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शियाओं को महंगा पड़ा आजम को घेरना, पुलिस ने जमकर भांजी लाठियां

Written By Bureau News on Friday, July 25, 2014 | 9:17 PM

  लखनऊ।। उत्तर प्रदेश के नगर विकास और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहममद आजम खां का घर घेरने जा रहे शियाओं पर आज यहां पुलिस ने जमकर लाठियां भांजी।
   अलविदा की नमाज के बाद शिया मुस्लिमों ने जुलूस की शक्ल मे इमामबाड़ा की मस्जिद से निकलकर मैडीकल कालेज चौराहा, नीबू पार्क और शहीद स्मारक पहुंचे। स्मारक पर लगी बैरीकेडिंग को तोड़ते हुए आगे बढ़ने की कोशिश की।
   पुलिस ने उन्हें रोका तो प्रदर्शनकारी पथराव करने लगे। इसके बाद पुलिस ने जमकर लाठियां भांजी जिससे कई लोग घायल हुए है। प्रदर्शनकारियों ने कुछ मीडियाकर्मियों के साथ भी दुर्व्यवहार किया।
   लाठीचार्ज के बाद शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद धरने पर बैठ गए। मौलाना कल्वे जव्वाद का आरोप है कि शिया वक्फ बोर्ड की सम्पत्तियों को जानबूझकर औने पौने बेचा जा रहा है और इसके लिए मोहम्मद आजम खां जिम्मेदार है।
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अदालत ने कहा, फिर से तय हो गुजारा भत्ता

   नई दिल्ली।। एक सत्र अदालत ने घरेलू हिंसा के एक मामले में मजिस्ट्रेट की अदालत को एक महिला और बच्चे को गुजारा भत्ता फिर से तय करने का निर्देश दिया क्योंकि पति का दावा है उसकी कुल आमदनी तय राशि से बहुत कम है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश :एएसजे: गौतम मनन ने इस संबंध में एक मजिस्ट्रेट की अदालत को यह आदेश दिया। मजिस्ट्रेट की अदालत ने पति को आदेश दिया था कि वह अपनी पूर्व पत्नी और उसके बच्चों को 5,000 रूपए गुजारा भत्ता दे। पति ने इस आदेश को चुनौती दी थी। न्यायाधीश ने उसकी याचिका यह कहते हुए स्वीकार कर ली कि मजिस्ट्रेट ने राशि तय करते वक्त महिला की आय और संपत्ति को लेकर सबूतों पर विचार नहीं किया।
   उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि निचली अदालत ने प्रतिवादी :महिला: और उसकी वित्तीय संपत्ति की आमदनी के सबूतों पर विचार किए बिना ही आदेश जारी किया। अदालत ने कहा, ''गुजारा भत्ता का आदेश जारी करने से पहले निचली अदालत को दोनों पक्षों को अपने अपने आय और संपत्ति पर हलफनामा देने के लिए कहना चाहिए, इसलिए साक्ष्यगत अनियमितता को देखते हुए इसे खारिज किया जाता है। उत्तरप्रदेश में अंबेडकर नगर निवासी व्यक्ति ने जनवरी 2014 में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के आदेश को इस आधार पर चुनौती दी थी कि उसकी कुल मासिक आय गुजारा भत्ते की राशि से कम है और इसलिए वह हर महीने इतनी राशि नहीं दे सकता।
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सिविल सेवा के अभ्यर्थियों को संसद कूच करने से रोका गया

   नई दिल्ली।। सिविल सेवा के अभ्यर्थियों के एक समूह ने 'भाषाई भेदभाव के विरूद्ध प्रदर्शन करते हुए आज संसद की ओर कूच किया लेकिन उसे पुलिस ने रोक दिया और बाद में एहतियाती हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों को केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन के बाहर रोक दिया गया और उन्हें संसद मार्ग थाने ले जाया गया। कल रात उनकी उत्तर दिल्ली में पुलिस के साथ झड़प हुई थी। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा,''हमने करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया है। जरूरत पड़ी तो जरूरी एहतियाती कार्रवाई की जाएगी। ÓÓ प्रदर्शनकारियों को संसद भवन के समीप कहीं भी पहुंचने से रोकने के लिए केंद्रीय सचिवालय एवं उद्योग भवन मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं। 
   दिल्ली मेट्रो के एक प्रवक्ता ने कहा, ''पुलिस की सलाह के मुताबिक दो मेट्रो स्टेशन पौने एक बजे से लेकर अगले परामर्श तक आम जनों के लिए बंद कर दिए गए हैं। केंद्रीय सचिवालय पर अदला-बदली की सुविधा उपलब्ध रहेगी। प्र्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि वर्तमान फार्मेट उन लोगों के लिए भेदभावकारी है जो अंग्रेजी में कुशल नहीं हैं। एक सिविल सेवा अभ्यर्थी ने कहा, ''हम संसद की ओर जाना चाहते थे क्योंकि सरकार की ओर से हमसे बातचीत करने के लिए कोई आगे नहीं आया। वर्तमान फार्मेट में उन लोगों के साथ भेदभाव की ज्यादा गुजाइंश है जो अग्रेज में कुशल नहीं हैं। उसने कहा, ''हमें पहले आश्वासन मिला लेकिन कुछ नहीं हुआ। कल हमें परीक्षा प्रवेश पत्र जारी कर दिया गया और अब 24 अगस्त को हमारी परीक्षा है। हम चाहते हैं कि तत्काल कुछ किया जाए। 
    सिविल सेवा अभ्यर्थी सिविल सेवा अभिक्षमता परीक्षा रद्द करने की मांग करते हुए पिछले कुछ समय से प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्होंने यूपीएससी से कल प्राथमिक परीक्षा के लिए परीक्षा प्रवेश पत्र जारी होने के बाद कल रात उत्तरी दिल्ली में बुराड़ी के समीप मुख्य राजमार्ग बाईपास को जाम कर दिया था। उनकी पुलिस के साथ झड़प हुई थी। उन्होंने एक पुलिस जीप समेत कई वाहनों में आग लगा दी तथा पथराव किया जिससे 12 लोग घायल हो गए। संयुक्त पुलिस आयुक्त संदीप गोयल के अनुसार करीब साढ़े आठ बजे करीब 500-700 प्रदर्शनकारियों ने सीएसएटी रद्द करने की मांग करते हुए मुख्य बाईपास जाम करने का प्रयास किया। पुलिस उपायुक्त :उत्तरी: माधुर वर्मा के मुताबिक एक रोडेवेज बस ड्राइवर, एक राहगीर और 10 पुलिसकर्मी घायल हुए। स्थिति बिगडऩे पर पुलिस ने आंसूगैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया ताकि प्रदर्शनकारी वहां से चले जाएं। पुलिस ने 20 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया और उन पर दंगा फैलाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया। पुलिस ने सारी घटना की वीडियोग्राफी की तथा आगजनी एवं दंगे में लिप्त और लोगों की पहचान होने के बाद और गिरफ्तारियां कर सकती हैं।
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सरकारी जमीन को नोटरी कराकर बेच डाला

   शिवपुरी।। खनियांधाना थाना क्षेत्र में पेट्रोल पंप के सामने स्थित 100 बाई 45 के शासकीय भूमि के टुकड़े को अतिक्रामक ने स्टाम्प पर नोटरी कराकर बेच दिया। जिस पर खरीददार ने मकान बनवा लिया। इस मामले में तहसीलदार ने नोटिस देकर भूमि से संबंधित कागजात मांगे तो खरीददार ने विक्रेताओं द्वारा दिए गए कब्जे के कागजात पेश किए। जिसे तहसीलदार ने अमान्य घोषित करते हुए विक्रेता पति-पत्नी सहित खरीददार के खिलाफ थाने पहुंचकर आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है।
  खनियांधाना में पेट्रोल पंप के पास स्थित बेशकीमती शासकीय भूमि पर दौलत पुत्र परीक्षत परीहार और उसकी पत्नी बाईवेव ने अतिक्रमण कर कब्जा कर रखा था। इस जमीन पर अतिक्रामक झोंपड़ी बनाकर निवासरत् था। बाद में अतिक्रामक ने उक्त भूमि को बेचने की योजना तैयार की और उसे वीरेन्द्र पुत्र बाबू सिंह यादव को 29 अगस्त 2008 में एक स्टा प पर नोटरी कराकर बेच दिया। बाद में पटवारी ने उक्त भूमि से संबंधित रिपोर्ट तहसीलदार को सौंपी।
   जिस पर तहसीलदार ने नोटिस जारी कर भूमि से संबंधित कागजातों की मांग की। के्रता ने खरीदी गई जमीन से संबंधित नोटरी युक्त स्टा प तहसीलदार के समक्ष प्रस्तुत किए। जिसे तहसीलदार जेपी गुप्ता ने आमान्य मानते हुए उक्त भूमि से कब्जा हटाने का निर्देश दिया, लेकिन इसे बावजूद भी वीरेन्द्र यादव ने कब्जा नहीं हटाया। बाद में श्री गुप्ता ने क्रेता और विक्रेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए पत्र लिखा जिसके आधार पर पुलिस ने प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया।
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खुलेआम वर्दी पहनकर जुआ खेलते पुलिसकर्मी


खुलेआम वर्दी पहनकर जुआ खेलते पुलिसकर्मी।खुलेआम उड़ी वर्दी की धज्जियां, जुआ खेलते पकड़े गए पुलिसकर्मी खुलेआम वर्दी पहनकर जुआ खेलते पुलिसकर्मी
   आगरा।। अपराध पर लगाम कसने वाली पुलिस खुद ही वर्दी पहने खुले आम ताजनगरी में जुआ खेलती नजर आई। वह भी बीच शहर में और ड्यूटी के दौरान। सोमवार को पुलिस लाइन की दीवार से सटे ईदगाह रेलवे स्‍टेशन परिसर में जुए पर छापेमारी के दौरान कई पुलिसकर्मी पकड़े गए हैं। इन्‍हें निलंबित करने की कार्रवाई की जा रही है। छापेमारी की कार्रवाई एसएसपी के निर्देश पर हुई है।
    ईदगाह रेलवे स्‍टेशन पर खुलेआम सुबह-शाम जुए खेला जाता है। उनके हौसले इतने बुलंद हैं कि वे पुलिस और रेल प्रशासन की परवाह भी नहीं करते हैं। इसके कारण इसमें खाकी भी शामिल हो गई। जुए की जानकारी आरपीएफ, जीआरपी और स्‍टेशन स्‍टाफ को थी, लेकिन पुलिसकर्मियों के शामिल होने की वजह से वो कोई कदम नहीं उठाते थे। यही नहीं दीवार तोड़कर पुलिस लाइन में तैनात पुलिसकर्मी ही निर्माणाधीन प्‍लेटफार्म नंबर चार पर जुआ खेलते थे।
अधिकारियों के पहुंचते ही मच गई भगदड़
    सोमवार को सहायक पुलिस अधीक्षक शैलेश कुमार पाण्‍डेय ने इस इलाके की छापेमारी की। इसके बाद तो यहां भगदड़ सी मच गई। जुआरियों के साथ मौजूद पुलिसकर्मी भी भागने लगे। एससपी ने बताया कि सूचना थी कि पुलिस लाइन की दीवारी के बाहर और रेलवे स्‍टेशन के बीच में जुआ खेला जाता हैं। इसमें पुलिस के कर्मचारी भी शामिल हैं। उनके पहुंचते ही वहां भगदड़ मच गई। कुछ पुलिसकर्मी चिह्नित हो गए हैं। इस बात की जांच की जाएगी कि वह खेल रहे थे या देख रहे थे।
अब तक हिरासत में नहीं लिए गए पुलिस जुआरी
    उन्‍होंने बताया कि जो भी इस अपराध में लिप्त पुलिसकर्मी पाए गए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। निलंबन की रिपोर्ट दी जा रही है। मौका-ए-वारदात से पकड़े गए पुलिसकर्मियों में एक हाथरस से बर्खास्‍त कांस्‍टेबल, एक रिटायर्ड पुलिस कर्मचारी और एक अन्‍य पुलिस कर्मी भी शामिल है। फिलहाल अभी तक किसी भी कर्मी को पुलिस ने हिरासत में नहीं लिया है।

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पहले मुनाफा, अब 300 करोड का घाटा


    नई दिल्ली।। संघ शासित प्रदेश दमन-दीव एवं दादरा नगर हवेली में कई ऐसे अधिकारी हैं, जिनके पास दर्जनों विभाग के अतिरिक्त प्रभार हैं. ऐसे में ये अधिकारी कितना और क्या काम कर पाते होंगे, इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल नहीं है. संघ शासित प्रदेश दमन-दीव एवं दादरा नगर हवेली, दोनों के प्रशासक एक ही अधिकारी भूपेन्द्र सिंह भल्ला हैं. आईएएस ज्ञानेश भारती (दायें)
   दोनों संघ प्रदेश में विकास आयुक्त का पदभार 16 महीनों से रिक्त है. आईएएस अधिकारी, वित्त सचिव ज्ञानेश भारती को अतिरिक्त पदभार के रूप में दिया गया है. ज्ञानेश भारती के पास अतिरिक्त प्रभार के रूप में, विकास आयुक्त, वित्त सचिव, स्वास्थ सचिव, शिक्षा सचिव, विद्युत सचिव, लोक निर्माण विभाग के सचिव, प्लानिंग सचिव, वैट विभाग के कमिश्नर, एक्साइज़ अथवा सभी टैक्स के सचिव,विजिलेन्स (सतर्कता विभाग) के चेयरमैन पंचायती राज, चुनाव कमिश्नर, दानह विधुत निगम के कंपनी सेक्रेटरी, के आलावे कई अतिरिक्त पदभार है. उक्त सभी पदभार संघ प्रदेश दमन के है. इसके अलावा, संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली के भी कई प्रभार इनके जिम्मे है.
    बहरहाल, ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि संघ शासित इन प्रदेशोँ मेँ शासन-प्रशासन की हालत क्या होगी? उदाहरण के लिए यहां का विद्युत विभाग. यहां का विद्युत विभाग 2008 तक प्रति वर्ष 70-80 करोड़ का मुनाफा कमा रहा था, लेकिन 2011 मेंइसे 300 करोड़ का घाटे हुआ. सवाल है कि अचानक ऐसा कैसे हो गया? ऊपर से घाटे की भरपाई करने के लिए, तमाम घरों के मीटर बदल दिए गए. ये संघ प्रदेश 2011 तक सबसे कम विद्युत शुल्क के लिए जाना जाते थे. आज यहे के विद्युत बिल गुजरात से भी अधिक आता है. स्थानीय लोगों ने इसके खिलाफ यहां कई आंदोलन भी किए. जनता हजारों की संख्या में सड़कों पर आई, लेकिन किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की.
    जनता की जायज मांगों पर ध्यान देने की जगह विद्युत विभाग अपनी मनमानी चला रहा है. स्थानीय लोग तो यहां तक कहते हैं कि खुद यह विभाग ही विद्युत चोरी करवा कर करोड़ों का घाटा उठा रहा है. गुलेल से बात करते हुए दमन के एक स्थानीय पत्रकार बताते है कि चूंकि दमन में विद्युत शुल्क काफी कम है और वहीं गुजरात में यह काफी मंहगी है, इसलिए दमन का विद्युत विभाग गुजरात की निजी कंपनियों से सांठ-गांठ करके चोरी से बिजली का कनेक्शन मुहैया कराता है. इसके अलावा और भी कई तरह की अनियमितताएं इस विभाग में चल रही हैं. मसलन, विभाग ने अपने कार्यपालक अभियंता को प्रमोशन देने में भी काफी अनियमितता बरती. कार्यपालक अभियंता पहले सहायक अभियंता थे, वह भी परमानेंट नहीं थे. नियमों के अनुसार परमानेंट सहायक अभियंता के सात वर्ष की सर्विस के बाद ही उसे कार्यपालक अभियंता बनाया जा सकता है. लेकिन उक्त अभियंता को जूनियर इंजीनियर से सीधा कार्यपालक अभियंता बना दिया गया, जबकि इस मामले में बांबे हाईकोर्ट में एक याचिका भी डाली जा चुकी है.
    उक्त अभियंता व विद्युत सचिव ज्ञानेश भारती के बारे में, दमन दीव प्रशासक से कई बार शिकायत की जा चुकी है. साथ ही इस सब के बारे मेँ गृह मंत्रालय में भी शिकायत की गई, मुंबई सीबीआई में शिकायत की गई, सीवीसी में शिकायत की गई एवं गृह मंत्री एवं तमाम जांच एजेंसियों को सबूत भी दिए गए. लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. इसके अलावा, दमन विद्युत विभाग एवं कार्यपालक अभियंता किसी आरटीआई का जवाब भी नहीं देते. अपील करने पर, कोई जबाब नहीं मिलता, तथा सूचना के अधिकार के तहत किसी प्रकार की सूचना भी नहीं दी जाती.

(C. M. Jain)

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मोदी का जादू नहीं चला उत्तराखंड विधानसभा की तीन सीटों पर

उपचुनावः कांग्रेस का क्लीन स्वीप, सरकार मजबूत
   देहरादून।। उत्तराखंड में विधानसभा की तीन सीटों पर हुए उपचुनाव में मोदी का जादू नहीं चला। लोकसभा चुनाव के ढाई महीने बाद हुए उपचुनाव में तीनों सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार विजयी रहे हैं। मुख्यमंत्री हरीश रावत धारचूला सीट पर आसानी से जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। रावत ने बीजेपी के बीडी जोशी को करीब 20 हजार से वोटों से हराया। इसके अलावा डोईवाला से कांग्रेस के हीरा सिंह बिष्ट और सोमेश्वर से रेखा आर्या ने जीत दर्ज की है ।
    धारचूला, सोमेश्वर और डोइवाला सीटों पर 21 जुलाई को वोट डाले गए थे। बीजेपी के लिए भले इस चुनाव की बहुत अधिक अहमियत न हो लेकिन हरीश रावत के लिए जीत बेहद जरूरी थी। तीनों विधानसभा सीटों पर जीत के साथ 70 विधायकों की उत्तराखंड विधानसभा में कांग्रेस के अब 35 विधायक हो गए है। बहुमत के लिए कांग्रेस को 36 विधायक चाहिए, जो एक मनोनीत सदस्य इसकी पूर्ति कर रहा है। इसके अलावा कांग्रेस के सहयोगी 7 विधायक समर्थन दे रहे हैं।
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हजार गुना होता है लेटी कांवड़ का पुण्य

   मेरठ।। कांवड़ यात्रा के दौरान लोग श्रद्धा व आस्था के चलते भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए लेटी, खड़ी, बैठी व झूला कांवड़ लेकर आ रहे हैं। इनमें सबसे कठिन है लेटी कांवड़, जिसे लाने का साहस कोई-कोई ही करता है। ऐसा ही साहस किया है भराला निवासी अरुण कुमार ने।
    पूरी कांवड़ यात्रा के दौरान एक भोला मनोतामना पूरी होने पर मुजफ्फरनगर से मेरठ औघड़नाथ मंदिर तक हाइवे पर लेटी कांवड़ यात्रा पूरी करते दिखाई दिया। साधु-संतों का कहना है कि एक हजार खड़ी कांवड़ लाने में जो पुण्य मिलता है, वह एक लेटी कांवड़ लाने में ही मिल जाता है।
     लेटी कांवड़ यात्रा पूरी कर रहे भराला निवासी 27 वर्षीय अरुण पुत्र कांति प्रसाद ने बताया कि वह बीए पास है। पढ़ाई के बाद बेरोजगारी के चलते परेशान था। उसके घर की माली हालत बिगड़ती जा रही थी। एक रोज उसने भगवान शंकर से स्थाई नौकरी मिलने पर हरिद्वार से पैदल चलकर व मुजफ्फरनगर से लेटकर मेरठ औघड़नाथ मंदिर तक कांवड़ यात्रा पूरी करने का संकल्प लिया था। इसके बाद उसको परतापुर गुब्बारे की कंपनी में सुपरवाइजर की स्थाई नौकरी मिल गई। देवों के देव महादेव भोले बाबा से किए वचन को निभाने के लिए वह हरिद्वार से मुजफ्फरनगर तक पैदल चलकर कांवड़ लेकर आया और लिए संकल्प के अनुसार मुजफ्फरनगर से मेरठ औघड़नाथ मंदिर तक लेटकर कांवड़ यात्रा पूरी कर रहा है। अरुण ने बताया कि वह 25 जुलाई शुक्रवार की सुबह शिवरात्रि तक अपनी यात्रा पूरी कर लेगा। कांवड़ यात्रा के दौरान गांव के उनके दोस्त दीपक पुत्र प्रमोद व छोटू पुत्र रामकिशोर का विशेष सहयोग रहा। उन्होंने बताया कि दीपक हाइवे पर लेटने के दौरान हाथ के पास लाइन खींचने व छोटू गर्मी के चलते पंखे से उनकी बराबर हवा करते चल रहे हैं। कांवड़ से मिले आधे पुण्य के हकदार उनके दोनों दोस्त भी है। परिवार में मां दुलारी, चारों भाई-बहन सहित पिता भी भजन कर उनकी लेटी कांवड़ यात्रा सकुशल पूरी कराने के लिए भगवान शिव का जाप कर रहे हैं।


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हैरतअंगेज: डॉक्टरों ने फिर से जोड़ दिए कटे हुए हाथ


   भोपाल।। भोपाल के डॉक्टरों ने एक युवक के कटे हाथ फिर से जोड़ दिए। दावा किया जा रहा है कि प्रदेश में प्लास्टिक सर्जरी द्वारा किया गया ये पहला ऑपरेशन है। इस ऑपरेशन में 14 घंटों का वक्त लगा।विशाल झा (18) एक प्रिंटिंग प्रेस पर काम कर रहा था कि अचानक उसके हाथ मशीन में आकर कट गए। प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारी उसे तुरंत अस्पताल लेकर पचुंच गए। वह अपने साथ उसके कटे हाथ भी लेकर आए थे।
    प्लास्टिक सर्जन अरुण भटनागर ने बताया कि जांचें की गईं और प्लास्टिक सर्जरी के द्वारा उसे कटे हाथों को जोड़ दिया गया। जोड़ने के बाद लगातार ये देखा गया कि यह काम कर रही है या नहीं। मंगलवार को उसने हाथों की उंगलियों को हिलाया तो सफलता साबित हुई।ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉक्टर वैभव माहेश्वरी ने बताया कि प्रेस के कर्मचारियों ने विशाल के कटे हुए हाथों को बर्फ में रख लिया था जिसके कारण नसें ब्लॉक नहीं हुईं और हाथों को जोड़ा जा सका।




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राष्ट्रपति के तौर पर प्रणब मुखर्जी ने पूरे किए दो साल, संग्रहालय का उद्घाटन किया

   नई दिल्ली।। राष्ट्रपति पद संभालने के अपने दो साल पूरे होने के मौके पर प्रणब मुखर्जी ने आज लंदन के मैडम तुसाद संग्रहालय के भारत के अपने संस्करण का उद्घाटन किया जिसमें पूर्व राष्ट्रपतियों की फाइबर-कांच की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं और उन्हें विदेशों से जो तोहफे मिले, वे नुमाइश के लिए लगाए गए हैं। संग्रहालय के उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शिरकत की। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस समारोह के दौरान कई कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए। संग्रहालय के उद्घाटन के लिए प्रणब द्वारा फीता काटने के समय उनके एक तरफ मोदी थे जबकि दूसरी तरफ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपनी पत्नी गुरशरण कौर के साथ थे। राष्ट्रपति भवन को जनहितैषी बनाने की प्रणब की पहल के तहत यह संग्रहालय राष्ट्र को समर्पित किया गया। मोदी, कैबिनेट मंत्रियों एवं समारोह में शिरकत कर रहे अन्य लोगों का शुक्रिया अदा करते हुए प्रणब ने कहा, ''मुझे यकीन है कि यह संग्रहालय हमारे देश के लोगों को राष्ट्रपति भवन के अंदर का नजारा, इसकी कला एवं वास्तुकला देखने का मौका मुहैया कराएगा और उन्हें विभिन्न राष्ट्रपतियों की जिंदगी के बारे में शिक्षित करेगा। यह संग्रहालय एक अगस्त से लोगों के लिए खोला जाएगा। 
   लोग इस संग्रहालय की सैर शुक्रवार, शनिवार और रविवार को कर सकते हैं। पहले तीन महीने में संग्रहालय की सैर करने के लिए लोगों को कोई शुल्क नहीं देना होगा। तीन महीने के बाद शुल्क के तौर पर मामूली राशि ली जाएगी और इसके लिए आरक्षण ऑनलाइन भी कराया जा सकता है। संग्रहालय में रायसीना हिल के भवन की योजना एवं निर्माण, वाइसरॉय हाउस रहे भवन में गांधी-इरविन समझौते पर दस्तखत, भारत के विभाजन पर फैसले के लिए नेताओं की बैठक और दरबार हॉल में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और पहले राष्ट्रपति बाबू राजेंद्र प्रसाद का शपथ-ग्रहण समारोह दिखाया जाएगा। इस संग्रहालय में राष्ट्रपति भवन की कहानी साउंड-लाइट-वीडियो एनिमेशन, लेजर और होलोग्राफिक प्रोजेक्शन का इस्तेमाल कर बताई जाएगी। आज के कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू, मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और कैबिनेट सचिव अजित सेठ सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

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पश्तूनों के इतिहास और तालिबान के उदय की वजूहात को खंगालती एक किताब....

    नई दिल्ली।। एक नई किताब के अनुसार पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों देशों द्वारा पश्तून समुदाय के लोगों को राष्ट्रीय तंत्र के साथ जोडऩे और आर्थिक एवं राजनीतिक धागे में पिरोने में असफल रहने की वजह से दोनों देशों की सुरक्षा को लेकर चुनौतियां पैदा हुई हैं। अस्थिरता के दौर से गुजर रहे अफगानिस्तान और पाकिस्तान को लेकर अधिकतर समकालीन लेखों में कहा जाता रहा है कि तालिबान और उससे जुड़े समूहों के लिए समर्थन समेत हिंसक इस्लामी आतंकवाद की जड़ें या तो पश्तून इतिहास एवं संस्कृति में रची बसी हैं या उन्हें अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा के दोनों ओर पश्तून समुदाय में पनाह मिलती है। 
   लेकिन 'द पश्तून्स: दि अनरिजोल्वड की टू दि फ्यूचर ऑफ पाकिस्तान एंड अफगानिस्तान किताब में पत्रकार अबुबाकर सिद्दीकी ने लिखा है कि पश्तूनों को राष्ट्रीय तंत्र के साथ जोडऩे और आर्थिक एवं राजनीतिक धागे में पिरोने में अफगानिस्तान और पाकिस्तान की असफलता या अनिच्छुकता इन सबके लिए जिम्मेदार है और इसकी वजह से ही दोनों देशों में राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण विफलता सामने आई है। लेखक ने दलील दी है कि इन महत्वपूर्ण असफलताओं की वजह से धार्मिक अतिवाद पनपा है और इन हालातों के लिए एक हद तक दोनों देशों का कुलीन वर्ग जिम्मेदार है। लेखक खुद भी पश्तून समुदाय के हैं और उनका कहना है कि इस तरह के दोषपूर्ण विश्लेषण की वजह से 5 करोड़ पश्तूनों ने पिछले 30 सालों में भारी कीमत चुकाई है। रैंडम हाउस इंडिया द्वारा प्रकाशित किताब में सिद्दीकी ने लिखा है, ''तालिबान और उससे संबद्ध समूहों और साथ ही क्षेत्रीय देशों एवं पश्चिमी ताकतों ने अपनी पसंद के हिसाब से पश्तून क्षेत्रों को ढालने के लिए हिंसा का इस्तेमाल किया है। 
   उनके प्रयासों ने निराशा और अविश्वास की विरासत पीछे छोड़ी है और तालिबान जैसे एक संसाधन संपन्न एवं प्रतिबद्ध दुश्मन के निर्माण में योगदान दिया है। लेकिन क्षेत्र में पश्चिमी देशों के राजनीतिक लक्ष्य अपूर्ण रहे हैं। उन्होंने कहा, ''मैंने यह दिखाने की कोशिश की है कि अकसर पश्तून सीमा इलाकों में शक्तिशाली हस्तक्षेप और मुख्य रूप से तालिबान को एक आतंकी खतरे के तौर पर देखने से यह संकट और बढ़ा है। मैंने यह दिखाने की कोशिश की है कि कैसे क्षेत्रीय देश पश्तून क्षेत्र का निर्माण अंतरराष्ट्रीय सहयोग के एक पुल के तौर पर करने में असफल रहे हैं। सिद्दीकी ने कहा, ''और मैंने यह दिखाने की कोशिश की है कि मुख्य रूप से तालिबान और उसके सहयोगियों की गतिविधियों में दिखने वाला क्षेत्रीय अतिवाद काफी हद तक इन महत्वपूर्ण असफलताओं की वजह से पैदा हुआ है। हालांकि सबसे उूपर मैंने यह दिखाने की कोशिश की है कि तालिबान जैसे इस्लामी कट्टरपंथियों के उदय की वजह पश्तून क्षेत्र में विकास एवं स्थिरता की कमी है। किताब में तालिबान के उदय, उसके समकालीन व्यवहार, रणनीतिक दृष्टि और संभावित भविष्य को स्पष्ट करने की कोशिश की गई है।
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किसान के ज्ञान को विज्ञान का सलाम


    रामपुर।। न रसायनिक खाद, न कीटनाशक, न बरसात का इंतजार, फिर भी फसल में विज्ञान सरीखा कमाल। टमाटर के पौधे 15 फीट तक ऊंचे और उत्पादन प्रति बीघा 100 क्विंटल। ऐसी खेती देख दक्षिण पूर्व एशियाई देश फिलीपींस के कृषि वैज्ञानिक भी अचरज में पड़ गए। उन्होंने दुनिया में ऐसी खेती न होने का दावा किया। इसके बाद उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के इस किसान के ज्ञान को विज्ञान ने भी सलाम किया और पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय ने सराहा।

    रामपुर जिले के बेनजीर गांव निवासी वीरेंद्र सिंह संधु ने अर्थशास्त्र में परास्नातक कर 15 साल पूर्व जैविक खेती का निर्णय लिया। वे खेतों में सिर्फ जैविक खाद डालते हैं और कीटनाशक दवाओं का भी इस्तेमाल नहीं किया। संधु 12 एकड़ के फार्म में धान, मैंथा, मटर, टमाटर, खीरा, गेहूं व धनिया उगाते हैं। फसलों की सिंचाई के लिए रिजर्वायर बना रखा है। बिजली आने पर इसमें पानी भरते हैं। रिजर्वायर से कुछ ऊंचाई पर गाय, भैंस, बछड़े बंधे रहते हैं। उनका गोबर व मूत्र वेयर में आता है, जो पानी में मिलता है और सिंचाई के जरिये फसलों में पहुंचता है। कीटों को मारने के लिए वह बायो कंट्रोल सिस्टम अपनाते हैं। उन्होंने यहीं पर आठ बीघा जमीन पर पोलीहाउस बना रखा है, जो ऊपर से ढका है। इसमें टमाटर, शिमला मिर्च, खीरा आदि की खेती करते हैं।
    इसकी तकनीक सीखने के लिए वह इजराइल गए थे। टमाटर की फसल की ऊंचाई 15 फीट तक है, जिस पर नीचे से ऊपर तक टमाटर लदे हैं। प्रति बीघा सौ क्विंटल टमाटर व 50 क्विंटल खीरा उत्पादन का रिकॉर्ड उनके पास है। वह इनका बीज हॉलैंड से लेकर आए थे। पोलीहाउस में कृत्रिम बारिश करने के साथ दस डिग्री तक तापमान घटाने और बढ़ाने की व्यवस्था है। संधु को मेरठ व पंतनगर के कृषि विश्वविद्यालय अक्सर लेक्चर के लिए बुलाते हैं। वहां से प्रोफेसर, कृषि विशेषज्ञ भी फॉर्म पर आते हैं। बताते हैं कि फिलीपींस के इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट के हेड डॉ. खुश फार्म पर आए थे।
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बगावत से घिरी कांग्रेसः 5 राज्यों में पार्टी नेताओं ने खोला मोर्चा, एनसीपी ने भी दिखाई आंख

   नई दिल्ली।। लोकसभा चुनावों के बाद मुंह के बल गिरी कांग्रेस पार्टी में अब बगावत के सुर देशव्यापी होते जा रहे हैं। जिन भी राज्यों में कांग्रेस की सरकार है वहां नेतृत्व परिवर्तन को लेकर आवाज तीखी हो गई है। यहां तक कि मंत्री भी एक के बाद एक इस्तीफा दे रहे हैं। इस्तीफे के साथ ही तीखे बयानों ने कांग्रेस आलाकमान की बेचैनी बढ़ा दी है। खबर है कि कांग्रेस 5 राज्यों में अपनो की बगावत से परेशान है जिसने कांग्रेसाध्यक्ष की पेशानियों पर बल दे दिया है….
पं. बंगाल में पार्टी को झटका
   पश्चिम बंगाल से है जहां कांग्रेस के 3 MLA ने पार्टी का दामन छोड़ टीएमसी के साथ हाथ मिला लिया है। हालिया मामले प. बंगाल का है जहां पार्टी के तीन एमएलए असित मल, उमापद बौरा और गोलम रब्बानी ने ममता बनर्जी का दामन थाम लिया है। प. बंगाल में ममता की बढ़ता लोकप्रियता से कोई अछूता नहीं है, एक CPIM नेता छाया दौली ने भी टीएमसी का दामन थाम लिया है।
   इस पर पं. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता ने खुशी जताते हुए कहा है कि हमारी पार्टी में बस कम्यूनल राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है।
हरियाणा में भी बगावत के सुर
   हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ बगावती सुर और तेज हो गए हैं। राज्य में कांग्रेस के बड़े नेता चौधरी वीरेंद्र सिंह ने सोमवार को कहा, वह हुड्डा के नेतृत्व में चुनाव नहीं लड़ेंगे।
जम्मू कश्मीर में लाल ने छोड़ी पार्टी
   पूर्व सांसद लाल सिंह ने गुलाम नबी आजाद के खिलाफ खुलकर मैदान में उतरते हुए पार्टी छोड़ दी। नेकां और कांग्रेस गठबंधन टूटने के बाद उन्होंने यह ऎलान किया। भाजपा और पीडीपी से उनकी बातचीत चल रही है।
असम
    असम के स्वास्थ्य मंत्री भी बागी हो चुके हैं, कल 30 कांग्रेसी विधायकों ने गवर्नर से मुलाकात की थी।
जम्मू-कश्मीर
   जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस के एक पूर्व सांसद ने बग़ावत का झंडा का उठा लिया. उसे आरोप लगया है कि उनका टिकट काट कर गुलाम नबी आजाद को टिकट दिया. जो चुनाव हार गए,जम्मू−कश्मीर के उधमपुर से पूर्व सांसद चौधरी लाल सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।
एनसीपी ने भी दिखाई आंख
   नेशनल कॉन्फ्रेंस के बाद अब एनसीपी से अलगाव का खतरा पैदा हो गया है. एनसीपी ने कांग्रेस को दो टूक कह दिया है कि उसे महाराष्ट्र में विधानसभा की आधी सीटें नहीं मिली, तो वो अकेले चुनाव लड़ेगी. पार्टी के नाराज कद्दावर नेता नारायण राणे के मंत्री पद से इस्तीफे से कांग्रेस अभी उबरी भी नहीं है कि एक और परेशानी उसके सामने खड़ी हो गई है, महाराष्ट्र एनसीपी के अध्यक्ष सुनील तटकरे ने कहा है कि अगर कांग्रेस ने उन्हें 144 सीटें नहीं दीं, तो एनसीपी सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी. एनसीपी को इन सीटों पर जीत की उम्मीद है.
   दरअसल एनसीपी नेता अपने सुप्रीमो शरद पवार का मिजाज भांपकर कांग्रेस को ये तेवर दिखा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को लेकर लोकसभा में ट्राई एक्ट संशोधन बिल का समर्थन कर शरद पवार ने सबको चौंका दिया था. महंगाई के मुद्दे पर भी जब कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट किया, तो भी उसे एनसीपी का साथ नहीं मिला.
क्या चाहती है एनसीपी?
    एनसीपी दबाव बनाकर महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों में से 144 सीटें चाहती है. 2009 में कांग्रेस 170 सीटों पर लड़ी थी, जिसमें से उसे 82 सीटों पर जीत मिली थी. जबकि एनसीपी को उसने 113 सीटें दी थी, जिसमें से 62 पर उसके विधायक जीते थे. एनसीपी इस बार 50-50 का फॉर्मूला चाहती है. दलील ये है कि लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में उसके सांसद कांग्रेस से ज्यादा हैं. महाराष्ट्र में एनसीपी ने 4 लोकसभा सीटें जीतीं हैं, जबकि कांग्रेस के हिस्से में केवल दो ही सीट आई है.

5:28 PM | 0 comments | Read More

लोकल लेवल पर फाइनल होंगे नगरीय निकाय के टिकिट

   शिवपुरी।। अपनी खोई हुई जमीन तलाशने का प्रयास की रही कांग्रेस के आलाकामन ने यह घोषणा की है नगर निकाय चुनाव के टिकिट स्थानीय स्तर पर ही फायनल होंगें। इसके लिए हर जिले स्तर पर एक कमेटी बनाई जा रही है।
   दिसंबर में होने वाले नगर निकाय चुनाव के लिए कांग्रेस के टिकट पर अपने-अपने वार्डों से चुनाव लडऩे का सपना देख रहे दावेदारों को टिकट पाने के लिए भोपाल के चक्कर लगाने की जरुरत नहीं है। कांग्रेस आलाकमान ने इसके लिए जिला स्तर पर एक पैनल का गठन कर दिया है जो आगामी नगर निकाय चुनाव में शहर के 39 वार्डों से चुनाव लडऩे वाले उ मीदवारों का चयन करेगी। अब तक कांग्रेस पार्टी प्रदेश स्तर से उ मीदवार का चुनाव करती थी और भोपाल से कांग्रेस जिलाध्यक्ष के पास पैनल में जिसका नाम आ जाता है उसे ही चुनाव लडऩे का मौका प्रदान किया जाता थाए लेकिन अब जिला स्तर से ही टिकट मिल जाएगा।
   कांग्रेस आला कमान ने यह फैसला टिकट बंटवारे के समय आने वाले विवाद के मद्देनजर किया है। पार्टी का कहना है कि जब-जब टिकट बंटवारे का समय आता है तब-तब टिकट की चाह रखने वाले उ मीदवार एक-दूसरे के जानी दुशमन हो जाते हैं और चुनाव के समय टिकट न मिलने की स्थिति में भितरघात करने लगते हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिए पार्टी ने जिला स्तर पर कोर कमेटी बनाने एवं कमेटी को चुनाव लडऩे के इच्छुक उ मीदवारों के बीच पनपने वाले मनमुटाव को दूर करने की जि मेदारी भी सौंपी है।
   प्र्र्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव का कहना है कि जुलाई महीने में हम कमेटियां गठित कर देंगे। इस बार इस तरह का निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि कार्यकर्ताओं को दिक्कत न आए । इसका दूसरा पहलू यह भी है कि स्थानीय स्तर पर कमेटी जनता के बीच में जाकर उ मीदवार की रायशुमारी करेगी जिससे पार्टी को फायदा होगा।
   पार्षदों को स्थानीय कमेटी साफ. स्वच्छ छवि के आधार पर टिकट बांटेगी,इसके लिए मॉनिटरिंग प्रदेश महामंत्री और प्रदेश सचिव के द्वारा रखी जाएगी। टिकट वितरण प्रक्रिया में वर्तमान पार्षद का वैकग्राउण्ड उसके बायोडाटा पर निर्भर करेगा। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने बनाई जा रही जिला कमेटियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चुनाव लडऩे का दंभ भरने वाले पार्षदों से पहले उनका बायोडाटा लिया जाए उसके बाद रायशुमारी कर साफ. स्वच्छ वाजे उ मीदवार को ही चुनाव लडऩे का मौका दिया जाए।
5:25 PM | 0 comments | Read More

यूपी: रेप कर बनाई अश्लील क्लिप

    गाजियाबाद।। गाजियाबाद में राजनगर एक्सटेंशन निवासी युवती को नशीली कोल्ड ड्रिंक पिलाकर रेप करने और अश्लील क्लीपिंग बनाने का मामला सामने आया है।
   आरोपी युवक क्लीपिंग को सार्वजनिक करने की धमकी देकर पीड़िता से पांच लाख रुपये की मांग कर रहा था।
    पीड़िता ने सिहानी गेट कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने आरोपी जावेद उर्फ अमित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। दूसरी ओर, पीड़िता का मेडिकल कराया जा रहा है।
   एसएचओ अशोक सिसोदिया ने बताया कि डासना निवासी बाउंसर जावेद मसूरी टोल प्लाजा पर तैनात है। पीड़िता गाजियाबाद स्थित निजी मोबाइल कंपनी में कार्यरत है।
    कंपनी में आने-जाने के दौरान अमित उर्फ जावेद की दोस्ती उससे हुई थी। आरोपी ने अपना असली नाम छिपाए रखा। जावेद ने अपना नाम अमित बताया था और खुद को निजी कंपनी का कर्मचारी बताता था।
   पीड़िता ने बताया कि दोस्ती के करीब चार माह बाद अमित ने राजनगर स्थित पीड़िता के फ्लैट पर नशीली कोल्ड ड्रिंक पिलाकर बेहोशी की हालत में रेप किया और क्लिपिंग बना ली। इसके बाद से ही वह पांच लाख रुपयों की मांग उससे कर रहा था। रुपया न मिलने पर उसने क्लीपिंग को सार्वजनिक करने की धमकी दी थी।

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सीसी कैमर की निगरानी में हो पोस्टमार्टम

यूपी ही नहीं देशभर के पोस्टमार्टम हाउसों में लगे सीसी कैमरा
सीसी कैमरे से न सिर्फ डाक्टरों की मनमानी रुकेगी, बल्कि विश्वसनीयता भी बढ़ेगी
इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनउ बेंच में सामाजिक संगठन पीपल्स फोरम ने दायर की पीआईएल
    इलाहाबाद।। अक्सर सुनने को मिलता है, हिंसक वारदातों में चिकित्सक ने पोस्टमार्टम दवाब में किया है। पीएम रिपोर्ट सही नहीं है। खासकर मर्डर की घटनाओं में इस तरह के आरोप लगाएं जाते है। अमूक तथ्य को छिपाया गया है। कुछ वारदातों में तो कभी-कभी कब्र से निकालकर दुबारा पोस्टमार्टम की बात होती है, लेकिन जिन शवों को जला दिया जाता है उसमें ऐसी संभावना नहीं रहती। इस तरह के मामले में यूपी ही नहीं पूरे देश में है। ताजा मामला यूपी की राजधानी लखनउ के मोहनलालगंज कांड व बदायूं का है। जहां न सिर्फ जांच अधिकारी बल्कि पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक भी शक के दायरे में है। कहीं किडनी रिपोर्ट व बलात्कार हुए ही नही तो कहीं हत्या नहीं आत्महत्या की बात सामने आ रही है।
    हाल के दिनों में एक के बाद एक हुई गैंगरेप व हत्याओं की घटनाओं में पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों पर ही उंगूलिया उठने लगी है। आरोप रहता है कि जांच अधिकारी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी कर किसी बड़े अपराधी या नेता को बचाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गड़बड़ी करते है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट को ही आधार बनाकर गुनहगारों को बचा लिया जाता है। ऐसे में सीबीआई जांच मांग उठने लगती है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब साक्ष्य ही नहीं है तो चिकित्सक की ही बात को सही मानने की विवशता हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसे मामलों की पोस्टमार्टम सीसी कैमरे की निगरानी में हो तो होने वाली गड़बड़ियां रोकी जा सकती है।
    यूपी की राजधानी लखनउ के मोहनलालगंज में गैंगरेप के बाद बड़े ही बेरहमी सेे महिला का कत्ल किया किया गया वह समूचे जनमानस को हिलाकर रख दिया है। बड़ी बात तो यह है कि प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ जनता का सरकार पर जब दवाब बना तो 24 घंटे के अंदर अपने को जाॅबाज कहलाने वाले कतिपय अधिकारियों ने बिल्कूल फिल्म्ी स्टाइल में पटकथा को लिखते हुए सिरे से खारिज कर दिया कि महिला के साथ गैंगेरेप तो दूर बलातकार हुआ ही नहीं है। एक अकेला व्यक्ति ही बाइक चाभी से उसके प्राइवेट पार्ट पर हमला कर महिला की हत्या की है। इस पुलिसिया खुलासे के बाद जनता से लेकर मीडिया तक भौचक रह गयी। सवाल पर सवाल दागे जाने लगे। पोस्टमार्टम के मुताबिक किसी ब्लंट आब्जेक्ट से उसके प्राइवेट पार्ट में कई बार प्रहार किए गए है। अधिक रक्स्राव से महिला की मौत हुई है। उसके शरीर के दोनों किडनी सही थे। शरीर के किसी भी अन्य हिस्से में जख्म नहीं पाएं गए है। लेकिन पुलिस के इस कहानी में जनता को बिल्कुल विश्वास नहीं हो रहा।
    दरअसल, दरिंदगी का शिकार बनी महिला के घर वालों के मुताबिक उसकी एक ही किडनी थी। उसने अपनी दूसरी किडनी पति को दान कर चुकी थी। रिपोर्ट में गुर्दे (दशा और वजन) के सामने लिखा है कि बोथ पेल एनएडी (नथिंग अबनॉर्मल डिटेक्टिंग) 150 ग्राम ईच। मतलब दोनों किडनियों की हालत ठीक। पोस्टमॉर्टम दो फॉरेंसिक एक्सपर्ट समेत 6 डॉक्टरों के पैनल ने किया। जबकि महिला के देवर ने बताया कि 15 अक्टूबर, 2011 को पीजीआई में किडनी ट्रांसप्लांट हुई थी। इस दौरान भाभी ने ही भाई को अपनी किडनी डोनेट की थी। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी 15 जून, 2001 को भाई की किडनी ट्रांसप्लांट हुई थी। तब मां ने किडनी दी थी। पीजीआई के निदेशक डॉ. आरके शर्मा ने बताया कि 15 अक्टूबर, 2011 को महिला और उसके पति का किडनी ट्रांसप्लांट का ऑपरेशन हुआ था। इस सच्चाई को उजागर होने के बाद पीएम रिपोर्ट की विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म होती नजर आ रही है।
    पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के जिस हिस्से में डॉक्टरों ने चोटों को लेकर अपनी राय लिखी है उस पेज की लिखावट का अंतर भी कई सवाल खड़े कर रहा है। रिपोर्ट में महिला के प्राइवेट पार्ट में चोटों का जहां जिक्र है वह हिस्सा काफी हल्के से लिखा गया है, जबकि उस पेज की बाकी रिपोर्ट गहरे रंग में साफ लिखी है। विशेषज्ञ के मुताबिक रिपोर्ट एक ही डॉक्टर द्वारा लिखी जाती है। उसे कार्बन पेपर लगाकर लिखते हैं। इसलिए लिखावट एक सी आती है। पोस्टमॉर्टम में महिला के शरीर पर मिलीं दो चोटें भी पुलिस की कहानी से मेल नहीं खा रहीं। पुलिस के मुताबिक आरोपी रामसेवक ने चाबी, हेलमेट और हाथ से चोटें पहुंचाईं, जबकि विशेषज्ञों के मुताबिक पोस्टमॉर्टम में मिली दो चोटें चाबी, हाथ या हेलमेट से नहीं पहुंचाई जा सकतीं। रिपोर्ट में करीब 3 सेमी गहरे पंचर्ड बोन के बारे में लिखा गया है। यह चोट चाभी से नहीं लग सकती। चाभी से घाव एक सेमी से अधिक नहीं हो सकता। प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग होने लगी। मतलब साफ है, पोस्टमार्टम ही गलत तरीके से किया गया या रिपोर्ट गलत तैयार कराई गयी। ऐसे में पोस्टमार्टम की विश्वसनीयता व निष्पक्षता बनाएं रखने के लिए सभी मर्चरी घरों से लेकर पोस्टमार्टम हाउस में सीसी कैमरा लगाया जाना बेहद जरुरी हो जाता है।
    सामाजिक संगठन पीपल्स फोरम की कर्ताधर्ता श्रीमती नूतन ठाकुर ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच में पीआईएल दायर कर प्रदेश के सभी पोस्ट मोर्टम हाउस में सीसीटीवी कैमरा लगाए जाने और इनका सही रख-रखाव सुनिश्चित किये जाने की मांग की है। पीआईएल में कहा गया है कि जिस प्रकार से लखनऊ पुलिस ने मामले का अनावरण किया है वह पूरी तरह से अविश्वसनीय है और मृतिका के परिवार वाले भी इस पर पूरी तरह सन्देश कर रहे हैं। पीआईएल में तमाम कारण बताते हुए घटनाक्रम की सीबीआई जांच की मांग की गयी है। पीआईएल में सभी इन्टरनेट प्रोवाइडर को इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी (इन्टरमिडीयरी गाइडलाइन्स) रूल्स 2011 के अनुसार निश्चित रूप से शिकायत अधिकारी नियुक्त किये जाने की प्रार्थना की गयी है ताकि इस मामले पीड़िता के निर्वस्त्र फोटोग्राफ के काफी प्रसारित हो जाने जैसी घटनाओं को रोका जा सके। यूपी पुलिस को यौन अपराध के मामलों में बेहतर ढंग से बर्ताव और कार्य कर सकने के लिए आवश्यक ट्रेनिंग और कौशल विकास कराये जाने हेतु निर्देशित करने की भी प्रार्थना की गयी है।
 
 
 
(सुरेश गांधी) 
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वाट्स-अप पर तस्वीरें पोस्ट कर किया जा रहा है हिन्दूओं को भडक़ाने का प्रयास

राज्य व केन्द्र सरकार से सख्त कानून बनाने की मांग
   अमृतसर।। नेशनल स्टूडेंट़्स फेडरेशन(एनएसएफ) ने वाट्स अप पर डाली जा रही हिन्दू देवी देवताओं की फोटों फैशन शो के दौरान महिलाओं की अंग वस्त्रों पर प्रिंट करने की सख्त शब्दों में निंदा की है। इस मामले पर संगठन ने राज्य व भारत सरकार से सख्त कानून बनाने की अपील की है ताकि कुछ शक्तियां हिन्दू धर्म के लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ न कर पाएं।
   एनएसएफ के राज्य सचिव राजविंदर कुमार राजा ने कहा कि भारत में हिन्दू समाज की जनसख्यां चाहे 72 प्रतिशत से अधिक है लेकिन विश्व में कुछ स्थानों पर कुछ विकिृ त मानसिकता के लोग हिन्दू धर्म के ईष्ट व अराध्य देवताओं क ा अपमान करने में कोई कसर नही छोड़ रहे। हिन्दू चाहे विनम्रता का सूचक है लेकिन कुछ लोग हिन्दूओं के नम्र स्वभाव को उनकी कमजोरी समझ कर ऐसी ओछी हरकते कर रहे है जोकि सभ्य समाज को शोभा नही देती। आजकल वाट्स-अप पर ऐसी तस्वीरें पोस्ट की जा रही है जिसमें हिन्दू सस्कृंति को नीचा दिखाते हुए पश्चिमी सस्कृंति को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर हिन्दू देवताओं का अपमान किया जा रहा है। वाट्स-अप पर ऐसी तस्वीरें पोस्ट की जा रही है जिससे हिन्दूओं की आस्था को ठेस पहुँच रही है ओर जो भी इन तस्वीरों को एक बार देख लेता है उसका खून खोल उठता है। वाट्स-अप पर भेजी पोस्ट के अनुसार आस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में हुए एक फै शन शो में मँा लक्ष्मी,भगवान श्री राम जी के ग्राफिॅक अश्लील कपड़ों व जूतों पर छापकर नुमाईश की गई। इससे यह साबित होता है कि कुछ शरारती व असामाजिक तत्व जानबूझ कर हिन्दूओं की आस्था को ठेस पहुँचाते हुए उनकी धार्मिक भावनाएँ भडक़ाने का प्रयास कर रहे है। एनएसएफ नेता ने कहा कि अगर सरकार ने इस संबंध में कोई सख्त एक् शन न लिया तो संगठन इस मुद्दे पर सडक़ों पर आने के लिए मजबूर होगा।
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जानिए महाराजा जयसिंह ने रोल्स रॉयस कार का नगरपालिका के लिए कचरागाड़ी के रूप में उपयोग क्यों किया ?




   इंगलैण्ड की राजधानी लंदन में यात्रा के दौरान एक शाम महाराजा जयसिंह सादे कपड़ों में बॉन्ड स्ट्रीट में घूमने के लिए निकले और वहां उन्होने रोल्स रॉयस कम्पनी का भव्य शो रूम देखा और मोटर कार का भाव जानने के लिए अंदर चले गए। शॉ रूम के अंग्रेज मैनेजर ने उन्हें “कंगाल भारत” का सामान्य नागरिक समझ कर वापस भेज दिया। शोरूम के सेल्समैन ने भी उन्हें बहुत अपमानित किया, बस उन्हें “गेट आऊट” कहने के अलावा अपमान करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। अपमानित महाराजा जयसिंह वापस होटल पर आए और रोल्स रॉयस के उसी शोरूम पर फोन लगवाया और संदेशा कहलवाया कि अलवर के महाराजा कुछ मोटर कार खरीदने चाहते हैं।
   कुछ देर बाद जब महाराजा रजवाड़ी पोशाक में और अपने पूरे दबदबे के साथ शोरूम पर पहुंचे तब तक शोरूम में उनके स्वागत में “रेड कार्पेट” बिछ चुका था। वही अंग्रेज मैनेजर और सेल्समेन्स उनके सामने नतमस्तक खड़े थे। महाराजा ने उस समय शोरूम में पड़ी सभी छ: कारों को खरीदकर, कारों की कीमत के साथ उन्हें भारत पहुँचाने के खर्च का भुगतान कर दिया। भारत पहुँच कर महाराजा जयसिंह ने सभी छ: कारों को अलवर नगरपालिका को दे दी और आदेश दिया कि हर कार का उपयोग (उस समय के दौरान 8320 वर्ग कि.मी) अलवर राज्य में कचरा उठाने के लिए किया जाए। विश्व की अव्वल नंबर मानी जाने वाली सुपर क्लास रोल्स रॉयस कार नगरपालिका के लिए कचरागाड़ी के रूप में उपयोग लिए जाने के समाचार पूरी दुनिया में फैल गया और रोल्स रॉयस की इज्जत तार-तार हुई। युरोप-अमरीका में कोई अमीर व्यक्ति अगर ये कहता “मेरे पास रोल्स रॉयस कार” है तो सामने वाला पूछता “कौनसी?” वही जो भारत में कचरा उठाने के काम आती है! वही? बदनामी के कारण और कारों की बिक्री में एकदम कमी आने से रोल्स रॉयस कम्पनी के मालिकों को बहुत नुकसान होने लगा। महाराज जयसिंह को उन्होने क्षमा मांगते हुए टेलिग्राम भेजे और अनुरोध किया कि रोल्स रॉयस कारों से कचरा उठवाना बन्द करवावें। माफी पत्र लिखने के साथ ही छ: और मोटर कार बिना मूल्य देने के लिए भी तैयार हो गए। महाराजा जयसिंह जी को जब पक्का विश्वास हो गया कि अंग्रेजों को वाजिब बोधपाठ मिल गया है तो महाराजा ने उन कारों से कचरा उठवाना बन्द करवाया !


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लोस में दर्दनाक हार झेल चुके शाहनवाज अब लड़ेंगे विस चुनाव

   नई दिल्ली।। राजनीतिक दृष्टि से अपने करियर का लोकसभा में सबसे दर्दनाक हार झेलने वाले शाहनवाज हुसैन अब विधानसभा का उप चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं.
   नौकरशाही डॉट इन को यह उड़ती खबर हाथ लगी है कि 21 अगस्त को होने वाले दस विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव में शाहनवाज ने भाजपा कार्यालय से सम्पर्क साधा है. माना जा रहा है कि उन्हें टिकट दिया भी जा सकता है. हालांकि इस बात की पुष्टि शाहनवाज ने खुद अपनी तरफ से नहीं की है. अगर टिकट मिला तो वह उसी भागलपुर से किस्मत आजमायेंगे जहां लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.
   लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि राजनीतिक लिहाज से अब तक काफी भाग्यशाली रहे शाहनवज की किस्मत ने इस बार काफी बड़ा दगा किया जिसके सदमे को वह अभी तक झेल रहे हैं. यह दुनिया जानती है कि अगर वह लोकसभा चुनाव जीत गये होते तो कैबिनेट की कुर्सी तो उनके लिए चुटकियों में होती, क्योंकि यह शाहनवाज हुसैन ही हैं जिन्हें अटल बिहार वाजपेय मंत्रिमंडल में भी जगह मिली थी. हालांकि संगठन में उनसे बड़े नेता मुख्तार अब्बास नकवी मौजूद थे लेकिन वह चुनाव हार गये थे.
   लेकिन इस बार शाहनवाज की किस्मत में कैबिनेट की कुर्सी नहीं लिखी थी. शायद इसी लिए वह अपने राजनीतिक वजूद को बचाये रखने के लिए विधानसभा का उपचुनाव लड़ना चाह रहे हैं.
  शाहनवाज हुसैन देश में भाजपा के एक ऐसे स्थापित चेहरा बन गये हैं जो लोकसभा चुनाव उस दौर में भी जीतता रहा है जब भाजपा अकेले दम पर कभी बहुमत में नहीं आ सकी. लेकिन इस बार जब वह अकेले दम पर बहुमत से ज्यादा सीटें ले आयी तो शाहनवाज हार गये और कैबिनेट से महरूम रह गये.
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कानून के प्रति विश्वास घटने से देश कमजोर होता है

   न्यायालयों की अपनी एक गरिमा है, इसके अलावा न्यायालयों के आदेशों के विरुद्ध अपील होती है। न्यायालयों के आदेशों की आलोचना सार्वजनिक तौर पर नहीं की जा सकती, लेकिन न्यायालयों से संबंधित हर प्रकरण गरिमा और अवमानना से ही जोड़ दिया गया है, इसलिए न्यायालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार के प्रकरण पर बोलने व लिखने से हर कोई बचता रहता है, ऐसे में उच्चतम न्यायालय के पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू का खुलासा बेहद अहम कहा जा सकता है।
   खुलासा सनसनीखेज नहीं है और न ही उसमें कुछ नया है, क्योंकि अधिकाँश लोगों को पता ही है कि न्यायालयों के हालात क्या हैं? अधिकांश लोगों को यह भी पता है कि न्यायालयों में जजों की नियुक्त कैसे होती है? अधिकाँश लोग न्यायालयों की गिरती साख से दुखी हैं और अधिकांश लोग न्यायालयों को पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त रखने के पक्ष में ही हैं, इसलिए पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू को इस मुददे पर व्यापक स्तर पर जनसमर्थन भी मिल रहा है। संसद के दोनों सदनों में हंगामा होने के राजनैतिक कारण हैं, जिससे आम जनता का कोई मतलब नहीं है। आम जनता चाहती है कि पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू ने मुददा उठा ही दिया है, तो नियुक्ति ही नहीं, बल्कि संपूर्ण न्यायायिक प्रक्रिया को लेकर भी ठोस निर्णय लेना ही चाहिए, वरना बहस के बाद इस मुददे पर चर्चा थम गई, तो फिर सालों कोई आवाज नहीं उठायेगा। क्या पता कि भविष्य में कोई मार्कण्डेय काटजू हो न हो, इसलिए सरकार की ओर से तत्काल ऐसा कदम उठना ही चाहिए, जिससे न्यायालयों के प्रति हर दिन आम जनता का विश्वास बढ़े।
   पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष बने हैं, तब से किसी न किसी मुददे को लेकर वह चर्चा में बने ही रहते हैं। उन्होंने मीडिया को भी कठघरे में खड़ा किया है। और भी कई जरूरी व गैर जरूरी प्रकरणों में वे अपनी राय देते रहे हैं, जिससे उन पर भी आरोप लगते रहे हैं। उन्हें खास दलीय मानसिकता का पक्षधर घोषित करने का प्रयास किया जाता रहा है। उनके पिछले तमाम लेख व भाषण विवादित रहे हैं, लेकिन उनके ताज़ा लेख ने उन्हें लोकप्रिय बनाया है। आम जनता के बीच उनकी चर्चा ही नहीं हो रही, बल्कि उनका सम्मान भी बढ़ा है। उन्होंने जिस तरह पूरे प्रकरण को उठाया है, उसको लेकर वास्तव में वह बधाई के पात्र कहे जा सकते हैं। पूर्व जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने अपने ब्लॉग में लिखा था कि मद्रास हाईकोर्ट के भ्रष्ट जज अशोक कुमार को यूपीए सरकार के कार्यकाल में संरक्षण दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की कोलिजियम ने भ्रष्ट जज अशोक कुमार का कार्यकाल न बढ़ाने का फैसला कर लिया था। यूपीए सरकार को बचाने के लिए एक राजनीतिक दल के दबाव में फैसला बदला गया था। मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश के पद पर रहते हुए पूर्व जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने स्वयं सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायधीश जस्टिस आर.सी. लोहाटी से इस भ्रष्ट जज अशोक कुमार के संबंध में शिकायत की थी।
   पूर्व जस्टिस मार्कण्डेय काटजू की शिकायत पर जस्टिस लोहाटी ने आईबी से जांच कराई थी। आईबी की जांच रिपोर्ट में बताया गया कि संबंधित जज अशोक कुमार का आचरण ठीक नहीं है, उनकी कार्यशैली भ्रष्ट आचरण की है। आईबी की रिपोर्ट के बाद निर्णय लिया गया कि जज अशोक कुमार का कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाया जायेगा। पूर्व जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने विस्तार से जानकारी दी है कि मुख्य न्यायाधीश वाई.के. सबरवाल के कार्यकाल में भी इस भ्रष्ट जज अशोक कुमार को संरक्षण मिला। मुख्य न्यायाधीश के.जी. बालकृष्णन ने इस भ्रष्ट जज अशोक कुमार को स्थाई नियुक्ति ही दे दी। पूर्व जस्टिस मार्कण्डेय काटजू द्वारा यह सब सार्वजनिक कर देने के बाद न्यायिक क्षेत्र में सन्नाटा नज़र आने लगा, वहीँ संसद में भूचाल आ गया।
   उल्लेखनीय है कि अशोक कुमार को वर्ष 2003 में दो साल के लिए मद्रास हाईकोर्ट में अतिरिक्त जज के तौर पर नियुक्त किया गया था। पूर्व जस्टिस मार्कण्डेय काटजू वर्ष 2004 में मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने, तो उनके संज्ञान में आया कि अशोक कुमार का न्यायिक कार्य संदिग्ध रहा है। जिला जज के रूप में भी उनकी छवि अच्छी नहीं रही है। एक राजनीतिक दल के खास रहे हैं। उस समय मार्कण्डेय काटजू ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लिया और सुप्रीम कोर्ट में उस समय चीफ जस्टिस रहे लोहाटी को अवगत करा दिया। आईबी से जांच हुई, जिसमें अशोक कुमार का चरित्र संदिग्ध पाया गया। कोलिजियम ने अप्रैल 2005 के बाद अशोक कुमार का कार्यकाल आगे न बढ़ाने की संस्तुति की, लेकिन यूपीए सरकार के खास घटक दल द्रमुक के दबाव में अशोक कुमार को नहीं हटाया गया। सरकार बनाये रखने के लिए न्यायालय की प्रतिष्ठा को तार-तार कर दिया गया।
   हाईकोर्ट में अशोक कुमार की नियुक्ति के विरुद्ध 2007 में पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री शांतिभूषण ने एक जनहित याचिका भी दायर की थी, जिसको लेकर समूचा प्रकरण चर्चा में रहा था, लेकिन हुआ कुछ नहीं, क्योंकि विवादित जज जुलाई 2009 में सेवानिवृत्त हो गये और तीन महीने बाद ही उनका निधन हो गया। अब पूर्व जस्टिस काटजू के खुलासे के बाद पूर्व कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने मीडिया के समक्ष स्वीकार कर लिया है कि 2005 में द्रमुक के सांसदों ने जस्टिस अशोक कुमार का कार्यकाल बढ़ाए जाने के लिए दबाव बनाया था।  इन लोगों ने कहा था कि जस्टिस अशोक कुमार दलित हैं, इसलिए उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने कानून मंत्री की हैसीयत से तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस लोहाटी को पत्र लिखा था, लेकिन उन्होंने मनमोहन सरकार को बचाने का आरोप गलत बताया।
   पूर्व मुख्य न्यायाधीश के.जी. बालकृष्णन अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट कर चुके हैं कि मद्रास हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश पर ही 2007 में जस्टिस अशोक कुमार को स्थाई किया गया था और आईबी की रिपोर्ट उनके संज्ञान में नहीं थी। विवाद के बाद केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद कह चुके हैं कि उनकी सरकार राष्ट्रीय न्यायिक आयोग गठित करने के लिए संकल्पवान है। उच्च स्तर पर न्यायपालिका में नियुक्तियों और पदोन्नतियों के प्रकरण में पारदर्शिता बरतने का प्रयास किया जायेगा, लेकिन इतने कहने भर से काम नहीं चलेगा, क्योंकि न्यायालय मौलिक अधिकारों का संरक्षक है। न्यायालय की कार्यप्रणाली हर हाल में स्वच्छ व पारदर्शी होनी ही चाहिए, क्योंकि जिस देश के लोगों का विश्वास जज और कानून से उठता जाता है, वह देश कमजोर होता जाता है।
   पूर्व जस्टिस काटजू के लेख पर हुए बवाल के बाद सरकार ने एक-दो नियम और बना भी दिए, तो उससे कुछ सुधार नहीं होने वाला। मुंसिफ मजिस्ट्रेट के न्यायालय से सुधार की शुरुआत करनी होगी और सुप्रीम कोर्ट तक उतने ही कड़े नियम बनाने होंगे। न्यायालय में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर अब आदमी को उल्टे ताने मिलने लगे हैं। प्रशासनिक कार्यालयों में तैनात कर्मचारी आम आदमी के सामने रिश्वतखोरी की दलील देते हुए चेतावनी देते हैं कि अदालत में कुछ नहीं कहते, वहां चुपचाप दे आते हो। धनाढ्य लोगों की जिला न्यायालय से लेकर हाईकोर्ट तक में फाइल दबा दी जाती है। उच्च स्तरीय दबाव के चलते फैसले भी प्रभावित होते रहे हैं, ऐसे में न्यायालयों में स्वच्छता और पारदर्शिता की स्पष्ट नीति लागू करना बेहद आवश्यक हो गया है और कड़े नियम बनाने का सुअवसर पूर्व जस्टिस काटजू ने प्रदान कर दिया है, जिसका सरकार को तत्काल लाभ उठाना चाहिए।


(बी.पी. गौतम)
स्वतंत्र पत्रकार
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जज मामले में जवाब दें मनमोहन

   नई दिल्ली।। मद्रास हाईकोर्ट में दागी जज की नियुक्ति के मामले में मोदी सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर निशाना साधा है। संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू ने मनमोहन सिंह की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें देश के सामने आकर सचाई बतानी चाहिए। वेंकैया के अनुसार, दागी जज की नियुक्ति के खुलासे इस बात के सुबूत हैं कि संप्रग सरकार किस तरह काम करती थी।
   संसदीय कार्यमंत्री के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के किए गए खुलासे पर पूर्व प्रधानमंत्री की चुप्पी से इस आशंका को बल मिलता है कि वे कुछ छुपाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि 'न्याय के हित में मनमोहन सिंह को यह बताना चाहिए कि दागी जज की नियुक्ति में आखिर क्या हुआ था? क्या वे सच में दबाव के आगे झुक गए थे?'
   वेंकैया ने कहा कि देश की जनता को सच को जानने का अधिकार है और इससे देश में न्यायपालिका की छवि सुधारने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह सचाई सामने लाकर इस मामले में चल रहे अफवाहों पर विराम लगा सकते हैं।
  गौरतलब है कि मंगलवार को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि 2005 में मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम को एक नोट भेजा था जिसमें कथित दागी जज की नियुक्ति में देरी पर सवाल उठाया गया था। जस्टिस काटजू के अनुसार, सरकार के दवाब में दागी जज को मद्रास हाईकोर्ट का जज बना दिया गया था।


3:45 PM | 0 comments | Read More

राजेश खन्ना बंगला 95 करोड़ में बिका

   मुंबई।। बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार दिवंगत राजेश खन्ना उर्फ काका का कार्टर रोड स्थित बंगला 'वरदान आशीर्वाद' उनकी दूसरी पुण्यतिथि (18 जुलाई) से कुछ दिनों पहले बिक गया। खरीदार के नाम का फिलहाल पता नहीं चल सका है। लेकिन, बताया जा रहा है कि यह बंगला 95 करोड़ रुपये में बिका है।
   रीयल एस्टेट सूत्र इसे काफी कम कीमत बता रहे हैं। उनके अनुसार भुतहा और क्षेत्र कम (603 वर्गमीटर) होने की वजह से बंगले की ज्यादा कीमत नहीं मिली। सूत्रों ने बताया कि किसी शेट्टी नाम के व्यक्ति ने काका के बंगले को रहने के लिए खरीदा है। करीब 15 दिन पहले हुए इस सौदे से जुड़े लोगों के नाम गुप्त हैं।
   राजेश खन्ना की मौत होने के बाद बंगले का स्वामित्व उनकी बेटियों ट्विंकल और रिंकी खन्ना को मिल गया था। बंगले समेत राजेश खन्ना की संपत्ति में हिस्सेदारी को लेकर अनीता आडवाणी ने भी दावा किया था। उनका कहना था कि वह लंबे समय तक अभिनेता के साथ रही थीं। काका ने यह बंगला अपने जमाने के जुबली स्टार राजेंद्र कुमार से 3.5 लाख रुपये में खरीदा था। तब इसका नाम डिंपल था। राजेश खन्ना इस नाम को बदलने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन राजेंद्र कुमार के अनुरोध पर उन्होंने बंगले का नाम बदलकर वरदान आशीर्वाद कर दिया था।
   पहले चर्चा थी कि ट्विंकल और रिंकी बंगले को संग्रहालय में तब्दील करना चाहती हैं, लेकिन कुछ वजहों से ऐसा नहीं हो सका। इस बाबत ट्विंकल और उनके पति अक्षय कुमार से ई-मेल के जरिये जानकारी मांगी गई, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। उनकी मैनेजर ने भी कुछ कहने से इन्कार कर दिया।





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मुंबई में चलती कार में हुआ महिला का गैंगरेप

   मुंबई।। मुंबई के धारावी पुलिस थाने में 40 साल की महिला ने गैंगरेप का मामला दर्ज कराया है। महिला ने अपनी शिकायत में कहा है कि दो लोगों ने उसके साथ इनोवा कार में गैंगरेप किया। महिला का कहना है कि 4 लोग इनोवा में आए थे। जिनमे से 2 लोगों को वो जानती थी। महिला के मुताबिक जानने वाले लोगों ने बलात्कार किया।
   पीड़ित महिला कॉल सेंटर में काम करती है। पुलिस के मुताबिक घटना परसो रात की है। महिला के मुताबिक वो मीरा रोड से बांद्रा शॉपिंग के लिए आई थी। पुलिस नें मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया है। लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में महिला के साथ बालात्कार की पुष्टि ना होने की वजह से पुलिस किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है।
   वहीं पीड़िता के लगातार बयान बदलने की वजह से पुलिस अधिकारी का कहना है कि महिला के आरोपों की गंभीरता से जांच के बाद ही वे कोई ठोस कदम उठाएंगे। फिलहाल पुलिस द्वारा मामला दर्ज कर लिया गया है।




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कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का गोल्ड से खाता खुला

   ग्लास्गो।। 20वें कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की शुरुआत गोल्ड के साथ हुई। टूर्नामेंट के पहले दिन उसे वेटलिफ्टिंग में संजीता खुमुखच्चम ने 48 किग्राभार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। एक अन्य सिल्वर मेडल मीराबाई चानू सैखोम ने इस इवेंट में जीता। वहीं भारत को दो सिल्वर मेडल जूडो में मिले। जूडो में पुरुषों के 60 किग्राभार वर्ग में नवजोत चाना और महिलाओं के 48 किग्राभार वर्ग में सुशीला लिक्माबाम ने सिल्वर मेडल जीता।
   ब्रॉन्ज मेडल नेची ओपारा के नाम रहा। वह नाइजीरिया की हैं। संजीता ने महिलाओं के 48 किलोग्राम भारवर्ग में 173 किलोग्राम भार उठाकर स्वर्ण पर कब्जा किया, जबकि मीराबाई चानू सैखोम ने इसी वर्ग में 170 किलोग्राम भार उठाकर रजत पदक हासिल किया।
गोल्ड जीता पर विश्व रिकॉर्ड से रही गईं दो किग्रा दूर
   संजीता हालांकि 175 किग्रा के अगस्तीना नकेम नावाओकोलो के राष्ट्रमंडल खेलों के रिकॉर्ड से दो किग्रा से पीछे रह गई। संजीता ने स्नैच में 77 किग्रा वजन उठाकर अगस्तीना के राष्ट्रमंडल खेलों के रिकॉर्ड की बराबरी की। उन्होंने क्लीन एवं जर्क में 96 किग्रा वजन उठाया।
नाइजीरिया की ओपारा को छोड़ा पीछे
   स्नैच स्पर्धा के बीच में ही भारत का दबदबा स्थापित हो गया था जब 20 साल की संजीता और 19 साल की मीराबाई ने क्रमश: 77 और 75 किग्रा वजन उठाया। नाइजीरिया की ओपारा स्नैच में 70 किग्रा वजन ही उठा पाई। उनका 75 किग्रा का तीसरा प्रयास विफल रहा। संजीता ने स्नैच में 72 किग्रा वजन उठाकर शुरुआत की और फिर 77 किग्रा वजन उठाया। मीराबाई 75 किग्रा के अपने पहले प्रयास में विफल रही लेकिन उन्होंने तीसरे प्रयास में यह वजन उठा लिया।


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कांग्रेस डूब रही है...राहुल गांधी कहां हैं?


   नई दिल्ली।। कांग्रेस अपनी चुनावी राजनीति के सबसे ख़राब दौर से गुज़र रही है। पश्चिम और उत्तरी भारत में पार्टी को विपक्ष की स्थिति में धकेल दिया गया है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी उसकी यही स्थिति है। और बिहार-यूपी में वह ग़ायब हो चुकी है। तमिलनाडु-बंगाल में वह भारतीय जनता पार्टी से भी पिछड़ गई है लेकिन कांग्रेस का नेतृत्व, ख़ास तौर पर राहुल गांधी इससे चिंतित हों ऐसा कहीं से भी नज़र नहीं आ रहा।
    इतनी विकट स्थिति में भी पार्टी को सहारा देने के बजाए राहुल अपनी बहन के परिवार के साथ यूरोप घूमने चले गए हैं। ऐसे में राजनीति में गंभीरता पूर्वक निवेश करने वाले कांग्रेसी आगबबूला होंगे ही लेकिन राहुल गांधी को राजनीति और पार्टी में रुचि ही नहीं है। न वह उत्साह दिखाते हैं और न काम करने की इच्छा दर्शाते हैं। ऐसा क्यों है कि गांधी परिवार पराजय में भी संतुष्ट नज़र आता है? क्या राहुल गांधी को उस संकट की भयावहता का अंदाज़ा है जो नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के लिए खड़ा किया है?अगर ऐसा है तो इस 'युवराज' के क्रियाकलापों में वह ज़रा भी नज़र नहीं आता। कांग्रेस में असुरक्षा, नाराज़गी और विद्रोह घर करने लगे हैं (उधर अपनी पार्टी पर मोदी की मज़बूत पकड़ से यह अंतर और तीखा नज़र आता है) तो ऐसे वक्‍त में इसके नेता कहां हैं? हालिया ख़बरों में कहा गया है कि वह अपनी बहन प्रियंका और उनके परिवार के साथ यूरोप में छुट्टियां मनाने गए हैं। कुछ लोगों को इस बात पर अचरज हो सकता है, क्योंकि विपक्ष में होने और सुर्खि़यों से बाहर होने के बावजूद कांग्रेस को प्रेस में नकारात्मक प्रचार ही मिल रहा है लेकिन हम ऐसे किसी व्यक्ति से क्या उम्मीद कर सकते हैं जो पार्टी के इतिहास में सबसे ख़राब चुनाव प्रदर्शन करने के बाद बाली जाकर आराम फ़रमाने लगे लेकिन जो कांग्रेसी इस भयावह हादसे से सन्न रह गए थे उनके लिए यह परिदृश्य दिन-ब-दिन डरावना होता जा रहा है। महाराष्ट्र में चुनाव इस बात की पुष्टि कर देंगे कि पार्टी अब अपरिवर्तनीय पतन की ओर अग्रसर है। अपरिवर्तनीय इसलिए नहीं कि क़िस्मत ही ऐसी है, बल्कि इसलिए कि इस पतन को रोकने की कोई कोशिश नहीं की जा रही है।
    पूरे पश्चिम और उत्तरी भारत में पार्टी को स्थाई रूप से विपक्ष की स्थिति में धकेल दिया गया है। गुजरात में यह पिछले 30 साल में एक भी चुनाव नहीं जीती है (पिछली बार यह राजीव गांधी के नेतृत्व में 1984-85 में जीती थी)। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी यह इसी स्थिति में है, जहां मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल ख़त्म होते-होते इसे सत्ता से बाहर हुए 15 साल हो जाएंगे।बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे दो महत्वपूर्ण राज्यों में यह पहले ही महत्वहीन हो चुकी है, जहां भाजपा ने शानदार ढंग से अपनी वापसी की है। और तो और तमिलनाडु और बंगाल में भी यह भाजपा से पिछड़ गई है। महाराष्ट्र में जहां यह आज तक के इतिहास में सिर्फ़ एक बार हारी है, इस साल के अंत में होने वाले चुनावों में यह बुरी तरह मार खाने वाली है और इसी तरह दिल्ली में भी। कांग्रेस के लिए यह राष्ट्रव्यापी संकट है और अपनी हालत सुधारने के लिए इसे महीनों तक लगातार और ध्यान लगाकर मेहनत करनी होगी।
    लेकिन, जैसा कि मैंने कहा, क्या कहीं से भी ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि राहुल गांधी काम में जुटे हुए हैं। हफ़्तों तक राहुल यह मांग करते रहे कि कांग्रेस को लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद दिया जाए। आख़िर वह इसे चाहते ही क्यों हैं? ईमानदारी से कहूं तो मुझे यह समझ नहीं आता कि कांग्रेस इस पद का करेगी क्या? राहुल राजनीति और पार्टी में इतनी कम रुचि लेते हैं (संसद में उनकी उपस्थिति उनकी अरुचि का एक बहुत अच्छा उदाहरण है) कि उनका ऐसी मांगें करना औपचारिकता से ज़्यादा कुछ नहीं लगता। अगर मोदी झुकते हैं (जो अकल्पनीय बात लगती है) और कांग्रेस को यह विशुद्ध रस्मी पद भेंट कर देते हैं तो भी गांधी परिवार के रवैये में कोई बदलाव नहीं आने वाला।
    सैकड़ों कांग्रेसियों ने चुनावों में करोड़ों रुपये लगाए और हार गए, कई की तो ज़मानत भी ज़ब्त हो गई। ऐसे लोग जिन्होंने राजनीति में गंभीरता पूर्वक निवेश किया है, जिनके लिए यह शौक़िया नहीं है, वे पार्टी नेतृत्व पर आगबबूला होंगे। वह यह सोच रहे होंगे कि क्या हारने के लिए और ज़्यादा पैसा ख़र्च करना सही रहेगा। उन्हें यह यक़ीन दिलाए जाने की ज़रूरत है कि कांग्रेस फिर से अपने पैरों पर खड़ी हो सकती है और ऐसा किए जाने के संकेत उन्हें सिर्फ़ राहुल गांधी से मिल सकते हैं और हमें अभी तक ऐसे संकेत नहीं दिख रहे हैं कि ऐसा हो रहा है। भारतीय राजनीति में नेतृत्व के लिए मूल्यों की बहुत ज़रूरत नहीं होती और न ही बहुत बुद्धिमत्ता चाहिए होती है। इसके लिए सिर्फ़ दो ही चीज़ें चाहिए होती हैः उत्साह और कड़ी मेहनत। राहुल गांधी ज़रा भी उत्साह नहीं दिखाते और न ही काम करने की इच्छा दर्शाते हैं। इस हफ़्ते एक टीवी चैनल में बहस के दौरान मैंने यह बात कही और कांग्रेस प्रवक्ता को बुरा लग गया।
   उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने प्रचार के दौरान इतनी सारी चुनावी रैलियों में हिस्सा लिया (जैसे कि वह अपनी पार्टी पर कोई एहसान कर रहे हों)। शायद उन्होंने किया हो, लेकिन फिर भी, यह भी कहा जाना चाहिए कि यह मोदी के मुक़ाबले आधी ही थीं। लोकसभा चुनावों को जीतने के लिए मोदी कोई बहुत कमाल का आइडिया नहीं लाए थे या जादू की छड़ी नहीं घुमाई थी।चुनावों के दौरान विश्वसनीय और निरपेक्ष विद्वान 'गुजरात मॉडल' पर लगातार सवाल उठाते रहे। लेकिन यह मोदी का दृढ़ निश्चय, संकल्प और अथक परिश्रम ही था जिसने उन्हें सफल बनाया। वह खेल को इस तरह खेले जैसे इसमें उनका कुछ लगा हुआ हो। गांधी परिवार की तरह नहीं। गांधी परिवार तो पराजय में भी काफ़ी संतुष्ट लगा। उनके बर्ताव से मुझे आख़िरी मुग़लों की याद आ गई, जो अपने हाथी और परिवार की चांदी को ख़ुशी-ख़ुशी बेच रहे थे ताकि उनके जीर्ण-शीर्ण महल और उच्च पदवियां उनके पास बनी रहें।



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किस बात की छुट्टी...क्या हमसे पूछ कर होती हैं गर्भवती"

   पंचकूला।। हरियाणा गवर्नमैंट कालेज टीचर्ज एसोसिएशन के लगभग 1 हजार से भी ज्यादा सदस्यों, जिनमें प्रदेश के साथ-साथ पंचकूला, बरवाला, कालका इत्यादि कालेजों के लैक्चरार भी शामिल थे, द्वारा पंचकूला परेड ग्राऊंड में हायर एजुकेशन के अतिरिक्त मुख्य सचिव एस.एस. प्रसाद की महिला कालेज टीचरों पर दी गई अभद्र टिप्पणी के खिलाफ जमकर धरना-प्रदर्शन कर रोष व्यक्त किया और निंदा प्रस्ताव पारित किया गया।
   मुख्य सचिव एस.एस. प्रसाद पर आरोप है कि कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के एक शिष्टमंडल द्वारा बुधवार को मीटिंग के दौरान जब उनसे महिला शिक्षकों के लिए चाइल्ड केयर लीव की विसंगतियां दूर करने की मांग की तो उन्होंने जवाब दिया कि "किस बात की छुट्टी...क्या हमसे पूछ कर होती हैं गर्भवती"।
   मुख्य सचिव के इस बर्ताव के विरोध में प्रदेशभर से हरियाणा गवर्नमैंट कालेज टीचर्ज एसोसिएशन के लगभग हजारों सदस्यों ने परेड ग्राऊंड में धरना-प्रदर्शन कर जमकर नारेबाजी करते कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए अगर उन पर कार्रवाई न की गई तो वह मजबूरन वूमैन कमीशन में मामले की शिकायत करेंगे।
  कालेज टीचर्ज एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष संदीप खंडवाल ने कहा कि इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रसाद के खिलाफ रोष जताने व अपनी मांगों संबंधी प्रदर्शन करने के लिए एसोसिएशन के सैंकड़ों सदस्यों ने सैक्टर-5 स्थित शिक्षा सदन की तरफ जाना चाहा, परंतु धारा 144 का हवाला देते हुए स्थानीय पुलिस ने शिक्षा सदन के सामने जाने से रोक दिया, जिसके चलते एसोसिएशन का एक शिष्टमंडल हायर एजुकेशन विभाग के डायरैक्टर जनरल अंकुर गुप्ता से मिला और अपनी मांगों संबंधी ज्ञापन सौंपा।


3:29 PM | 0 comments | Read More

वेबसाइट्स पर बेच रहे सेक्स पैकेज

   इंदौर।। इंदौर बाजारों की दुनिया में बड़ा नाम है। अब यहां पर एक और बाजार तेजी से फल-फूल रहा है। उस बाजार का नाम है ई-सेक्स बाजार। एंड्राइड फोन में एप से लेकर ऑनलाइन वेबसाइट के जरिए शहर में कॉलगर्ल उपलब्ध कराने का धंधा चल रहा है। सेक्स माफियाओं ने इंटरनेट पर इंदौर कॉल गर्ल डॉट कॉ डॉट इन, इंदौर एस्कॉर्ट सर्विस डॉट कॉ डॉट इन जैसी वेबसाइटें तक बना रखी हैं। इन साइट्स पर जिस्मफरोशी के सौदे हो रहे हैं।
ऎसे होता है सौदा
  लड़की का फोटो सेलेक्ट करने के बाद साइट पर ही लिखे नंबरों पर कॉल किया जाए तो आपको आपके वॉट्सएप नंबर पर कुछ ही देर में कई फोटो भेज दिए जाते हैं। फोटो में सामान्यत: दिखाई लड़कियों की उम्र 18 से 30 वर्ष तक रहती है। सौदा फिक्स होने पर माफिया कस्टमर से किसी भी होटल में कमरा बुक कराने का कहते हैं। कमरा बुक होने पर सेलेक्ट की गई लड़की को वहां तय समय के लिए भेज दिया जाता है।

पॉश इलाकों में बना अड्डा
   कस्टमर के बताए स्थान पर लड़कियां सप्लाय करने के अलावा माफियाओं ने शहर के पॉश इलाकों में फ्लैट भी ले रखे हैं। बात फिक्स होने के बाद कस्टमर को बॉम्बे हॉस्पिटल चौराहे पर बुलाया जाता है। यहां माफिया अपना एक बंदा भेजता है जो कस्टमर को फ्लैट तक ले जाता है।

बाहर से आने वाले टारगेट
   प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी होने के चलते इंदौर में बाहर से बड़ी संख्या में बिजनेस क्लास के लोग आते हैं। माफिया का टारगेट ज्यादातर यह वर्ग रहता है। यही वजह है कि इन एस्कॉर्ट एजेंसियों की नजर बड़े होटलों पर भी रहती है। वह यहां आने वाले ग्राहकों को भी सर्विस देने का दावा करते हैं।

7 से 35 हजार रूपए तक रेट
   वेबसाइट पर बाकयदा सेक्स पैकेज बेचे जा रहे हैं। घंटों और दिन के हिसाब से कीमत वसूली जा रही है। ऑफर ऎसे हैं, जैसे किसी सेल में होते हैं। लड़कियों के प्रोफाइल भी साइट पर उपलब्ध हैं, लेकिन उपलब्ध कराए जाने वाली लड़कियां प्रोफाइल से अलग होती हैं। प्रोफाइल सिर्फ ब्रांडिंग के हिसाब से यह लोग उपयोग कर रहे हैं। पैकेज की कीमतें 7 से 35 हजार रूपए तक तय हैं।

3:28 PM | 0 comments | Read More

देवी पुराण: जब सती के रूप से डर कर भाग गए थे भगवान शिव

   इन दिनों सावन का पवित्र महीना चल रहा है। ये महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय है। भगवान शंकर त्रिदेवों में प्रमुख देवता हैं। वे भगवान विष्णु व ब्रह्मा के भी आराध्य देव हैं। अनेक धर्म ग्रंथों में भगवान शंकर को अनादि व अजन्मा बताया गया है। शिव जन्म व मृत्यु से भी परे है। इसलिए उन्हें महाकाल भी कहा जाता है। महादेव को किसी का भी भय नहीं है, लेकिन देवी पुराण के एक प्रसंग के अनुसार एक बार भगवान शिव माता सती के रौद्र रूप से घबराकर भाग गए थे। देवी पुराण के अनुसार-
   भगवान शिव का प्रथम विवाह दक्ष प्रजापति की पुत्री सती से हुआ था। एक बार सती के पिता दक्ष प्रजापति ने बहुत बड़े यज्ञ का आयोजन किया। उस यज्ञ में दक्ष प्रजापति ने अपनी पुत्री सती और दामाद शिव को निमंत्रित नहीं किया। यज्ञ के बारे में जान कर सती बिना निमंत्रण ही पिता के यज्ञ में जाने की जिद करने लगी।
   तब भगवान महादेव ने सती से कहा कि- किसी भी शुभ कार्य में बिना बुलाए जाना और मृत्यु- ये दोनों ही एक समान है। मेरा अपमान करने की इच्छा से ही तुम्हारे पिता ये महायज्ञ कर रहे हैं। यदि ससुराल में अपमान होता है तो वहां जाना मृत्यु से भी बढ़कर होता है। ये बात सुनकर सती बोलीं- महादेव। आप वहां जाएं या नहीं, लेकिन मैं वहां अवश्य जाऊंगी।
   देवी सती के ऐसा कहने पर शिवजी ने कहा- मेरे रोकने पर भी तुम मेरी बात नहीं सुन रही हो। दुर्बुद्धि व्यक्ति स्वयं गलत कार्य कर दूसरे पर दोष लगाता है। अब मैंने जान लिया है कि तुम मेरे कहने में नहीं रह गई हो। अत: अपनी रूचि के अनुसार तुम कुछ भी करो, मेरी आज्ञा की प्रतीक्षा क्यों कर रही हो।
   जब महादेव ने यह बात कही तो सती क्षणभर के लिए सोचने लगीं कि इन शंकर ने पहले तो मुझे पत्नी रूप में प्राप्त करने के लिए प्रार्थना की थी और अब ये मेरा अपमान कर रहे हैं। इसलिए अब मैं इन्हें अपना प्रभाव दिखाती हूं। यह सोचकर देवी सती ने अपना रौद्र रूप धारण कर लिया।
   क्रोध से फड़कते हुए ओठों वाली तथा कालाग्नि के समान नेत्रों वाली उन भगवती सती को देखकर महादेव ने अपने नेत्र बंद कर लिए। भयानक दाढ़ों से युक्त मुख वाली भगवती ने अचानक उस समय अट्टहास किया, जिसे सुनकर महादेव भयभीत हो गए। बड़ी कठिनाई से आंखों को खोलकर उन्होंने भगवती के इस भयानक रूप को देखा।
   देवी भगवती के इस भयंकर रूप को देखकर भगवान शिव भय के मारे इधर-उधर भागने लगे। शिव को दौड़ते हुए देखकर देवी सती ने कहा-डरो मत-डरो मत। इस शब्द को सुनकर शिव अत्यधिक डर के मारे वहां एक क्षण भी नहीं रुके और बहुत तेजी से भागने लगे।
   इस प्रकार अपने स्वामी को भयभीत देख देवी भगवती अपने दस श्रेष्ठ रूप धारण कर सभी दिशाओं में स्थित हो गईं। महादेव जिस ओर भी भागते उस दिशा में वे भयंकर रूप वाली भगवती को ही देखते थे। तब भगवान शिव ने अपनी आंखें बंद कर ली और वहीं ठहर गए।
   जब भगवान शिव ने अपनी आंखें खोली तो उन्होंने अपने सामने भगवती काली को देखा। तब उन्होंने कहा- श्याम वर्ण वाली आप कौन हैं और मेरी प्राणप्रिया सती कहां चली गईं। तब देवी काली बोली- क्या अपने सामने स्थित मुझ सती को आप नहीं देख रहे हैं। ये जो अलग-अलग दिशाओं में स्थित हैं ये मेरे ही रूप हैं। इनके नाम काली, तारा, लोकेशी, कमला, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, षोडशी, त्रिपुरसुंदरी, बगलामुखी, धूमावती और मातंगी हैं।
   देवी सती के ये वचन सुनकर शिवजी बोले- मैं आपको पूर्णा तथा पराप्रकृति के रूप में जान गया हूं। अत: अज्ञानवश आपको न जानते हुए मैंने जो कुछ कहा है, उसे क्षमा करें। ऐसा कहने पर देवी सती का क्रोध शांत हुआ और उन्होंने महादेव से कहा कि- यदि मेरे पिता दक्ष के यज्ञ में आपका अपमान हुआ तो मैं उस यज्ञ को पूर्ण नहीं होने दूंगी। ऐसा कहकर देवी सती अपने पिता के यज्ञ में चली गईं।


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"क्या पीएम मोदी भगवान हैं, जो हमें दर्शन देंगे"


   नई दिल्ली।। संसद में कुछ ऎसा हुआ कि कांग्रेस सांसद ने पीएम मोदी पर चुटकी ले ली। लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्किार्जुन खड़गे ने कहा "क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भगवान है जो हमें कभी-कभार ही दर्शन देंगे।"
  खड़गे की इस टिप्पणी के बाद सदन में हंसी का ठहाका गूंज उठा। दरअसल, खड़गे ने कहा था कि कार्यवाही के दौरान पीएम मोदी को भी सदन में सप्ताह में दो-तीन बार तो आना चाहिए। जिसके जवाब में सुषमा स्वराज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ब्राजील दौरे पर व्यस्त रहे इसके बावजूद वहां से आने के बाद उन्होंने सदन में आपको दर्शन दिए।
   सुषमा का इतना कहना हुआ कि खड़गे ने तपाक से चुटकी लेते हुए कहा कि क्या पीएम मोदी भगवान है जो हमें कभी कभी ही दर्शन देंगे। खड़गे की इस टिप्पणी पर पक्ष-विपक्ष में हंसी का ठहाका फूट पड़ा।

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आम आदमी पार्टी महाराष्ट्र में नहीं लड़ेगी चुनाव, लोकसभा चुनावों में हार के बाद फैसला

   नई दिल्ली।। आम आदमी पार्टी हरियाणा में चुनावों से अपना नाम वापस लेने के बाद महाराष्ट्र में भी कुछ ऐसा ही करने जा रही है। दिल्ली विधानसभा को देखते हुए पार्टी यहाँ भी वही फैसला ले रही है जैसा हरियाणा में लिया है।
  सूत्र बता रहे हैं कि पार्टी ने लोकसभा चुनाव में जबर्दस्त हार का आंकलन कर यह फैसला किया है। लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में पार्टी को सिर्फ 2.2 फीसदी वोट ही मिले। जमीनी स्तर पर काम करने वाले पार्टी के कार्यकर्ता भी नहीं चाहता कि 'आप' विधानसभा चुनाव में उतरे।
   25 जुलाई को आम आदमी पार्टी की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इन फैसलों पर औपचारिक मुहर लगेगी। 'आप' संयोजक अरविंद केजरीवाल 30 जून को ही कह चुके हैं कि पार्टी को हरियाणा, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से ध्यान हटाकर दिल्ली पर ही केंद्रित होना चाहिए।
   महाराष्ट्र यूनिट की आप संयोजक अंजलि दमानिया ने बताया कि हम अपने फैसले के बारे में राष्ट्रीय कार्यकारिणी को बता चुके हैं। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में न उतरने के हमारे फैसले पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सभी एकमत हैं।
  दमानिया ने कहा, 'पार्टी के हार्डकोर समर्थक भी यही मानते हैं कि हमें महाराष्ट्र में अधिक काम करने की जरूरत है। यह एक बहुत बड़ा राज्य है। हमें ग्रामीण इलाकों तक भी पहुंच बनानी होगी।

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सावधानः किसी भी वक्त आ सकता हैं PM मोदी का फोन

   नई दिल्ली।। इन दिनों किसी भी वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन आ सकता है। रात के 8 बजते ही हर मंत्रालय में फोन की घंटियों पर ही नजर रहती है। क्योंकि मोदी उनके मंत्रालय से जुड़े किसी प्रॉजेक्ट या नीति के बारे में कोई भी अपडेट ले सकते हैं, या सलाह दे सकते हैं। किस मंत्रालय में फोन आएगा, यह भी किसी को पता नहीं। मोदी प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के साथ अचानक ही तय करते हैं कि किसे और किन मुद्दों पर फोन करना है।
   वहीं जिस दिन मोदी दिल्ली में होते हैं, उस दिन शाम के 7 बजे अपने प्रिंसीपल सैक्टरी नृपेंद्र मिश्र के साथ मीटिंग जरूर करते हैं जिसमें मंत्रालयों से जुड़े मुद्दे पर विचार विमर्श कर रात के 11 बजे तक फोन पर बात करने का सिलसिला जारी रहता है।
   सूत्रों के मुताबिक पीएमओ में मोदी के निर्देश पर फॉलोअप टीम बनाई गई है। इस टीम का काम सरकार के फैसले या दूसरे निर्देश को पूरा करने के लिए दबाव बनाना है। नृपेन्द्र मिश्र के नेतृत्व में बनी यह टीम ऐसे फॉलोअप की लिस्ट हर दिन मोदी के पास रखती है। इसी टीम ने मोदी के मार्फत सभी मंत्रियों तक संदेश पहुंचाया कि बजट में उनके मंत्रालय के लिए जितनी घोषणाएं हुईं, उन पर 1 अगस्त से ही काम हो।






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हां, मैं हाफिज सईद से मिला हूं, और मै पत्रकार हूं

कितनी बेमानी है हाफिज सईद पर खामोशी बरत पाकिस्तान से बातचीत ?
   अभी नरेन्द्र मोदी की बात कर रहा है, चौदह बरस पहले बालासाहेब ठाकरे की बात कर रहा था। अभी खुद को दहशतगर्दी से अलग बता रहा है, चौदह बरस पहले दहशतगर्दी को सही ठहरा रहा था। अभी भारत में किसी भी आतंकी हमले से अपना दामन पाक साफ बता रहा है, चौदह बरस पहले कश्मीर से लेकर लालकिले तक की हमले की जिम्मेदारी लेते हुये भारत के हर हिस्से में आतंकी हमले की धमकी दे रहा था। अभी मोदी के पाकिस्तान आने पर विरोध ना करने की बात कह रहा है, चौदह बरस पहले परवेज मुशर्रफ के आगरा सम्मिट में शामिल होने को भी पाकिस्तानी अवाम के खिलाफ उठाया गया कदम बता रहा था। चौदह बरस पहले भारत सरकार लश्कर चीफ हाफिज मोहम्मद सईद को लेकर पाकिस्तान से सवाल नहीं उठा पायी थी, और आज जमात-उल-दावा के चीफ हाफिज सईद को लेकर कोई सीधा सवाल सरकार नहीं उठा पा रही है। चौदह बरस पहले हाफिज सईद का चेहरा दुनिया ने नहीं देखा था। आज दुनिया के सामने हाफिज सईद का चेहरा है। चौदह बरस पहले लालकिले पर आतंकी दस्तक के बावजूद वाजपेयी सरकार पाकिस्तान से बातचीत करने को तैयार थी। और बीते चौदह बरस के दौर में लालकिले से आगे संसद तक पर हमले और मुंबई, दिल्ली , हैदराबाद समेत बारह राज्यों में लश्कर के आतंकी हमलो के बावजूद मोदी सरकार विदेश सचिव स्तर की बातचीत करने जा रही है। लेकिन यह सवाल बीते चौदह बरस से अनसुलझा है कि जिस हाफिज सईद ने चौदह बरस पहले रिकार्डेड इंटरव्यू में कश्मीर में मौजूद आठ लाख भारतीय सेना को दहशतगर्द से जोड़कर भारत पर लश्कर के आतंकी हमले को माना था और उस वक्त के प्रधानमंत्री वाजपेयी और गृहमंत्री आडवाणी को यह कहकर चेताने कोताही नहीं बरती थी कि कश्मीर में किसी की जान जायेगी तो वह उन्हें भी नहीं छोडेगा तो फिर आज की तारिख में कैसे हाफिज सईद के ह्दय परिवर्तन वाले वेद प्रताप वैदिक की मुलाकात या कहें बातचीत को मान्यता दी जा सकती है। और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ प्रधानमंत्री मोदी कीगुफ्तगु संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा साडी-शाल डिप्लोमैसी के दायरे में समेटी जा सकती है। और जब २५ अगस्त को विदेश सचिव मिलेंगे तो हाफिज सईद के आंतक पर खामोशी बरत कैसे संबंध बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठायेगें यह शायद सबसे बड़ा सवाल है।
   दरअसल हाफिज सईद जो सच इंटरव्यू के जरीये चौदह बरस पहले बोल गया उसके मौजूदा सच को भी पत्रकार इंटरव्यू के जरीये आज भी ला सकता है। लेकिन मुंबई हमलों के बाद राष्ट्रीय न्यूज चैनलों के संपादक के संगठन बीईए यानी ब्रॉडकास्ट एडीटर एसोसिएशन ने तय कर लिया कि आतंकवादी हाफिज सईद का इंटरव्यू न्यूज चैनलों पर नहीं दिखायेंगे। यानी कोई पत्रकार चाहे कि वह पाकिस्तान जाकर हाफिज सईद के सच को ले आये तो भी उसे न्यूज चैनल नहीं दिखायेंगे। क्योंकि आतंकवादी को राष्ट्रीय न्यूज चैनल मंच देना नहीं चाहते। लेकिन बीईए से जुडे यही संपादक हाफिज सईद के साथ वेद प्रताप वैदिक के ह्दय परिवर्तन सरीखी बातचीत पर हंगामा खड़ा कर पत्रकारिता करना जरुर चाहते हैं। असल में हाफिज सईद से इंटरव्यू लेना कितना आसान है या मुश्किल यह तो मुझे चौदह बरस पहले ही समझ में आ गया था लेकिन यह सवाल कि भारत सरकार इन चौदह बरस में भी क्यों पाकिस्तान को आतंक के कटघरे में खड़ा नहीं कर पाती है जबकि उसकी जमीन से लश्कर आतंक का खुला खेल भारत के खिलाफ खेलता है। इसे समझने के लिये आइए पहले चौदह बरस पुराने पन्नों को पलट लें।
   जनवरी 2000 । जगह रावलपिंडी का फ्लैशमैन होटल। पाकिस्तान टूरिज्म डेवल्पमेंट कारपोरेशन के इस होटल में दोपहर 3 बजे के करीब एक कद्दावर शख्स कमरे में घुसा। गर्दन से नीचे तक लटकती दाढी । हट्ट-कट्टा शरीऱ । सफेद पजामा और कुरता पहने शख्स ने कमरे में घुसते ही कहा कॉफी नहीं पिलाइयेगा । कुछ पूछने से पहले ही वह शख्स खुद ही कुर्सी पर बैठा। और हमारे कुछ भी पूछने से पहले खुद ही बोल पड़ा। इंडिया से आये हैं। जी । कई दिनों से हैं। जी । तो रुके हुये क्यों है। जी हम लश्कर के मुखिया मोहम्मद हाफिज सईद का इंटरव्यू लेने के लिये रुके हैं। क्यों आपकी बात हो गयी है । जी नहीं। तो फिर क्या फायदा । फायदा-नुकसान की बात नहीं है। दिल्ली में लालकिले पर हमला हुआ तो हम पाकिस्तान यही सोच कर आये हैं कि इंटरव्यू करेंगे तो भारत में भी लोग जान पायेंगे कि लश्कर के इरादे क्या हैं। आपने लश्कर के चीफ की कभी कोई तस्वीर देखी है। नहीं । तो फिर इंटरव्यू की कैसे सोच ली। पत्रकार के तौर पर पहली बार हमारे भीतर आस जगी कि हो ना हो यह शख्स लश्कर से जुड़ा है। तो तुरंत कॉफी का आर्डर दे दिया । दरअसल हाफिज सईद से मुलाकात का मतलब क्या हो सकता है और 14 बरस पहले कैसे यह संभव हुआ। यह इस हद तक डराने और रोमांचित करने वाला था कि लालकिले पर हमला हो चुका था । कश्मीर में कई आतंकी हमले हो चुके थे। देश में लोग आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तौयबा को जानने लगे थे । तालिबान के साथ लश्कर के संबंधों को लेकर दुनिया में बहस भी हो रही थी। लेकिन उस वक्त किसी ने लश्कर के मुखिया हाफिज सईद का चेहरा नहीं देखा था। कहीं किसी जगह हाफिज सईद की कोई तस्वीर छपी नहीं थी और सिर्फ नाम की ही दहशत उस वक्त कश्मीर से लेकर दिल्ली में था। और उसी दौर में हमने सोचा कि लश्कर के मुखिया हाफिज सईद का इंटरव्यू लेने पाकिस्तान जाना चाहिये। कोई सूत्र नहीं । किसी को जानते नहीं थे। सिर्फ कश्मीर के अलगाववादियों से पीओके यानी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के अलगाववादियों से संपर्क साध कर हम { मैं और मेरे सहयोगी अशरफ वानी } इस्लामाबाद रवाना हो गये। लेकिन पाकिस्तान में हिजबुल से लेकर जैश-ए मोहमम्द तक के दफ्तरों की हमने खाक छानी लेकिन किसी ने लश्कर के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। पाकिस्तानी पत्रकारों से हम लगातार मिलते रहे। लेकिन किसी भी पत्रकार ने उस वक्त यह भरोसा नहीं दिया कि लश्कर के मुखिया हाफिज सईद से हमारी कोई मुलाकात हो भी सकती है । यहां तक की उस वक्त तालिबान में सक्रिय ओसामा बिन लादेन से संपर्क करने वाले पत्रकार हामिद मीर ने भी हमें यह कहकर निराशा दी कि हाफिज सईद से मिलना नामुमकिन है। हां, यह कहकर उन्होंने जरुर आस जगा दी कि अगर लश्कर कोपता चल जाये कि आप दिल्ली से लश्कर का इंटरव्यू लेने आये हैं तो वह संपर्क साध सकता है। तो हमें भी लगा हम हर दरवाजे पर तो जा चुके है । अब वीजा का वक्त भी खत्म होने जा रहा है तो आखिरी दिन तक रुकते हैं, उसके बाद वापस लौट जायेंगे। और वीजा का वक्त आखिरी दिन तक काटने के लिये ही पीटीडीसी के फ्लैशमैन होटल के कमरा नं ३२ में हमारा वक्त गुजर रहा था। सुबह से ही कबाब और रात में फ्लैशमैन होटल के खानसामे से आलू की भुजिया या कभी पीली दाल बनाने के तरीके बताकर बनवाकर खाना। चार दिन वीजा के बचे थे और तीसरे दिन दोपहर तीन बजे के वक्त कद्दावर शख्स फ्लैशमैन होटल के हमारे कमरे में बिना इजाजत घुसा था। बातचीत करते हुये दो घंटे बीते होंगे, जिसके बाद उसने खुद का नाम याह्या मुजाहिद बताया। तो हमारे दरवाजे पर लश्कर दस्तक दे चुका है। कि याह्या मुजाहिद का नाम बतौर लश्कर के प्रवक्ता के तौर पर लालकिले पर हमले के बाद भी आया था। जिसमें लश्कर ने लालकिले पर हमले की जिम्मेदारी ली थी। शाम हो चुकी थी और अब मैं और अशरफ वानी हर हाल में इंटरव्यू चाहते थे। जिसके लिये हमने होटल में ही भोजन करने का आग्रह कर तुरंत कटलेट का आर्डर दे दिया। हमें लगा कि किसी तरह यह शख्स ना कर यहा से निकल ना जाये। देश-दुनिया के हर मुद्दे पर बातचीत हो रही थी। भारत में जितने भी आंदोलन चल रहे थे। बाला साहेब ठाकरे और शिवसेना को लेकर याह्या मुजाहिद की खास रुचि थी । महाराष्ट्र में लंबी पत्रकारिता मैंने की थी तो खासी बातचीत हुई। फिलिस्तीन और यासर अराफात तक को लेकर बातचीत हुई। बहुत ही बारीक चीजो को जानने-समझने या फिर मुद्दों के जरीये हमारे नजरियो के समझने के मद्देनजर याह्या मुजाहिद भी लगातार सवाल कर रहा था। और बहस के बीच में उसने जानकारी दे दी कि इंडिया की तरफ से कई पत्रकारों ने इंटरव्यू की गुहार लगायी। बाकायदा न्यूज चैनलों के बडे चेहरों का उसने नाम लिया। उसमें एक नाम महिला पत्रकार का भी आया। लेकिन किसी महिला को हाफिज सऊद इंटरव्यू नहीं दे सकते हैं। क्यों। क्योंकि ख्वातिन को इंटरव्यू नहीं दिया जा सकता है। लेकिन हमें तो इंटरव्यू दिया ही जा सकता है। बातचीत का सिलसिला रात 10 बजे तक चलता रहा ।
   लेकिन याह्या मुजाहिद इंटरव्यू की बात आते ही टाल जाता। करीब रात ग्यारह बजे उसने किसी से मोबाइल पर बात की और उसके बाद हमारे सामने इंटरव्यू के लिये कई शर्त रख दीं। जिसमें इंटरव्यू लेने के तुरंत बाद हमें पाकिस्तान छोड़ना होगा। जहा इंटरव्यू लेना होगा वहां ले जाने के लिये सुबह पांच बजे लश्कर की गाड़ी होटल में आ जायेगी। इंटरव्यू सिर्फ आडियो होगा। हम हर शर्त पर राजी हुये। क्योंकि लश्कर का मुखिया हाफिज सईद पहली बार किसी को इंटरव्यू दे रहा था। यानी भारत ही नहीं दुनिया के कई पत्रकारों ने इंटरव्यू के लिये लश्कर का दरवाजा खटखटाया। तो हर शर्त मान र रात में ही फ्लैशमैन होटल को सुबह कमरा खाली करने की जानकारी दे कर हमने सबकुछ निपटाया। सुबह साढे पांच बजे लश्कर की गाड़ी आयी। एक घंटे के ड्राइव के बाद अंधेरे में कहां ले गयी हम समझ नहीं पाये। इंटरव्यू लिया गया और इंटरव्यू खत्म होने के तुरंत बाद लश्कर की गाडी ने ही हमें हवाई अड्डे पहुंचा दिया। वह इंटरव्यू आजतक चैनल पर 14 बरस पहले दिखाया भी गया। लेकिन तब दुनिया के सामने हाफिज सईद का चेहरा नहीं आया था, तो इंटरव्यू भी हाफिज मोहम्मद सईद के पीठ पीछे कैमरा रख कर लिया गया। उसके बाद अमेरिका पर हुये हमले यानी 9/11 के बाद पहली बार हाफिज सईद का चेहरा अमेरिका सामने लेकर आया । क्योंकि लश्कर के ताल्लुकात ओसामा बिन लादेन से थे। और इस संबंध के सामने आने के बाद ही हाफिज सईद ने 2004 में लश्कर की जगह जमात-उल-दावा के सामाजिक कार्यो में लगा हुआ बताना ही हाफिज सईद ने शुरु किया । इसलिये 2004 से लेकर मुंबई हमला यानी 26/11 तक के दौर में भारत पर लश्कर के करीब दो दर्जन आतंकी हमले अलग अलग शहर में हुये। भारत ने लगातार लश्कर को निशाने पर लिया। आतंकी हमलों को लेकर पाकिस्तान को सबूत भी दिये। लेकिन पाकिस्तान में हाफिज सईद को छूने की हिम्मत किसी की नहीं थी। और ना ही आज है। क्योंकि लश्कर आईएसआई और सेना की कूटनीति चालों का सबसे बेहतरीन प्यादा भी है और पाकिस्तानी सत्ता के लिये कश्मीर के नाम पर वजीर भी। और यह सच वाजपेयी-मुशर्ऱफ के आगरा सम्मिट से एक महीने पहले जून 2001 में सामने आया। जून २००१ में मैंने दोबारा हाफिज मोहम्मद सईद का इंटरव्यू लिया। इस बार पहली बार की तरह भटकना नहीं पड़ा। वह इंटरव्यू भी आजतक चैनल पर दिखाया गया और पहली बार जिस जनरल ने नवाज शरीफ का तख्ता पलट उसके खिलाफ हाफिज सऊद ने खुले तौर पर इंटरव्यू में आग उगले। और यहकहकर उगले कि मुशर्रफ को आगरा सम्मिट में नहीं जाना चाहिये। यानी पाकिस्तान में जनरल मुशर्रफ का विरोध करने वाला अकेला शख्स हाफिज सईद ही था। और आगरा सम्मिट जब फेल हुआ तो लश्कर ने उस वक्त पाकिस्तान में अपनी राजनीतिक समझ को यही कहकर मजबूत किया कि एक भारतीय चैनल को दिये इंटरव्यू में पहले ही कह दिया था कि परवेज मुशर्रफ को भारत बातचीत के लिये नहीं जाना चाहिये था । ध्यान दें तो आगरा सम्मिट को कवर करने पहुंचे पत्रकारों के एक बड़े समूह को पहले से पता लगने लगा था कि बातचीत फेल हो रही है। यानी लश्कर-ए-तौयबा की भूमिका सम्मिट को लेकर उस वक्त भी आईएसआई के जरीये आंकी जा रही थी। यानी पाकिस्तान की तीन सत्ता के बीच ताम-मेल बैठाने के लिये या कहे किसी का पलड़ा कमजोर हो तो उसे मजबूत करने के लिये जमात-उल-दावा का छाया युद्द है। जो तालिबान से लेकर कश्मीर तक और अरब वर्ल्ड से लेकर अमेरिका तक को अपनी सौदेबाजी के दायरे में खड़ा करने से नहीं कतराता। चौदह बरस पहले लश्कर एक आतंकवादी की ट्रेनिंग पर 1500 डॉलर खर्ज करता था। और उस वक्त हर साल 50 लाख डॉलर ट्रेनिग पर ही खर्च करता था। अमेरिकी रिपोर्ट की मानें तो 9/11 के वक्त लश्कर को हर बरस सौ मिलियन डालर चंदे के तौर पर मिलते थे । जो मौजूदा वक्त में पांच हजार मिलियन डॉलर को पार चुका है । यानी पाकिस्तान जितना बजट 10 बरस में सामाजिक क्षेत्र में खर्च करता है उतना पैसा सामाजिक कार्य के नाम पर चंदे के तौर पर दुनिया से जमात-उल-दावा से उगाही कर लेता है। तो आखिरी सवाल २५ अगस्त को विदेश सचिवों की बैठक में भारत कैसे पाकिस्तान के साथ संबंध को बेहतर करने की दिशा में कदम बढ़ायेगा अगर हाफिज सईद पर दोनो देश खामोशी बरतेंगे य़ा पाकिस्तान कहेगा कि हाफिज सईद के खिलाफ कोई सबूत तो है नहीं।



पुण्य प्रसून बाजपाई 
इंडिया टुडे ग्रुप आज तक
2:17 PM | 0 comments | Read More

दबंग सलमान खान की फिल्म किक रिलीज

   बम्बई।। बॉलीवुड के दबंग सलमान खान की फिल्म किक रिलीज हो गई है. किक देश की अब तक की सबसे बड़े पैमाने पर रिलीज होने वाली फिल्म है. किक को देश भर में 4,000 स्क्रीन पर रिलीज किया गया है. देश से बाहर विदेश में यह फिल्म 700 स्क्रीनों पर रिलीज हो रही है. किक फ्रांस, मालदीव, जर्मनी, ब्रिटेन और अमेरिका सहित 42 से ज्यादा देशों में रिलीज हो रही है. मिस्र, ताइवान और चीन में किक बाद में रिलीज होगी. इस फिल्म का सबटाइटल सात भाषाओं में होगा जिसमें अंग्रेजी, फ्रेंच, डच, थाई, मलय और अरबी जैसी भाषाएं शामिल हैं. किक के ट्रेलर में सलमान के लुक और एक्शन को काफी सराहा गया है.
   सलमान खान की इस फिल्म का उनके प्रशसकों को काफी दिनों से इंतजार था. यह निर्माता साजिद नाडियाडवाला की पहली निर्देशित फिल्म है. फिल्म का स्क्रीनप्ले चेतन भगत ने लिखा है. इस फिल्म की प्रमुख अभिनेत्री की भूमिका में जैक्लिन फर्नांडिस हैं फिल्म में म्यूजिक हिमेश रेशिमया, मीत ब्रदर्स अंजान और यो यो हनी सिंह ने दिया है. ईद के मौके पर रिलीज किक से सलमान खान रिकॉर्ड कमाई की उम्मीद कर रहे हैं सलमान खान को उम्मीद है कि किक 300 करोड़ से ज्यादा की कमाई करेगी.
2:16 PM | 0 comments | Read More

बिहार विधान परिषद: जम कर हुई मारपीट और गाीली गलौज

Written By Bureau News on Thursday, July 24, 2014 | 9:17 PM

   पटना।। गुरुवार को बिहार विधान परिषद में जेडीयू और बीजेपी के सदस्यों ने जम कर मारपीट-धक्का-धुक्की और गाली गलौज की है. इस दौरान पूर्व सीएम नीतीश कुमार, राबड़ी देवी भी मौजूद थे.
   मामला इतना बढ़ा कि दोनों पार्टियों के विधायक के बीच हाथापाई, मारपीट और गाली गलौज तक हुई.सदन के एक सदस्य ने नौकरशाही डॉट इन से यह बात स्वीकार की है कि दोनों तरफ से गाली गलौज और मारपीट हुई है. इसमें जदयू की तरफ से संजय सिंह व नीरज कुमार थे तो भाजपा की तरफ से मंगल पांडेय सुशील कुमार मोदी की नेतृत्व में भाजपा के सदस्य आगे-आगे थे.
   गुरुवार का दिन बिहार विधान परिषद के लिए शर्मनाक साबित हुआ जब नीतीश कुमार की मौजूदगी में जद यू भाजपा के सदस्योंने मारपीट और गाली गलौज तक कर दी.
   गाली गलौज की यह स्थिति तब आई जब सुशील कुमार मोदी के एक प्रश्न का जवाब मंत्री विजय चौधरी दे रहे थे. लेकिन इसी बीच मोदी बार बार उन्हें टोक रहे थे. इतना ही नहीं उन्होंने मंत्री विजय चौधरी का नाम ले लिया. किसी मंत्री का बहस के दौरान नाम लेना मान्य परम्परा के खिलाफ माना जाता है इस पर पार्षद संजय सिंह ने कहा कि मोदी को टोका-टोकी करने की बीमारी है.इसके जवाब में बहस तेज हो गयी और सुशील मोदी बेल में चले आये. उनके साथ मंगल पांडेये समेत बीजेपी के अनेक नेता पहुंच गये. और सदम में हांगामा शुरू हो गया. फिर स्थिति धक्कामुक्की गाली गलौज तक पहुंच गयी.
   जब ये सब चल रहा था तो विधान परिषद में नीतीश कुमार और पूर्व सीएम राबड़ी देवी भी वहां मौजूद थे. काफी हंगामे के बाद नीतीश कुमार अपनी सीट से खड़े हुए और फिर लोगों को शांत कराया.
  इस मारपीट और हंगामे के बाद सभापति ने विधान परिषद की कार्यवाही 2.30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी.
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सीवर प्रोजेक्ट में गंभीर अनियमितताओं के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर

   शिवपुरी।। अंचल की ढाई लाख आबादी के लिए जलावर्धन योजना तो पूर्ण हो नहीं सकी और अब सीवर प्रोजेक्ट का कार्य धड़ल्ले से किया जा रहा है लेकिन यह कार्य भी पूर्ण रूप से नियम निर्देशों को ताक पर रखकर किया जा रहा है यहां केन्द्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय झील संरक्षण येाजना के तहत शिवपुरी में स्थित प्राचीन झीलें जाधवसागर एवं माधव सागर लेक(चांदपाठा) के बचाव और शिवपुरी नगर की 2.5 लाख आबादी के कल्याणर्थ संचालित होकर इसका उददेश्य शिवपुरी नगर के सीवर से उन झीलों को सुरक्षित कर नगर के प्रमुख पेयजल स्त्रोतों को संरक्षित करना है।
   एड. पीयूष शर्मा ने इस योजना को पूर्ण करने के लिए अब माननीय उच्च न्यायालय की शरण ली है ताकि झील संरक्षण के तहत इस योजना के निर्माण कार्य को पूर्ण ईमानदारी व क्वालिटी से किया जाए ताकि शहर में आने वाले समय में सीवर की समस्या पुन: उत्पन्न ना हो।
   स्थानीय होटल वरूण इन में आयोजित प्रेसवार्ता में सीवर प्रोजेक्ट के निर्माण में बरती जा रही गंभीर अनियमितताओं व डीपीआर मानकों को दरकिनार कर किए जा रहे निर्माण कार्या का ब्यौरा प्रस्तुत करते हुए एड. पीयूष शर्मा ने बताया कि सीवर प्रोजेक्ट के निर्माण में गंभीर अनियमितताऐं बरती जा रही है ै क्योंकि उपरोक्त प्रोजेक्ट में सीवर लाईन नेटवर्क निर्माण, सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण एवं अंत में सीवर उपचारित किया जाकर उस पानी को सिंध नदी में मिलाना है। जिसके निर्माण के लिए कुल स्वीकृत राशि 69.51 करोड़ की राशि में से 90 प्रतिशत राशि लगभग 54.05 करोड़ सीधे-सीधे, सिर्फ सीवर लाइन बिछाने में खर्च की जा रही है।
   शेष दो प्रमुख भागों ट्रीटमेंट प्लांट एवं ट्रीटेड सीवर का अंत में निस्तार (सिंध में) नदी में करना शामिल है, के लिए कुल स्वीकृत की 10 प्रतिशत लगभग शेष राशि से उक्त भागों की पूर्ति करना असंभव है जबकि आज तिथि तक वर्तमान योजना के शेष उक्त 2 भागों का कार्य पूर्ण करने हेतु कोई स्वीकृति नहीं कराई गई है तो काम प्रारंभ होने का तो कोई प्रश्न ही नहीं है।
   जिसका परिणाम होगा कि सीवर का ट्रीटमेंट नहीं होगा और सीवर ट्रीटमेंट के परिणामस्वरूप शोधित सीवर 98 प्रतिशत शुद्ध पानी में तब्दील किया जाकर तीसरा भाग उस पानी को निस्तार कोटा नाले पर होगा यह कि शहर से सीवर कोटा नाले में डाला जाकर वहां से वह उसी अवस्था में अर्थात बिना ट्रीटमेंट के ही सिंध में मिलाकर सिंध नदी को नाले में तब्दील कर प्रदूषित करने का प्रयास है। जिसके बाद 120 करोड़ की जलावर्धन योजना से वही सीवर युक्त पानी मिलने वाला है तो इन योजनाओं का औचित्य ही क्या है। वैसे आज भी शहर निवासी गटर युक्त चांदपाठे का पानी पी रहे है।
9:17 PM | 0 comments | Read More

एम.पी. ऑनलाईन एवं जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्थान की अनियमितता के चलते होनहार छात्रा हुई प्रवेश से वंचित

  लाबरिया/धार।। एम.पी.आनलाईन एवं जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्थान (डाईट) धार की अनियमितता के कारण होनहार छात्रा प्रवेश से वंचित होने के कारण उसके भविष्य के साथ खिलवाड हो रहा है। लाबरिया निवासी धलचंद्र प्रजापत ने बताया कि उनकी पुत्री कु. चैतना पिता धुलचंद प्रजापत ने कक्षा 12वीं में 80.02 अंको के साथ विज्ञान संकाय से प्रथम श्रेणी में कक्षा उत्तीर्ण की। 
    चैतना ने डी.एड (जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्था) में प्रवेश हेतु आनलाईन आवेदन किया था। चेतना ने आनलाईन आवेदन के साथ कक्षा 10वीं, 12वीं, मुलनिवासी, जाति प्रमाण-पत्र पिछडावर्ग की छायाप्रति संलग्न की थी। लेकिन दुसरे दिन रसीद हेतु आनलाईन अवेदन केन्द्र पर सम्पर्क किया तो उससे आय का प्रमाण पत्र मांगा गया। लेकिन इससे पूर्व आनलाईन आवेदन हेतु आय प्रमाण पत्र के कोई निर्देश नही थें। इसके पश्चात् डी.एड में प्रवेश हेतु 30 लोगो की मेरीड सूची समाचार पत्र में प्रकाशित की गई तो उसमे अनारक्षित वर्ग 79.08 प्रतिशत पर अंतिम प्रवेशार्थी का चयन हुआ। जबकि चैतना प्रजापत ने 80.02 प्रतिशत के साथ कक्षा 12 वीं उत्तीर्ण की हैं। बालिका का डी.एड में प्रवेश नही होना ऑनलाई प्रक्रिया पर प्रश्न चिन्ह खडा करता हैं।
   उक्त छात्रा का डी.एड में प्रवेश नही होने से छात्रा के भविष्य के साथ खिलवाड हो रहा हैं। छात्रा के प्रवेश से वंचित होने पर पालक द्वारा मुख्यमंत्री ऑनलाईन शिकायत की गई हैंं एवं जिला प्रशिक्षण संस्थान (डाईट) धार में भी प्राचार्य को बालिका को प्रवेश दिलाने हेत आवेदन प्रस्तुत किया गया हैं। छात्रा के प्रवेश से वंचित होने के कारण छात्रा के मन में निराशा हैं और उसने भी अनुनय किया हैं कि में प्रवेश हेतु पात्र हुॅ मुझे डी.एड में प्रवेश दिया जाए।
   वही उक्त मामले पर अनिल वर्मा, प्राचार्य जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाईट) ने कहा है की बालिका ने एम.पी.ऑनलाईन में आवेदन किया था, इसमें हमारी कोई त्रुटी नही हैं। यह सब ऑनलाईन प्रक्रिया के द्वारा हुआ है। हमारे द्वारा केवल उनके दस्तावेजो का सत्यापन किया गया था।


(विशाल कुमार मारू)
7:59 PM | 0 comments | Read More

खतरे में है पीडि़त बिटिया का परिवार

आसाराम के समर्थक खुलेआम शहर में बंटवा रहे पर्चे
घटना के संबंध में भ्रमित करने का किया जा रहा प्रयास
    शाहजहांपुर।। आसाराम की सताई बिटिया का पूरा परिवार इस समय खतरे में है। जोधपुर में लड़की की मां पर हमले का प्रयास किया गया और अब शाहजहांपुर में भी आसाराम के चेलों ने भी घेराबंदी शुरू कर दी है। आसाराम के गुर्गों ने गुरूवार को शहर भर में अखबारों में रखकर पर्चे बंटवाए, जिसमें आसाराम को निर्दोष बताने की कोशिश की गई है। पर्चों के माध्यम से आसाराम की वकालत करने वाले उनके गुर्गों का निशाना बिटिया का परिवार है। इससे पहले शहर के जिस सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल से लड़की की टीसी जारी की गई थी, उस स्कूल के प्राधानाचार्य को धमकी भरे पत्र के साथ कारतूस भी भेजे गए थे। चेलों द्वारा शहर मे पर्चे बांटे जाने से जाहिर हो गया है कि आसाराम ने अपना नेटवर्क फैला रखा है जो कभी भी परिवार को नुकसान पहुंचा सकता है। आसाराम के चेले लगभग दस दिनों से शाहजहांपुर में डेरा डाले हुए। यह लोग गुुरू पूर्णिमा पर आसाराम के रूद्रपुर स्थित आश्रम में पूजा करने की जुगत लगा रहे थे। यह सब इसलिए कर रहे थे कि जिले के लोगों में जो आसाराम के प्रति गुस्सा और गुबार है उसको कम किया जा सके। जब प्रशासन ने आश्रम में पूजा पाठ करने की अनुमति नहीं दी तो शहर के राजकीय इंटर कालेज के मैदान में धर्म रक्षा सम्मेलन करने की योजना तैयार की गई। यहां भी अनुमति नहीं मिलने पर यह लोग बिटिया के परिवार के लोगों को घेरने की योजना बनाने लगे। मौका देखकर उनके गुर्गों ने पहले मां पर हमला करने की कोशिश की फिर आसाराम की वकालत करने वाले पर्चे बांटकर लोगों को भ्रमित कर पीडिता के परिवार वालों पर मानसकि दबाव डालना चाह रहे हैं।
    इन पर्चों में आसाराम के साथ जगन्नाथपुरी मठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती, जूना अखाड़ा के पंचानंद गिरी, विहिप के मुख्य संरक्षक अशोक सिंघल, न्यायविद डा.सुब्रमण्यम स्वामी का भी जिक्र है। पर्चे के अनुसार इसे साधु संतों को बदनाम करने और भारतीय संस्कृति पर हमला की सजिश बताई गई है। इस पर्चे से अनुमान लगाया जा रहा है कि एक बार फिर सक्रिय हुए आसाराम के चेले अपना मजबूती से जाल फैला रहे हैं और इस बार उनका मकसद आसाराम को समाज के सामने निर्दोष साबित कर सहानुभूति बटोरना है। पर्चे में लड़की को बालिग बताया है इसके लिए उन्होंने श्री शंकर मुमुक्ष विद्यापीठ द्वारा जारी टीसी व एलआइसी पालिसी में दर्ज आयु का ब्यौरा दिया है।
7:04 PM | 0 comments | Read More

सानिया ने तोड़ी चुप्पी, 'मरते दम तक भारतीय ही रहूंगी'

   नई दिल्ली।। केंद्र सरकार ने सानिया मिर्जा के ब्रांड एंबेसडर बनाने पर सवाल खड़े करने वाले तेलंगाना विधानसभा में बीजेपी के नेता के लक्ष्मण के बयान से किनारा कर लिया है। सरकार ने साफ कहा है कि सानिया मिर्जा देश की बेटी हैं और इस तरह की आपत्ति उठाना ठीक नहीं है।
   सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सरकार की तरफ से बयान देते हुए कहा कि लक्ष्मण का बयान पार्टी का बयान नहीं है। सानिया इस देश की बेटी हैं। सानिया ने आज जो कुछ भी हासिल किया है वो अपनी क्षमताओं पर हासिल किया है। ऐसे में अगर उनके बारे में कुछ गलत कहा जाता है तो यह ठीक नहीं है।
   ब्रांड एंबेसडर विवाद पर चुप्पी तोड़ते हुए सानिया मिर्जा ने कहा कि मुझे इस बात से दुख पहुंचा है कि हमारे प्रमुख नेताओं और मीडिया का बहुत सा बहुमूल्य समय तेलंगाना राज्य के मेरे ब्रांड एंबेसेडर बनने जैसे छोटे से मुद्दे पर बर्बाद हो रहा है। मैं गंभीरता से मानती हूं कि ये बहुमूल्य समय देश और राज्य के ज्यादा महत्वपूर्ण मुद्दों को सुलझाने के लिए खर्च होना चाहिए।
   सानिया ने कहा कि मैंने पाकिस्तान के शोएब मलिक से शादी की है लेकिन मैं भारतीय हूं और मरते दम तक भारतीय रहूंगी। सानिया ने कहा कि मेरा जन्म मुंबई में हुआ क्योंकि मेरी मां की हालत मेरे जन्म के समय ठीक नहीं थी और उन्हें एक विशेषज्ञ अस्पताल की जरूरत थी। मैं जब हैदराबाद में अपने घर आई तो महज तीन हफ्ते की थी। मेरे पूर्वज एक सदी पहले से हैदराबाद में रहते आए थे।
   इससे पहले टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा को तेलंगाना का ब्रांड एंबेसडर बनाए जाने को लेकर बीजेपी ने ऐतराज जताया था। बीजेपी ने कहा है सानिया का तेलंगाना से कोई ताल्लुक नहीं है और वो पाकिस्तान की बहू हैं।
   तेलंगाना विधानसभा में बीजेपी के नेता के लक्ष्मण ने आरोप लगाया था कि टीआरएस ने ग्रेटर हैदराबाद नगरपालिका चुनाव से पहले ये कदम जानबूझकर अल्पसंख्यकों को लुभाने के लिए उठाया है। बीजेपी नेता लक्ष्मण ने कहा कि सानिया का जन्म महाराष्ट्र में हुआ और उसके बाद टेनिस खिलाड़ी का परिवार 1986 में हैदराबाद आया।
   लक्ष्मण ने तेलंगाना सरकार द्वारा सानिया को एक करोड़ रुपये देने पर भी हैरानी जताई थी। उन्होंने कहा कि ऐसा कर सरकार दूसरे प्रतिभावान खिलाड़ियों को नजरअंदाज कर रही है। लक्ष्मण ने कहा कि 13 साल की उम्र में 25 मई 2014 को माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली मालावत पूर्णा को केवल 25 लाख दिए गए।
   लक्ष्मण ने कहा था कि सरकार कैसे सानिया को सम्मान दे सकती है। जिसने पाकिस्तानी क्रिकेट खिलाड़ी शोएब मलिक से 2010 में शादी की। बीजेपी नेता लक्ष्मण से आईबीएन7 ने बात की। लक्ष्मण का कहना है कि तेलंगाना सरकार दोहरा रवैया अपना रही है। तेलंगाना अपने ही बनाए नियमों का पालन नहीं कर रही है।
  इससे पहले तेलंगाना राज्य की ब्रांड एम्बेसडर बनाए जाने के बाद टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा ने ट्वीट करके राज्य की पहली ब्रांड एंबेसडर होने पर खुशी जाहिर की और मुख्यमंत्री का आभार प्रकट किया था।
  बीजेपी के ऐतराज पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आ रहीं थी। तमाम राजनीतिक दल बीजेपी के इस ऐतराज को गलत ठहरा रहे थे। तमाम राजनीतिक दलों का कहना था कि ये कोई मुद्दा नहीं है।
6:51 PM | 0 comments | Read More

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