थान पर पाकिस्तान का था जहां 326 लोगों को फांसी दी गई जबकि पहले नंबर पर ईरान रहा जिसने कम से कम 977 लोगों को फांसीाँ दें।
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अयोध्या में राममंदिर के ऊपर बनाई गई थी मस्जिद - डॉ. के.के. मोहम्मद

    नर्इ दिल्ली।। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के प्रसिध्द पुरातत्ववेत्ता डॉ. के.के. मोहम्मद ने, वर्षों बाद भी अयोध्या प्रकरण का समाधान नहीं निकलने के लिए वामपंथी इतिहासकारों को उत्तरदायी ठहराया है। उनके अनुसार वामपंथियों ने इस मुद्दों का समाधान नहीं होने दिया।
    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उत्तर क्षेत्र के पूर्व निदेशक डॉ. मोहम्मद ने मलयालम में लिखी आत्मकथा ‘जानएन्ना भारतीयन’ (मैं एक भारतीय) में यह दावा करते हुए कहा है कि, ‘वामपंथी इतिहासकारों ने इस मुद्दे को लेकर बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के नेताओं के साथ मिलकर देश के मुसलमानों को पथभ्रष्ट किया। उनके अनुसार, इन लोगों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय तक को भी पथभ्रष्ट करने का प्रयास किया था।
    अपनी आत्मकथा में डॉ.के.के. मोहम्मद ने बताया है कि, १९७६-७७ के कालावधि में एएसआइ के तत्कालीन महानिदेशक प्रो. बीबी लाल के नेतृत्व में पुरातत्ववेत्ताओं के दल द्वारा अयोध्या में किए गए उत्खनन के कालावधि में मंदिरों के ऊपर बने कलश के नीचे लगाया जाने वाला गोल पत्थर मिला। यह पत्थर केवल मंदिर में ही लगाया जाता है। इसी प्रकार जलाभिषेक के पश्‍चात, मगरमच्छ के आकार की जल प्रवाहित करनेवाली प्रणाली भी मिली है।
    देश के एक प्रमुख पोर्टल समाचार से बात करते हुए डॉ. मोहम्मद ने बताया कि, इस मुद्दे को लेकर इरफान हबीब (भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष) के नेतृत्व में कार्रवाई समिति की कई बैठकें हुईं थीं।   
     उन्होंने कहा कि, ‘रोमिला थापर, बिपिन चंद्रा और एस गोपाल सहित इतिहासकारोने कट्टरपंथी मुसलमान समूहों के साथ मिलकर तर्क दिया था कि, १९ वीं शताब्दी से पहले मंदिर की तोडफोड और अयोध्या में बौद्ध जैन केंद्र होने का कोई संदर्भ नहीं है। इसका इतिहासकार इरफान हबीब, आरएस शर्मा, डीएन झा, सूरज बेन और अख्तर अली ने भी समर्थन किया था।’ इनमें से कइयों ने सरकारी बैठकों में हिस्सा लिया और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का खुला समर्थन किया।’

     पुस्तक के एक अध्याय में डॉ. मोहम्मद ने लिखा है, ‘जो कुछ भी मैंने जाना और कहा है, वह ऐतिहासिक सच है । हमे विवादित स्थल पर एक नहीं, बल्कि १४ स्तंभ मिले थे। सभी स्तंभों पर कलश खुदे थे। ये ११ वीं व १२ वीं शताब्दी के मंदिरों में पाए जानेवाले कलश के समान थे। कलश ऐसे नौ प्रतीकों में एक हैं, जो मंदिर में होते हैं । इस से कुछ मात्रा में यह भी स्पष्ट हो गया था कि, मस्जिद एक मंदिर के अवशेष पर खडी है। उन दिनों मैंने इस बारे में अंग्रेजी के कई समाचार पत्रों को लिखा था।
    उन्होंने यह भी बताया है कि, मेरे विचार को केवल एक समाचार पत्र ने प्रकाशित किया और वह भी ‘लेटर टू एडिटर कॉलम’ में।’

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