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बहनों की तरह जुड़वा भाई भी लाए एक जैसे नंबर

Written By News Today Time on Friday, May 22, 2015 | 6:20 PM

    रांची।। आईसीएसई-2015 की परीक्षाओं में रांची की जुड़वा बहनों अनुरूपा और अपरूपा ने एक समान नंबर लाकर सबको चौंका दिया है। ये दोनों बहनें अपने स्कूल लॉरेटो कॉन्वेंट की टॉपर भी हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि इनके जैसा कोई और नहीं है। रांची में ही पैदा हुआ कोलकाता में रहने वाले जुड़वा भाई काॢतकेयन और रित्विक ने भी आईएससी की परीक्षाओं में एक जैसे नंबर हासिल किए और अपने संस्थान मि.बिरला हायर सेकंड्री फॉउंडेशन स्कूल, कोलकाता के टॉपर भी बने। चट्टोपाध्याय बहनों के नंबरों में 0.2 प्रतिशत का अंतर है, वहीं खटोर भाइयों ने तो पूरी तरह समान नंबर पाए। अनुरूपा ने 500 में से 490 नंबर हासिल किए, जबकि अपरुपा को 500 में से 489 नंबर मिले। वहीं दोनों खटोर भाइयों ने 400 में से 389 नंबर हासिल किए।
     जुड़वा बहनों के नंबर हिंदी को छोड़कर सभी विषयों में समान थे, वहीं जुड़वा भाइयों के विषय ही एक-दूसरे से अलग थे, जिनमें उन्होंने अलग-अलग नंबर हासिल किए। खटोर भाइयों की मां बताती हैं कि ये दोनों भाई बास्केटबॉल खेलना पसंद करते हैं और स्कूल की टीम से खेलते भी हैं। इन भाइयों की मां से जब यह पूछा गया कि क्या ये दोनों भाई हमेशा एक जैसे नंबर लाते रहे हैं, तो इस पर उनकी मां ने बताया कि इनके क्लास और सब्जेक्ट हमेशा अलग-अलग रहे, लेकिन नंबरों का टोटल हमेशा लगभग एक जैसा रहा है। जुड़वा बहनें जहां डॉक्टर बनना चाहती हैं, वहीं जुड़वा भाई सीए बनना चाहते हैं। जुड़वा भाइयों के पिता ऋषि खटोर भी पेशे से सीए हैं और कोलकाता में खुद की फर्म चलाते हैं।
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आईएस लड़ाकों ने महिलाओं को बनाया सेक्स गुलाम

    नई दिल्ली।। आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) को छोड़कर भारत लौटे अरीब माजिद ने कहा है कि आईएस लड़ाके पुरुषों और महिलाओं के साथ सेक्स गुलाम की तरह व्यवहार करते थे। एक अंग्रेजी अखबार की खबर के अनुसार अरीब ने आईएस छोड़ने की वजह बताते हुए कहा, कि आईएस लड़ाके भारतीयों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार करते थे.आतंकी संगठन ने भारतीयों को आईएस की बाकी गतिविधियों से दूर रखा था। अरीब ने अपने बयान में कहा, महिलाओं को आईएस लड़ाके सेक्स गुलाम की तरह इस्तेमाल करते थे.ये सब मुझे अच्छा नहीं लगा और मैंने आईएस छोड़ने का फैसला किया.
    एनआईए द्वारा दाखिल 8000 पेज की चार्जशीट में इस बयान का उल्लेख है। अरीब पर इंडियन पेनल कोर्ट की धारा 125 के तहत जांच एजेंसी ने मामला दर्ज किया। उल्लेखनीय है कि मई 2014 में मुंबई कल्याण के 4 युवक अरीब माजिद, फहाद शेख, अमान टंडेल और शहीम टंकी ने इराक और सीरिया में आईएस की ओर से शुरू लड़ाई में शामिल होने के लिए घर छोड़ दिया था। भारत लौटने के बाद एनआईए ने पूछताछ के बाद अरीब को गिरप:तार किया था। जाँच एजेंसी ने कोर्ट में मामला पेश कर दिया है।
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नाराज हाई कोर्ट ने कहा, 'काम के बजाए ताले जड़ रही दिल्ली सरकार'



    नई दिल्ली।। दिल्ली सरकार व उपराज्यपाल के बीच चल रही जंग पर दिल्ली हाई कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। हाई कोर्ट ने तीन अलग-अलग मामलों की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि आखिर यह क्या हो रहा है। आम लोग अच्छी सरकार चाहते हैं लेकिन सरकार काम करने के बजाए अधिकारी के कार्यालय पर ताले जड़ रही है।
      मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी व न्यायमूर्ति आरएस एंडलॉ की खंडपीठ के समक्ष अल्पसंख्यक समुदाय के स्कूलों में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चों को दाखिला, नर्सरी दाखिले के लिए जारी किए गए दिशा-निर्देशों को चुनौती व विकलांगों के लिए सड़कों पर ध्वनियुक्त यातायात सिग्नल व अन्य सुविधा प्रदान करने के मामलों पर सुनवाई होनी थी। इस दौरान दिल्ली सरकार व केंद्र की तरफ से कोई वकील पेश नहीं हुआ। अदालत ने दोनों सरकारी वकीलों के प्रति नाराजगी जताते हुए कोर्ट मास्टर को निर्देश दिया कि वह वकीलों को बुलाए। इस पर कोर्ट मास्टर ने देखा कि दिल्ली सरकार के वकील रमन दुग्गल कोर्ट रूम में उपस्थित हैं। उन्होंने इस बात की जानकारी खंडपीठ को दी। खंडपीठ के पूछने पर दुग्गल ने कहा कि उन्हें मामले की तैयारी के लिए समय चाहिए। उनका कहना था कि उनके पास सरकार के मामलों की करीब नौ हजार फाइलें हैं।
आप लोग सुनवाई में पेश क्यों नहीं होते
    अदालत ने वकील के इस रवैये पर नाराजगी जाहिर की और कहा कि यह क्या हो रहा है। आप लोग सुनवाई में पेश क्यों नहीं होते। क्या अदालत को हर बार आपको विशेष निमंत्रण देकर बुलाना पड़ेगा। सरकारें बदलती रहती हैं लेकिन कभी भी इस प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ा।
     अब तो हालत यह हो गई है सरकारी वकील अदालत में दिखाई ही नहीं देते। अदालत ने कहा आप लोग यहां रहा करो, हर मामले में आपको बार-बार नहीं बुलाया जा सकता। अदालत ने केंद्र व सरकारी वकील को मामलों में जल्द से जल्द जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।
केंद्र व दिल्ली सरकार को लगाई कड़ी फटकार
     खंडपीठ ने नेत्रहीन व विकलांग लोगों के लिए ध्वनियुक्त ट्रैफिक लाइट लगाने के मुद्दे पर जवाब दाखिल न करने पर केंद्र व दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा है कि सरकारों के इस आचरण से कैसे प्रशासन की योग्यता में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।
     खंडपीठ ने केंद्र व दिल्ली सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वे मामले में जल्द जवाब दाखिल नहीं करते हैं तो केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव, दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को समन जारी किया जाएगा। अदालत ने कहा कि यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि दिल्ली व केंद्र सरकार ने ऐसे अहम मामले में भी अपना जवाब दाखिल करना उचित नहीं समझा और न ही उनके वकील अदालत में पेश हो रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई 1 जुलाई को होगी।


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पाकिस्तान के आये हिंदू परिवारों की स्थिति दयनीय

     नई दिल्ली।। 2011 से लगातार पाकिस्तान से हिंदुस्तान आ रहे हिंदू परिवारों की स्थिति दयनीय है। मौजूदा समय में 250 से अधिक हिंदू परिवारों के 1300-1400 सदस्य हिंदुस्तान में हैं, लेकिन उनकी स्थिति बद से भी बदतर है। हालात ये हैं कि वो आज सिर्फ दया के सहारे जीने को अभिशप्त हैं। दरअसल, वो सालों से हिंदुस्तान में रहकर हिंदुस्तानी नागरिक बनने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनके पास आजीविका का जरिया नहीं हैं। वो दिल्ली में तो हैं, लेकिन कोई काम नहीं कर सकते। हिंदुस्तान में तो हैं, लेकिन दिल्ली के बाहर नहीं जा सकते। मौजूदा समय में दिल्ली के मजनूं का टीला, रोहिणी सेक्टर 11 और आदर्श नगर में जलबोर्ड की जमीनों पर अस्थाई झोपड़ों और टैंटों में ये 1400 पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी किसी तरह रह रहे हैं। पाकिस्तानी हिंदुओं का दर्द है कि वो पाकिस्तान में होने वाले जिन अत्याचारों से मुक्ति के लिए भागे थे, उनसे मुक्ति नहीं मिली है, क्योंकि वो यहां भी खुद को अलग-थलग ही पाते हैं। मजनूं का टीला में बने अस्थाई कैंप के मुखिया दयाल दास कहते हैं कि वो दिल्ली में तो रह रहे हैं, तमाम खर्च भी कर रहे हैं। लेकिन जो कुछ चल रहा है, वो सिर्फ लोगों की दया पर। हमें कुछ हिंदू संगठनों की मदद मिल रही है। वो बीच में अनाज दे जाते हैं। खर्च के लिए पैसे दे जाते हैं। कुछ एनजीओ भी मदद कर रहे हैं। आपातकालीन स्वास्थ्य संबंधित जरूरतों में एक एनजीओ मदद करती है। कोर्ट के मामलों के हिंदू महासभा देख रही है। दरअसल, ऐसा इसलिए कि हमारे पास कमाने के अधिकार नहीं हैं। हम रेहड़ी-पटरी भी नहीं लगा सकते। पाकिस्तानी होने का ठप्पा हमें कहीं काम नहीं दिला पाता। हम दिल्लीवालों के लिए शरणार्थी हैं, लेकिन हम इस जीवन के लिए यहां नहीं आए थे।
     दयाल दास कहते हैं कि हमें नरेंद्र मोदी सरकार से बहुत उम्मीदें हैं। लेकिन सरकार ने हमारे लिए अबतक कुछ नहीं किया। हमारी सरकार से गुहार है कि वो हमें सिर्फ लांग टर्म वीजा ही न दे, बल्कि शरणार्थी का दर्ज देते हुए तिब्बतियों की तरह से अधिकार भी दे। उन्होंने कहा कि आज लाखों तिब्बती देश के कोने-कोने में व्यवसाय कर रहे हैं। उनके लिए धर्मशाला में तमाम अधिकार हैं। वो अलग पहचान लेकर भी भारत में शान से रह रहे हैं। हम उनकी बुराई नहीं कर रहे, बल्कि हमें जलन हो रही है। हम पाकिस्तान से किसी तरह से जान बचाकर यहां आए हैं। हम वापस पाकिस्तान नहीं जा सकते, और यहां भारत सरकार रहने नहीं दे रही। दयाल दास कहते हैं कि हमारे लोग फरीदाबाद में जाकर काम-धाम करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने वापस लोगों को दिल्ली भेज दिया। हम सड़क के किनारे किस तरह से जीवन जिएं वो तो भला हो तत्कालीन एसडीएम का, जिन्होंने तमाम विरोध-प्रदर्शनों के बाद हमें मजनूं का टीला में अस्थाई घास-फूस के आवास बनाने दिए और टैंट लगवाए, लेकिन अब कइयों की वीजा अवधि समाप्त हो चुकी है। तो हमारी कोई मदद नहीं कर रहा। हम अगर मजनूं का टीला में ही सड़क के किनारे छोटे-मोटे काम करते हैं, तो पुलिस वाले हमें भगा देते हैं। अब बताइए, जिस हिंदुस्तान में सभी को जीने के समान अवसर प्राप्त हों, वो हम हिंदू भाइयों की मदद क्यों नहीं कर रहा जबकि हम वैध तरीके से अपने जीवन जीने का अधिकार और देश की नागरिकता मांग रहे हैं। आज तमाम बांग्लादेशी अवैध तरीके से हिंदुस्तान की नागरिकता ले चुके हैं, लेकिन हमें वैध तरीके से भी इज्जतदार जिंदगी बसर नहीं करने दिया जा रहा। क्या यही है हिंदुस्तान की उदारता।
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65 साल की उम्र में की हाईस्कूल परीक्षा पास

    फतेहपुर।। कहावत है कि पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती, इंसान के अंदर जज्बा हो तो वह शिक्षा से तमाम ऊंचाइयों को छू सकता है। वेद, पुराण, कुरआन, बाइबिल सभी पवित्र किताबें शिक्षा को बढ़ावा देतीं है। शिक्षा के लिए तो लोग दूसरे देशों तक कि यात्रा कर अपने को उस विधा में निपुण बनाने का प्रयास करते हैं। इसी को सत्यार्थ करते हुए पैंसठ वर्षीय वृद्ध जो अपने पढ़ाई के जज्बे को रोक न पाया और उसने यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा पढ़कर दे डाली और जब रिजल्ट आया तो वह अच्छे नंबरों से पास भी हो गया। इसके बाद से ही पूरे इलाके के लोग अभी तक उसे बधाइयां दे रहे हैं। नतीजे आने के बाद से अभी तक इस बुजुर्ग को इस कदर शुभकामनाएं मिल रही हैं कि अब पूरे जनपद में वह सुर्खियों में आ गया है।
     खागा तहसील के ग्राम रहमतपुर निवासी 65 वर्षीय अतहर अहमद खां को अपने निरक्षर होने की बात हमेशा अखरती रही। साक्षर मिशन से प्रभावित होकर वृद्ध अतहर ने हाईस्कूल की परीक्षा दे डाली और पहले ही प्रयास में वह सफल हो गया। इसके बाद धीरे-धीरे जब लोगों को अतहर के पास होने की सूचना मिली तभी से उसके घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। भीड़ और स्वागत इस कदर हो रहा है कि टॉप करने वाले छात्रों के स्कूल और घर का जश्न भी फीका पड़ जाए। बुजुर्ग अतहर ने बताया कि इस दुनिया में अब निरक्षर होने का कोई मतलब नहीं है। साक्षर व्यक्ति ही अपनी जिंदगी को रोशनी और उमंगों के साथ जी सकता है। इस बुजुर्ग ने सभी से आह्वान किया कि वह स्वयं पढ़ें और अपने बच्चों को भी पढ़ाने की कोशिश करें जिससे उनके ऊपर से निरक्षर होने का दाग मिट जाए।
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आईएस में 'भर्ती' व्यक्ति ने किया स्वदेश वापसी का फैसला

विशेष अदालत को एनआईए ने बताया
   नई दिल्ली।। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एक विशेष अदालत को बताया कि आईएसआईएस में 'भर्ती' हुआ आरिफ मजीद इराक में लड़ते हुए घायल होने के बाद वापस भारत में ''घुसना" चाहता था लेकिन मुंबई आने पर उसे गिरफ्तार किया गया है। एनआईए ने यह बात विशेष एनआईए न्यायाधीश वाई डी ङ्क्षशदे की अदालत में कल्याण टाउनशिप के रहने वाले 23 वर्षीय मजीद के खिलाफ दायर 8,000 पन्नों के अपने आरोप पत्र में कही जो सात खंडों में है। आरोपपत्र में कहा कि 'अगस्त से अत्तूसबर 2014 के बीच वह दो बार गोली लगने तथा एक बार अमेरिकी हमले सहित कुल तीन बार घायल हुआ। इसमें कहा गया कि इसी समय उसने भारत लौटने का फैसला किया। एनआईए ने कहा कि नवंबर 2014 में उसने तुर्की के भारतीय दूतावास में बात की और कहा कि उसका पासपोर्ट खो गया है। दूतावास ने उसे 'आपातकालीन प्रमाणपत्र' जारी किया। 
    एनआईए का कहना है कि उसने भारत में घुसने का प्रयास किया और वह एक तुर्की एयरलाइंस फ्लाइट में सवार हुआ लेकिन उसे मुंबई उतरने पर गिरप:तार कर लिया है। मजीद पिछले साल 28 नवंबर में मुंबई लौटा, जिसके बाद उसे हिरासत में लिया गया और फिर गिरफ्तार किया गया। इराक जाने से पहले मजीद ने आईएसआईएस के बारे में ज्यादा जानकारी जुटाने के लिए सोशल नेटवर्किंग साइटों से कुछ वीडियो डाउनलोड किये। उसने इन वेबसाइटों के जरिये लोगों से संपर्क करना शुरू किया और इस दौरान वह कल्याण के तीन अन्य युवकों के संपर्क में आया जो अब भी लापता हैं। आरोपपत्र में कहा गया कि चारों लड़कों ने नियमित रूप से मिलना शुरू कर दिया था और आईएसआईएस में शामिल होने का फैसला किया। गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धारा 125 जो ऐसे एशियाई देशों के खिलाफ युद्ध छेड़ने पर लागू होती है, जिनके भारत के साथ दोस्ताना संबंध हैं: के तहत आईएसआईएस, मजीद और अन्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। वे सभी इंजीनियंरिंग के छात्र हैं।
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इन भ्रष्ट अधिकारियों के आगे हरकोई बौना

     नई दिल्ली।। न्याय के आशा में 18 मार्च 2015 से दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना में बैठे मो. जलील है, उम्र 38 वर्ष कुआटर नं. एस.वी.ऐ.-184, सी.आई.एस.एफ. कॉलोनी, पोस्ट-दनांनजोड़ी, जिला-कोरापुट, ऊड़ीसा-763008 का कहना है कि मुझे सी.आई.एस.एफ. कामांन्डेंट ने 11 झूठे चार्ज लगाकर बिना मेरा जवाब प्राप्त किये नौकरी से 02 दिसम्बर 2013 को बरखास्त कर दिया। हिन्दुस्तान में आज तक किसी के ऊपर एक साथ 11 चार्जशीट नहीं लगाई गई जो विकृति मानसिकता और बदले लेने की भावना से की गई है। इस मामले की सुनवाई ऊड़ीसा हाई कोर्ट 'कटक' में हो रही है। उपर्युक्त आदेश को कोर्ट ने गलत मानते हुए आदेश जारी किया कि यह गलत है जिससे 31.10.2014 को कोर्ट की अवमानना और गलत आदेश के लिए सी.आई.एस.एफ. कामांन्डेंट ज़ोपोनेई जू को अपनी गलती की माफी मांगनी पड़ी। इसके लिए मैने तमाम नेता, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से न्याय के लिए गुहार लगाई पर मुझे अभी तक न्याय नहीं मिला। 
     मेरे इस केस की जांच सी.आई.एस.एफ./बी.एस.एफ/सी.आर.पी.एफ./ आई.टी.बी.एफ/एस.एस.बी. को छोड़कर अन्य किसी भी स्वतंत्र संस्था से कराई जाये क्योंकि से भ्रष्ट हो चुकी है। कुछ ऐसी ही हालत श्री राम अयोध्या प्रसाद उम्र 61 वर्ष, डी.वी.सी. पंचेत, धनबाद, बिहार के सी.आई.एस.एफ. में नौकरी करने वाली की है जिसे जाति प्रमाणपत्र के नाम पर चार्जशीट लगाकर 29.8.2012 को बरखास्त कर दिया गया। मामला लड़की की शादी के लिए छुट्टी मांगने पर हुआ। सहायक सी.आई.एस.एफ. कामांडेंन्ट डी.के. कार और कौशिक गांगुली सी.आई.एस.एफ.कामांडेंन्ट की कार्यवाही से ऐसा हुआ जिसने आज तक उनकी नौकरी बरखास्त करने के बाद सैलरी और प्रोवीडेंट फंड की राशी भी नहीं लेने दी। आखिर इन भ्रष्ट अधिकारियों को कौन दंड देगा। जहां न्याय पालिका, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी बौने साबित हो रहे हैं तो न्याय की आशा कैसे की जा सकती है।
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मोदी अंकल को तरक्की दे अल्लाह

      आगरा।। मोदी अंकल को लेकर कोई कुछ भी कहे, पर अंकल बहुत अच्छे हैं। उनकी वजह से ही जल्द मेरा इलाज होगा और मैं ठीक हो जाऊंगी। मोदी अंकल को अल्लाह खूब तरक्की दे। ये शब्द हैं कक्षा चार की छात्रा तैयबा के। जो अम्मी चांदबी से जुदा नहीं होना चाहती। जुदाई की सोच से ही वह रोने लगती है।
    मंटोला के अब्दुल खालिद की बेटी तैयबा के हृदय का वाल्व जन्म से खराब है। परिजन इलाज का खर्चा उठाने में असमर्थ हैं। इस पर मासूम तैयबा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। तैयबा ने बताया कि पत्र कैसे लिखा जाता है, यह उसे पता ही नहीं था।
     राजीव मॉडर्न पब्लिक स्कूल में जो पढ़ाया गया था, उसी के आधार पर पत्र लिखा और फिर न सिर्फ उसका जवाब आया, बल्कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने इलाज का खर्चा उठाने का आश्वासन दिया। मंत्रालय के अपर सचिव व निदेशक हॉस्पिटल सर्विसेज द्वारा लिखे गए पत्र में जीबी पंत अस्पताल में तैयबा का इलाज कराने की बात कही गई है।
बदल रहा है मुस्लिम समाज का नजरिया :
    अब्दुल खालिद का कहना है कि प्रधानमंत्री उनकी बेटी के लिए फरिश्ता हैं। मुस्लिमों के सहयोगी हैं। मुस्लिम समाज के लोगों का भी उनके प्रति नजरिया बदल रहा है।

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निकाला दुनिया का सबसे बड़ा किडनी ट्यूमर

    नई दिल्ली।। एम्स के डॉक्टरों ने दुनिया का सबसे बड़ा किडनी ट्यूमर निकालने में कामयाबी पाई है। एम्स के डॉक्टरों का दावा है कि इस किडनी ट्यूमर का वजन 5.018 किलोग्राम है, जो अब तक निकाले गए सभी ट्यूमर से बड़ा है। यह ट्यूमर साइज में इतना बड़ा था कि यह किडनी से होते हुए लंग्स तक पहुंच गया था। लेकिन डॉक्टरों ने ओपन सर्जरी कर इस किडनी ट्यूमर को निकाल दिया है। हाल ही में गंगाराम अस्पताल में किडनी ट्यूमर निकाला गया था, जिसका वजन 2.75 किलोग्राम था। बिहार के दरभंगा निवासी के.एल.दास (66) के पेट के दाहिने हिस्से में यह ट्यूमर था। ट्यूमर की वजह से उन्हें पहले तो कोई परेशानी नहीं थी, लेकिन पेट के नीचे भारीपन था। पहली बार रूटीन चेकअप में तो उन्हें पता नहीं चला कि ट्यूमर है, लेकिन जब सीटी स्कैन कराया तो पता चला कि ऐसा कोई ट्यूमर है। इसके बाद परिजन उन्हें इलाज के लिए एम्स लेकर पहुंचे, जहां शुरुआती जांच के बाद डॉक्टर ने सर्जरी करने का फैसला किया।
     एम्स के ऑन्कॉलजी सर्जन डॉक्टर एम.डी.रे ने बताया कि 20 गुणा 15 सेमी का एक बड़ा-सा ट्यूमर पेट के राइट साइड में था। यह इतना बड़ा था कि राइट किडनी को कवर करने के बाद लंग्स तक पहुंच गया था। अच्छी बात यह थी कि लंग्स में एक छोटा-सा टुकड़ा ही ट्यूमर का था। बड़ी सर्जरी थी, इसलिए पेट से लेकर थोरासिक यानि कि छाती तक चीरा लगाकर पूरी किडनी को एक साथ बाहर निकाला गया। यह सर्जरी 14 मई को की गई। सुबह 9 बजे सर्जरी की शुरुआत की गई और 2.30 बजे तक सर्जरी पूरी हो चुकी थी। डॉक्टर रे ने कहा कि मरीज की उम्र ज्यादा थी, इसलिए हमने पहले प्रीएनेस्थेटिक चेकअप किया और फिर रेडिकल नेफ्रेकटॉमी विद रिसेक्शन आफ लंग लेसन करने का फैसला किया। सर्जरी के दौरान पेट के बाएं तरफ के निचले हिस्से से चेस्ट के दाहिने तरफ तक चीरा लगाया। इसके बाद सबसे पहले लीवर और राइट कोलोन को अलग किया गया, राइट ग्लैंड को ट्यूमर से बचाकर अलग किया गया। सर्जरी के दौरान राइट किडनी समेत पूरे ट्यूमर को निकाल दिया गया और लंग्स में जो छोटा ट्यूमर था, उसे भी निकाल दिया गया।
   एम्स के डीन और कैंसर एक्सपर्ट डॉक्टर पी.के.जुल्का ने कहा कि यह ट्यूमर कैंसर वाला था या नहीं, इसकी जांच की जा रही है। एक-दो दिन में उसकी रिपोर्ट आ जाएगी। डॉक्टर जुल्का ने कहा कि ट्यूमर क्यूं होता है, यह बताना मुश्किल है। हर मरीज में इसके बनने की वजह अलग-अलग है। किसी में जेनेटिक तो किसी में कोई और वजह हो सकती है। के.एल.दास के बेटे गुंजन ने बताया कि दो महीने पहले तक उन्हें कोई परेशानी नहीं थी, लेकिन अचानक यह ट्यूमर हो गया और उन्हें भारीपन का एहसास होने लगा। डॉक्टर जुल्का ने कहा कि ऐसे ट्यूमर बहुत जल्दी बढ़ते हैं और सर्जरी ही एकमात्र इलाज है।

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करें हवाई यात्रा एक रुपया किलोमीटर के रेट पर

   नई दिल्ली।। किफायती विमानन सेवा देने वाली निजी कंपनी एयरएशिया इंडिया ने गुरुवार को दिल्ली से उड़ान सेवा शुरू कर दी। कंपनी ने पिछले महीने कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी उत्तर भारत के लिए हब के रूप में काम करेगी।अपनी उड़ान सेवा में इस विस्तार के बाद एयरएशिया नई दिल्ली से बेंगलुरु, गुवाहाटी और गोवा को जोड़ेगी।एयरएशिया ने नई दिल्ली-गुवाहाटी रूट के लिए 1,500 रुपये या एक रुपये प्रति किलोमीटर की पेशकश की है। साथ ही नई दिल्ली-गोवा और नई दिल्ली-बेंगलुरु के लिए 1,700 रुपये किराया निर्धारित किया है।इस बीच, एयरलाइन ने बेंगलुरु से विशाखापट्टनम रूट पर अगले महीने से शुरू हो रही उड़ान सेवा के लिए की 1400 रुपये किराये की पेशकश की है।कंपनी ने जारी बयान में बताया कि सस्ते किराये वाली टिकट की बुकिंग गुरुवार से शुरू हो गई है, जो 24 मई तक चलेगी। इस टिकट पर 18 जून 2015 से 31 मई 2016 तक यात्रा की जा सकेगी।
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तालीबानी फरमान: प्रेम विवाह करने पर 50 हजार का लव मैरिज टैक्स अदा करने का फरमान


   बिहार।। प्रेम विवाह करने पर 50 हजार का लव मैरिज टैक्स अदा करने का फरमान सुनाया गया है। टैक्स अदा न करने पर गांव छोड़ने की चेतावनी दी गई है।
    यह तालीबानी फरमान गांव के कुछ दबंगों की ओर से प्रेमी युगल और उनके परिजनों को सुनाया गया है। प्रेमी जोड़े की खता सिर्फ इतनी थी कि उसने अंतर जातीय विवाह किया था, जो गांव के दंबगों को रास नहीं आया। मामले में पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया है।
    अंग्रेजी अखबार द हिंदू में छपी खबर के अनुसार बिहार के कैथर जिले के आजमनगर निवासी चंदन यादव (30) और सोनी देवी (22) ने छह माह पूर्व घर से भागकर शादी रचा ली थी।
     मामले में कुछ दिन हंगामा मचने के बाद दोनों के परिवारवालों और गांव ने उनके रिश्ते को स्वीकार कर लिया था। जिसके बाद प्रेमी युगल घर लौट आया था। उनके गांव आने के कुछ दिन बाद गांव के ही कुछ दबंगों ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया।
     चंदन यादव ने बताया कि उनसे प्रोटेक्‍शन मनी या लव मैरिज टैक्स के तौर पर 50 हजार रुपये की मांग की जा रही थी। पैसे न देने पर लगातार गांव से निकलने की धमकी दी जा रही है। उनका कहना था कि हमने बिरादरी से बाहर शादी की है इसलिए ये रकम चुकानी होगी।
     चंदन की पत्‍नी सोनी देवी ने बताया कि आरोपियों ने उन्हें धक्‍का देकर चोट पहुंचाने का भी प्रयास किया। चंदन यादव कैथर में वेटर के तौर पर काम करता था, लेकिन शादी के बाद वह लौट आया। इसके बाद से ही उसे लगातार धमकियां मिल रही हैं।
    मामले में उसने क्षेत्रीय विधायक महेन्द्र यादव से अपनी समस्या बताई। जिसके बाद विधायक ने कैथर के एसपी क्षत्रणैल सिंह को मामले से अवगत कराया। एसपी का कहना था मामले में पुलिस को जांच करने के आदेश दे दिए गए हैं। अगर मामला सही पाया जाता है तो आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

12:05 PM | 0 comments | Read More

मीडिया पर भड़के थरूर कहा गिरे हुए लोगों से नहीं करेंगे बात

      नई दिल्ली।। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता शशि थरूर ने एक बार फिर मीडिया पर जमकर निशाना साधा है। पत्री सुनंदा पुष्कर की संदिग्ध मौत पर सवाल पूछे जाने पर थरूर ने मीडिया को झूठा और गिरा हुआ करार दिया। तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर जब पत्रकारों ने सुनंदा पुष्कर की मौत पर उनसे सीधे सवाल पूछे तो थरूर ने कहा कि वो सिर्फ पुलिस से बात करेंगे। झूठों और गिरे हुए लोगों से नहीं। 
     बता दें कि मीडिया को लेकर थरूर का ये रूख तब सामने आया जब बुधवार को दिल्ली की एक अदालत ने पुलिस को सुनंदा केस के तीन गवाहों के लाई डिटेक्टर टेस्ट की इजाजत दे दी। इस मामले में शशि थरूर से तीन बार पूछताछ हो चुकी है। सुनंदा पुष्कर की पिछले साल 17 जनवरी को दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया था।
11:54 AM | 0 comments | Read More

अमृतसर में खुली देश की पहली पेट्रोल फायनस कंपनी


Idiot Club Petrol     अमृतसर।। पंजाब के अमृतसर में खुली देश की पहली पेट्रोल और डीजल फाइनस करने वाली कंपनी दरअसल लगातार पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ने की बाद इडियट क्लब के सदस्यों ने मोदी सरकार पर कटाक्ष किया है उन्होंने इडियट पेट्रोल फाईनस कंपनी खोली है जिसके तहत कोई भी अपने डाकुमेंट देकर और एक सरकारी ग्रांटर देकर पेट्रोल फायनस करवा सकता है वहीँ इडियट क्लब के प्रमुख राजिंदर रिखी ने खबर हर पल इंडिया के साथ बात करते हुए बताया के मोदी सरकार ने जो लोगों को अछे दिनों के सपने दिखाये थे वो चूर चूर हो गए हैं और महंगाई लगतार बढ़ रही है वहीँ उन्होंने कहा के आने वाले दिनों में हालात ऐसे होंगे के लोगों असल में पेट्रोल और डीजल फाईनस करवाना पढ़ेगा। 




(बिक्रम गिल /सोनू सोढ़ी)
11:51 AM | 0 comments | Read More

आक्रोशित आमजन की सुनवाई खुद मुख्यमंत्री करें - गहलोत

केन्द्र के एक साल से देशवासियों में भयंकर निराशा
     यपुर, 21 मई। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि अब तो खुद भाजपा ने ही स्वीकार कर लिया है कि राजस्थान में हालात ठीक नहीं है। मैं पहले से ही आगाह करता आ रहा हूं कि भारी बहुमत के साथ सत्ता में आई भाजपा सरकार जनता की अपेक्षा के अनुरूप काम नहीं कर रही है। आमजन परेशान है। उनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। मेरा मानना है कि परेशान एवं आक्रोशित आमजन की सुनवाई खुद मुख्यमंत्री को करनी चाहिए।
     पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री महोदय अब भी सिर्फ अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं एवं जन-प्रतिनिधियों से मिलने की बात कह रही हैं। पहला तो पार्टी के कार्यालय में जन-सुनवाई का कोई तुक नहीं है, जन-सुनवाई मुख्यमंत्री के निवास पर होती है, मंत्रियों के घरों पर होती है या फिर आम जगह हो सकती है। पार्टी कार्यालय में भी उन्हीं लोगों को अनुमति दी गई जिन्हें ब्लाक अध्यक्ष या जिलाध्यक्षों ने लिख कर दिया। इसको आमजन कैसे बर्दाश्त करेगा। इसके अलावा जो व्यक्ति भाजपा से ताल्लुक नहीं रखता वो उनके कार्यालय में क्यों जायेगा।
     गहलोत ने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार ने डेढ साल का कार्यकाल सैर-सपाटे और समीक्षाओं के नाम पर ही निकाल दिया। पूर्व कांग्रेस सरकार की कल्याणकारी योजनाऐं रोक दी, मेट्रो को रोक दिया गया, रिफाइनरी रोक दी गई, जितने भी विकास के कार्य चल रहे थे वो सब ठप्प कर दिये गये। पानी और बिजली की समस्या खड़ी हो गई और कानून व्यवस्था तो पूरी तरह चौपट हो गई।
     गहलोत ने कहा कि ऐसी जानकारी सामने आई है कि भाजपा के राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री श्री सौदान सिंह ने मुख्यमंत्री की मौजूदगी में कहा है कि भारी बहुमत के बावजूद हालात ठीक नहीं है। मेरा मानना है कि लापरवाही और बदले की भावना से शासन चलाने का ही यह परिणाम है कि राजस्थान में हालात खराब हैं।
    प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में एक कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए गहलोत ने केन्द्र सरकार के एक साल के कार्यकाल पूरा करने के सवाल पर कहा कि एक साल तो यूं ही चला गया, एक सपना आया था वो चकनाचूर हो गया, पूरे देश की जनता में निराशा है, वादा खिलाफी हुई, उनके साथ धोखा हुआ है, ऐसी निराशा मैंने कभी नहीं देखी। केन्द्र के साथ राजस्थान की भी सरकार है जिसमें छः महिने में नहीं बल्कि चार महिने में ही लोगों के मुंह पर आ गया कि ये कैसी सरकार है?
गुर्जर महापंचायत
     एक प्रश्न के उत्तर में गहलोत ने कहा कि मेरा मानना है कि गुर्जर समाज को चाहिए कि लोकतंत्र में समस्या के समाधान के लिए शांति से बातचीत का रास्ता अपनायें। हिंसा का रास्ता उचित नहीं है। सरकार को भी चाहिए कि आगे बढ़कर उनसे बात करें और उनकी समस्या के समाधान का प्रयास करे।
डांगावास घटना
   गहलोत ने डांगावास घटना पर पूछे गये एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि मैं पहले ही कह चुका हूं कि पुलिस प्रशासन द्वारा पहले ही कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए आवश्यक कदम उठा लिये गये होते तो ये घटना ही नहीं होती। दुर्भाग्य की बात है कि प्रदेश के गृह मंत्री हमेशा पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की पीठ ही थपथपाते रहे हैं, पता नहीं उनकी क्या कमजोरी है? उन्हें दो टूक बात करनी चाहिए जिसकी गलती है उसको सजा दें, चाहे वो कोई व्यक्ति हो, अधिकारी हो या कर्मचारी हो। पर वो यह नहीं करेंगे। यह इतनी बड़ी घटना है कि आज पूरे देश में इसकी चर्चा है। प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह चौपट है। यदि इसे सम्भाला नहीं गया तो यह हम सबके लिए चिन्ता का विषय होगा।
बलिदान दिवस
      गहलोत ने कहा कि स्वर्गीय श्री राजीव गांधी की प्रासंगिकता आप देख ही रहे हैं कि किस रूप में उन्होंने इस देश को नेतृत्व दिया। उनके संदेश से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है। आज के वक्त में इसकी ज्यादा जरूरत है, क्योंकि देश में आज जिस प्रकार की राजनीति की जा रही है, बहुत ही निम्न स्तर की है। चुनाव के दौरान जिस रूप में असत्य बोलकर माहौल बनाया गया और आम जनता को भ्रमित किया गया, विशेष रूप से युवा पीढ़ी को, तो युवा नेता राजीव गांधी का जो संदेश था वो इस रूप में रिलेवेन्ट है कि हम उनके आदर्शों, संदेश को आत्मसात करें और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचायें।
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यमुना एक्सप्रेस वे को छू कर उड़ा वायु सेना का लड़ाकू विमान, परीक्षण सफल

Written By News Today Time on Thursday, May 21, 2015 | 8:54 PM



   नई दिल्ली।। यमुना एक्सप्रेस वे पर मथुरा के पास गुरुवार सुबह एयरफोर्स के एक लडा़कू विमान का ट्रायल रन कराया गया। सुबह 6.45 बजे यमुना एक्सप्रेस वे पर विमान मिराज 2000 को दो बार टचडाउन कराया गया। यानी सेना का यह विमान सड़क को छूकर फिर से उड़ गया।
    देश में ऐसा प्रयोग पहली बार किया गया है और इस दौरान एक्सप्रेस वे को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। वायु सेना के विमान उतारे जाने के बाद यमुना एक्सप्रेस वे पर एयरफोर्स का हेलिकॉप्टर भी उतारा गया।
    इस एक्सरसाइज के दौरान बड़ी संख्या में एयरफोर्स के अफसर भी मौजूद थे। मिराज-2000 के टचडाउन से पहले वायुसेना के एक हेलिकॉप्टर ने कई चक्कर भी लगाए। दरअसल यूपी सरकार की ओर से यमुना एक्सप्रेस वे की तरह ही ताज एक्सप्रेस का निर्माण भी किया जा रहा है, जो लखनऊ से आगरा को जोड़ेगा।
यह भी पढ़ें - आखिर सड़कों पर क्यों उतारे जाते हैं लडा़कू विमान
   विमान की लैंडिंग यह जांचने के लिए की गई कि आपात स्थिति में एक्सप्रेस वे पर विमान उतर सकते हैं या नहीं। अब उत्तर प्रदेश में 13 हजार करोड़ की लागत से बन रहे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर आपात स्थिति में लड़ाकू विमान भी उतर सकेंगे। यह देश का पहला एक्सप्रेस-वे होगा, जिसे एयर स्ट्रिप की तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा।




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आप भी जाने मोदी सरकार की कुछ खास बांते ....

मोदी की विदेश यात्राओं पर सोशल मीड़िया में काफी जोक्स बनाये जा रहे है.. लेकिन कुछ तथ्य जिन्हे जानना भी देशवासियों के लिए जरुरी है -
1) मोदी 365 दिनों में से 53 दिन विदेश यात्राओं पर रहे है.. मौजूदा चीन यात्रा को पकड़ के..और कुल 17 देशों का दौरा किया है. दूसरी तरफ डॉ मनमोहन सिंग (UPA -2, पहिला साल), 365 दिनों में से 47 दिन विदेश यात्रा पर रहे है. और सिर्फ 12 देशों का ही दौरा किया है..
2) दोनों ने लगभग समान दिन बिताये है विदेश में.. पर मोदी ने ज्यादा देशों का दौरा किया है, मनमोहन से तुलना करने पर..
3) और साफ़ फर्क ये है की, मोदी के दौरे Official State Visits रहे है, जबकी मनमोहन सिंग के दौरे Summit-Oriented रहे है जैसे की यु.एन., ब्रिक्स, सार्क, NAM, ASEAN, वगैरा.
4) मोदी ने एक साल में कुल 57 करार किये है 17 देशो से.. जबकि मनमोहन सरकार 22 करार ही कर पायी, 12 देशों से..
5) मोदी ने एक साल में 40% ज्यादा FDI भारत में लाया है.. जबकि मनमोहन सरकार सिर्फ 18% ज्यादा..
6) मोदी सरकार में विदेशी मुद्रा 18% बढ़ी है जबकि मनमोहन सरकार में सिर्फ 5.5%.. और मजे की बात ये है की मनमोहन सिंह की विदेश यात्राओं पर 650 करोड़ रूपये खर्च हुए है..और उनके साथ सेकड़ो मीडिया वाले भी जाते थे सरकारी पैसे से, जो मोदी ने बंद कर दिया है.." पर मोदी के विदेश दौरे ज्यादा चर्चा में रहे है, क्योंकी पिछले एक साल में दुनिया भर में भारत की साख और इज्जत बढ़ी है..
   मोदी किसी भी नेता की आँख में आँख डालकर बात करते है..अमेरिका, जापान, कनाडा, ऑस्ट्रलिया, और अब चीन में जो मोदी का रॉकस्टार स्वागत हुआ है, तो पुरे विश्व में चर्चा तो होगी ही.. साथमें कुछ लोगों के पेट में भी दर्द उठेगा."--------


(प्रिया भाटिया)


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बच्चों को पसंद आया मोदी अंकल का तोहफा

    जयापुर की तस्वीर बदल चुकी है। बच्चे हों या बड़े-बुजुर्ग अब कोई भी गांव छोड़कर नहीं जाना चाहता है।
     मोदी के जयापुर में एक और 'क्रांत‌ि', प्रधानमंत्री का गोद लिया गांव जयापुर इतना बदला कि बच्चों को भी भाने लगा। साक्षी, पलक, मोहित, सावन, निखिल.. ये है जयापुर की किड्स ब्रिगेड। कोई नर्सरी का छात्र है तो कई कक्षा चार का, मगर सबकी आपस में गहरी दोस्ती है। दोस्ती की वजह है गांव में लगा नया झूला।
इनमें से कोई भी अबकी गर्मी की छुट्टियों में अपने नाना या मामा के यहां नहीं जाना चाहता। वजह पूछने पर कहते हैं, वहां न तो ऐसा झूला मिलेगा और न ऐसी चहल-पहल। ...और अब तो मेरा गांव देखने मौसी के बच्चे खुद ही आ गए।
      गांव अगर बदल जाएं तो उन्हें कोई नहीं छोड़ना चाहेगा। कम से कम बच्चों का ये मामला तो यही कहता है। गांव में आंगनबाड़ी केंद्र के बाहर दो झूले और एक रैंप लगाया गया है। जब से यह झूला लगा है, बच्चों की तो मानो चांदी हो गई है। जब भी मौका मिलता है घर से भागकर सभी यहां पहुंच जाते हैं। झूले दो हैं और झूलने वाले ढेरों, सो यहां नंबर लगता है।
     मोहित, सावन और पायल किड्स ब्रिगेड के सबसे जूनियर सदस्य हैं। कक्षा तीन में पढ़ने वाले निखिल टीम लीडर हैं। गर्मी की छुट्टियों के बारे में पूछने पर कहते हैं, राजातालाब में मामा का घर है। हर साल स्कूल बंद हो जाने के बाद अम्मा मुझे मामा के यहां भेज देती थीं मगर अबकी मैं नहीं जाऊंगा। क्योंकि अब झूला और ‘फिसलने वाला’ यहीं लग गया है।
    इन बच्चों की बातों से तो एक बात तय है कि अबकी गर्मी की छुट्टियों में गांव बच्चों से गुलजार रहेगा। जानकी और चांदनी ने तो अपनी मौसी की लड़कियों को गांव में ही बुला लिया है। शाम के चार बजते-बजते आंगनबाड़ी केंद्र के पास बच्चों की धमाचौकड़ी शुरू हो जाती है। हैंगिंग और स्टैंडिंग झूले के साथ ही पारंपरिक सीढ़ी और रैंप भी है। चोट से बेफिक्र बच्चे यहां खूब मस्ती कर रहे हैं। बच्चों को मोदी अंकल का तोहफा खूब पसंद आ रहा है।
    'जयापुर की तस्वीर बदल चुकी है। बच्चे हों या बड़े-बुजुर्ग अब कोई भी गांव छोड़कर नहीं जाना चाहता है। गली-चौराहे से लेकर चट्टी-चौपाल तक गुलजार हैं। पूर्व के सालों में बच्चे गर्मी की छुट्टियां होते ही अपने ननिहाल या रिश्तेदारों के यहां घूमने चले जाते थे मगर तमाम घरों से सुनने में मिल रहा है कि इस बार बच्चे छुट्टी में कहीं बाहर नहीं जाना चाहते।


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दाऊद पर सबसे बड़ा वार करने की तैयारी में भारत सरकार

    नई दिल्ली।। दाऊद इब्राहिम ने अपने काले धंधों की बदौलत भारत और दुनिया के कई देशों में अरबों की दौलत जुटा रखी है। इकबाल मिर्ची की मदद से उसने 5000 करोड़ की दौलत बनाई है। रुपया रुपए को खींचता है इसी कहावत को शायद भारत का दुश्मन अंडरवल्र्ड डॉन दाऊद इब्राहिम अपना मंत्र मानता है। इसलिए उसने करोड़ों रुपए लगाकर 5 हजार करोड़ रुपए बना लिए और भारत से की गई ये कमाई पांच देशों में फैली अपनी तिजोरियों में छुपा ली। जी हां, दाऊद की तिजोरियां पांच देशों में हैं और अब इसी रुपए को सूंघते हुए दाऊद पर सबसे बड़ा वार करने की तैयारी में है भारत सरकार। दाऊद के पांच हजार करोड़ रुपए अब उसके गले की फांस बन सकती हैं क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय यानि ईडी को उन देशों का पता लग चुका है जहां ये पैसा रखा गया है। 
     पता ये भी लग चुका है कि आखिर दाऊद की कौन सी ऐसी बेनामी संपत्तियां हैं जो वो बेचकर सारा पैसा हवाला के जरिए विदेश में जमा कर रहा है और आखिर कौन सी वो 9 संपत्तियां अभी भी भारत में हैं जिन्हें दाऊद किसी भी तरह बेचना चाहता है। दाऊद इब्राहिम पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह का हाल का बयान कइयों को चौंका गया था। सरकार ने दावा किया था कि वो दाऊद को भारत लाकर रहेगी। तो क्या सरकार ने दाऊद पर होमवर्क करना शुरू कर दिया था। आखिर प्रवर्तन निदेशालय को कहां से पता चला कि दाऊद इब्राहिम ने भारत में अपनी बेनामी संपति:यां बेचकर वो पैसा कहां छुपाया हुआ है। या मुंबई समेत कई शहरों में वो कौन सी 9 संपत्तियां हैं जो दरअसल दाऊद की हैं लेकिन जिन्हें बेचने की फिराक में वो है। प्रवर्तन निदेशालय ने दाऊद की सारी जायदाद की लिस्ट तैयार की है। इसमें डॉन की भारत और विदेश में संपत्तियों का जिक्र है। सूत्रों का कहना है इस पैसे से जुड़ा है एक इंसान का नाम इकबाल मोहम्मद मेमन उर्फ इकबाल मिर्ची। सूत्र इस इंसान को दाऊद का मुनीम कहते हैं। ये वो इंसान था जिसे दाऊद की पाई-पाई का पता था, जो दाऊद के काले कारोबार से जन्मे पैसे का राजदार था। और 2013 में इस इंसान की मौत के बाद से दाऊद राज में खलबली मची हुई है। बताया गया है कि मिर्ची की मौत से पहले तक दाऊद के 5 हजार करोड़ रुपए उसने 5 देशों में जमा कर लिए थे। सूत्रों के मुताबिक प्रवर्तन निदेशालय को पता चला है कि दाऊद के मुनीम इकबाल मिर्ची ने 2500 करोड़ रुपए दाऊद की संपत्ति बेचकर, 1000 करोड़ रुपए ड्रग्स के कारोबार के, 1500 करोड़ रुपए सट्टेबाजी के कारोबार के भारत से हवाला के जरिए बाहर भिजवाए। हालांकि, दाऊद के वकील रहे श्याम केशवानी इन आंकडों को मनगढ़ंत करार देते हैं। दाऊद के वकील श्याम केशवानी ने कहा कि जहां तक दाऊद का ताल्लुक है की उनकी कुछ प्रोपर्टी अबतक हिंदुस्तान में हैं। लेकिन प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों का साफ कहना है कि इकबाल मिर्ची जो पहले दाऊद के लिए नशे का कारोबार देखता था 1993 के मुंबई धमाकों के बाद उसे दाऊद का रियल इस्टेट का धंधा संभालने को कहा गया। वो खुद लंदन में रहता था जहां उसने दाऊद का काफी पैसा लगाया। लेकिन जब सरकार ने दाऊद की संपत्तियों को जब्त करना शुरू कर दिया तब एक ट्रस्ट की शक्ल में एक खेल खेला गया। ऐसा खेल जिसकी मदद से दाऊद ने जब्त की गई अपनी संपत्ति दोबारा सरकार से खरीदकर मोटे मुनाफे में बेच डालीं और वो सारा पैसा उन पांच देशों में जमा करवा लिया।
      सूत्र बता रहे हैं कि इकबाल मिर्ची के इशारे पर बाकायदा मुंबई में एक ट्रस्ट बना और इस ट्रस्ट ने उन संपत्तियों पर नजरें गड़ाईं जो दाऊद की बेनामी थीं और जिन्हें सरकार ने जब्त कर लिया था। वो संपत्तियां कुछ वक्त बाद नीलाम की गईं। जाहिर है दाऊद की नाक का सवाल था सो इस ट्रस्ट के जरिए ही इनमें से कई संपत्तियां इकबाल मिर्ची ने दोबारा खरीद लीं। इस ट्रस्ट ने ही अकेले कम से कम 1000 करोड़ के सौदे कर भी लिए हैं। और उन्हें खरीदने के बाद शुरू हुआ बेचने का सिलसिला। सूत्रों की मानें तो भारतीय एजेंसियो के रडार पर दाऊद की संपत्ति जुड़ी ज़्यादा जानकारी तब हाथ लगी जब मिर्ची के परिवार वालों नें एक के बाद उन बंगलों की डील शुरू कर दी जिसे दाऊद की बेनामी संपत्ति माना जा रहा था। जांच की गई तो सामनें आया की कई प्रोप्रटीज की डील पक्की भी हो गई है और उसका पैसा हवाला के ज़रिए दाऊद तर पहुंचा दिया गया। प्रवर्तन निदेशालय के सूत्र बता रहे हैं मुंबई में वर्ली सी फेस पर एक संपत्ति की बिक्री ने खास तौर पर उसके कान खड़े किए।
    बताया गया है कि इकबाल मिर्ची के ही घरवालों ने इस संपत्ति का सौदा 700 करोड़ में किया। सूत्र ये भी बता रहे हैं कि भारत में डॉन की बेनामी संपत्तियां बेचने का ये सिलसिला आज भी जारी है। प्रवर्तन निदेशालय ने ऐसी 9 संपत्तियों का पता भी लगा लिया है। ये संपत्तियां मुंबई, पुणे, मैसूर, दिल्ली और कोलकाता शहर में हैं। अकेले मुंबई में वर्ली सी फेस में दाऊद की संपत्ति का सौदा 700 करोड़ में हुआ। सूत्रों का ये भी कहना है कि मसूरी में दाऊद के होटल का सौदा भी 200 करोड़ में किया जा रहा है। वहीं पुणे के एक फॉर्म हाउस की डील 100 करोड़ में हो चुकी है। सूत्रों का कहना है कि पता ये भी चला है कि दाऊद की इन संपत्तियों की बिक्री से आया पैसा हवाला के जरिए विदेश भिजवाने के लिए कई फर्जी कंपनियां तक खड़ी की गई हैं। बताया जा रहा है कि ये कंपनियां गार्मेंट एक्सपोर्ट के नाम पर रजिस्टर हुई हैं। लेकिन दरअसल उनमें सिंगापुर, मलेशिया और नाईजीरिया के कई हवाला ऑपरेटर शामिल हैं। ये ऑपरेटर ही दाऊद की संपत्ति की बिक्री से आए करोड़ों अरबों रुपए हवाला के जरिए बाहर भिजवा रहे हैं।
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पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में भाजपा सांसद मनोज तिवारी से मारपीट!

    वाराणसी।। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी स्थित 80 घाट पर एक समाचार चैनल द्वारा आयोजित लाइव शो के दौरान भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। भाजपा के दिल्ली से सांसद मनोज तिवारी और कांग्रेस विधायक अजय राय के समर्थकों के बीच जमकर मारपीट हुई और दोनों ओर से पथराव भी किया गया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उनकी पार्टी के सांसद मनोज तिवारी के साथ मारपीट की। दोनों पक्षों ने पुलिस में इस मामले की शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस निरीक्षक आशुतोष ओझा का कहना है कि दोनों पक्षों की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है। 
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से सांसद हैं। ऐसे में 1 साल के अंदर संसदीय क्षेत्र में उनके विकास कार्यों की समीक्षा करने के लिए चैनल द्वारा 80 घाट पर कार्यक्रम का आयोजन किया था। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में बीजेपी सांसद मनोज तिवारी, कांग्रेस के विधायक अजय राय और समाजवादी पार्टी (एसपी) सरकार में राज्यमंत्री सुरेंद्र पटेल शामिल थे। प्रत्यक्षदॢशयों के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान जब लोगों से जवाब-सवाल का सिलसिला शुरू हुआ तो बीच में हूङ्क्षटग होने लगी। इसके बाद कुछ कार्यकर्ता गाली-गलौज करने लगे है। इसी दौरान अजय राय और मनोज तिवारी के समर्थक आपस में भिड़ गए और एक-दूसरे पर जमकर लात-घूसे बरसाए। समर्थकों ने जमकर पथराव भी किया। इसके बाद मनोज शो बीच में ही छोड़कर चले गए। मारपीट के दौरान विधायक अजय राय और भाजपा नेता भेलूपुर थाने पहुंच गए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ मारपीट का आरोप लगाते हुए तहरीर दी। वाराणसी से लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी रहे अजय राय ने आरोप लगाया कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनके कार्यकर्ता रोहित चौरसिया के साथ मारपीट की, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। वहीं, बीजेपी कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनके सांसद मनोज तिवारी के साथ कांग्रेस के नेताओं ने मारपीट की। पुलिस सच जानने का प्रयास कर रही है।
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बच्चों को जिद्दी बना सकता है कॉम्टीशन का दबाव

     मुंबई।। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में अभिभावक चाहते हैं कि उनके बच्चे सबसे आगे रहें लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि एक दूसरे से आगे निकलने का दबाव बच्चों को जिद्दी भी बना सकता है। इसीलिए बच्चों को सफलता की अंधी दौड़ का घोड़ा बनाने से पहले यह बात जरूर जहन में रखें कि इससे बच्चों के स्वाभाविक विकास में कोई कमी न रह जाए। मनोविज्ञानी कहते हैं अभिभावक चाहते हैं कि उनके बच्चे सबसे आगे रहें और सफलता का शिखर छू सकें। लेकिन वह यह भूल जाते हैं कि उनकी यह चाहत बच्चों को गहरे दबाव में ला सकती है। यदि बच्चे यह दबाव सहन नहीं कर पाए तो उनकी मानसिकता प्रभावित होती है। कई बार बच्चे जिद्दी हो जाते हैं और वह काम बिल्कुल नहीं करना चाहते जो उनके अभिभावक चाहते हैं।
     वह कहते हैं कि कोशिश करनी चाहिए कि बच्चे जिद जल्द त्याग दें, वरना यदि वह जिद्दी बन गए तो उनके लिए ही मुश्किल होगी। एक अन्य मनोविज्ञानी का कहना है कि बच्चों की मानसिकता को समझना बेहद जरूरी होता है। अभिभावकों को यह देखना चाहिए कि उनके बच्चों की दिलचस्पी किस क्षेत्र में है और किस विषय को वह पसंद नहीं करता। इस नापसंद का कारण पता लगाना चाहिए और फिर इस तरीके से बच्चों को प्यार से समझा कर उसकी नापसंद दूर करने की कोशिश करनी चाहिए कि उस विषय में रुचि लेने लगे। यदि उसकी नापसंद का विषय पढ़ने के लिए उस पर जोर डाला गया तो वह जिद्दी हो जाएगा और उस विषय को बिल्कुल पढ़ना नहीं चाहेगा।
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अब 'आप' विधायक सुरेंद्र की बीए की डिग्री फर्जी !

    नई दिल्ली।। दिल्ली की आप सरकार के सामने रोज नई मुसीबतें खड़ी हो रही हैं। अभी कानून मंत्री जितेंद्र ङ्क्षसह तोमर के खिलाफ फर्जी डिग्री का मामला चल ही रहा था कि अब पार्टी के दिल्ली वैंसट विस क्षेत्र से विधायक कमांडो सुरेंद्र ङ्क्षसह की डिग्री फर्जी होने का आरोप लगाते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। कोर्ट ने विधायक, चुनाव अधिकारी समेत 13 लोगों को नोटिस जारी कर मामले में चार हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी। 
    न्यायमूर्ति हीमा कोहली की खंडपीठ के समक्ष दिल्ली वैंसट विधानसभा क्षेत्र से सुरेंद्र के सामने पराजित हुए भाजपा प्रत्याशी करण सिंह तंवर ने यह याचिका दायर की है। याची का आरोप है कि विधायक ने अपने नामांकन के दौरान स्वयं को सिक्किम विश्वविद्यालय से बीए पास बताया। वह भारतीय सेना में वर्ष 1997 से 2011 तक एनएसजी कमांडो रहे थे। उन्होंने वर्ष 2012 में बीए की डिग्री लेने का दावा किया है, जबकि आरटीआई के जवाब में सिक्किम विश्वविद्यालय ने कहा कि उसने या उससे संबद्ध किसी भी कॉलेज ने सुरेंद्र ङ्क्षसह को बीए की डिग्री प्रदान नहीं की है। याची का आरोप है कि विधायक ने अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में गलत जानकारी दी है। साथ ही नामांकन पत्र में आयकर से संबंधित कॉलम में गलत ब्योरा दिया है। विधायक अभी भी स्वयं को कमांडो बताते हैं, जबकि वर्तमान में वह कमांडो नहींं है। उन्होंने चुनावों में फौजी भाई-आर्मी भाई कहकर लोगों से वोट मांगे, जो गलत है। इसे देखते हुए उनके चुनाव को रद्द कर दिया जाए।
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बेटा पोल डांसर भले बन जाए पर डॉक्टर कभी नहीं!

    तिरुवनंतपुरम।। देश में अधिकांश अभिभावकों की इच्छा होती है कि उनके बच्चे मेडीकल या इंजीनियरिंग के क्षेत्र में व्ॉसरियर बनाएं लेकिन केरल के एक डॉक्टर ऐसे भी हैं जो चाहते हैं कि उनका बच्चा माता-पिता उसके डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना देखते हैं. लेकिन एक डॉक्टर का कहना है कि उनका बच्चा पोल डांसर भले ही बन जाए लेकिन कभी डॉक्टर न बने।
    केरल के एनेस्थिसियॉलोजिस्ट डॉ. रोशन राधाकृष्णन ने अपने ब्लॉग में ये बातें कही हैं। उनका यह ब्लॉग अब इंटरनेट पर वायरल हो गया है। अभी तक इस ब्लॉग को 9686 बार शेयर किया जा चुका है। इस ब्लॉग में रोशन ने लिखा है कि वे चाहते हैं कि उनका बच्चा डॉक्टर कभी न बने। उन्होंने ऐसा क्यों सोचा इसकी वजह भी रोशन ने अपने ब्लॉग पोस्ट (क्यों मैं अपने बच्चों को भारत में डॉक्टर नहीं बनने की सलाह दूंगा) में दिया है। डॉ. रोशन अपने बेटे सेे मुखातिब करते हुए कहते हैं- तुम्हें सबसे बड़ा त्याग अपने माता-पिता, पति-पत्नी और बच्चों के लिए करना होगा। तुम्हारे पास उनके लिए कभी समय नहीं होगा। ब्लॉग में रोशन ने लिखा है कि मुझे लगता था कि डॉक्टर अपने परिवार के साथ समय बिताते हुए, दिन में दो बार काम करते हुए काफी पैसा कमा लेता है लेकिन मेरी सोच गलत थी। मुझे अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि अब डॉक्टरों को मरीज की जान बचाने के साथ-साथ उनके तीमारदारों से अपनी भी जान बचानी पड़ती है। रोशन लिखते हैं कि इस फील्ड में प्रोपेसशनलिज्म की बहुत कमी है। आप कभी किसी ड्राइवर से 24 घंटे ड्राइव करने के लिए नहीं कहेंगे लेकिन एक डॉक्टर से हर तीसरे दिन यह कहना बहुत सही है। रोशन ने अपने ब्लॉग में एक डाटा भी दिया है. जिसमें बताया गया है कि भारत में प्रति एक हजार लोगों पर सिर्फ सात डॉक्टर हैं. जबकि चीन में प्रति हजार पर 19, यूनाइटेड ङ्क्षकगडम में 28, यूएस में 25 और स्पेन में यह संख्या 49 है।
   ब्लॉग में ही उन्होंने पूछा है कि क्या आप अपने पेशे में मरने के लिए तैयार हैं? इसके साथ ही उन्होंने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के मई 2015 के आंकड़े का हवाला दिया है जिसके अनुसार भारत के 75 प्रतिशत डॉक्टर अपने मरीज की हिंसा का शिकार होते हैं।
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योग में खलल पड़ा, महिला आईएएस ने माली को शांति भंग की आशंका में जेल भिजवाया



    लखनऊ।। अभी महीने भर पहले डीएम रंजन कुमार की शिकायत को लेकर चर्चा में रहीं गोरख्पुर की एसडीएम नेहा प्रकाश अपने ताजा कारनामे की वजह से एक बार फिर बड़ी चर्चा में हैं. इस महिला आईएएस ने पार्क के बुजुर्ग माली को सिर्फ इसलिए जेल भिजवा दिया क्यूंकि मैडम के कहने के बावजूद उसने पार्क की सफाई नहीं बंद की . इस बुजुर्ग माली का दोष सिर्फ इतना था कि वह मैडम के योगाभ्यास करते समय पार्क की घास काट रहा था.मैडम ने कहा कि उन्हें डस्ट एलर्जी यानि धुल से परहेज है. आइएस अफसर को बुजुर्ग माली का सफाई जारी रखना नागवार गुजरा और इस हरकत पर एसडीएम साहिबा ने अपने मजिस्ट्रेटी पॉवर का पूरा इस्तेमाल करते होए माली विश्वनाथ यादव को जेल भिजवाने का हुक्म सुना दिया. माली पर दफा 151 यानी शांति भंग की आशंका के तहत कार्रवाई की गयी .
     प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ एसडीएम मैडम शहर के पार्क में योग साधना कर रहीं थीं. इसी बीच बदकिस्मत बजुर्ग माली ने वहां घास काटना शुरू कर दिया. बुजुर्ग माली की इस हरकत से मैडम की योग साधना क्या भंग हुई कि वे क्रोधित हो उठीं. उनकी त्योरियां कुछ यूँ चढ़ीं कि मानो उस माली को भस्म कर देंगी. फिलहाल उनके पास यह दैवीय शक्ति थी नहीं, इसलिए उन्होंने अपनी कुर्सी की शक्ति का बेजा प्रयोग करते हुए उसे पुलिस से गिरफ्तार करवा जेल भिजवा दिया. इस बेसहारा बुजुर्ग माली को जेल भिजवाने वाली इस महिला आईएएस का विवादों से पुराना नाता रहा है. इनकी इन्ही हरकतों के आगे बेचारे जिले के डीएम और कप्तान दोनों ही बेबस नजर आ रहे हैं. नेहा प्रकाश
    डीएम साहब की मजबूरी भी समझी जा सकती है, इससे पहले इसी महिला आईएएस ने इन डीएम साहब पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा दिया था. कारण सिर्फ इतना था कि डीएम ने इनकी हरकतों को देखते हुए इन्हें सदर तहसील से हटाकर 25 किलोमीटर की दूरी स्थित ग्रामीण तहसील पर तैनात कर दिया था. इसका खामियाजा डीएम को यौन उत्पीड़न का आरोप सहकर उठाना पड़ा था. नौकरशाही से जुड़े सूत्रों की मानें तो एसडीएम साहिबा के पति भी दूसरे राज्य से ट्रान्सफर होकर उत्तर प्रदेश आए हैं और पडोसी जिले में ही बतौर डीएम तैनात हैं. यह दोनों ही पति-पत्नी येन केन प्रकारेण राजधानी लखनऊ की तैनाती चाहते हैं. सूत्रों के मुताबिक इस दम्पति की इस इच्छा के चलते डीएम साहब इनका शिकार बन गए.
    उस समय, एक महिला आईएएस अफसर द्वारा एक डीएम पर उत्पीड़न की खबर उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में खासी चर्चा का विषय बन गयी थी. तब यह महिला अधिकारी यह कहतीं सुनी गयी हैं कि वे प्रकरण को अंजाम तक ले जाएँगी. जानकारी के मुताबिक दो साल पहले आईएएस बनी इस अधिकारी को पूर्वांचल के इस जिले में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात किया गया था और उन्हें डीएम द्वारा एसडीएम सदर का कार्यभार दिया गया था. इसी दौरान एक बैठक के दौरान डीएम द्वारा किसी मुद्दे पर महिला अफसर को सबके सामने डांटने की बात सामने आयी थी. उसके बाद इस महिला अफसर को सदर तहसील से हटाकर एक ग्रामीण तहसील में एसडीएम बनाने का आदेश जिलाधिकारी ने किया तो दोनों अफसरों के बीच नाइत्तफाकियों की खबर गर्म हो गयी थी. इस महिला अधिकारी ने नए स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही राज्य के मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव गृह से गंभीर आरोपों की शिकायत भी की थी.



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महिला एसडीएम के साथ फोटो लेना पड़ा महंगा, आप नेता को जेल

Written By News Today Time on Wednesday, May 20, 2015 | 8:38 PM

    इलाहाबाद।। शहर की समस्या को लेकर ज्ञापन देने पहुंचे एक आम आदमी पार्टी (आप) नेता को महिला एसडीएम के साथ फोटो खिंचवाना महंगा पड़ गया। एसडीएम हॢषता माथुर ने उन्हेें पुलिस के हवाले कर दिया। जहां कुछ देर हवालात में रखने के बाद पुलिस ने शांति भंग की आशंका में उन्हें जेल भेज दिया। बताया जाता है कि आप नेता सुनील चौधरी वेश्यावृति बंद कराने के लिए ज्ञापन देने गए थे। एसडीएम को ज्ञापन सौंपने के बाद उन्होंने कार्यकर्ताओं से फोटो लेने के लिए कहा। 
    एसडीएम को यह बात नागवार गुजरी और वे भड़क गईं। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच काफी नोंक-झोंक हुई। बाद में एसडीएम ने कर्नल गंज पुलिस को बुला कर आप नेता को गिरप:तार करा दिया। पुलिस ने केस दर्ज करके उन्हें जेल भेज दिया है। इस बात की सूचना मिलते ही 'आप' कार्यकर्ता थाने पहुंच गए। पुलिस के मुताबिक, एसडीएम सदर की शिकायत पर सुनील चौधरी को गिरफ्तार किया गया है। इस शिकायत के अनुसार सुनील एडीएम के साथ अभद्रता कर रहे थे।
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सांसदों के होटल बिलों पर हुए 35,73,35,281 रु. खर्च

    जी हाँ | भारत जैसे देश के सांसदों के होटल बिलों में भी आता है करोड़ो का खर्च, जन्हा एक और सरकारे गरीबो की बात करती है, और सांसद संसद में महंगाई जैसे मुद्दे उठाते वंही दूसरी और स्वयं उनके होटल बिल करोड़ो रुपयों में पंहुच रहे है | आर.टी.आई. एक्टिविस्ट वेदपाल ने सूचना के अधिकार अधिनियम के जरिये सरकार द्वारा सांसदों के होटल बिलों के भुगतान की जानकारी मिली थी | और जो जवाब मिला उसे देखकर आपके भी होश उड़ जायेंगे |
    वेदपाल ने वित्तवर्ष 1990-91 से लेकर 2013-14 तक होटल बिलों में हुए सरकार के खर्चो का ब्यौरा माँगा था, उन्हें जवाब में जो सूची मिली उसके अनुसार सरकार ने इस दौरान लगभग 36 करोड़ रूपये होटल बिलों के रूप में चुकाए है |
    वेदपाल ने सूचना का अधिकार (आरटीआइ) के जरिए सांसदों के होटल बिल के रूप में सरकार द्वारा किए गए भुगतान की जानकारी मांगी थी। जवाब देखकर कोई भी हैरत में पड़ जाएगा। यह आंकड़े इसलिए आम आदमी को चुभ सकते है कि क्यूंकि सभी राज्यों के सांसदों के लिए पर्याप्त संख्या में गेस्ट हाउस है, ऐसा होते हुए भी पांच सितारा होटलों में करदाताओं के पैसे उडाना सच में पैसे की बर्बादी ही कहलायेगा.
देखें पूरी सूची
वित्त वर्ष धनराशि (रुपये में)
1990-91 28,20,822
1991-92 43,69,148
1992-93 15,93,878
1993-94 25,94,603
1994-95 7,80,411
1995-96 6,76,569
1996-97 89,51,702
1997-98 56,96,681
1998-99 64,60,456
1999-00 87,12,094
2000-01 79,76,811
2001-02 68,72,070
2002-03 75,22,987
2003-04 1,11,10,119
2004-05 2,69,62,131
2005-06 2, 29,43,611
2006-07 3,57,54,804
2007-08 35,68,605
2008-09 39,41,949
2009-10 6,71,99,689
2010-11 6,69,86,046
2011-12 4,15,94,405
2012-13 44,26,480
2013-14 78,19,207
कुल खर्च – 35,73,35,281
(Gopal Prasad)


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एक साल बाद भी सपने बेचने में लगे हैं मोदी : शरद यादव

    नई दिल्ली।। केंद्र में सत्ता परिवर्तन का एक साल पूरा होने को है, मगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जमीनी स्तर पर कोई ठोस उपलब्धि हासिल नहीं कर पाए, एक साल बाद भी वह सपने बेचने में लगे हैं। यह कहना है विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता शरद यादव का। उन्होंने मोदी सरकार के विकास संबंधी तमाम दावों को नकार दिया है। जनता दल-युनाइटेड (जद-यू) नेता शरद यादव ने एक साक्षात्कार में कहा कि मोदी ने देशवासियों से वादा किया था कि वे लोगों के अच्छे दिन लाएंगे, लेकिन वे इसमें बुरी तरह नाकाम रहे हैं। मोदी सरकार के एक साल पूरा होने पर सरकार के प्रदर्शन के बार में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि लोग अभी भी उनके दिखाए सपनों के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। शरद यादव ने कहा कि समग्रता में देखें तो जमीनी स्तर पर कोई भी प्रभावी कार्य नहीं हो पाया है। मैंने खुद इस सरकार द्वारा किया गया एक भी ऐसा काम नहीं देखा है, जिसके बारे में वह दावा कर सके कि यह उसकी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि मुद्दा यह है कि इस सरकार के पास पूरा करने या न करने के लिए कोई नीति या कार्यक्रम है भी या नहीं। इस सरकार के पास न तो कोई रोडमैप है, न नीति है और न ही कोई कार्यक्रम। केवल इरादों से गरीबों का भला नहीं होने वाला।
     शरद ने कहा कि बिना ठोस नीति और कार्यक्रमों के इरादों की क्या कीमत है। परिणाम तभी आएंगे, जब नीति और उद्देश्य दोनों को मिलाया जाएगा। छह विपक्षी पार्टियों का विलय कराकर उन्हें 'जनता परिवार' के बैनर तले एकजुट कराने वालों में से एक जद-यू नेता ने कहा कि सरकार ने दो करोड़ अतिरिक्त रोजगार सृजन, प्रत्येक बेघर को घर और हर खेत को पानी देने का वादा किया था। लेकिन इनमें से कोई भी वादा पूरा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल इरादे न जताकर गरीबी दूर करने, रोजगार सृजन और संकट में फंसे किसानों व गरीब व्यक्तियों की मदद के लिए एक स्पष्ट रोडमैप के साथ आना चाहिए और अपनी नीतियों को विस्तार से पेश करना चाहिए। मोदी के विदेश दौरों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि मोदी हर वक्त विदेश यात्राओं में लीन हैं, लेकिन आज की तारीख में उन देशों से एक भी बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रस्ताव नहीं आया, जिन देशों का उन्होंने दौरा किया। शरद ने कहा कि उन्होंने अपने दौरों से विदेश भ्रमण संबंधी व ऐतिहासिक स्थलों के बारे में भारतीय मतदाताओं का सामान्य ज्ञान बढ़ाने के सिवाय किया ही क्या है।
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सचिवालय पर सरकार के खिलाफ धरना

    नई दिल्ली।। दिल्ली सचिवालय के बाहर मंगलवार को 2 अलग-अलग ग्रुप्स ने सरकार के खिलाफ प्रोटेस्ट करते हुए धरना दिया। एक तरफ जहां नॉर्थ ईस्ट के लोगों ने कार्यवाहक चीफ सेक्रेटरी शकुंतला गैमलिन के समर्थन में गैमलिन पर लगाए जा रहे आरोपों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के तहत काम करने वाले पैरामैडिकल स्टाफ और नर्सों ने भी मांगों को लेकर धरना दिया। 
     इस दौरान सचिवालय के बाहर सुरक्षा भी बढ़ा दी गई। नॉर्थ ईस्ट के प्रदर्शनकारी संख्या में भले ही कम थे, लेकिन वो अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में कामयाब रहे। उन्होंने अपने हाथों में शकुंतला गैमलिन के समर्थन में नारे लिखे पोस्टर बैनर ले रखे थे। ये लोग केजरीवाल सरकार से मांग कर रहे थे कि गैमलिन को सरकार में उचित सम्मान दिया जाए और उन्हें बेवजह बदनाम न किया जाए। उधर सरकारी अस्पतालों के पैरामेडिकल स्टाफ और नर्सों की मांग थी कि समान काम और समान पद के साथ ही उन्हें समान वेतन भी दिया जाए और उनकी नौकरी पक्की की जाए। प्रदर्शनकारियों में बड़ी तादाद में महिलाएं भी शामिल थीं। ये लोग एक दिन की सांकेतिक हड़ताल के दौरान प्रोटेस्ट करने यहां आए थे।
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दिल्ली में तेज हुई 'जंग', LG ने रद किए अधिकारियों के तबादले

    नई दिल्ली।। दिल्ली में अधिकारों को लेकर चल रही जंग लगातार गंभीर होती जा रही है। ताजा घटनाक्रम में उपराज्यपाल ने पिछले चार दिन के दौरान किए गए सभी अधिकारियों के तबादलों को रद कर दिया है। यह सभी तबादले दिल्ली सरकार द्वारा किए गए थे। इस बीच उपराज्यपाल नजीब जंग ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक पत्र भी लिखा है। इसमें जंग ने उपराज्यपाल के संवैधानिक अधिकारों के बारे में चर्चा की है।
    उपराज्यपाल के कार्यालय से जारी एक नोट में कहा गया है कि मुख्यमंत्री को जारी किए गए लेटर में ये साफ कर दिया गया है कि उप मुख्यमंत्री द्वारा जारी किया गया आदेश संवैधानिक नहीं है। किसी भी सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी का ट्रांसफर या पोस्टिंग की स्वीकृति करना उपराज्यपाल के साथ केवल मुख्यमंत्री ही सक्षम हैं।
    उपराज्यपाल नजीब जंग के पत्र में लिखा है कि तबादलों और तैनाती के सभी फैसले रद किए जाए। इसके साथ ही पत्र में कहा गया है कि सभी फाइलें मेरे पास भेजी जाएं, मंत्री के पास नहीं। इस खत के बाद बवाल और बढ़ने की आशंका है। हालांकि सरकार की ओर से इस तरह के किसी आदेश या पत्र के मिलने से इनकार किया जा रहा है।
   उल्लेखनीय है कि यह मामला पिछले कई दिनों से गरमाया हुआ है। नजीब जंग और केजरीवाल, राष्ट्रपति से भी मुलाकात कर चुके हैं। इसके साथ ही केजरीवाल ने पीएम मोदी को उलाहना भरा खत लिखा था।
7:26 PM | 0 comments | Read More

रीटेल में एफडीआई के खिलाफ रैली

    नई दिल्ली।। खुदरा व्यापार में 51 फीसदी विदेशी निवेश के यूपीए सरकार के फैसले को बरकरार रखने के केंद्र की मोदी सरकार के फैसले के खिलाफ आम आदमी पार्टी की ट्रेडर्स विंग ने मंगलवार को चांदनी चौक इलाके में एक रैली का आयोजन किया। इस रैली को 'विश्वासघात रैली' का नाम दिया गया। हालांकि इसमें उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया को भी शामिल होना था, लेकिन राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए जाने की वजह से वह इस रैली में हिस्सा नहीं ले पाए। रैली में चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, दरियागंज, नेहरू प£ेस, करोल बाग, सरोजनी नगर, गांधी नगर, कश्मीरी गेट, चावड़ी बाजार, नया बाजार जैसे दिल्ली के होल सेल बाजारों के डेढ़ हजार से ज्यादा व्यापारी और कई बड़े व्यापारी नेता मौजूद थे। बल्लीमारान से विधायक इमरान हुसैन ने भी रैली में शिरकत की। उनके अलावा आम आदमी पार्टी की ट्रेड विंग के संयोजक बृजेश गोयल, अध्यक्ष सुभाष खंडेलवाल, महासचिव विष्णु भार्गव और कोषाध्यक्ष सुधीर जैन भी मंच पर मौजूद थे। 
    मीटिंग में आप के व्यापारी नेताओं ने कहा कि बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के वक्त व्यापारियों से वादा किया था कि अगर वह सत्ता में आई, तो रीटेल में एफडीआई के यूपीए सरकार के फैसले को निरस्त कर देंगे। इसी भरोसे पर देश के 5 करोड़ से ज्यादा खुदरा व्यापारियों ने बीजेपी को वोट दिया था, लेकिन अब सत्ता में आने के बाद बीजेपी अपने उस वादे से मुकर गई है। दिल्ली में इस फैसले को लागू नहीं करने के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के फैसले पर व्यापारियों ने खुशी भी जाहिर की और यह फैसला लिया गया कि जल्द ही इसके लिए आप की ट्रेड विंग एक धन्यवाद रैली का आयोजन करेगी, जिसमें अरविंद केजरीवाल को भी बुलाया जाएगा। इस बीच दिल्ली को व्यापार और खासतौर से खुदरा व्यापार का हब बनाने के आम आदमी पार्टी के वादे को पूरा करने के लिए दिल्ली डायलॉग कमिशन ने भी बुधवार से फील्ड में जाकर व्यापारिक संगठनों से बातचीत करने और उनके फीडबैक लेने का काम शुरू करने का फैसला किया है। इसकी शुरुआत आज ओखला इंडस्ट्रियल एरिया से होगी। बाद में पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स, फेडरेशन ऑफ फैक्ट्री ओनर्स ऑफ दिल्ली, वजीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया, लॉरेंस रोड इंडस्ट्रियल एरिया और नरेला इंडस्ट्रियल एरिया में जाकर भी मीटिंग्स की जाएगी।
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आत्मघाती हमले, गैरइस्लामी : गैर मुसलमान की रक्षा करना सभी इस्लामी देशों का फ़र्ज

   लाहौर।। पाक के करीब 200 धार्मिक विद्वानों ने आत्मघाती हमलों को गैर इस्लामी करारदेते हुए फ़तवा जारी कियाl और कहा कि इस्लामी सरकारों को तालिबान, isis तथा अलकायदा जैसे विद्रोही समूहों को कुचलना ही होगा l
     रविवार को सम्मेलन के बाद विभिन्न इस्लामी फिरको से ताल्लुक रखने वाले धर्मगुरुओं की ओर से जारी फतवे में कहा कि तहरीक ए पाकिस्तान, अलकायदा, आइएसआइएस, बोको हरम, अल शबाब और इस तरह के अन्य तथा कथित संगठनों की विचारधारा गुमराह करने वाली है l
     उनके कृत्य गेर इस्लामी हैं और सोच इस्लाम के कम ज्ञान पर आधारित है l जिहाद इस्लामी शर्तों के खिलाफ़ है l जातीय नरसंहार में शामिल तत्व फ़साद के दोषी हैं l ऐसे तत्वों को कुचलना इस्लामी सरकारों का फ़र्ज है l गैर मुसलमानों की हिफाज़त करना किसी भी इस्लामी देश के लिये अनिवार्य है l गैर मुसलमानों के धर्म स्थानों पर हमले करना सबसे बड़ा पाप और जघन्य अपराध है l
     सम्मेलन के समन्वयक मौलाना जियाउल हक़ नक्श्बन्दी ने कहा कि धर्म गुरुओं ने आगामी शुक्रवार को शांति और प्रेम दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया l इस दिन 4 लाख मस्जिदों में कत्लेआम के खिलाफ़ उपदेश दिये जायेंगे l
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नेताजी ने आजाद हिंद फौज के बैंक के लिए जो खजाना जुटाया था, उसे उनके करीबियों ने ही लूटा

     1945 में विमान हादसे में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत अब तक एक रहस्य है, लेकिन इसके साथ एक और चौंकाने वाले राज का खुलासा हुआ है. नेताजी ने आजाद हिंद फौज के बैंक के लिए जो खजाना जुटाया था, उसे उनके करीबियों ने ही लूटा और सारी जानकारी होने के बावजूद केंद्र की जवाहर लाल नेहरू सरकार आंख मूंदे बैठी रही.
    'इंडिया टुडे' मैगजीन के पास नेताजी की वह टॉप सीक्रेट फाइल है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. दरअसल नेताजी ने आजाद हिंद फौज को खड़ा करने के लिए आम लोगों पैसे लेकर एक खजाना तैयार किया था. उस खजाने में 65 किलो से ज्यादा सोना था.कुछ तो बताते हैं कि तकरीबन 100 किलो सोना नेताजी को दान में मिला था। इस खजाने का बड़ा हिस्सा साईगान में नेताजी ने आजाद हिंद फौज का बैंक बनाने के लिए रखा था.
     यह वो सोना था जिसे भारत की मां-बहनों ने आजादी की लड़ाई के लिए नेताजी को दान में दिया था. अब सीक्रेट फाइलों से ये पता चला है कि उस खजाने को जब लूटा जा रहा था, तब भारत की नेहरू सरकार चुपचाप देख रही थी.
   दस्तावेजों से साफ है कि प्रधानमंत्री नेहरू को जापान सरकार ने बार-बार बताया कि नेताजी का खजाना उन्हीं के करीबी लूट रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी प्रधानमंत्री नेहरू ने कोई कार्रवाई नहीं की. उल्टा जिस शख्स पर खजाना लूटने का आरोप था, उसी की चिटठी संसद में पढ़ी गई जिसमें उसने नेताजी की मौत की पुष्टि की थी. दस्तावेजों के मुताबिक नेताजी के करीबी ए अय्यर और एम रामामूर्ति ही खजाना लूटने के आरोपी हैं.
उस खजाने की कीमत आज करोड़ों में होती, लेकिन खुद नेताजी के करीबियों ने उसे लूट लिया. उस वक्त नेताजी से 'जुड़ाव न रखने वाली' नेहरू सरकार ने पूरे मामले में आंख पर पट्टी बांधे रखी. 65 किलो से ज्यादा सोने में से सिर्फ 11 किलो सोना ही भारत वापस आ सका.
     1952 में चार पैकेट में आजाद हिंद फौज का 11 किलो सोना वापस आ सका. ये ताइवान हादसे के बाद जमा किया गया था. जले हुए बैग में ये खजाना आज भी राष्ट्रीय म्यूजियम दिल्ली में पिछले 62 साल से पड़ा है.
    तकरीबन 50 साल तक साउथ ब्लॉक में ऑफिशल सीक्रेट ऐक्ट की आड़ में नेताजी से जुड़ी जिन 37 फाइलों को सार्वजनिक करने से सरकार बचती रही, उसी में से एक फाइल से यह जानकारी सामने आई है। इसके मुताबिक, नेताजी ने आजाद हिंद फौज को खड़ा करने के लिए आम लोगों से पैसे लेकर खजाना तैयार किया था। नेताजी के निजी सहायक कुंदन सिंह के हवाले से बताया गया कि हिटलर ने भी स्टील के चार संदूकों में गहने भरकर नेताजी को गिफ्ट किया था।
     दस्तावेजों के मुताबिक, टोक्यो में पहले भारतीय संपर्क मिशन के प्रमुख बेनेगल रामाराव ने भारत सरकार को बताया कि राममूर्ति ने नेताजी के पैसों और उनके कीमती सामान का गबन किया। इसके बाद मिशन प्रमुख बने के. के. चेत्तूर ने लिखा कि राममूर्ति और अय्यर का संबंध नेताजी के रहस्यमय ढंग से गायब खजाने से जरूर है। तोक्यों में भारतीय राजदूत ए. के. डार ने 1955 में लिखा कि सरकार को इस बात की जांच करानी चाहिए कि इस खजाने को चुराने वाले कौन हैं।


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सिसोदिया ने जारी किया उपराज्यपाल से तबादलों का अधिकार छीनने का फरमान

Written By News Today Time on Tuesday, May 19, 2015 | 7:45 PM

    नई दिल्ली।। दिल्ली सरकार ने अभूतपूर्व कदम उठाते हुए उपराज्यपाल से आला अधिकारियों (सुपर टाइम स्केल) के तबादले का अधिकार छीनने के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके लिए 21 साल पुराने सरकारी फरमान को भी पलट दिया गया है।
    उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा 15 मई को जारी आदेश के अनुसार अब भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस) और दिल्ली अंडमान निकोबार सिविल सर्विसेज (दानिक्स) के वरिष्ठ अधिकारियों के तबादलों का फैसला अब सेवाएं विभाग संभालने वाले मंत्री ही करेंगे। चूंकि यह विभाग सिसोदिया के ही पास है लिहाजा उनके आदेश का सीधा तात्पर्य यह है कि वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति अथवा उनके स्थानांतरण का फैसला उपमुख्यमंत्री ही करेंगे। आपको बता दें कि राजधानी में आला अधिकारियों से लेकर अन्य कर्मचारियों तक की नियुक्ति और उनके तबादलों के अधिकार को लेकर करीब 21 साल पहले 9 मई, 1994 को दिल्ली सरकार के सेवाएं विभाग के सचिव बलबीर सिंह की ओर से आदेश जारी किया गया था। इसमें स्पष्ट कहा गया था कि सरकार के सचिव और विभागाध्यक्षों के तबादले उपराच्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह से करेंगे। इसके अलावा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले का अधिकार मुख्यमंत्री को दिया गया।
    उप मुख्यमंत्री द्वारा जारी किए गए आदेश में तबादलों के मामले में उपराच्यपाल को इस दायरे से बाहर कर दिया गया है। साथ ही मुख्यमंत्री भी इस प्रक्रिया से अलग कर दिए गए हैं। अब मुख्य सचिव के पास इंट्री लेवल के दानिक्स अधिकारियों के तबादले का अधिकार बच गया है।
     सिसोदिया ने अपने इस आदेश को जारी करने के लिए कार्य संपादन नियम (ट्रांजेक्शन ऑफ बिजनेस रूल) 1993 की धारा 15 और 16 में सरकार को प्राप्त अधिकारों का हवाला दिया है। समझा जा रहा है कि सरकार ने इसी आदेश के आधार पर सामान्य प्रशासन व सेवाएं विभाग के प्रमुख सचिव अनिंदो मजूमदार को पद से हटाने और उनका कार्यभार मुख्यमंत्री के सचिव राजेंद्र कुमार को सौंपने का फैसला किया।
    उच्चपदस्थ सूत्रों का कहना है कि उपमुख्यमंत्री के आदेश को लेकर राजनिवास और दिल्ली सचिवालय के बीच की लड़ाई और तेज होने की आशंका है। यह भी कहा जा रहा है कि वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले के आदेश एक मंत्री के माध्यम से जारी किए जाएं, इसे लेकर नौकरशाही को भी भारी आपत्ति हो सकती है। उपराच्यपाल के लिए भी इस आदेश को मानना संभव नहीं है।
 
 
[अजय पांडेय]



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वाह, डीएम ने दी चंदा करके पीड़ित को 20 हजार की तुरंत मदद


    भदोही।। भदोही तहसील मे मंगलवार को आयोजित तहसीलदिवस में नवागत जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया जो कभी पहले न तो देखा गया था और न ही सुना गया था। इसके बाद लोगों के मुंह से बरबस ही निकल गया कि वाह डीएम साहब आज तो कमाल हो गया। तहसील दिवस पर हमेशा फरियाद आते हैं लेकिन किसी फरियादी ने पहली बार भदोही तहसील पर त्वरित न्याय पाया होगा। हुआ यूं कि एक 7 वर्ष की बीमार बच्ची के माता पिता मदद के लिए तहसील दिवस में फरियाद लेके पहुचे और डीएम के नेतृत्व में पिड़ित को 20 हजार रु0 तत्काल मिल गया यह राशि सरकारी नहीं बल्कि डीएम समेत अन्य अधिकारी कर्मचारी ने अपने निजी पाकेट मनी से उपलब्ध कराई। उसकी फरियाद सुनने के बाद डीएम ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से 500-500 सौ रूपये निकालने के लिये कहा तो लोग आश्चर्य में पड़ गये लेकिन उन रूपयों को इकठ्ठा करके जब पीड़ित को 20 हजार रूपये दिये तो लोगों के अंदर खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
    इस मौके पर जिलाधिकारी ने कहा कि नियमानुसार कार्य हो होने चाहिए लेकिन इंसानियत के नाते किसी पिड़ित का पहले फौरी मदद होनी चाहिए इतना ही नही डीएम ने तत्काल समाजवादी एम्बुलेंस 108 नंबर डायल करके बुलाया और उपचार के लिए पिडित को बीएचयू भेजवाया। साथ ही सम्बंधित अधिकारी को निर्देशित किया की पीडित का कागजात तैयार करे ताकि शासन से भी आर्थिक सहायता दिलाया जा सके। ज्ञात हो की आज तहसील दिवस पर दुलमदासपुर के सेराजुददीन अपनी 7 वर्षीय बीमार पुत्री को लेकर पहुचे थे और बताया की बेटी का धनाभाव में उपचार नही हो पा रहा है आज जिलाधिकारी की यह दरियादिली की हर ओर सराहना हो रही है

7:06 PM | 0 comments | Read More

किशोरी ने शादी रुकवाने सीएम से कराया पिता को फोन

     रांची।। यहां एक 17 साल की किशोरी ने हिम्मत दिखाते हुए अपनी शादी रुकवाने में सफलता प्राप्त की है। वह अपने परिवार के फैसले के खिलाफ झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास से मिलीं और उनसे अपनी शादी रुकवाने की अपील की। मुख्यमंत्री ने भी बिना देर किए तुरंत उसके पिता से बात कर शादी टालने की सलाह दी। पॉलिटेक्निक की छात्रा डॉली कुमारी ने मुख्यमंत्री दास को बताया कि वह आगे पढ़ना चाहती हैं लेकिन उसके परिवार वालों ने उसकी शादी करने का फैसला किया है। 
    डॉली ने सीएम से आवेदन किया कि वह उनके पिताजी से फोन पर बात करें और उसकी शादी रुकवाएं। मुख्यमंत्री शनिवार को अपने आवास पर लोगों से मिल रहे थे, तभी डॉली ने भी उनसे भेंट की और अपनी समस्या रखी। सीएम दास ने डॉली की इच्छा शक्ति को देखते हुए तुरंत ही फोन पर उसके पिताजी से बात की और शादी टालने की सलाह दी। डॉली के पिताजी कैलाश कुमार पंडित कोडरमा जिले के एक सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। जब उनके फोन पर यह आवाज आई, 'मैं रघुवर दास बोल रहा हूं' तो वह आश्चर्य में पड़ गए। सीएम दास ने उनसे बेटी की पढ़ाई जारी रखने और फिलहाल शादी टालने की सलाह दी। 
    हालांकि डॉली के पिताजी ने अगले साल अपने सेवानिवृत होने और अपनी वित्तीय समस्या को मुख्यमंत्री से साझा किया। इस पर सीएम दास ने रांची के डिप्टी कमिश्नर को डॉली के परिवार से मिलने और उसकी पढ़ाई में किसी भी तरह की दिक्कत नहीं आने देने का निर्देश दिया। इससे पहले भी गुमला की एक 13 साल की एक लड़की के अपनी शादी के खिलाफ जिला प्रशासन से मदद लेने और पढ़ाई जारी रखने में मुख्यमंत्री दास ने उसकी मदद की थी।
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जब 200 मीटर तक अटकी रही इस पुलिस वाले की जान

    नई दिल्ली।। दिल्ली से सटे नोएडा मेें आज एक अजीबो-गरीब घटना देखने को मिली। यहां एक कार चालक ने पुलिस वाले को टक्कर मार दी, जिसके बाद लगभग 200 मीटर तक उसकी जान कार के बोनट में फंसी रही। तभी उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक ऑटो चालक की मदद से दिल्ली पुलिस के उस कांस्टेबल की जान बचाई।
    दरअसल घटना दिल्ली-नोएडा बॉर्डर के पास की है। बॉर्डर पर वाहनों की चेकिंग के दौरान दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल ने एक कार को रोकने की कोशिश की। हाथ देने और कार के सामने आने के बाद भी कार चालक नहीं रुका और कांस्टेबल को टक्कर मार दी। कार के टक्कर से कांस्टेबल कार पर गिर पड़ा और बोनट में फंस गया। अपनी जान बचाने के लिए उसने कार को दोनों हाथों से पकड़ लिया। लेकिन इन सबके बाद भी उस कार चालक को रहम नहीं आई और वो भागने की कोशिश करने लगा।
    तभी उत्तर प्रदेश पुलिस और एक ऑटो ड्राइवर उस का पीछा करने लगे। लगभग दो सौ मीटर पीछा करने के बाद दोनों ने कार चालक को पकड़ लिया। कार के रूकते ही वहां लोग जमा हो गए और चालक की धुनाई करने लगे। फिर अपने आप को संभालते हुए दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल ने भीड़ से उस कार चालक को बचाया और थाने ले गया।


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घट रही है इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या

घटिया सेवाओं और कम स्पीड से डिजिटल इंडिया को गहरा धक्का
    नई दिल्ली।। टेलीकाम कंपनियों की खराब गुणवत्ता भ्रामक पैकिज, बिलों में अनाप-शनाप वृद्धि के करण उपभोक्ताओं की संख्या घटने लगी है। दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के ताजा आंकड़ों में ब्रॉडबेंड ग्राहकों की वृद्धि दर 3 फीसदी थी जो अब घटकर 1.88 फीसदी रह गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट संवाओं की खराब गुणवत्ता, भ्रामक पैकेज और दरों में बढ़ोत्तरी के कारण ऐसा हुआ है। ट्राई ने देश में टेलीफोन और ब्राडबैंड के 31 मार्च तक के आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि ब्राडबैंड इंटरनेट सेवाओं में भारी कमी आई है। फरवरी में जो रिपोर्ट जारी हुई थी उसमें मासिक वृद्धि दर 3.05 फीसदी रही थी। फरवरी में कुल करीब 29 लाख नए ब्राडबैंड कनेक्शन लिए गए थे, लेकिन मार्च में सिर्पस 19 लाख नए कनेक्शन बढ़े। जनवरी मे करीब 85 लाख की वृद्धि हुई थी। तब मासिक वृद्धिदर 10.21 फीसदी थी। उससे पहले यह दर 3.79 फीसदी दर्ज थी। सबसे ज्यादा उपभोक्ता वायरलैस इंटरनेट के हैं, जिसमें मोबाइल आधारित इंटरनेट या डोंगल से चलने वाला इंटरनेट शामिल है। फरवरी में वायरलैस इंटरनेट सेवाओं की वृद्धि दर 3.59 फीसदी थी लेकिन मार्च में यह घटकर 2.17 रह गई। यानी फरवरी में इस सेवा के तहत करीब 27 लाख कनेक्शन लिए गए, लेकिन मार्च में करीब 18 लाख कनेक्शन ही जुड़े।
    डिजिटल इंडिया कार्यक्रम में इंटरनेट की घटिया स्पीड तथा टेलीकाम कंपनियों के ब्राडबैंड और डाटा पैकिज के झूठे वायदों ने उपभोक्ताओं को निराश कर दिया है। इंटरनेट की स्पीड को लेकर उपभोक्ताओं में सबसे ज्यादा नाराजी है। कंपनियों 4 एमबी तक कनेक्शन देकर उपभोक्ताओं से वसूली कर रही है। किन्तु स्पीड 8 केबीपीएस की भी नहीं मिलती हैं जिससे नाराज उपभोक्ताओं का विश्वास टेलीकाम कंपनियों पर खत्म हो गया है। वहीं वर्तमान इंटरनेट की स्पीड पर उसको काफी टाइम खर्च करना पड़ता है। जिसके कारण जो उपभोक्ता इंटरनेट की स्पीड को लेकर आकर्षित हुए थे। वह तेजी के साथ अपने कनेक्शन बंद कर रहे हैं। पिछले एक वर्ष में इंटरनेट उपभोक्ताओं की वृद्धि पर तेजी से घट रही है। इसको लेकर दूरसंचार नियामक आयोग की चिंताएं बढ़ गई हैं। पिछले वर्षों में हेलीकाम कंपनियों की सेवाएं काफी घटिया होने से उपभोक्ताओं का गुस्सा भी बढ़ रहा है।
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4 साल से यातनागृह में बंद बच्ची हुई मुक्त

ब्याज चुका पाने में असमर्थ बच्ची पर 4 सालों तक जुल्म
    गाजि़याबाद।। राजेंद्र नगर इलाके में चार साल से बंद एक बच्ची को पुलिस ने मुक्त कराया। यह बच्ची तपती दोपहरी में घर का पंखा भी नहीं चला सकती थी अगर चलाती तो उसे यातनायें दी जाती थीं।परिजनों द्वारा ब्याज न चुका पाने से गाजियाबाद में इसके मालिक मालकिन ने इसे घर में कैद करके रखा था। दरअसल इस बच्ची की मां ने इस घर के मालिक मालकिन से ब्याज पर 30 हज़ार रूपए लिए थे। लेकिन ब्याज बढ़ते हुए वो रूपए चार साल में तीन लाख हो गए और उस ब्याज को ये बच्ची चुकाती है। ये बच्ची इस घर में काम करती है। लेकिन काम के साथ साथ इस बच्ची को यातनाये भी झेलनी पढ़ती है, इसे खाना नहीं मिलता। इसे मारापीटा जाता है, इसे इसके माँ बाप से भी नहीं मिलने दिया जाता है और तो और इसे घर में बंद करके सुबह मालिक मालकिन चले जाते है। अगर ये पंखा भी चला लेती है तो इसे मारा जाता है। बंद अँधेरे कमरे में ये बच्ची चार साल से यूं ही बंद है।
    शुक्रवार को बच्ची ने किसी तरह से परेशान होकर पड़ोसियों सूचना दी। मौके पर इसके बाद चाइल्ड लाइन की टीम आई और बच्ची को छुड़ाने के लिए पुलिस को बुलाया। पुलिस ने फिलहाल मकान मालकिन को हिरासत में लेकर बच्ची को डाक्टरी जाँच के लिए भेज दिया है। पुलिस पूरे मामले की तहकीकात में जुटी है।
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केन्द्रीय मंत्री स्मृति के खिलाफ शिकायत करने वाले पर जुर्माना

     नई दिल्ली।। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति इरानी के खिलाफ शिकायत दायर करने वाले याचिकाकर्ता पर अदालत ने हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। शिकायतकर्ता ने इरानी पर चुनाव आयोग में अपनी शैक्षिक योग्यताओं के संबंध में झूठी जानकारी देने का आरोप लगाया है। गुरुवार को मामले में सुनवाई के दौरान न तो शिकायतकर्ता अहमर खान और न ही उनका वकील शिकायत पर दलीलें देने के लिए अदालत में मौजूद थे। हालांकि, मेट्रोपोलिटन मैजिस्ट्रेट आकाश जैन ने खान की इस दिन के लिए व्यक्तिगत पेशी से छूट दिए जाने की मांग मंजूर कर ली। शिकायतकर्ता ने इस आधार पर यह छूट दिए जाने की मांग की थी कि वह किसी जरूरी काम की वजह से दिल्ली से बाहर है। खान की अर्जी दायर करने वाले दूसरे वकील ने अदालत से सुनवाई आगे के लिए टाले जाने की गुहार लगाते हुए यह भी कहा कि जिस वकील को शिकायत पर दलीलें देनी हैं, वह भी अदालत में मौजूद नहीं है।
     अदालत ने शिकायतकर्ता की मांगें तो मंजूर कर ली, लेकिन अदालत का कीमती समय बर्बाद करने के लिए उन पर 1 हजार रुपये का हर्जाना लगाया। जुर्माना दिल्ली लीगल सर्विस अथॉरिटी के पास जमा कराने के लिए कहा गया है। मामले में अगली सुनवाई अब 1 जून को होगी। फ्रीलांस लेखक खान ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि ईरानी ने अप्रैल 2004 में लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग में जो एफिडेविट जमा कराया, उसके मुताबिक उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) से 1996 में बीए कंप्लीट किया था। गुजरात से राज्यसभा चुनाव लड़ते हुए उन्होंने 11 जुलाई 2011 में जो एफिडेविट दिया, उसमें उनकी एजुकेशनल क्वॉलिफिकेशन बीकॉम र्फस्ट इ:यर बताई गई। उसमें डीयू के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग से ही बीकॉम करने की बात कही गई थी। इसके बाद उन्होंने फिर से लोक सभा चुनाव लड़ते हुए 16 अप्रैल 2014 में जो एफिडेविट दिया, उसमें उन्होंने डीयू (एसओएल) से बीकॉम र्फस्ट ईयर किए जाने का ही दावा किया। शिकायतकर्ता के मुताबिक इस आधार पर इरानी के खिलाफ रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपील एक्ट, 1951 की धारा 125 ए के तहत अपराध बनता है।
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दबंग मुस्लिमों ने गरीब मुस्लिमों के मकानों को बुल्डोजर से रौंद डाला

    दहशहत और खौफ पैदा करने वाली इस खबर को पढ़ कर आप सोचने को मजबूर हो जायेंगे कि कैसे भागलपुर में दबंग मुसलमानों ने दंगा पीड़ित 15 गरीब मुसलमानों के घरों को बुल्डोजर से रौंद डाला.

गरीबों के ध्वस्त मकान



    तुर्रा यह कि जब इन गरीबों की एफआईआर पर दबंगों को गिरफ्तार किया गया तो वे दूसरे ही दिन हवालात से बाहर आ गये और उन गरीबों को अब जान से मारने की धमकी दे रहे हैं.
    भागलपुर के हबीबपुर थाना के शाहजंगी गावं के मोहम्मद अली इमाम समेत दीगर 14 लोगों के घरों को बीते 22 अप्रैल को बुल्डोजर चला कर निस्त नाबूद कर दिया गया{देखें तस्वीर}. इसकी शिकायत अली इमाम ने बाजाब्ता हबीबपर पुलिस को लिखित रूप से की.
पहले दंगाइयों ने लूटा अब अपनों ने
    अली इमाम और उनके पड़ोसी वही लोग हैं जो भागलपुर दंगों में सब कुछ लुट जाने के बाद हबीबपुर के शाहजंगी गांव में आकर तीन साल पहले बसे थे. अली इमाम ने इस जुर्म के लिए हबीबपुर के पूर्व मुखिया व पैक्स के मौजूदा अध्यक्ष के भाई मो. इस्माइल, मों. जुल्फी, मो. आलम और जेसीबी के चालक मो. शमसुद्दीन को प्रथम अभियुक्त बनाते हुए एफआईआर संख्या 30/15 दर्ज करायी थी. अली इमाम का कहना है कि हबीबपुर पुलिस ने भारी रिश्वत लेकर इन मुख्य अभियुक्तों का नाम अभियुक्त से हटा कर इस घटना का चश्मे दीद गवाह के रूप में कर दिया. नतीजा यह हुआ कि ये लोग गिरफ्तारी के दूसरे दिन ही छूट गये.
    अली इमाम कहते हैं कि तीन वर्ष पहले उन्होंने इस गांव में जमीन खरीद कर घर बनाया था. उसी के बाद से दबंगों द्वारा रंगदारी मांगी जा रही थी. वे बराबर उन्हें जान से मारने और घर को बुल्डोजर से ध्वस्त करने की धमकी देते थे.
    अली इमाम का कहना है कि कुछ दिन पहले भी उन्होंने पुलिस में शिकायत की थी लेकिन पुलिस उनसे मिली हुई है और पुलिस ने कुछ ले-दे कर मामला खत्म करने को कहा था. जिसके बाद उन्हें लगा कि पुलिस खुद जब अपराधियों से मिली हो तो इंसाफ की उम्मीद नहीं की जा सकती.
    अब अली इमाम ने इस मामले की शिकायत बिहार सरकार तक पहुंचायी है लेकिन अभी तक उस मामले में कोई सुनवाई नहीं हुई है.
जीवन तबाह
     इस बीच राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी के नेता नूर हसन आजाद के नेतृत्व में एक दल गांव का दौरा कर लौटा है. नूर हसन आजाद ने आरोप लगाया है कि दबंग मुसलमानों ने गरीब और पिछड़े मुसलमानों के जीवन को बरबाद करके छोड़ दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि गांव के पूर्व मुखिया और उनके रिश्तेदार राष्ट्रीय जनता दल के नेता हैं जिनका बड़ा राजनीतिक रसूख है.
     नूर हसन का कहना है कि1989 के भागलपुर दंगे में इन लोगों को जितना नुकसान साम्प्रदायिक शक्तियों से नहीं हुआ उससे ज्यादा नुकसान खुद दबंग मुसलमानों ने इनका किया है लेकिन पुलिस प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व पिछले पंद्रह दिनों से चुप है. उन्होंने कहा कि इस्लाम और भाईचारे की दुहाई देने वाले ताकतवर मुसलमानों ने, तिनका-तिनका चुन कर जिंदगी संवारने की कोशिश में लगे गरीब मुसलमानों को लूट कर यह साबित कर दिया है कि अपराधियों का कोई मजहब नहीं होता. [इसी बुल्डोजर से घरों को रौंदा गया]
    नूर हसन आजाद ने राज्य सरकार से मांग की है कि वह इस मामले की जांच कराये और आरोपियों को सजा दिलवाये. उन्हों ने मांग की है कि इस मामले में मोटी रिश्वत लेने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाये.
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क्या 'मोदी भी सामने नहीं लाना चाहते नेताजी की मौत का सच'

    आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत के रहस्य से पर्दा हटाने की मांग फिर से जोर पकड़ने लगी है। नेताजी के परिवार से जुड़ी समाजसेवी राज्यश्री चौधरी ने कहा कि नेताजी को लेकर देश की हुकूमत का नजरिया साफ नहीं है।
     नेहरू-गांधी परिवार ने इस मसले में कभी दिलचस्पी नहीं दिखाई। मोदी सरकार का रवैया भी पूर्व की सरकारों की तरह ही है। उन्होंने कहा कि मुखर्जी कमीशन की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग को लेकर जल्द ही देशव्यापी जनांदोलन छेड़ा जाएगा।
     शनिवार की दोपहर धर्मसंघ परिसर में भारत स्वाभिमान आंदोलन की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में हिस्सा लेने के बाद ‘राज्यश्री चौधरी ने कहा कि बोस परिवार ही नहीं देश के तमाम बड़े समाजसेवी और शोधकर्ताओं का मानना है कि नेताजी के गुम होने या कथित मौत के लिए नेहरू ही जिम्मेदार थे। यही वजह है कि कांग्रेस की सरकारों ने नेताजी की मौत की गुत्थी सुलझाने में रुचि नहीं ली।
    आज तक न तो डेडबॉडी मिली और न ही डेथ सर्टिफिकेट। क्या सरकार का फर्ज नहीं बनता कि वह पता लगाए कि आखिर नेताजी की मौत किन परिस्थितियों में हुई।
     चौधरी ने कहा कि एयर क्रैश की थ्योरी किसी के गले नहीं उतरती। हमारी मांग की है कि नेताजी के मौत की कारणों की पड़ताल करने वाली मुखर्जी कमीशन की 70 हजार पेज की रिपोर्ट सार्वजनिक हो। उस रिपोर्ट पर संसद में बहस हो और देश की जनता को मौत के कारणों और साजिशकर्ताओं के बारे में बताया जाए। साथ ही आजाद हिंद फौज के अरबों रुपये के खजानों के बारे में भी देश को बताया जाए।
     राज्यश्री चौधरी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की चचेरी बहन स्नेहलता सरकार की नतिनी की बेटी हैं। पिछले कई साल से वे प. बंगाल के ग्रामीण इलाकों में गरीबी उन्मूलन की दिशा में काम कर रही हैं। राष्ट्रीय चिंतक एवं विचारक केएन गोविंदाचार्य की प्रेरणा से स्थापित सामाजिक संस्था राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन से वह एक दशक से जुड़ी हुई हैं।
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रिश्वत की पेशकशः केजरीवाल की बेटी के खिलाफ शिकायत दर्ज

    नई दिल्ली।। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की बेटी हर्षिता केजरीवाल के खिलाफ आरटीओ (रीजनल ट्रांसपोर्ट आफिसर) को घूस की पेशकश के चलते भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत दिल्ली सरकार के पूर्व मुख्य सचिव उमेश सहगल ने दर्ज कराई है।
    गत सप्ताह लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए हर्षिता माल रोड स्थित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय पहुंचीं थीं। वहां उनके पास दस्तावेज की फोटोकॉपी नहीं थी। इस पर उनसे फोटोकॉपी लाने को कहा गया। मुख्यमंत्री की बेटी ने आरटीओ की ईमानदारी को जांचने के लिए लाइसेंस बनवाते समय घूस की पेशकश की थी, जिसे अधिकारी ने ठुकरा दिया था।
    इस बात की जानकारी खुद अरविंद केजरीवाल ने लोगों को रविवार को बुराड़ी मैदान में आयोजित ऑटो चालकों की रैली में दी थी।


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सब कुछ ठीक ठाक रहा इसी साल मे सलमान ख़ान कर सकते है शादी


सलमान ख़ान के चाहने वालो के लिए है खुश खबरी सलमान ख़ान ने कहा है सब कुछ ठीक ठाक रहा इसी साल मे कर सकते है शादी
     सलमान खान के लिए राहत वाला दिन मान लिया जाए तो वे अपनी जिंदगी के एक बड़े फैसले के बारे में सोच सकते हैं. सलमान खुद ही कह चुके हैं कि सबकुछ ठीकठाक रहा तो वे इस साल के अंत तक शादी कर लेंगे. यदि ऐसा होगा, तो शादी करने के लिए दुल्हन भी चाहिए.

कौन है दुल्हन
    लूलिया वांतुर. रोमानिया की टीवी प्रेजेंटर और एक्ट्रेस. कुछ दिन पहले उन्हें मुंबई में सलमान और उनके परिवार के साथ भी देखा गया. जन्म: 24 जुलाई, 1980, लासी रोमानिया मेंपढ़ाई: लॉ ग्रेजुएट हैं.कॅरियर: 19 साल की उम्र में यूरोपा नोवा चैनल में नौकरी शुरू की और फिर 15 साल टीवी प्रेजेंटर रहीं. 2006 में वे राजधानी बुखारेस्ट आ गईं, जहां उन्होंने मॉर्निंग न्यूज शो और डांस शो टीवी पर प्रेजेंट किए. स्पोर्ट्स का शौक: वॉलीबॉल, टेनिस और बास्केटबॉल की अच्छी खिलाड़ी रही हैं.
सलमान से पहचान और प्रेम
     2010 में डबलिन में सलमान 'बॉडीगार्ड' की शूटिंग कर रहे थे. उसी दौरान लूलिया का परिचय उसके ब्वॉयफ्रेंड मारियस मोगा ने कराया. मोगा पश्चिमी-मध्य यूरोप के नामचीन प्रोड्यूसर, कंपोजर और सिंगर हैं. दोनों 2011 में भारत भी आए. लेकिन जल्द ही उनका ब्रेकअप हो गया. इसके बाद लूलिया डिप्रेशन में चली गईं. बताया गया कि तनाव से बाहर आने के लिए उन्हें मनोचिकित्सक की मदद भी लेनी पड़ी. लेकिन इसी दौरान में सलमान दोबारा परिदृश्य में आए. दो साल पहले एक विदेश दौरे के दौरान सलमान लूलिया से मिले. उसके बाद से लगातार दोनों संपर्क में रहे और एक-दूसरे के करीब आ गए.
     परिवार में शामिल लूलिया पिछले दिनों भारत आईं और डेढ़ महीने तक सलमान और उनके परिवार के साथ रहीं. इस दौरान उन्होंने मोगा से उनके अलगाव में मदद की. लूलिया अब ज्यादातर दुबई में रहती हैं.

(Naeem)


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बड़ा होकर संयोग से इस देश का प्रधानमंत्री बन गया तो सबसे पहले पूरे देश के प्राइवेट स्कूलों को बंद करवा दूंगा ताकि सभी बच्चे सरकारी स्कूलों में एक साथ पढ़े सकें

Written By News Today Time on Monday, May 18, 2015 | 8:56 PM


एक 7 साल के लड़के ने नितीश कुमार को सर झुकाने को मजबूर कर दिया 
    पटना।। पटना में आयोजित एक सम्मलेन में शामिल होने गए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक बच्चे ने निशब्द कर दिया। नीतीश को शायद पता भी नहीं होगा कि कार्यक्रम में भाषण देने आया सात साल का कुमार राज नाम उन्हें गर्दन झुकाकर बैठे रहने पर मजूबर कर देगा। दरअसल सम्मेलन में नालंदा के रहने वाले सात साल के कुमार राज को बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर भाषण देने के लिए बुलाया गया था। छोटे से बालक ने जब राज्य की शिक्षा व्यवस्था की परतें खोलना शुरू कीं तो एक समय के लिए मुख्मंत्री के लिए गर्दन उठाकर लोगों की प्रतिक्रिया देखना मुश्किल हो गया। कुमार के भाषण पर पूरा माहौल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज रहा था।कुमार ने अपने भाषण में सरकारी और निजी स्कूलों की व्यवस्था में फर्क बताते हुए कहा, 'दो तरह की शिक्षा की व्यवस्था है, अमीरों के लिए अलग जिनके बच्चे नामी प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने जाते हैं और गरीबों के लिए अलग जिनके बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ने जाते हैं। इससे साफ मालूम चलता है कि प्राइवेट स्कूलों की अपेक्षा सरकारी स्कूलों में शिक्षा का घोर अभाव है।
   आखिर क्या कारण है कि कोई भी डॉक्टर, इंजीनियर, वकील यहां तक कि उस स्कूल के शिक्षक भी अपने बच्चे को सरकारी स्कूल में पढ़ाना नहीं चाहते। यही वजह है कि हम बच्चे हीन भावना का शिकार हो जाते हैं।'अपने भाषण में कुमार ने बड़े होकर प्रधानमंत्री बनने के संयोग पर कहा, 'बड़ा होकर संयोग से इस देश का प्रधानमंत्री बन गया तो सबसे पहले पूरे देश के प्राइवेट स्कूलों को बंद करवा दूंगा ताकि सभी बच्चे सरकारी स्कूलों में एक साथ पढ़े सकें। चाहे वह डॉक्टर का बच्चा हो या किसान का। चाहे वह इंजीनियर का बच्चा हो या मजदूर का। तभी इस देश में समान शिक्षा लागू होगी।'भाषण के अंत में कुमार ने अपनी कही बातों पर निर्णय करने का अधिकार जनता को देते हुए कहा, 'अब मैं क्या बोलूं। मैंने क्या सही बोला, क्या गलत मुझे नहीं मालूम। इसका निर्णय तो आप लोग कर सकते हैं। एक बात जरूर है कि मेरे दिल में जितनी भी बात थी मैंने कह दी। अब मैं अपने आप को बहुत हल्का महसूस कर रहा हूं।'
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चुनौतियों से निपटने नई शिक्षा नीति पर काम जारी

     नई दिल्ली।। गुणवत्ता, अनुसंधान और नवाचार की कमी के कारण हमारी शैक्षणिक संस्थाओं को पेश आ रही चुनौतियों का सामना करने के लिए केन्द्र के मानव संसाधन मंत्रालय ने एक नई शिक्षा नीति तैयार करने की दिशा में काम करना आरंभ कर दिया है। इसमें छात्रों, शिक्षकों एवं जनप्रतिनिधियों समेत पंचायत एवं ग्रामीण स्कूलों तथा अन्य लोगों की राय ली जा रही है। मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को बदलती जरूरतों के अनुरूप ठोस दिशा देने के लिए 'नई शिक्षा नीति' तैयार की जा रही है। नयी शिक्षा नीति कैसी हो, इसके बारे में 33 थीम तैयार की गईं हैं। इस बारे में विभिन्न पक्षों के साथ चर्चा की जा रही है। इस संदर्भ में ग्राम समिति की राय भी ली जा रही है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के बारे में सांसदों एवं जनप्रतिनिधियों से भी राय देने को कहा गया है। 
    नयी शिक्षा नीति के बारे में अब तक करीब नौ हजार टिप्पणियां एवं राय प्राप्त हो चुकी हैं। इन सुझावों का संकलन किया गया है। सुझावों को एकत्रित करने का कार्य ग्राम पंचायत स्तर से शुरू कर ब्लाक, जिला और राज्य स्तर पर किया जा रहा है। इसमें सूचना प्रौद्योगिकी, श्रम, सामाजिक न्याय, आदिवासी मामलों, युवा मामलों समेत करीब एक दर्जन मंत्रालयों की राय को समाहित किया जा रहा है। सरकार द्वारा नयी शिक्षा नीति तैयार करने का उद्देश्य गुणवत्ता, अनुसंधान और नवाचार की कमी के कारण हमारी शैक्षणिक संस्थाओं को पेश आ रही चुनौतियों से निपटने की व्यवस्था करना और नये समय की जरूरतों को पूरा करने का आधार प्रदान करना है।
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दो साल तक श्वासनली में फंसी रही लोहे की चाभी

    वाराणसी।। बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में डॉक्टरों ने एक युवक की श्वासनली में दो साल से पंससी लोहे की चाबी निकाली। यह काम एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टर आर.बी. ङ्क्षसह, सर्जन सिद्धार्थ लखौटिया और पैरामेडिकल स्टाफ की एक टीम ने किया। डॉक्टर लखोटिया ने बताया कि दो साल पहले जब मरीज के मानसिक रोग का उपचार चल रहा था तब एक दिन वह चाभी मुंह में रखकर सो गया जोकि उसकी श्वास नली में जाकर अटक गई। उसे खांसी हुई जिसे उसके घरवालों ने एक नीम हकीम को दिखा दिया। 
   किसी ने उसकी इस बात पर विश्वास नहीं किया कि उसने एक चाबी निगल ली है। दो साल तक उसे खांसी बनी रही और वो अस्पताल आने के बजाय ऐसे ही लोगो को दिखाता रहा। कुछ दिन पहले वह एक आयुर्वेदिक डाक्टर के पास गया जिन्होंने पहली बार उसकी छाती का एक्स-रे करवाया। श्वास की नली में एक बड़ी सी चाबी को पंससी देख उन्होंने उसे तुरंत सीटीवीएस विभाग, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, बीएचयू में रेफर कर दिया। उसकी चाबी को सफलतापूर्वक रिजिड और पेसक्सिबल ब्रोंकोस्कोप की मदद से निकाला गया। यह काफी दिक्कत का काम था क्योंकि चाबी दो साल से पड़ी रहने के कारण श्वास की नली की परतों के अंदर दब गई थी।
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