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दीपावली पर मोदी सियाचिन पहुंचे, संदेश दिया कि सभी भारतीय भारतीय सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं

Written By Bureau News on Thursday, October 23, 2014 | 7:59 PM


Hindi radio iran's photo.  सियाचिन।। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के सबसे ऊंचे रणक्षेत्र कहलाने वाले सियाचिन ग्लेशियर का दौरा किया जबकि भारत के सैन्य अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि जम्मू के कुछ सीमावर्ती सेक्टरों पर बृहस्पतिवार की सुबह पाकिस्तानी सेना ने भारतीय प्रतिष्ठानों पर फ़ायरिंग की है।
   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि वह दीवाली, कश्मीर में बाढ़ से प्रभावित लोगों के साथ मनाएंगे। नरेंद्र मोदी बृहस्पतिवार की सुबह कश्मीर पहुंचे और वहां से हेलीकाप्टर द्वारा उन्होंने दुनिया के सबसे ऊंचे रणक्षेत्र कहलाने वाले सियाचिन ग्लेशियर का दौरा किया और वहां भारतीय सेना के जवानों से मुलाक़ात की।
   दीपावली के मौके पर गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात भारतीय सैनिकों के साथ कुछ समय बिताया और वहां संदेश दिया कि सभी भारतीय उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। बर्फ की उंची चोटियों से मोदी ने दिपावली के मौके पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को बधाई दी।
  मोदी ने टवीट किया कि बर्फ़ की उंची चोटियों से अपने बहादुर जवानों और सशस्त्र बलों के अधिकारियों को मैं दिपावली की शुभकामना पेश करता हूं।
   दूसरी ओर नरेंद्र मोदी के कश्मीर के दौरे के विरुद्ध घाटी में अलगाववादियों की काल पर हड़ताल की गयी। सुरक्षा के कड़े प्रबंध और नाकाबंदी के कारण आम जनजीवन प्रभावित रहा। बीजेपी के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने नरेंद्र मोदी का स्वागत गवर्नर हाऊस में किया। राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री के सामने 44 हज़ार करोड़ रुपये की पुनरवास योजना पेश की है जो बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को पुनः आबाद करने के लिए बनाई गयी है।
7:59 PM | 0 comments | Read More

आरा में प्रदर्शनकारियों ने रोकी रेल, दिवाली पर हुई फजीहत

   आरा।। दिवाली मनाने अपने घरों को आने वाले सैकड़ों यात्रियों को गुरुवार को आरा रेलवे स्टेशन के पूर्वी क्रासिंग पर आंदोलनकारियों द्वारा रेल रोकने से भारी दिक्कत उठानी पड़ी है. प्रदर्शनकारियों के अड़ियल रवैये के कारण पुलिस को लाठी चार्ज करके हटाना पड़ा.
    हालांकि प्रदर्शनकारी रेलवे ट्रैक पर करीब ढ़ाई घंटे तक जमे रहे. पैक्स चुनाव की मतगणना में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर गुस्साए सैकड़ों लोगों ने आरा पूर्वी रेलवे क्रॉसिंग के पास हावड़ा-दिल्ली मेन रेल लाइन को जाम कर दिया। उग्र लोगों ने रेलवे ट्रैक पर तीन घंटे धरना प्रदर्शन कर अप आनंद विहार एक्सप्रेस और अपर इंडिया एक्सप्रेस समेत अनेक लोकल ट्रेनों को को रोक दिया.
   प्रदर्शनकारी आरा जिला प्रशासन के खिलाफ रेल पटरियों पर जमा हो गये. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बुद्वार को हुए पैकेस चुनाव की गिनती में भारी गड़बड़ी की गयी है. प्रदर्शनकारी दोबारा गिनती की मांग कर रहे थे.
   भोजपुर के पिरौटा में हुए मतदान के बाद उसकी गिनती हुई और हरेराम सिंह को विजयी घोषित किया गया लेकिन प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गिनती में गड़बड़ की गयी है.
7:43 PM | 0 comments | Read More

धनतेरस से दीवाली तकः पश्चिम बंगाल में 11 शिशुओं ने अस्पताल में तोड़ा दम

   कोलकाता।। पश्चिम बंगाल के मालदा मेडिकल कॉलेज एण्ड हास्पिटल में पिछले तीन दिन में 11 शिशुओं की मौत हो गई. चिकित्सा अधीक्षक एवं उपप्रधानाचार्य एम ए राशिद ने बताया, ‘‘आठ शिशुओं की मौत सोमवार को और तीन की मौत पिछले 24 घंटों के दौरान हुई है. सभी मृत शिशुओं की उम्र एक दिन से 30 दिन के बीच थी.’’
   उन्होंने कहा, ‘‘ सभी बच्चों का वजन बहुत कम था और वे कुपोषित थे तथा उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी.’’ ज्यादातर बच्चों को मालदा जिले के कालीचक ब्लॉक और मालदा के अन्य इलाकों से स्थानीय अस्पतालों द्वारा रेफर करने के बाद यहां लाया गया था. गौरतलब है कि पिछले साल भी इस अस्पताल में कई शिशुओं की मौत हुई थीं.


7:42 PM | 0 comments | Read More

भारतीय वायु सेना ने सुरक्षा के लिए खतरा बताए जाने के बाद भी, भारत में धड़ल्ले से बिक रहा है श्याओमी

   नई दिल्ली।। भारत में सेकंडों में बिक जाने वाले श्याओमी स्मार्टफोन्स को भारतीय वायु सेना ने सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। भारतीय वायु सेना ने कहा है कि श्याओमी स्मार्टफोन्स पर यूज़र डेटा को चीन के सर्वर में भेजने के आरोप लगते रहे हैं, जिससे कि इसकी वजह से जासूसी हो सकती है। सेना ने अपने अधिकारियों को एक अलर्ट जारी करके श्याओमी स्मार्टफोन्स इस्तेमाल न करने के लिए कहा है।




(Sabir Khan)


4:45 PM | 0 comments | Read More

खुले में धूल-मिट्टी के बीच बेची जा रही है मिठाईयां, हो रहा है स्वास्थ्य से खिलवाड़

  सिरसा।। प्रशासन के आदेशों को ताक पर धरकर अनेक लोगों ने खुले में मिठाईयों की बिक्री शुरू कर दी है, जिसके कारण लोगों का स्वास्थय दांव पर है। मिठाईयों की बिक्री की वजह से इन पर धूल-मिट्टी पड़ रही है और उनके प्रदुषित होने की आशंका भी बनी हुई है। शहर में कई जगह तो गंदगी के ढेरों के निकट मिठाई की स्टॉले सजाई गई है।
    मिठाई के नाम पर कमाई करने की चाह रखने वालों ने शहर के बाहर कालौनियों में मिठाईयों की स्टॉल लगाई हुई है। जिन लोगों का मिठाई से दूर-दूर का वास्ता नहीं है, वे भी पर्व पर मिठाई बेचकर जेब भरने की ताक में है। ऐसे में इन दुकानदारों द्वारा किस दर्जे की, किस क्वालिटी की मिठाई बेची जा रही होगी, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके साथ ही मिठाई की स्टॉल लगाकर बैठे दुकानदारों द्वारा ग्राहकों को मिठाई के डिब्बे का वजन साथ तौलकर भी चपत लगाई जा रही है। माप तौल विभाग के अनुसार मिठाई के डिब्बे का वजन मिठाई के साथ नहीं किया जा सकता। बावजूद यह खेल सरेआम खेला जा रहा है। ग्राहकों को गत्ते का डिब्बा 200 से 500 रूपये किलो की दर पर बेचा जा रहा है। चार दिन के लिए मिठाई बेचने वाले घटिया दर्जे की मिठाई बेचकर गायब हो जाएंगे और उनके खिलाफ कार्रवाई भी नहीं हो पाएगी। इसलिए ऐसे स्टॉल लगाने वालों की मिठाईयों की पहले लैब से जांच होनी चाहिए, उसके बाद ही बिक्री की अनुमति मिलनी चाहिए।


4:36 PM | 0 comments | Read More

बुंदेलखंड में दबंगों का कहर


   बुंदेलखंड।। बुंदेलखंड के जनपद झाँसी के रक्शा थाना के खैरा गावं में दबंगों दुआरा दलित युवक सुन्नु को बंधक बनाकर बेरहमी से मारपीट कर, पेसाब व मल खिलाकर व प्राइवेट पार्ट्स में पेट्रोल डालकर सिगरेट से जलाया, सर के बाल मुडवाकर व जूतों की माला पहनकर गावं में घुमाया
    बुंदेलखंड जहाँ पर सामंतशाही व दबंगों की दबंगई इस प्रकार हाबी हे की दलितों के साथ आये दिन उत्पीडन के घटनाये लगातार हो रही हे व शासन व प्रशासन के लोग बेसुध होकर सो रहे हे यहाँ पर तो दबंगों ने दबंगई की हद ही पर कर दी !
    दिनांक 17 सितम्बर २०१४ को बुंदेलखंड के जनपद झाँसी के रक्शा थाना क्षेत्र के खैरा ग्राम की घटना हे जहाँ जमीन के बिबाद में दबंगों ने रात्रि १० बजे एक दलित सुन्नु उर्फ़ सुजान पुत्र श्री रामा (धोबी) को उसके प्लाट से अगुआ कर ले गए जहाँ रात्रि भर उसकी पिटाई की व उसको मूत्र पिलाया एवं मल खिलाया उसके गुप्तांगो में पेट्रोल से भीगी रुई डालकर व उसे सिगरेट से भी दागा, व सर के बल मुडवाकर जूतों की माला गले में डालकर उसे गावं में घुमाया इस दलित युवक का कसूर सिर्फ इतना था की इसके परिवार बालों ने दबंगों के घर के पास जमीन (प्लाट) खरीद ली थी जिसको लेकर दबंग उसे आये दिन धमकी देते रहते थे और इसको लेकर गाली गलोंच भी होता था 17 सितम्बर की रात्रि में दबंगों ने मौका पाकर युबक को अगुवा कर उसके साथ इस तरह का कुकृत्य किया !
    यह रिपोर्ट पीड़ित के भाई व माता के बयान एवं बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच की टीम के दुवारा की गई विजिट के आधार पर लिखी गई हे ! इस पुरे केस की फैक्ट फाइंडिंग बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच की टीम कर रही हे व मंच की टीम पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रही हे !


From- Vimal Kumar Baudh
BDAM
4:27 PM | 0 comments | Read More

गडकरी के लिए विधायक ने इस्तीफे की पेशकश की


कांग्रेस हो या बीजेपी भाया सब और है पद की माया
   नागपुर।। मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा की तरफ से राज्य पार्टी प्रमुख देवेंद्र फडऩवीस के पसंदीदा उम्मीदवार होने की चर्चा के बीच नागपुर पूर्व से विधायक कृष्णा खोपड़े ने कल नितिन गडकरी के लिए अपनी सीट छोडऩे की पेशकश की। उन्होंने यह पेशकश ऐसे समय में की है जब केंद्रीय मंत्री को राज्य की बागडोर सौंपने की मांग तेज हो गयी है। दूसरी बार विधायक बने खोपड़े ने कहा कि गडकरी के लिए वह अपने निर्वाचन क्षेत्र से इस्तीफा देने को इच्छुक हैं। घटनाओं के बारे में विवरण के लिए जब फडऩवीस से संपर्क किया गया तो उन्होंने खामोशी अख्तियार कर ली और कोई बयान नहीं दिया।
    गडकरी ने मंगलवार रात कहा था कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से सौंपी जाने वाली किसी भी जिम्मेदारी को स्वीकारने के लिए वह तैयार हैं। विदर्भ क्षेत्र के भाजपा के करीब 39 विधायकों ने कल गडकरी से उनके आवास पर मुलाकात की। विधायकों ने उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री बनाने की मांग की है। वरिष्ठ भाजपा नेता ने बाद में इलेक्ट्रानिक मीडिया से कहा कि जिन विधायकों ने उनसे मुलाकात की मेरे मन में उनके लिए बहुत सम्मान है और वे मुझसे मुख्यमंत्री बनने के लिए अनुरोध कर रहे हैं।


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पुत्र 'मोह': कांग्रेस का असल संकट ?

    राजनीति में कुछ भी शाश्वत नहीं होता. यही उसका स्वभाव है. महत्व केवल अवसर का होता है. सत्ता अवसर देती है और अवसर संभावनाओं के द्वार खोलता है. कांग्रेस दस साल शासन में रही. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के पास अवसर था. यह साबित करने के लिए कि उनमें संभावनाएँ हैं. साल 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन हुआ लेकिन वे 1982 के एशियाड से कुछ नहीं सीखे. तब राजीव गांधी के प्रबंधकीय कौशल की खूब तारीफ हुई थी लेकिन 2010 में राहुल ने ये मौका गंवा दिया. उनकी माँ सोनिया गाँधी भी अपनी सास इंदिरा गांधी से सबक नहीं ले सकीं. मधुकर उपाध्याय का विश्लेषण वह घटना छोटी थी पर मामूली नहीं थी. इस बात का अहसास सबको था. सबकी नज़रें एक-एक पल उस पर थीं. शायद इसीलिए 'हिन्दुस्तान टाइम्स' ने उसे 'गेम चेंजर' कहा. 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' की ख़बर का शीर्षक था 'इट टर्न्ड मेन फ्रॉम ब्वायेज़.' 
    बकौल 'इंडिया टुडे' यह प्रबंधकीय कौशल का इम्तिहान था और घटना में शामिल लोग इम्तिहान में 'पास' हो गए. बात 1982 के नवंबर महीने की है. और घटना है नवें एशियाई खेलों का आयोजन. खेलों का आयोजन भारत में हो, यह फ़ैसला पहले हुआ था लेकिन चरण सिंह सरकार ने इसे 'फ़िज़ूलख़र्च' क़रार देते हुए रद्द कर दिया. आम चुनाव के बाद, जब इंदिरा गांधी की सत्ता में वापसी हुई, आदेश बदल दिया गया. अप्रैल महीने में. राजीव को जिम्मेदारी एशियाड'82 भारत का पहला बड़ा खेल आयोजन था और इंदिरा गांधी निश्चित रूप से इसका महत्त्व समझती थीं. यह वो ज़माना था जब दिल्ली में कोई बड़ा स्टेडियम नहीं था, सड़कें दुबली-पतली थीं, फ़्लाइओवर होते ही नहीं थे और टेलीविज़न 'ब्लैक एंड व्हॉइट' होता था. एशियाड आयोजन का अर्थ था, सब बदल देना. समय बहुत कम था. चुनौती बहुत बड़ी. दो वर्ष से कुछ अधिक वक़्त में सब करना था कि रंगीन टेलीविज़न पर रंग-बिरंगा दिखाई दे. और दुनिया उसे देखे. खेलों की एक आयोजन समिति थी पर इंदिरा गांधी आश्वस्त नहीं थीं. अनौपचारिक रूप से यह काम एक विशेष समिति को सौंपा गया. ज़िम्मेदारी राजीव गांधी को दी गई. दफ़्तर खुला प्रगति मैदान में. लक्ष्य था कि आयोजन अबाधित हो, सफल हो. घटनाएं-स्पर्धाएं पत्रकारिता के वे मेरे शुरुआती साल थे. डेस्क पर काम करता था और अप्रैल, 1982 में नौकरी बदलकर संवाद समिति यूएनआई की हिंदी सेवा 'यूनीवार्ता' में आया था. 
    एशियाड इतना बड़ा आयोजन था कि तत्कालीन मुख्य संपादक जीजी मीरचंदानी और 'वार्ता' के संपादक काशीनाथ जोगलेकर ने डेस्क से तमाम लोगों को रिपोर्टिंग का ज़िम्मा दे दिया. मैं भी उन लोगों में शामिल था. यक़ीनन, सारी बड़ी घटनाएं-स्पर्धाएं वरिष्ठ सहयोगियों को देखनी थीं. हमें छिटपुट ख़बरें और 'झलकियां' इकट्ठा करनी थीं, लॉन टेनिस के मुक़ाबले 'कवर' करने के अलावा. उद्घाटन समारोह की तैयारियां हो चुकी थीं. बस एक फ़िक्र थी. आसमान में कुछ बादल नज़र आ रहे थे. एक डर मन में था कि कहीं बरस न पड़ें. इंदिरा का जन्मदिन आख़िर प्रधानमंत्री समारोह में उपस्थित रहने वाली थीं और कोई व्यवधान, ईश्वरीय ही सही, कोई नहीं चाहता था. वह इंदिरा गांधी का जन्मदिन भी था. ज़ाहिर है, मैं मुख्य समारोह के समय स्टेडियम में नहीं था. उसे 'कवर' नहीं कर रहा था. शाम सात-साढ़े सात का समय होगा, कुछ रिपोर्टर ख़बर की तलाश में विशेष आयोजन समिति के दफ़्तर, प्रगति मैदान पहुंचे. अंदर, रंगीन टेलीविज़न पर राजीव गांधी और उनके दो सहयोगी- अरुण नेहरु और अरुण सिंह समारोह का प्रसारण देख रहे थे. चाय मेज़ पर थी. थोड़ी देर में समारोह संपन्न होने को था. तभी बूंदा-बांदी शुरू हुई. और उद्घाटन समारोह ख़त्म होते न होते पानी टूट कर बरसा. तय कार्यक्रम के मुताबिक़ राजीव गांधी की 'तिकड़ी' इसके बाद वहां से जाने वाली थी- इंदिरा गांधी को जन्मदिन की बधाई देने. पर बारिश के कारण सब वहीं रुके रहे. राजीव की 'तिकड़ी' अरुण नेहरू, अरुण सिंह (बीच में) और राजीव गांधी. 
    उसी झमाझम बारिश में दफ़्तर के बाहर एक कार आकर रुकी. एक अधिकारी अंदर गया और बताया गया कि एक आयोजन स्थल पर स्टेडियम की छत टूट गयी है. स्टेडियम में पानी भर गया है. राजीव गांधी की 'तिकड़ी' फ़ौरन खेलगांव के लिए रवाना हो गई. यह वही स्टेडियम था, जहां अगले दिन भारोत्तोलन की स्पर्धाएं होने वाली थीं. उस वक़्त रात के साढ़े दस बजे होंगे. फ़ौरन दिल्ली के उपराज्यपाल, जगमोहन से संपर्क किया गया. आदेश था कि दो हज़ार लोग तत्काल उपलब्ध कराए जाएं. स्टेडियम की घेराबंदी कर दी गई. रिपोर्टर बाहर पेड़ों के नीचे खड़े थे, बारिश से बचने के लिए. राजीव गांधी स्टेडियम के एक कोने में खड़े रहे. देखते रहे. निर्देश देते रहे. मज़दूर काम करते रहे. स्टेडियम से पानी निकाला गया. छत की मरम्मत हुई और सुबह आठ बजे तक काम पूरा हो गया. भारोत्तोलन स्पर्धाएं निर्धारित समय पर हुईं, उसी जगह. राष्ट्रमंडल खेल इस घटना ने न केवल राजीव गांधी की प्रबंधकीय कुशलता स्थापित की, उन आलोचकों का कुछ हद तक मुंह बंद कर दिया, जो उन्हें अनुभवहीन 'बाबा लोग' कहते हुए ख़ारिज कर रहे थे. 
    शायद इंदिरा गांधी को एशियाई खेलों का महत्त्व एक से ज़्यादा तरीक़े से समझ में आ रहा था. राजनीतिक तौर पर भी. लगभग तीस साल बाद, भारत को राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन करना था. इसका फ़ैसला सात साल पहले हुआ था लेकिन स्थितियां पहले की तुलना में बहुत भिन्न नहीं थीं. अव्यवस्था, अराजकता और भ्रष्टाचार के आरोप थे. चीज़ें एक-एक करके बनती-बिगड़ती थीं. मीडिया आलोचना कर रहा था, विपक्ष थू-थू. तब से अब में एक अंतर था. फ़र्क यह था कि उसे संभालने के लिए कोई इंदिरा गांधी नहीं थीं. पुत्र मोह राजीव गांधी की जगह उनके पुत्र, राहुल गांधी थे पर उन्हें कोई ज़िम्मेदारी नहीं सौंपी गई. उनकी ओर से भी पहल नहीं हुई. राहुल स्वच्छंद रूप से कभी यहां-कभी वहां जाते रहे. गांवों में गए, विदेश हो आए. बाहें और त्योरियां चढ़ाए कुछ-कुछ बोलते रहे. तबतक मौक़ा हाथ से निकल गया. अफ़रातफ़री के दौर में बुज़ुर्ग प्रधानमंत्री, मनमोहन सिंह ने कमान अपने हाथ में लेने की कोशिश की. उनका क़ाफ़िला इस से उस स्टेडियम जाता रहा. राहुल को तब भी किसी ने कुछ नहीं कहा. सोनिया गांधी को याद नहीं दिलाया कि ऐसे ही मौक़े पर उनकी सास, इंदिरा गांधी ने क्या फ़ैसला किया था. विफलता के डर और पुत्र मोह ने इस देश को कई बार संकट में डाला है. महाभारत काल में उसे युद्ध तक ले गया है. तमाम हुकूमतें तबाह हुई हैं. देश का इतिहास-भूगोल बदल गया है. संगठन नष्ट हो गए हैं. राजनीति उलट-पुलट गई है. क्या कांग्रेस पार्टी भी उसी की शिकार है?
4:19 PM | 0 comments | Read More

जाने क्यों मनाई जाती है दीपावली ?

"हम दीपावली क्यों मनाते हैं ? दैविक युग हो ,वैदिक युग हो, त्रेता या द्वापर हर युग में दीपावली का विशेष महत्व रहा है। मुख्यतः हम दीपावली मनाने के निम्न 9 प्रमुख कारण बता सकते हैं।
1.देवी लक्ष्मी का जन्म दिवस -- समुद्र मंथन के दौरान लक्ष्मी जी कार्तिक की अमावस्या के दिन ही प्रकट हुयी थीं।
2. लक्ष्मी मुक्ति दिवस -- लक्ष्मी जी को बाली ने बंधक बना लिया था। भगवान् विष्णु के पंचम अवतार "वामन अवतार " में आ कर ने आज ही के दिन लक्ष्मी जी को मुक्त करवाया था।.
3. भगवान् कृष्ण ने नरकासुर का वध किया --- चतुर्दसी के दिन यानी दीपावली के एक दिन पहले भगवान् कृष्ण ने नरकासुर का वध करके उसके बंधन से 16000 स्त्रीयों को मुक्त कराया था। नरकासुर के नाम पर ही इसे नरक चतुर्दसी भी कहते हैं। यह अभियान दो दिन तक चला इसलिए पहले दिन छोटी दीपावली और दुसरे दिन दीपावली मनाई जाती है।
4. पांडवों की घर वापसी -- महाभारत के अनुसार "कार्तिक अमावस्या" के दिन ही पांडव अपने वनबास की अवधि पूरी करके वापस आये थे इस लिए प्रजा के उस वर्ग ने जो कौरव- पांडवों के द्वंद्व में पांडवों के पक्षधर था दिए कर दीपावली मनाई थी।
5. राम की विजय -- आज के ही दिन राम अपने वनवास की अवधि पूरी करके तथा लंका विजय करके लक्ष्मण और सीता के साथ अयोध्या वापस आये थे इसी खुशी में दीपावली मनाई जाती है।
6. विक्रमादित्य का राज्याभिषेक --- हिंदुत्व की अवधारणा अवधारणा के महानतम राजा विक्रमादित्य का राज्याभिषेक दीपावली के दिन ही हुआ था।
7. महर्षि दयानंद का निर्वाण दिवस -- दीपावली के दिन ही आर्य समाज के प्रवर्तक महर्षि दयानंद का निर्वाण दिवस है।
8. महावीर तीर्थंकर का निर्वाण दिवस -- जैन धर्म के प्रवर्तक महावीर थीर्थंके का निर्वाण दिवस भी आज के ही दिन यानी दीपावली को होता है।
9. सिख सम्प्रदाय के लिए विशेष दिन --- तीसरे सिख गुरु अमर दास ने आदेश दिया था कि दीपावली सिखों का महत्वपूर्ण पर्व होगा कि जिस दिन सभी सिख गुरु का लेने के लिए एकत्र होंगे। 1577 में दीपावली के दिन ही अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की आधारशिला (नीव ) राखी गयी थी। छठवें सिख गुरु हरगोविंद को मुग़ल जहांगीर ने बंदी बना लिया था आज ही के दिन यानी दीपावली को 1619 में ग्वालियर के किले से 52 राजाओं के साथ रिहा किया गया था।
----- दीपावली की शुभ और मंगल कामना ---- -----
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पटाखे की दुकान में आग, सात की मोत

   बालोतरा।। बालोतरा में बहुत ही दुखद हादसा पेश आया हैं। पटाखो की दुकान में गी आग में सात लोग जिंदा जल गये है। बालोतरा के शास्त्री सर्किल के पास में स्थित पटाखो की दुकान में बुधवार की रात को एक बजे आग लग गई। पटाखो की गुंज से पूरा शहर दहल उठा। पटाखो की दुकान के बाहर बेचने के लिये रखे पटाखो में आग लगने के बाद दुकान के गोदाम में रखे पटाखो ने भी आग पकड़ ली। गोदाम को बचाने के लिये दुकान मे काम कर रहे लोगो ने शटर बंद करके खुद को दुकान में ले लिया। लेकिन दुकान मे रखे पटाखो में धमाका होने से उनको बचने के लिये मोका नही मिलां। आग पर चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद काबु पाया जा सका। हादसे में दुकान के मलबे में से अब तक सात लोगो के शव निकाले जा चुके है ओर गुमषुदा लोगो को निकालने के लिये रेस्क्यु आपरेषन जारी है। हादसे में दो ओर लोगो के दबे होने की आशंकाए जताई जा रही है। जानकारी मिलने पर कलेक्टर पर जिला कलेक्टर मोके पर पहचे ओर हालातो का जायजा लिया। हादसे में मरने वाले पांच लोग एक ही परिवार के थे।




1:29 PM | 0 comments | Read More

प्रधानमंत्री बनते ही मोदी के, बदले रूख बाबा रामदेव के गये कांग्रेसी सरकार के निमंत्रण पर केदारनाथ


प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण में न जाने वाले बाबा रामदेव द्वारा कांग्रेसी सरकार का निमंत्रण स्वीकार करने पर लोग हैरान
   नई दिल्ली।। लोग हैरान है कि प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण में सम्मलित न होने वाले बाबा रामदेव कैसे कांग्रेसी मुख्यमंत्री हरीश रावत सरकार के निमंत्रण पर भगवान केदारनाथ धाम में सरकारी हेलीकप्टर से केदारनाथ धाम चले गये ? बाबा रामदेव के इस कदम के बारे में दीपावली के दिन सियाचीन सीमा पर सैनिकों से मिलने के बाद कश्मीर में बाढ़ पीड़ितों के बीच दीपावली मनाते समय प्रधानमंत्री मोदी के जेहन में रह रह कर उठ रहा होगा।
   भाजपाई ही नहीं देश के तमाम जागरूक लोग हैरान है कि कांग्रेस को भ्रष्टाचारी व विदेशों में छूपे भारत के भ्रष्टाचारियों के काले धन को संरक्षण देने का आरोप लगा कर देश की सत्ता से उखाड़ फेंकने व नरेन्द्र मोदी को देश का प्रधानमंत्री बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले बाबा रामदेव अचानक 22 अक्टूबर को अचानक अपने घोर विरोधी कांग्रंेस के साथ खडे दिखाई दिये? लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर क्या कारण है कि जिस कांग्रेस को धूल चटाने व मोदी को प्रधानमंत्री के पद पर आसीन कराने के लिए देश विदेश में रहने वाले अपने लाखों समर्थकों के साथ दिन रात एक करके बाबा रामदेव ने पूरे देश को कांग्रेस के विरोध में खड़ा करने का ऐतिहासिक योगदान दिया था। कांग्रेस को देश की सत्ता से उखाड़ फेंकने व नरेन्द्र मोदी को देश का प्रधानमंत्री बनाने के अपने प्रचण्ड व व्यापक खुलेआम अभियान से आक्रोशित कांग्रेस ने उनको सबक सिखाने के लिए उन पर व उनके समर्थकों पर कांग्रेस सरकार ने रामलीला मैदान में अमानवीय पुलिस दमन किया। बाबा रामदेव व उनके संस्थान पर 8 दर्जन से अधिक मुकदमें उत्तराखण्ड की कांग्रेस सरकार ने लगा कर उनके करीबी आचार्य बालकृष्ण को भी जेल की यातना तक दी गयी। कांग्रेस के जुल्मों का मजबूती से सामना करते हुए बाबा रामदेव ने अपना कांग्रेस को सत्ता से उखाड कर मोदी को प्रधानमंत्री बनाने का मिशन सफल होने तक जारी रखा।
   लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का पूरे देश से न केवल सफाया हुआ अपितु पहली बार भाजपा को अपने दम पर स्पष्ट बहुमत मिल गया। उसी मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद ऐसी क्या बात हुई कि मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित नहीं होने वाले बाबा रामदेव अचानक अपने घोर विरोधी कांग्रेस के मुख्यमंत्री हरीश रावत के सबसे करीबी सिपाहेसलार रणजीत सिंह रावत के साथ बैठ कर केदारनाथ धाम में पूजा अर्चना कर प्रदेश के उसी मुख्यमंत्री हरीश की सराहना करने लगे जिनकी वे खुद लोकसभा चुनाव में खुल कर विरोध करते थे।
    बाबा रामदेव व कांग्रेस के बीच बढ रही नजदिकियों को उजागर करने वाली यह घटना तब लोगों के जेहन में आयी जब 22 अक्टूबर की सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री हरीश रावत के औद्योगिक सलाहकार रणजीत रावत के साथ सरकारी हेलीकॉप्टर से बाबा रामदेव व आचार्य बालकृष्ण सहित कई संत व मीडिया के लोग हरिद्वार से केदारनाथ पहुंचे। कांग्रेसी सरकार के निमंत्रण को स्वीकार करने पर पत्रकारों ने बाबा से कांग्रेस के साथ खडे होने पर उठाये गये प्रश्नों का उतर देते हुए बाबा रामदेव ने स्पष्ट किया कि चुनाव के बाद पक्ष-विपक्ष को छोड़कर निष्पक्ष होना जरूरी होता है। ‘मोदी भाजपा के नहीं बल्कि सवा सौ करोड़ जनता के प्रधानमंत्री हैं और ऐसे ही हरीश रावत भी कांग्रेस के नहीं बल्कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हैं।’ मुख्यमंत्री ने भगवान शिव के धाम जाने के लिए कहा था। राज्य सरकार के बुलावे पर केदारनाथ की व्यवस्था देखने गये थे। मुख्यमंत्री ने हाथ बढ़ाया तो हमने भी उनका साथ दिया। दीपावली पर मुख्यमंत्री ने शुभकदम बढ़ाया तो हमने भी प्रदेश और देशहित में सरकार के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया।’ बाबा रामदेव ने संतों व मुख्यमंत्री के सलाहकार के साथ भगवान केदारनाथ की पूजा-अर्चना भी की।
    बाबा रामदेव के साथ केदारनाथ यात्रा के सूत्रधार मुख्यमंत्री हरीश रावत के सबसे करीबी सिपाहेसलार व औद्योगिक सलाहकार रंजीत सिंह रावत ने स्पष्ट किया कि योगगुरु ने भले ही कांग्रेस के विरोध में स्वर बुलंद किये हों मगर उन्होंने उत्तराखंड के विरोध में कभी कोई बात नहीं कही। श्री रावत ने कहा कि आपदा के बाद चारधाम यात्रा सहित प्रदेश का पर्यटन पटरी से उतर गया था। प्रदेश सरकार का प्रयास है कि देश-विदेश में यह संदेश जाए कि उत्तराखंड सुरक्षित है इसलिए उनकी ओर से इस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। श्री रावत ने कहा कि बाबा रामदेव को उत्तराखंड का ‘ब्रांड एम्बेसडकर’ भी कहा जा सकता है।
   इस प्रकरण पर भले ही रामदेव व कांग्रेस के साथ भाजपाई कोई मुह न खोलें पर बाबा रामेदव का अचानक कांग्रेसी सरकार का निमंत्रण स्वीकार करना साधारण सी बात नहीं है। बाबा रामदेव व मोदी के करीबी जानते हैं कि बाबा रामदेव व मोदी के बीच वह तालमेल, मेल मुलाकात व संवाद वेसा नहीं रहा जैसे लोकसभा चुनाव परिणाम निकलने तक थे। चुनाव परिणाम से जहां बाबा रामदेव गदगद थे। परन्तु जेसे ही उन्होंने इस ऐतिहासिक सफलता के लिए अपने भारतीय स्वाभिमान संगठन का कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में किया। उस कार्यक्रम में तत्कालीन भाजपाध्यक्ष राजनाथ सिंह, जेटली सहित तमाम बडे भाजपाई आये परन्तु जिन मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए बाबा रामेदव ने कई महीनों तक दिन रात एक करके कांग्रेस को सत्ता से उखाडने का आवाहन करके तमाम प्रकार के कांग्रेस जुल्म सितम सहे वही मोदी सत्ता प्रधानमंत्री की शपथ लेने से पहले उनके कार्यक्रम में नहीं आये। मोदी के इस बेगाने रूख से बाबा रामदेव बेहद आहत ही नहीं अपमानित भी महसूस करने लगे। वे हैरान थे कि चुनाव परिणाम आने से पहले उनके एक बुलावे पर हर जगह उपस्थित हो कर वेहद अपनत्व दिखाने वाले मोदी कैसे सत्ता मिलते ही बेगाने हो गये। खासकर उनके उन समर्थकों को जिन्होंने महीनों अपने घरबार छोड कर कांग्रेस को सत्ता से उखाड़ने व मोदी को सत्तासीन करने के लिए दिन रात एक कर दिया था , ऐसे हजारों हजार कार्यकर्ताओं को धन्यवाद का एक शब्द कहने के लिए मोदी के पास दिल्ली में रहते हुए भी पांच मिनट का समय नहीं रहा। इसी बदले व्यवहार से आहत बाबा रामदेव ने मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में सम्मलित नहीं हुए। हालांकि उन्होंने अपने संगठन को शपथ ग्रहण समारोह में भेजा था।
   बाबा रामेदव, मोदी के इस बदले रूप को देख कर हैरान थे। परन्तु बाबा उफ तक नहीं कर पाये। क्योंकि मोदी ने बेहद चतुर राजनेता की तरह बाबा रामदेव की प्रमुख मांग देश में काला धन को लाने के लिए प्रथम मंत्रीमण्डल की बैठक व उस पर कार्यवाही की। उसके बाद योग को भी अपनी सरकार की प्राथमिकता की सूचि में रखा। देश विदेश में भी योग को प्रमुखता से अपने भाषणों में बयान किया। पर बाबा अंदर ही अंदर मोदी के बदले रूख से बेहद आहत है। पर वे इसको कहीं प्रकट तक नहीं कर पा रहे है। करें भी तो क्या कह कर। मोदी ने उनको उफ करने के लिए भी कोई कारण नहीं दे रहे है। काला धन व योग पर सरकार तेजी से काम करती दिख रही है।
    हाॅं एफडीआई व गौ हत्याबंदी जेसे मामलों में तमाम राष्ट्रवादी ताकतें बाबा रामदेव से सरकार पर दवाब डालने के लिए जोर दे रहे है। पर बाबा रामदेव नहीं चाहते कि मोदी से उनकी सीधी तकरार हो। वे भी वक्त की इंतजारी कर रहे हैं। परन्तु हैरान है मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद के बेगाने व्यवहार से। बाबा हेरान है कि सत्ता पा कर लोग कैसे बदल जाते है। बाबा को यह बात भी बेहद दुखती है कि कांग्रेस की तो पूरी सरकार उनके स्वागत के लिए तैयार रहती पर जिस मोदी को उन्होंने प्रधानमंत्री बनाने के लिए दिन रात एक करके कांग्रेस के जुल्म तक सहे वह मोदी राजताज पाते ही इतने बदल जाये तो किस पर विश्वास करे। परन्तु प्रधानमंत्री मोदी का राज करने का अपना तरीका है। वे राजकाज करते समय रिश्ते नाते ही नहीं मित्रता को कहीं पास तक नहीं फटकने देते। वे नहीं चाहते कि उनकी सरकार के कार्यो में कोई व्यक्ति दखल करे। वे अपने मिशन 2024 के तहत बहुत ही सावधानी से काम कर रहे है। मोदी ने न केवल बाबा रामदेव को ही नहीं अपितु अपने सुब्रमण्य स्वामी, जेठमलानी आदि प्रमुख प्रभावशाली हितैषियों को अपने से दूर रखा है। यही नहीं उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेता आडवाणी व जोशी सहित तमाम नेताओं को राजनीति के नेपेथ्य में धकेल दिया है। वे 2024 तक देश में केवल मोदी ही मोदी दिखाना चाहते। देश इसके लिए भी तैयार है पर बशर्ते वे देश से अंग्रेजी की गुलामी, कत्लखाने, ठेकेदारी का शोषण, मंहगाई व भ्रष्टाचार को दूर करके देश को महाशक्ति बनाये। यह तो समय ही बतायेगा मोदी अपने मिशन पर कहां तक सफल हुए परन्तु वर्तमान में बाबा रामदेव उनके बदले रूप को देख कर बेहद आहत हैं। मोदी के इस बदले रूख से बाबा रामदेव ही नहीं उनके कई करीबी समर्थक भी मर्माहित होगे। पर उनके पास मूक रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं । देखना है मोदी के बदले इस रूख से बाबा रामेदव कांग्रेस से जुगलबंदी आगे भी निभाते हैं या मोदी के सफाई अभियान को आगे बढाते हैं।
(Dev Singh Rawat)




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हरियाणा के नए मुख्यमंत्री "मनोहर लाल खट्टर" जीने बारें कुछ बातें जो आप नहीं जानते

हरियाणा के नए मुख्यमंत्री "मनोहर लाल खट्टर" जीने बारें कुछ बातें जो आप नहीं जानते...
1. मनोहर लाल खट्टर का जन्म 1 जनवरी 1954 कोहरियाणा के रोहतक जिले के निंदाना गांव में हुआ.
2. खट्टर के पिता हरबंस लाल खट्टर पूर्वी पंजाब (अब पाकिस्तान) में रहते थे. विभाजन के समय सन 47 में वह अपने पिता यानी मनोहर लाल के दादा के साथ खाली हाथ रोहतक आ गए.
3. मनोहर लाल के पिता और दादा ने शुरुआती दौर में मजदूरी की. कुछ पैसा जमा हुआ तो निंदाना में दुकान खोल ली. यहीं मनोहर लाल पैदा हुए.
4. दुकान से कुछ पैसा जमा हुआ तो हरबंस लाल ने पास के बनयानी गांव में कुछ खेती योग्य जमीन खरीदी और निंदाना छोड़ वहीं बस गए.
5. हरबंस लाल नहीं चाहते थे कि मनोहर लाल ज्यादा पढ़े. वह चाहते थे कि बेटा खेती में हाथ बटाए. मगर मनोहर लाल बड़े होकर डॉक्टर बनना चाहते थे. मनोहर ने मां से पैसे उधार लिए और रोहतक के पंडित नेकी राम शर्मा गवर्नमेंट कॉलेज से हाई स्कूल पूरा किया.
6. मेडिकल एंट्रेंस की तैयारी के लिए मनोहरलाल दिल्ली आ गए. यहां वह रिश्तेदारों के यहां रहते थे. रिश्तेदार सदर बाजार में कपड़ों का काम करते थे. मनोहर को लगा कि 7 से 9 साल लग जाएंगे पढ़ाई में, तब डॉक्टरी शुरू होगी. इससे अच्छा है कारोबार किया जाए.
7. पिता से पैसे उधार लेकर मनोहर ने सदर बाजार में कपड़ों की दुकान कर ली. दुकान चल निकली. जल्द ही उन्होंने पिता को उधार चुकादिया. छोटी बहन की शादी की और दो और रिश्तेदारों को दिल्ली अपने पास बुला लियाकाम में मदद और पढ़ाई के लिहाज से.
8. इसी दौरान मनोहर लाल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया.तभी उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में शुरुआती जानकारी मिली.
9. 1977 में जनता राज आने के ठीक पहले खट्टरने 24 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ज्वाइन किया.
10. जनवरी 1979 में प्रयाग (इलाहाबाद) में हुए विश्व हिंदू परिषद के समागम में पहुंचे. कई संतों और संघ के प्रचारकों से मिले. त्रिवेणी दर्शन को गए और वहीं संघ से आजीवन जुड़ने का फैसला किया.
11. 1980 में पूर्णकालिक प्रचारक बन गए. आजीवन अविवाहित रहने का प्रण किया. परिवार ने, खासतौर पर माता पिता ने, बहुत विरोध किया.
12. 14 साल काम करने के बाद उन्हें बीजेपी में बुलाया गया और 1994 में हरियाणा का संगठन मंत्री बनाया गया.
13. 1996 में बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी के साथ तालमेल कर बीजेपी को सत्ता में हिस्सेदारी दिलाई. फिर जब देखा कि बंसीलाल सरकार की ठीक नहीं जा रही तो आलाकमान को समर्थन वापसी के लिए राजी कर लिया.
14. फिर चौटाला के साथ गठबंधन किया. 1999 में एनडीए ने हरियाणा से लोकसभा की सभी दस सीटें जीतीं.
15. 1996 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पहला संपर्क हुआ. मोदी उस वक्त हरियाणा के प्रभारी थे. इसके बाद मोदी जहांजहां गए, खट्टर को खास जिम्मेदारी देते गए.
16. नरेंद्र मोदी ने अपने पहले चुनाव साल 2002 में भूकंप प्रभावित भुज जिले का चुनाव मैनेज करने के लिए खट्टर को बुलाया. राजनीतिक दृष्टि से मोदी के लिए भुज जीतना जरूरी था क्योंकि यहां की बदहाली के मुद्दे पर ही उनके पूर्ववर्ती केशुभाई पटेल को हटाया गया था. भुज कांग्रेस का गढ़ था, फिर भी बीजेपी ने 6 में 3 सीटें जीतीं.
17. 2002 में खट्टर को पहली बार राज्य के बाहर की जिम्मेदारी सौंपी गई. उन्हें जम्मू कश्मीर चुनाव का प्रभारी बनाया गया. इसके कुछ साल बाद हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने पहली बार दहाई में जीत दर्ज की. कुल 11 विधायक जीते.
18. 2004 में बाल आप्टे के नेतृत्व में बीजेपी को सहायता देने के लिए संघ ने चुनावसहायक योजना बनाई. इसके तहत खट्टर 12 राज्यों के प्रभारी थे. इनमें दिल्ली और राजस्थान समेत कई महत्वपूर्ण राज्य शामिल थे. इसके बाद उन्हें जम्मू कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश का स्थानीय संगठन महामंत्री बनाया गया.
19. फिर बारी आई छत्तीसगढ़ की. यहां बस्तर की जिम्मेदारी सौंपी गई. पार्टी ने विधानसभा चुनाव में 12 में 10 सीटें जीतीं.इसके बाद खट्टर को अलग-अलग विधानसभा चुनावों में जिम्मेदारियां दी गईं.
20. 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हरियाणा में पार्टी की इलेक्शन कमेटी का मुखिया बनाया गया. साथ ही करनाल से चुनाव भी लड़वाया गया. यहां उन्होंने निर्दलीय जयप्रकाश गुप्ता को 63,773 वोटों के बड़े अंतर से हराया.
21. खाप पंचायत पर पूछे गए एक सवाल के दौरानखट्टर का एक जवाब विवादों के घेरे में आ गया था. उन्होंने कहा था कि लड़कियों को शालीन कपड़े पहनने चाहिए, ताकि अपोजिट सेक्स के लोग उनकी तरफ आकर्षित न हों.
 
 
(आर्य रणधीर सिंह पानीपतिया)
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देर से ही सही पर मज़बूरी में 27 अक्‍टूबर को कालाधन जमा करने वालों के नाम उजागर करेगी सरकार

   नई दिल्ली।। केंद्र सरकार अगले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट में विदेश में कालाधन जमा करने वालों के नाम उजागर करने जा रही है। केंद्र की तरफ से 27 अक्‍टूबर को सप्लीमेंट्री एफिडेविट फाइल की जाएगी, जिसमें खाताधारकों के नामों की लिस्ट बंद लिफाफे में होगी। वहीं वित्त मंत्री अरुण जेटली के 'नाम उजागर हुए तो शर्मिंदा होगी कांग्रेस' वाले बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार ब्लैकमेल न करें, बल्कि एक-एक नाम बताए।
800 में से 136 नामों का खुलासा करेगी सरकार
    बताया जा रहा है कि यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बीच हुई चर्चा के बाद लिया गया है। पहली लिस्ट में कुल 800 नामों में से उन 136 का खुलासा किया जाएगा जिन्‍हें यूरोपियन सरकार ने उपलब्ध कराए हैं। यह लिस्ट बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाएगी, जिसके बाद कोर्ट तय करेगा कि ये नाम कब और किस तरह उजागर किए जाने हैं और किससे कितना टैक्स वसूलना है। बताया जा रहा है कि स्विटज़रलैंड और अन्य सरकारों ने दोहरी कर संधि के बावजूद खाताधारकों के नाम उजागर करने की अनुमति दे दी है। सूत्रों का यह भी कहना है कि सरकार के पास ऐसे खाताधारकों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं, जिन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाकर स्विस बैंक में बड़ी रकम जमा कर रखी है।
कांग्रेस के हमले का जवाब देगी सरकार
     बता दें कि सरकार ने यह फैसला उस बहस के बाद लिया है, जिसमें कहा जा रहा था कि बीजेपी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में कालेधनपतियों के नाम न उजागर करने से पार्टी की छवि को धक्का लगा है। जबकि कालेधन का मुद्दा लोकसभा चुनावों में जोर-शोर से उठाया गया था और जीत दर्ज की गई थी। बीजेपी का मानना है कि कालेधनपतियों के नाम उजागर करने से कांग्रेस को भी करारा जवाब मिलेगा।
   सरकार के सुप्रीम कोर्ट में दिए जवाब पर कांग्रेस ने हमला बोलते हुए बीजेपी से पूछा था कि वह अब अपने वादे से क्यों पलट रही है, जबकि उसने लोकसभा चुनावों के दौरान कालाधन वापस लाने के बड़े-बड़े दावे किए थे। इस पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी कहा है कि अगर नाम उजागर होते हैं, तो कांग्रेस को शर्मिंदा होना पड़ेगा।
माकन का टि्वट-कांग्रेस जांच को तैयार
    जेटली के बयान पर कांग्रेस के मीडिया प्रमुख और प्रवक्ता अजय माकन ने बुधवार को कहा कि 'कांग्रेस को ब्लैकमेल न किया जाए। हम किसी दबाव में नहीं आने वाले हैं।' माकन ने कहा कि 'कांग्रेस जांच के लिए तैयार हैं। हम पूरा सच चाहते हैं, सरकार को चुने हुए नाम नहीं बल्कि सभी नाम उजागर करने चाहिए।' माकन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 'काले धन के मुद्दे पर सरकार हमें ब्लैकमेल कर रही है और इस मामले में सिलेक्टिव अप्रोच अपना रही है। माकन ने यह भी दावा किया कि नामों का खुलासा करने का वित्त मंत्री अरुण जेटली का बयान कांग्रेस के दबाव में आया है।'
12:44 PM | 0 comments | Read More

व्यवस्था चरम पर तो आम्दनी शिखर पर, समाज सेवा कर कैसे बने करोड़ों के मालिक ?


आम आदमी से करोड़पति तक के सफर की कहानी
क्या प्रमुख आय का स्तोत भ्रष्टाचार है ?
क्या स्थापित संसाधन एवं उद्योग केवल एक मुखोटा?
घर के तमाम सदस्य सक्रिय राजनीति में फिर भी कारोबार एवं आम्दनी के स्त्रोत शिखर पर कैसे ?
   गरीब रोजगार को तरस जाता है, मेहनत मजदूरी करने के बाद भी अमीर बनाने का ख्वाब उसे हर दिन सताता है, और जन प्रतिनिधि समाज सेवा कर करोड़ों के मालिक बन जाते है, यह बड़े चौकाने वाली बात है। जहां आम आदमी के पारवार में से एक सदस्य को रोजगार बड़ी मुश्किल से मिलता है वहीं नेताओं का पूरा परिवार रोजगार जैसी नदियों में रोज स्नान करता है, भला यह कैसे मुमकिन है कि नेताओं के कारखाने एवं उनकी कमाई के स्त्रोत आम आदमी से अधिक देखे जाते है, जहां नेताओं की व्यस्तता चरम पर रहती है वहीं उनके रोजगार एवं आम्दानी के स्त्रोत भी उसी चरम पर देखे जाते है, यह सोचने वाली बात है, हालांकि इस मामले में अलग अलग लोगों की अलग अलगा राय है, लेकिन जनता इस का कारण भी भलीभाँति जानती है तथा आमदनी के स्त्रोत भी।
   एक ऐसा ही मामला दामन में सामने आया है। दमन के नेता दहया भाई पटेल, जिन्होंने दमन-दीव की राजनीति में वो कामयाबी हांसील कि थी, जिसकी परिकल्पना करना भी अन्य के लिए कठिन प्रतीत होता है, उक्त नेता के पुत्र केतन पटेल भी राजनीति में अपनी किस्मत आजमाने हेतु सक्रिय हो गए। नेता दहया भाई की पत्नी ने भी राजनीति में सक्रिय है, तथा पुत्र जिग्नेश पटेल जिनको नेता तो नहीं, लेकिन एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है। इस परिवार के लगभग सभी सदस्य सक्रिय राजनीति में देखे गए। लेकिन यही से आम जनों के मन में सवाल खड़े होते है, कि घर के तमाम सदस्य सक्रिय राजनीति में होने के उपरांत भी अपने कारोबार एवं रोजगार के साथ साथ आम्दानी के स्त्रोतों को शिखर पर कैसे पहुचा दिया, आखिर इन नेताओं की व्यस्तथा पहले से ही इतनी अधिक देखी जाती है तो उक्त नेता अपने रोजगार हेतु साथपित किए गए संसाधनों को समय कैसे दे पाते है यह सोचने वाली बात है।
   वहीं जहां इनकी व्यवस्था चरम पर है तो इनकी आम्दानी भी शिखर पर है, आम जनता की माने तो इन नेताओं की प्रमुख आय का स्तोत भ्रष्टाचार है तथा इनके द्वारा स्थापित किए गए संसाधनों को केवल एक मुखोटे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, वहीं जितनी अधिक इनकी संपत्ति बताई जाती है उतनी इनकी भ्रष्ट नीति बताई जाती है।
   हालांकि दमन की जनता इनकी संपत्ति को देख इनकी नीति और नियत का आंकल कर चुकी है, देखना है इस मामले में प्रशासन किसी जांच का अंकल करते है या नहीं, वहीं जनता की माने तो इनकी सत्ता भी इनकी भ्रष्ट नीति एवं भ्रष्टाचार के दम पर टिकी है, वरना विरोधियों की वाह-वाह इस दौर में मुमकिन नहीं, और इन्हे तो विरोधियों का साथ भी मिला हुआ बताया जाता है।
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भ्रष्टाचार का कोई अंत नहीं, आतिशबाजी दूकानदारों से हो रही है खूब धन उगाही

अब दुकानदारों से काकोरी कालेज प्रशासन भी वसूली पर लग गया
    जलालाबाद।। एक तरफ सरकार भ्रष्टाचार से मुक्ति की बाते करती है दूसरी तरफ सरकारी कर्मचारी रिश्वत लेने के मामले में सरकार को पीछे छोड रहे है | नगर में आतिशबाजी दुकानदारो से अग्निशमन, एस डी एम् कार्यालय, पुलिस ने परमीशन देने के नाम पर खूब धन की उगाही की| हर जगह से परमीशन लेनी पडी | जिस सरकारी कार्यालय में गये, दुकानदारों को दक्षिणा देनी पडी | इसके बाद में यही कर्मचारी फ्री में आतिशबाजी लेने आ गये न देने पर बीसों क़ानून बताते है यदि फ्री में दे दो तो सारे क़ानून खत्म हो जाते है | बात यही नहीं ख़त्म होती अब दुकानदारों से काकोरी प्रशासन भी बसूली पर लग गया | प्रत्येक दुकानदार से कालेज प्रशासन की तरफ से ब्रजेश गुप्ता कमानी वाले 750 रूपए की बसूली कर रहे है लगभग 36 दुकाने लगी है जिनके पुलिस ने 500 प्रति दूकानदार + फ्री आतिशबाजी, एस डी एम् कार्यालय में 200 रूपए + फ्री आतिशबाजी, अग्निशमन विभाग 300 रूपए + फ्री आतिशबाजी | इतने लोगो को देने के बाद कालेज वाले क्यों पीछे रहे उन लोगो ने भी मौका नहीं गंवाया वह भी वसूली पर लग गए।





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जब महिला ने दिया मेंढक की तरह दिखने वाले बच्चे को जन्म


मेंढक की वजह से गर्भवती हुई महिला  कांठमांडू।। इस दुनिया में विचित्र घटनाओं व खबरों की कमी नहीं है. आपको किसी भी समय, कभी भी व कहीं भी कुछ अजीबोगरीब घटना सुनने को मिल सकती है जो आपको बेहद अचंभित कर देने के लिए काफी होगी. कुछ ऐसी ही विचित्र खबर कुछ समय पहले आई थी जिसमें यह कहा गया था कि एक औरत ने मेंढक जैसे दिखने वाले एक बच्चे को जन्म दिया है.
   यूं तो किसी के घर बच्चे के जन्म लेने पर आस पड़ोस व सगे संबंधियों को ही पता लगता है लेकिन यहां मामला कुछ और ही था. नेपाल में चारकोट के गौरीशंकर अस्पताल में जैसे ही नीर बहादुर कार्की और सुन्ताली कार्की के बच्चे का जन्म हुआ, सब दंग रह गए. जन्मे हुए बच्चे का आकार देखने में बड़ा ही अजीबोगरीब था. उसकी गर्दन नहीं थी…बड़ी-बड़ी आंखें थी, बिल्कुल एक मेंढक की तरह.
   यह खबर आग की तरह आसपास के क्षेत्र में व मीडिया में फैल गई. सभी अचंभित थे उस बड़ी-बड़ी आंखों वाले बच्चे को देखकर. उसे देख सभी को यह लग रहा था कि जैसे एक मेंढक ही एक बच्चे के शरीर पर अपना मुंह लगाकर आया हो. एक तरफ इस चमत्कार ने बड़े-बड़े विशेषज्ञों को चौकाया भी व साथ ही इस बच्चे को देख हर किसी के होश उड़ गए.
   अस्पताल में इस अजीबोगरीब बच्चे को देखेने के लिए अनगिनत लोगों का हुजूम उमड पडा था. मामला इतना संजीदा हो गया कि उन्हें नियंत्रित करने के लिए अस्पताल प्रबंधन को पुलिस की सहायता लेनी पड़ी.
इतना ही नहीं जिसने भी मेंढक जैसे दिखने वाले बच्चे को देखा उनके मुंह से बस यही निकला कि हो ना हो यह बच्चा किसी अभिशाप का शिकार है. खैर यह तो लोगों का अंधविश्वास है जो आज की 21वीं सदी में भी समाप्त होने की कगार से काफी दूर है.
    एक रिर्पोट में बताया गया है कि दरअसल इस बच्चे को जन्म देने वाली मां के भीतर मेंढक के शुक्राणु चले गए थे जिस कारण वो गर्भवती हो गई थी. यह रिपोर्ट उन विशेषज्ञों द्वारा निकाली गई है जहां इस अजीब से दिखने वाले बच्चे का जन्म हुआ था.
   अस्पताल के विशेषज्ञों का कहना है कि यह अनहोनी तब हुई होगी जब ये महिला तालाब में नहाने गई होगी. उसी समय पर शायद यह महिला तालाब के किसी मेंढक के स्पर्म के संपर्क में आ गई होगी जिस कारण यह बच्चा इस तरह का हुआ. हालांकि जन्म लिए बच्चे की कुछ ही घंटों में मौत हो गई थी.

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खतरे में मायावती की पार्टी का राष्ट्रीय दर्जा

Written By Bureau News on Wednesday, October 22, 2014 | 7:31 PM

   नई दिल्ली।। मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता खोनेवाली है। इसकी वजह यह है कि बीएसपी दो राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में अपेक्षित जीत हासिल नहीं कर सकी, जिससे उसका राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा कायम रह सकता था। चुनाव आयोग अब इस बारे में औपचारिक निर्णय करेगा। पार्टी ने हरियाणा विधानसभा की सभी 90 सीटों और महाराष्ट्र विधानसभा की कुल 288 में से 260 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। बीएसपी को एकमात्र जीत हरियाणा के पृथला में मिली हैं, जहां टेक चंद शर्मा ने बीजेपी के नयनपाल रावत को 1, 179 वोटों से हराया है। लोकसभा चुनाव में एक भी सीट जीतने में असफल रही बीएसपी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा बरकरार रखने के लिए इन चुनावों में कम-से-कम दो सीटों पर जीत दर्ज करना जरूरी था। सूत्रों के अनुसार लोकसभा चुनाव के ठीक बाद चुनाव आयोग ने बीएसपी प्रमुख मायावती से पूछा था कि राष्ट्रीय दल के रूप में उनकी पार्टी की मान्यता क्यों नहीं रद्द होनी चाहिए? तब पार्टी हरियाणा और महाराष्ट्र में विधासभा चुनावों का हवाला देकर कुछ वक्त पाने में कामयाब रही थी।
    राष्ट्रीय दल की मान्यता खोने के बाद बीएसपी को कुछ सुविधाओं से हाथ धोना पड़ेगा। इनमें एक चिह्न पर चुनाव लड़ने, ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर चुनाव प्रचार करने और मतदाता सूची की मुप:त प्रति पाने के अधिकार शामिल हैं। हरियाणा में जगधारी से बीएसपी के विधायक और विधानसभा के उप सभापति अकरम खान भी चुनाव हार गए हैं। बीएसपी किसी तरह हरियाणा में महज 4.4 फीसदी वोट ही हासिल कर पाई है। इसका साफ मतलब है कि मायावती के दलित वोट बैंक ने एक बार फिर उनसे किनारा कर लिया है। महाराष्ट्र में बीएसपी का प्रदर्शन बिल्कुल निराशाजनक रहा। मायावती ने यहां कई रैलियां की थीं, लेकिन पार्टी का यहां खाता भी नहीं खुल पाया। यहां उनकी पार्टी को महज 2.2 फीसदी वोट ही मिले। शुरू में एनसीपी के शरद पवार ने मायावती के सामने गठबंधन का प्रस्ताव रखा था। लेकिन, उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकराकर महाराष्ट्र में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया।

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गर्भवती महिलाओं के लिए नुकसानदायक है पटाखों का धुंआ


   नई दिल्ली।। दिवाली में धूमधड़ाके के लिए छोड़े जाने वाले पटाखों का धुंआ यूं तो सभी को नुकसान पहुंचाता है लेकिन गर्भवती महिलाओं को इससे बचाव के लिए विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि यह खतरनाक धुआं, धमाके की आवाज और कठोर रसायन भ्र्रूण को भी नुकसान पहुंचाते है। रोग विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान प्रदूषण गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए समस्या उत्पन्न कर सकता है। पटाखों से निकलने वाले धुएं में काफी अधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रस आक्साइड होता है। ऐसे में इन रसायनों के सीधे संपर्क में आने से गर्भ में पल रहे बच्चे और मां दोनों को खतरा हो सकता है। दिवाली के जश्न के दौरान छोटी-सी भी लापरवाही गर्भवती महिलाओं को जोखिम में डाल सकती है। सिर्फ प्रदूषण और रासायनिक पदार्थ ही नहीं, बल्कि पटाखों से निकलने वाले शोर भी मां और बच्चे को परेशानी में डाल सकते है। जिन्हें सांस की समस्या हो, उन्हें तो जरूर ही प्रदूषण से दूर रहना चाहिए। खासकर यदि किसी महिला को अस्थमा की समस्या है तो उन्हें हर वक्त अपने साथ इनहेलर रखना चाहिए। एलर्जी के खतरे को कम करने के लिए जब तक संभव हो सजावट की फूल-मालाएं आदि को घर से बाहर ही रखे। साथ ही उन्हें घर के भीतर लाने से पहले पानी से अच्छी तरह से छिड़काव करें। ऐसा करने से उन फूलों पर लगी धूल और पराग खत्म हो जाएगी और एलर्जी से भी बचाव होगा।
     गर्भवती महिलाओं को पटाखों से फैले प्रदूषण से भी बच कर रहना चाहिए। वे वातावरण से जो कार्बन मोनोक्साइड सांस के जरिए लेंगी, वह शरीर में आक्सीजन के उपयुक्त संचरण में बांधा पहुंचाते हैं। यह हानिकारक गैस भ्रूण के प्लेसेंटा से हो कर गुजरे तो गर्भ में पल रहे बच्चे को पर्याप्त आक्सीजन नहीं मिल पाता। यह भ्रूण के विकास में रुकावट का कारण भी बन सकता है। इससे बचने के लिए गर्भवती महिलाओं को घर के अंदर ही रहकर एक पर्यावरण सुरक्षित दिवाली का आनंद उठाना चाहिए. यह न सिर्फ उनके लिए बल्कि उनके गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए भी जरूरी है।

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राजनीति के रण में ''शाह" मॉडल लॉन्च

भाजपा की नई जोड़ी का जादू
   नई दिल्ली।। आखिर नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी हर मैच कैसे जीत रही है। नतीजे आने के बाद अखबारों में इनकी रणनीतियों और रैलियों की खूब चर्चा है। उम्मीदवार लाए, कैसे प्रचार किया जाए और कैसे रैलियां हों वगैरह वगैरह। इस जोड़ी को जीतने का जुनून है और इनके सामने की जोडि़यों को पहले टूटने और फिर बिखरने की बेचैनी दिखाई मालूम पड़ती है। अटल आडवाणी की जोड़ी से भी बेहतर और असरकारक साबित हो रही है जोड़ी नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ! अब राजनीति के रण में गुजरात मॉडल के बाद अमित शाह मॉडल लांच हो गया है। जिसमे दमदारी है इमोशनल ड्रामा का कोई स्थान नहीं है महाराष्ट्र और हरियाणा में जिस तरह की राजनीति से भाजपा ने जीत का परचम फहराया है उसने सबको अचरज में डाल दिया है मोदी और शाह की जोड़ी की जीत ने विरोधी खेमे में टीम से लेकर कप्तान के बदलाव तक पर दबाव डालना शुरू कर दिया है।
   भाजपा की जीत क्षेत्रीय दलों के लिए खतरे की घंटी हैं। मोदी का कांग्रेस मुक्त भारत, क्षेत्रीय दल मुक्त भारत भी होने लगा है। राजनीतिक नक्शा भाजपा युक्त भारत में बदलने वाला है। अगले दो सालों में 10 राज्यों के चुनाव में क्या कोई बीजेपी को हरा पाएगा इस लेकर अभी से मंथन शुरू हो गया है अखबारों के विश्लेषण में मोदी की जीत की संभावना को कोई असीम बता रहा है तो कोई कह रहा है कि महाराष्ट्र के नतीजे से लगता है कि मोदी अपने शिखर को छू चुके हैं। उनकी चुनावी सभाओं को देखकर तो नहीं लगता कि जीतने की भूख में कोई कमी आई है। अमित शाह ने कहा है कि मोदी लहर आज भी सुनामी की तरह चल रही है। मोदी ही देश के निॢववादित नेता हैं। मोदी राजनीति के नए धोनी हैं। महाराष्ट्र में नरेंद्र मोदी ने 27 रैलियां की और वोट प्रतिशत भी 27.8 ले आए जो हर लिहाज़ से बेहतरीन है।
   पिछली विधानसभा में बीजेपी को 13.8 प्रतिशत ही वोट मिले थे। मोदी ने मराठवाड़ा में 5, मुंबई और सटे इलाकों में 5, पश्चिम महाराष्ट्र में 7 विदर्भ में 4, उत्तर महाराष्ट्र में 3 कोंकण में 2 रैलियां की। पश्चिम महाराष्ट्र में 7 रैलियां की और यहां की 72 में से 24 सीटों पर कब्जा कर लिया। लेकिन यहां शिव सेना को भी 13, कांग्रेस को 10 और एनसीपी को 19 सीटें मिलीं।यहां बीजेपी का वजूद नहीं था मगर 24 सीटें जीत गईं, यहां कांग्रेस, एनसीपी को मिलाकर 29 सीटें हासिल हुई हैं जो बीजेपी से ज्यादा है। पश्चिम महाराष्ट्र में बीजेपी ने एनसीपी कांग्रेस के बागियों को टिकट दिया, स्वाभिमानी शेतकरी संगठन या राष्ट्र समाज पक्ष के साथ गठबंधन किया। इसके बावजूद मोदी उन कद्दावर नेताओं को नहीं हरा पाए, जिनके इलाके में उन्होंने सीधे ललकारा था। मसलन बारामती जहां चाचा-भतीजे के खिलाफ मोदी ने प्रचार किया था। लेकिन अजित पवार अच्छे खासे माॢजन से जीत कर आये।इतना ही नहीं वह आसपास के इलाकों में भी ज्यादा चोट नहीं पहुंचा पाए। एनसीपी की करीब 40 फीसदी सीट इसी इलाके से मिली हैं। महाराष्ट्र में 123 सीटें जीतना किसी भी नज़रिये से कम नहीं है। 1990 के बाद पहली बार किसी दल को सौ से ज्यादा सीटें मिली हैं।
    मुंबई में बीजेपी पहले नंबर पर है उसे शहर की 15 सीटें मिली हैं लेकिन शिवसेना को भी 14 कांग्रेस को 5 सीटें मिली हैं। मुंबई शहर में पहली बार आंध्र प्रदेश की पार्टी मुत्तहिदा मजलिस ए मुस्लमीन को 1 सीट मिली और मराठवाड़ा में उसने एक सीट जीती। राज्य में करीब 12-16 सीट ऐसीं थी, जिसमें मुस्लिम वोट कांग्रेस से निकल कर दूसरे विकल्पों के पास गया या पूरी तरह बंट गया। इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला है।मुंबई शहर में कांग्रेस के सिर्फ पांच एमएलए चुने गए, जिनमें 3 मुसलमान हैं। यहां पर एमआईएम का उम्मीदवार नहीं था, लेकिन जहां एमआईएम का उम्मीदवार था वहां कांग्रेस हारी है। जैसे भायखला। वहीँ हरियाणा की जीत कहती है कि अभी किसी भी दल के पास मोदी की काट नहीं है। चार सीट से सीधा 47 और स्पष्ट बहुमत से सरकार। फिर भी विरोधी दल साफ नहीं हुए लोकसभा की तरह। लोकसभा में 10 में से सात सीटें जीतने के बाद बीजेपी ने उस आंधी को कमज़ोर नहीं पड़ने दिया। जीटी करनाल रोड की 27 में से 22 सीटें बीजेपी ने जीती हैं। पहले यहां सिर्फ एक सीट भाजपा के पास थी। मध्य हरियाणा में भी 45 में से 16 सीटें बीजेपी को मिलीं। दक्षिण हरियाणा की 18 में से 9 ही बीजेपी को मिली। फरीदाबाद की छह में से तीन ही सीट पर बीजेपी जीत सकी। यहां प्रधानमंत्री की बड़ी रैली हुई थी।यह जीत जाति और क्षेत्रिय अस्मियता को ध्वस्त करती है।

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पाकिस्तान ने न्यायपालिका के खिलाफ कार्यक्रम प्रसारित करने पर चैनल को किया निलंबित

   इस्लामाबाद।। पाकिस्तान ने न्यायपालिका के खिलाफ अपमानजनक कार्यक्रम प्रसारित करने पर एक टेलीविजन चैनल के प्रसारण पर 15 दिन की रोक लगा दी है और उस पर एक करोड़ रूपए का जुर्माना लगाया है। इस साल दूसरी बार सरकार ने किसी बड़े खबरिया चैनल का मुंह बंद कर दिया है।
   पाकिस्तान इलेक्ट्रोनिक्स मीडिया नियामक प्राधिकरण :पीईएमआरए: ने 'एआरवाई न्यूज' पर टॉक शो 'खरा सच' में देश की न्यायपालिका को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए उसका लाइसेंस निलंबित कर दिया है। इस शो में न्यायपालिका और वरिष्ठ न्यायाधीशों की कथित आलोचना की गई थी।
  लाहौर उच्च न्यायालय के आदेश पर इस शो की समीक्षा के लिए कल पीईएमआरए की एक विशेष बैठक बुलाई गई थी। शो की मेजबानी मुबाशेर ल्यूकमैन ने की थी।
    जून में इस मीडिया नियामक प्राधिकरण ने जियो टीवी का लाइसेंस निलंबित कर दिया था। जियो टीवी ने एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी पर उसके एक पत्रकार की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया था। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एआरवाई टीवी का लाइसेंस निलंबित करने के फैसले को राजनीति से प्रेरित करार दिया है और उसपर मीडिया को चुप कराने का आरोप लगाया है।

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अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी पर नकद लेन-देन की सूचना छिपाने पर मुकदमा

   वाशिंगटन।। अमेरिका के टेक्सास निवासी एक भारतीय-अमेरिकी इत्र कारोबारी पर 10 हजार डॉलर से उूपर के लेन-देन के 40 से अधिक मामलों की सूचना छिपाने के संबंध में एक संघीय अदालत में आरोप लगाए गए हैं। इन मामलों में हुआ कुल लेन-देन 16 लाख डॉलर के करीब है।
  आरोपी वीरेंद्र शर्मा टेक्सास के लारेडो में थोक एवं फुटकर इत्र स्टोर का मालिक एवं अध्यक्ष है। दक्षिणी टेक्सास जिले के अमेरिकी अधिवक्ता केनेथ मैगिडसन ने बताया कि शर्मा पर 44 आरोप लगाए गए हैं।
   अभियोजन में दावा किया गया है कि कंपनी के लिए नकद लेन-देन जरूरतों की सूचना उपलब्ध कराना 59 वर्षीय शर्मा की जिम्मेदारी बनती थी।
   इसमें आरोप लगाया गया कि 2006 से अपनी जिम्मेदारियों को जानने के बावजूद शर्मा ने जून 2009 और जुलाई 2010 के बीच 10 हजार डॉलर से अधिक राशि के लेन-देन के 44 मामलों में सूचना उपलब्ध नहीं कराई। इन मामलों में कुल लेन-देन की राशि 16 लाख डॉलर से उूपर है।
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मप्र में दीपावली के अगले दिन छिड़ेगा "हिंगोट युद्ध"

    इंदौर।। मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में 24 अक्तूबर को सैकड़ों दर्शकों की मौजूदगी में 'हिंगोट युद्ध' छिड़ेगा। फिजा में बिखरे त्योहारी रंगों और उल्लास के बीच छिडऩे वाली इस पारंपरिक जंग में 'कलंगी' और 'तुर्रा' दलों के योद्धा एक..दूसरे को धूल चटाने की भरसक कोशिश करेंगे। हर साल की तरह इस बार भी दीपावली के अगले दिन यहां से करीब 55 किलोमीटर दूर गौतमपुरा कस्बा हिंगोट युद्ध का मैदान बनेगा। इस जंग में हथियार के रूप में 'हिंगोट' का इस्तेमाल किया जाएगा।
   हिंगोट दरअसल एक फल है, जो हिंगोरिया नाम के पेड़ पर लगता है। आंवले के आकार वाले फल से गूदा निकालकर इसे खोखला कर लिया जाता है। इसके बाद इसमें कुछ इस तरह बारूद भरी जाती है कि आग दिखाने पर यह किसी अग्निबाण की तरह सर्र से निकल पड़ता है। गौतमपुरा नगर परिषद के अध्यक्ष विशाल राठी ने आज 'भाषा' को बताया, 'हिंगोट युद्ध के पारंपरिक आयोजन के लिए गौतमपुरा में व्यापक व्यवस्था की गई है कस्बे में करीब 500 लोगों की बैठक क्षमता वाली दर्शक दीर्घा बनवाई गई है। इस दीर्घा के आस..पास लोहे की जालियां लगवाई गई हैं, ताकि हिंगोट युद्ध के दौरान दर्शक महफ़ूज़ रह सकें। उन्होंने बताया कि हिंगोट युद्ध के दौरान फायर ब्रिगेड और डॉक्टरों की टीम भी 'रणभूमि' के पास तैनात रहेगी।
   राठी ने बताया कि परंपरा के मुताबिक गौतमपुरा और रुणजी गांव के बाशिंदे 24 अक्तूबर को सूर्यास्त के तत्काल बाद एक मंदिर में भगवान के दर्शन करेंगे। इसके बाद हिंगोट युद्ध की शुरूआत होगी। गौतमपुरा के योद्धाओं के दल को 'तुर्रा' नाम दिया जाता है, जबकि रुणजी गांव के लड़ाके 'कलंगी' दल की अगुवाई करते हैं। बहरहाल, हिंगोट युद्ध की परंपरा की शुरूआत कब और कैसे हुई, इस सिलसिले में इतिहास के प्रामाणिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि, जैसा कि राठी बताते हैं कि इस बारे में ऐसी दंतकथाएं जरूर प्रचलित हैं कि रियासत काल में गौतमपुरा क्षेत्र की सरहदों की निगहबानी करने वाले लड़ाके मुगल सेना के उन दुश्मन घुड़सवारों पर हिंगोट दागते थे, जो उनके इलाके पर हमला करते थे। उन्होंने कहा, 'हमारे पुरखोंं के मुताबिक हिंगोट युद्ध एक किस्म के अभ्यास के रूप में शुरू हुआ था। वक्त बदलने के साथ इससे धार्मिक मान्यताएं जुड़ती चली गईं।Ó राठी ने बताया कि इन्हीं धार्मिक मान्यताओं के मद्देनजर हिंगोट युद्ध मेंं पुलिस और प्रशासन रोड़े नहीं अटकाते, बल्कि रणभूमि के आस..पास सुरक्षा व घायलों के इलाज के पक्के इंतजाम करते हैं।

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नायडू ने किया 10 करोड़ रूपए के पुलिस कल्याण कोष का ऐलान

    विजयवाड़ा।। आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने राज्य में पुलिस कल्याण के लिए 10 करोड़ रूपए के एक कोष का ऐलान किया है। नायडू ने कल यहां पुलिस स्मारक दिवस पर कहा कि शहीद पुलिस कर्मियों के परिवार के कल्याण की जिम्मेदारी सरकार की है। उन्होंने कहा कि जरूरत पडऩे पर इस कोष की राशि बढ़ाई जाएगी। उन्होंने पुलिस कर्मियों से कानून व्यवस्था की रक्षा करते हुए समाज के संरक्षक की भूमिका निभाने और सामुदायिक निगरानी की अवधारणा कम्युनिटी पोलिसिंग कॉन्सेप्ट को लागू करने को कहा। पुलिस व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने पुलिस कर्मियों को नवीनतम प्रौद्योगिकियां अपनाने की भी सलाह दी। 
   इस मौके पर आंध्रप्रदेश के तीन पुलिस कर्मियों सहित देश भर के उन 653 पुलिस कर्मियों को श्रद्धांजलि दी गई जिन्होंने बीते एक साल में दायित्व निर्वाह के दौरान अपनी जान गंवाई। बाद में मुख्यमंत्री ने पुलिस की नवीनतम पहल ''एफआईआर एट डोर स्टेप की शुरूआत की। राज्य के उप मुख्यमंत्री एन चिनप्पा राजप्पा और डीजीपी जे वी रामुदु भी इस मौके पर मौजूद थे।

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हरियाणा, महाराष्ट्र में भाजपा की जीत जम्मू कश्मीर चुनाव को करेगी प्रभावित - उमर

    श्रीनगर।। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आज कहा कि हरियाणा और महाराष्ट्र में भाजपा की जीत का प्रदेश में विधानसभा चुनाव पर कुछ प्रभाव पड़ेगा लेकिन साथ ही कहा कि यह असर उतना अधिक नहीं होगा जितनी पहले संभावना थी। उमर ने यहां संवाददाताओं से कहा, '' जाहिर सी बात है कि जम्मू कश्मीर में भाजपा का कुछ असर होगा लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह उतना अधिक होगा जितना पहले सोचा गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दोनों राज्यों में भाजपा ने अच्छा प्रदर्शन किया है लेकिन परिणाम उनकी  भाजपा  उम्मीदों के अनुरूप नहीं हैं। उमर ने कहा, ''हां, उन्होंने भाजपा ने अच्छा किया है लेकिन उतना नहीं जितना कि उन्होंने उम्मीद की थी। यदि आप हरियाणा में भाजपा के संसदीय चुनाव परिणामों और अभी तक के भाजपा शिवसेना संसदीय चुनाव परिणामों की तुलना करें तो वे इन दोनों राज्यों में संसदीय परिणामों को विधानसभा चुनाव परिणामों में नहीं बदल पाए।
    उन्होंने कहा, '' हरियाणा में, वे केवल आधे रास्ते ही पहुंच सके। महाराष्ट्र में उन्हें पीछे मुड़़कर सहयोगी की तलाश करनी पड़ रही है जहां वे अपने दम पर सरकार बनाने के बारे में बातें कर रहे थे। प्रदेश में चुनाव देरी से कराने की वकालत कर रही नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर ने कहा कि इसका फैसला निर्वाचन आयोग को करना है। उमर ने कहा, '' चुनाव के बारे में मुझे फैसला नहीं करना है। इसका फैसला निर्वाचन आयोग को करना है। वे यहां आए, अधिकारी स्तर पर चर्चा की और विभिन्न राजनीतिक दलों से बातचीत की। संभवत: वे आने वाले कुछ दिनों में अपने फैसले की घोषणा करेंगे। उन्होंने कहा, '' यदि वे चुनाव कराने का फैसला करते हैं तो लोगों को इसके लिए तैयार रहना होगा। एक सरकार के प्रमुख के नाते मैं इस पर कुछ नहीं कह सकता लेकिन इस मुद्दे पर निर्वाचन आयोग को पार्टी के रूख से अवगत करा दिया गया है। जनता को भी मीडिया के जरिए सूचित कर दिया गया है।

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स्वच्छ भारत अभियान से वास्तविक धरातल पर दिखे साफ..सफाई - सुमित्रा

     इंदौर।। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में शुरू किए गऐ स्वच्छ भारत अभियान को बेहद अहम करार देते हुए लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने आज कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस मुहिम से देश में वास्तविक धरातल पर साफ..सफाई दिखे। नगर निगम कार्यालय परिसर में निगम परिषद हॉल एवं सचिवालय भवन के प्रथम चरण के निर्माण कार्य के भूमि पूजन समारोह में सुमित्रा ने कहा, ''स्वच्छ भारत अभियान न तो केवल एक दिन चलने वाली मुहिम है, न ही यह केवल घोषणा है। यह एक सतत चलने वाला अभियान है। इसके जरिए हमें लोगों में स्वच्छता का भाव जागृत करने के साथ वास्तविक धरातल पर भी स्वच्छता लानी होगी।
    लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि नगर निगम, इंदौर के विकास की रीढ़ है। लिहाजा नगर निगम की व्यवस्थाएं बेहतर होनी चाहिए, ताकि शहर में श्रेष्ठ बुनियादी सुविधाएं विकसित हो सकें। इंदौर लोकसभा क्षेत्र की सांसद ने कहा कि यह इस शहर की बड़ी विशेषता है कि यहां का आम आदमी शहर के विकास के बारे में न केवल सोचता भी है, बल्कि इस काम में सरकारी तंत्र का सहयोग भी करता है। नगर निगम के महापौर कृष्णमुरारी मोघे ने बताया कि निगम परिषद हॉल एवं सचिवालय भवन के प्रथम चरण के निर्माण कार्य में 17 करोड़ रूपए की लागत आएगी। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि शहर में 300 करोड़ रुपए की लागत वाला सीवरेज जलशोधन संयंत्र लगाने का निर्णय किया गया है। इस संयंत्र से सीवरेज का करीब 36 करोड़ लीटर पानी प्रतिदिन साफ किया जा सकेगा। इससे गंदे पानी को जलस्रोतों में मिलने से रोका जा सकेगा।

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शहीद पुलिसजनों के परिजन की समस्याओं को समझने के लिए स्थाई समिति बनेगी

   देहरादून।। शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों को हरसंभव सहायता देने की वचनबद्घता व्यक्त करते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आज कहा कि उनकी समस्याओं को जानने और उन्हें दूर करने के लिए एक स्थाई समिति बनाई जाएगी। यहां पुलिस लाइन्स में आयोजित ्र पुलिस स्मृति दिवसॅ कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में रावत ने कहा कि राज्य सरकार शहीद पुलिस जनों के परिजनों को हरसंभव सहायता देने के लिए वचनबद्घ है और उनके परिजनों की समस्याओं को जानने और उन्हें दूर करने लिए एक स्थाई समिति बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि यह तीन सदस्ईय समिति प्रमुख सचिव गृह की अध्यक्षता में होगी, जिसमें पुलिस महानिदेशक सहित दो अधिकारी बतौर सदस्य शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मियों के हितों को लेकर राज्य सरकार संवेदनशील है और पुलिस विभाग के निरीक्षक, उप निरीक्षक एवं सहायक उप निरीक्षक के पेे बैंड व ग्रेड वेतन को राजकीय कर्मचारियों की भांति करने के लिए प्रमुख सचिव वित्त की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है। 
    समिति में प्रमुख सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक सदस्य के रूप में होंगे। कार्यक्रम में रावत ने अराजपत्रित अधिकारियों और कर्मचारियों के पौष्टिक आहार व धुलाई भत्ते में भी 50 प्रतिशत की वृद्घि करने तथा पुलिस कल्याण निधि को डेढ़ करोड़ रुपए से बढ़ाकर चार करोड़ रुपए करने की भी घोषणा की। रावत ने प्रदेश में पुलिस विभाग के चार पुलिस स्कूलों तथा पीएसी के रखरखाव के लिए भी एक करोड़ रुपए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से अनुदान के रूप में देने की घोषणा की। रावत ने कहा कि अपने प्राणों की आहुति देकर समाज और राष्ट्र की रक्षा करने वाले पुलिसजनों के त्याग ओर बलिदान को नहीं भुलाया जा सकता और पुलिसजनों के कल्याण के लिए राज्य सरकार वचनबद्घ है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भविष्य में भी पुलिस जनों के कल्याण के लिए निर्णय लेती रहेगी। उत्तराखण्ड की सीमाओं के अन्तरराष्ट्रीय सीमाओं से लगे होने के कारण राज्य में बाह्य आंतरिक सुरक्षा की चुनौती और अधिक बढऩे की बात पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने पुलिसजनों से कहा कि उन्हें इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए सचेत रहना होगा। उन्होंने कहा कि दुनिया का कोई भी देश आज आतंकवाद की समस्या से अछूता नहीं है और इस समस्या से हमारा देश भी जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि इन सभी समस्याओं से मुकाबला करने के लिए हमारी पुलिस को संदेश देना होगा कि हम सतर्क और सचेत हैं।

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हरियाणा में 83 फीसदी विधायक करोड़पति

   चंडीगढ़।। हरियाणा में नई विधानसभा के 83 फीसदी विधायक करोड़पति हैं। राज्य में भाजपा की सरकार बन रही है। इस बार नब्बे सदस्यीय विधानसभा में से 75 विधायक करोड़पति हैं। वहीं नौ विधायक ऐसे भी हैं, जिन पर आपराधिक मामले चल रहे हैं। इसी तरह दोबारा चुनकर आए 21 विधायकों ने पिछले पांच साल में अपनी जायदाद 9.80 करोड़ रुपये बढ़ी हुई दिखाई है। यह आंकड़े एसोसिएशन फॉर डेमोव््रौसटिक रिफॉम्र्स (एडीआर) ने जारी किए हैं। इस रिपोर्ट में चुनाव जीत कर आए उम्मीदवारों की जायदाद, उनकी शैक्षणिक योग्यता व आपराधिक मामलों आदि का जिक्र है। एक रिपोर्ट के मुताबिक विधानसभा पहुंचे 75 यानि 83 फीसदी विधायक करोड़पति हैं। सबसे धनी विधायकों में आदमपुर से हजकां विधायक कुलदीप बिश्नोई व उनकी पत्नी हांसी से विधायक रेणुका बिश्नोई शामिल हैंं। इनके पास 80 करोड़ रुपये की जायदाद है। सिरसा से इनेलो विधायक मक्खन लाल ङ्क्षसगला की संपत्ति 72 करोड़ जबकि तोशाम से कांग्रेस की विधायक चुनी गई किरण चौधरी की जायदाद करीब 70 करोड़ रूपये है। डबवाली से इनेलो विधायक नैना ङ्क्षसह चौटाला की संपत्ति 60 करोड़ है। बादशाहपुर से भाजपा विधायक राव नरबीर ङ्क्षसह की जायदाद 49 करोड़ रुपये है। ऐलनाबाद से इनेलो विधायक अभय ङ्क्षसह चौटाला 43 करोड़ और समालखा से निर्दलीय विधायक रवींद्र मछरौली 31 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं। 
    वहीं मुख्यमंत्री पद के मजबूत दावेदार करनाल के विधायक मनोहर लाल खट्टर की संपत्ति एक करोड़ से कम है। गरीब विधायकों में विशंभर वाल्मीकि के बाद कालांवाली से शिरोमणि अकाली दल के विधायक बलकौर ङ्क्षसह संपत्ति 28 लाख रुपये, दादरी से इनेलो विधायक राजदीप फौगाट की संपत्ति 33 लाख, नीलोखेड़ी से भाजपा विधायक भगवान दास कबीरपंथी की संपत्ति 37 लाख, फिरोजपुर-झिरका से इनेलो विधायक नसीम अहमद की संपत्ति 38 लाख रुपये है। खरखौदा से कांग्रेस के जयवीर ङ्क्षसह की संपत्ति 42 लाख, हथीन से इनेलो के केहर ङ्क्षसह रावत की 48 लाख, शाहबाद से भाजपा के कृष्ण बेदी की संपत्ति 56 लाख, करनाल से भाजपा के मनोहर लाल खट्टर की संपत्ति 61 लाख व गुहला से भाजपा के कुलवंत बाजीगर की संपत्ति भी 61 लाख रुपये है। विधानसभा में 90 में से सर्वाधिक 25 विधायक ग्रेजुएट हैं, 17 12वीं पास, 20 ग्रेजुएट बिजनेसमैन, 12 पोस्ट ग्रेजुएट हैं। एक निरक्षर, चार विधायक 8वीं पास, आठ विधायक 10वीं पास, दो विधायक पीएचडी व एक विधायक अन्य शिक्षा प्राप्त है।

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चीन में पिछले साल 2400 लोगों को मिली मौत की सजा - मानवाधिकार समूह

   बीजिंग।। एक अमेरिकी मानवाधिकार संगठन ने आज कहा कि विश्व में सबसे ज्यादा मौत की सजा देने वाले देश चीन में पिछले साल 2400 लोगों को मृत्युदंड दिया गया। इस संगठन ने इस दुर्लभ आंकड़े पर प्रकाश डाला है क्योंकि चीन आमतौर पर इस विषय पर चुप्पी साधे रहता है।
   'दुइ हुआ फाउंडेशन ने कहा कि यह आंकड़ा वर्ष 2012 की तुलना में 20 प्रतिशत कम है। समूह ने कहा कि चीन इस मुद्दे पर चुप रहता है और उसने मौत की सजा के प्रयोग में लंबी अवधि में गिरावट के बारे में बताने के लिए कुछ नहंी किया है। लेकिन चीन अब भी सभी देशों के आंकडे मिलाकर भी उससे ज्यादा लोगों को मृत्युदंड देता है।
   'एमनेस्टी इंटरनेशनल की इस साल की शुरूआत में जारी रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2013 में विश्व के अन्य देशों में दिए जाने वाले मृत्युदंडों की संख्या 778 थी। हालांकि इस रिपोर्ट में चीन में मृत्युदंड को लेकर कोई आंकड़ा नहीं दिया गया था।

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ओवेसी की पार्टी का विजय जुलुस निकला तो .........


   मुंबई।। मुलुंड से ओवेसी की पार्टी के जीते विधायक का विजय जुलुस निकला तो कुछ मुसलमानों ने पाकिस्तान का झंडा लहरा दिया और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे भी लगाए। साथ ही "ऊपर छतरी नीचे छाया भाग हिन्दू ओवेसी आया" के नारे लगाकर ख़ुशी जाहिर की।
   यहाँ सवाल सबसे बड़ा ये है कि ओवेसी की पार्टी के अभी सिर्फ दो विधायक ही जीते हैं और हिन्दुओं को भगाने की बात शुरू हो गई और तो और क्षेत्र विशेष के मुस्लिमों ने भी उस पार्टी को वोट दिया जो 15 मिनट में सारे हिन्दुओं को काटने की बात करता है।
    हालांकि मुंबई में ना जाने कितने मुस्लिम संगठन हैं जो इसका विरोध कर सकते थे पर उन्होंने ऐसा किया नहीं।
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प्राचीन उपाय - लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए दीपावली की रात इन 8 जगहों पर भी लगाना चाहिए दीपक


    दीपावली की रात महादेवी लक्ष्मी के पूजन की रात होती है। इस रात्री को महादेवी लक्ष्मी को मनाने का सबसे अच्छा समय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि इस रात देवी महालक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। अत: इस रात को देवी को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न उपाय बताए गए हैं। प्राचीन समय से परंपरा चली आ रही है कि दीपावली की रात में कुछ विशेष स्थानों पर दीपक लगाने से देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। आज हम आपको बताएँगे की दिवाली की रात में कहां-कहां दीपक लगाने चाहिए।
1. पीपल के पेड़ के नीचे दीपावली की रात एक दीपक लगाकर घर लौट आएं। दीपक लगाने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। ऐसा करने पर आपकी धन से जुड़ी समस्याएं दूर हो सकती हैं।
2. यदि संभव हो सके तो दिवाली की रात के समय किसी श्मशान में दीपक लगाएं। यदि यह संभव ना हो तो किसी सुनसान इलाके में स्थित मंदिर में दीपक लगा सकते हैं।
3. धन प्राप्ति की कामना करने वाले व्यक्ति को दीपावली की रात मुख्य दरवाजे की चौखट के दोनों ओर दीपक अवश्य लगाना चाहिए।
4. हमारे घर के आसपास वाले चौराहे पर रात के समय दीपक लगाना चाहिए। ऐसा करने पर पैसों से जुड़ी समस्याएं समाप्त हो सकती हैं।
5. घर के पूजन स्थल में दीपक लगाएं, जो पूरी रात बुझना नहीं चाहिए। ऐसा करने पर महालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
6. किसी बिल्व पत्र के पेड़ के नीचे दीपावली की शाम दीपक लगाएं। बिल्व पत्र भगवान शिव का प्रिय वृक्ष है। अत: यहां दीपक लगाने पर उनकी कृपा प्राप्त होती है।
7. घर के आसपास जो भी मंदिर हो वहां रात के समय दीपक अवश्य लगाएं। इससे सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।
8. घर के आंगन में भी दीपक लगाना चाहिए। ध्यान रखें यह दीपक भी रातभर बुझना नहीं चाहिए।

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रिश्वत लेने के आरोप में राजस्व अधिकारी गिरफ्तार

   बूंदी।। रामनगर इलाके में तैनात एक राजस्व अधिकारी को एक हजार रूपए की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के इंसपैक्टर नीरज गुप्ता ने कहा कि अजय सिंह परमार को कल शाम मारे गए छापे में गिरफ्तार किया गया। गुप्ता ने कहा कि आरोपी ने किसान क्रेडिट कार्ड के आवेदनपत्र को आगे बढ़ाने के लिए गुरू नानक कालोनी के निवासी बादल गर्ग से कथित तौर पर एक हजार रूपए की मांग की थी। 
    उन्होंने कहा कि गर्ग की शिकायत पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के कर्मियों ने तय योजना के तहत बूंदी पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने उसी चाय की दुकान से परमार को गिरफ्तार कर लिया, जहां उसने गर्ग को रिश्वत की राशि के साथ बुलाया था। गुप्ता ने कहा कि रिश्वत की राशि उससे बरामद कर ली गई और आरोपी को आज अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। गुप्ता ने कहा कि सितंबर 2010 में परमार को केशोरायपटन इलाके में तैनाती के दौरान 18,500 रूपए की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि उसके निलंबन को हाल ही में रद्द किया गया था। हालांकि मामला चल रहा है।

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भाजपा और शिवसेना के सरकार गठन को साथ आने के संकेत


   नई दिल्ली।। भाजपा ने अपनी शुरूआती दुविधा को छोड़ते हुए सरकार गठन के लिए अपने अलग हुए सहयोगी शिवसेना का साथ लेने का आज संकेत दिया। शिवसेना ने महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर भाजपा नेतृत्व के साथ चर्चा करने के लिए यहां अपने दो दूत भेजे हैं। इसके साथ ही यह भी प्रतीत हुआ कि राकांपा से बाहर से समर्थन लेने का विकल्प भाजपा नहीं छोडऩा चाहती ताकि शिवसेना के साथ समझौता नहीं हो पाने की स्थिति में उसके पास दूसरा विकल्प बना रहे। सूत्रों ने कहा कि शिवसेना ने भाजपा नेतृत्व के साथ चर्चा के लिए अपने दो नेताओं को लगाया है। शिवसेना ने इस विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के खिलाफ तीखी बयानबाजी की थी। भाजपा नेतृत्व से चर्चा करने के लिए शिवसेना के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सदस्य अनिल देसाई और एक अन्य नेता सुभाष देसाई आज रात दिल्ली पहुंचे। शिवसेना ने इसके साथ ही अपने कट्टर नेता संजय राउत को दरकिनार कर दिया। पार्टी सूत्रों ने कहा कि परोक्ष तौर पर शिवसेना को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह का महाराष्ट्र दौरा टाल दिया है। सिंह को भाजपा विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया गया था। वह अब दीपावली के बाद वहां जाएंगे। यह कदम एक तरह से पर्दे के पीछे शिवसेना को भाजपा की शर्तो पर साथ लाने की संभावना तलाशने का हिस्सा है। सरकार बनाने की कवायद के लिए सघन विचार विमर्श के बीच राज्य के भाजपा नेता विलास मुगंतीवार ने मुख्यमंत्री के मुद्दे को नया मोड़ दे दिया जब उन्होंने इस पद के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का पक्ष लिया। इस बीच वित्तमंत्री अरूण जेटली और महाराष्ट्र के लिए पार्टी के चुनाव प्रभारी ओम माथुर की टिप्पणियों से भी यह स्पष्ट है कि पार्टी ने शिवसेना के लिए अपने दरवाजे बंद नहीं किए हैं।
   सभी विकल्प खुले रखते हुए जेटली ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कुछ अन्य नेताओं को टेलीफोन पर बधाई देने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अपने आप में संकेत देता है :संभावित गठजोड़ के बारे में जेटली ने कहा, '' ...हमारे पास दो प्रस्ताव हैं। शिवसेना स्वाभाविक सहयोगी रही है, एनसीपी ने बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा की है...महाराष्ट्र में सरकार बनाने में भाजपा और शिवसेना का सहयोगी बनना निश्चित रूप से एक बात होगी लेकिन यदि कुछ कठिनाई पैदा होती है तो आपके पास राकांपा के रूप में बिना शर्त समर्थन की पेशकश भी मौजूद है। उन्होंने हालांकि कहा कि शिवसेना के साथ अभी अधिक बात नहीं हुई है, साथ ही जोर दिया कि दोनों सहयोगी अभी भी केंद्रीय मंत्रिमंडल और मुम्बई नगर निगम में साथ..साथ हैं।
   जेटली ने कहा, '' नि:संदेह तीन स्तरीय सरकार में से हम दो में सहयोगी हैं...यह तथ्य कि हम एक-दूसरे को बधाई दे रहे हैं, अपने आप में एक संकेत है। केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शिवसेना शामिल है और मुंबई नगर निगम में भी दोनों दल सहयोगी हैं। भाजपा के महाराष्ट्र चुनाव प्रभारी ओम प्रकाश माथुर ने भी इसी आधार बात कही और कहा कि उनकी पार्टी ''खुश होगी यदि उसकी ''स्वाभाविक सहयोगी शिवसेना साथ आती है। उन्होंने कहा, ''हमारा मानना है कि पार्टी जो वर्षों तक हमारे साथ रही है...यदि स्वाभाविक सहयोगी जो हमारे साथ थी हमारे साथ आती है, हम खुश होंगे। लेकिन यदि ऐसा नहीं होता है तो राजनीति में सभी विकल्प खुले हैं। भाजपा ने 288 सदस्ईय विधानसभा में 122 सीटें जीती हैं जो बहुमत से 23 सीटे कम है। वहीं शिवसेना ने 63 और राकांपा ने 41 सीटें जीती हैं। शिवसेना 63 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। राकांपा के पास 41 सीटें हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या वह शरद पवार के नेतृत्व वाले दल राकांपा से गठबंधन की संभावना को खारिज कर रहे हैं, जेटली ने कहा कि राजनीति में किसी संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, ''जब आप बातचीत कर रहे होते हैं तो पार्टी कुछ भी नहीं बोलती।
    इस बारे में जोर देकर यह पूछे जाने कि क्या वह राकांपा को 'नाÓ कह रहे हैं, उन्होंने कहा, ''मैं किसी को हां नहीं कह रहा हूं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने आज जेेटली से उनके आवास पर मुलाकात की। उन्होंने जेटली से करीब आधे घंटे तक बात की और सरकार बनाने की रणनीति पर चर्चा की। समझा जाता है कि जेटली और गडकरी के बीच महाराष्ट्र में पार्टी की पसंद के बारे में चर्चा हुई। राकांपा ने पहले ही बिना शर्त समर्थन देने की पेशकश की है लेकिन भाजपा ने अभी यह तय नहीं किया है कि वह पेशकश स्वीकार करनी है या नहीं। सूत्रों ने कहा कि अगर शिवसेना तेवर दिखाती है तो भाजपा अपना नेता चुनकर सरकार बनाएगी तथा राकांपा के प्रत्यक्ष या परोक्ष समर्थन से सदन में बहुमत साबित करेगी। जेटली से बातचीत करने के बाद गडकरी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेताओं से विचार विमर्श करने के लिए नागपुर रवाना हो गए। बताया जाता है कि संघ की इच्छा है कि हिन्दुत्व की शक्तियां एकजुट रहें। लेकिन अंतिम निर्णय उसने भाजपा पर छोड़ दिया है। इस बीच मुख्यमंत्री पद के लिए महाराष्ट्र में भाजपा प्रमुख देवेन्द्र फडऩवीस का नाम सबसे आगे चल रहा है। हालांकि इस दौड़ में एकनाथ खडसे और विनोद तावडे भी शामिल हंै।

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बीसीसीआई ने वेस्टइंडीज के साथ द्विपक्षीय दौरों पर लगाई रोक, कानूनी कार्रवाई भी करेगा

   हैदराबाद।। बीसीसीआई ने आज वेस्टइंडीज के साथ सभी द्विपक्षीय क्रिकेट दौरे निलंबित कर दिए और पिछले सप्ताह भारत दौरा बीच में रद्द करने के लिए उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही का भी फैसला किया है।
श्रृंखला बीच में रद्द होने से भारी नुकसान उठा रही बीसीसीआई ने यह कड़ा फैसला कार्यसमिति की आज यहां हुई बैठक में लिया।
   वेस्टइंडीज के साथ सभी क्रिकेट दौरे निलंबित करने और कानूनी कार्रवाई का फैसला कार्यसमिति के सदस्यों ने सर्वसम्मति से लिया। बीसीसीआई सचिव संजय पटेल ने बैठक के बाद एक संक्षिप्त बयान में कहा ,''बीसीसीआई दौरा बीच में रद्द करने के लिए वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करेगा। बीसीसीआई और वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड के बीच सभी द्विपक्षीय दौरे निलंबित रहेंगे।
   बीसीसीआई ने इतने कम समय के भीतर पांच वनडे मैचों की श्रृंखला खेलने के लिए राजी होने पर श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड की प्रशंसा भी की।
   बयान में कहा गया ,'' सदस्यों ने श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड की प्रशंसा की है जिसने इतने कम समय के भीतर भी दो नवंबर 2014 से पांच वनडे मैचों की श्रृंखला खेलने का हमारा अनुरोध मान लिया। बयान में कहा गया ,'' यह दौरा अगले साल श्रीलंकाई टीम के निर्धारित भारत दौरे के बदले में होगा। भारत जुलाई अगस्त 2015 में श्रीलंका का दौरा करेगा।
   पांच वनडे मैच कटक, हैदराबाद, रांची, कोलकाता और अहमदाबाद में खेले जाएंगे जबकि विस्तृत कार्यक्रम की घोषणा जल्दी ही होगी।
   बीसीसीआई के बयान में हालांकि यह नहीं कहा गया है कि भारत और वेस्टइंडीज के बीच क्रिकेट दौरों पर कब तक रोक रहेगी। समझा जाता है कि अधिकांश सदस्य वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड के खिलाफ सख्त कदम उठाने के पक्ष में थे।
   वेस्टइंडीज को आठ अक्तूबर से 19 नवंबर के बीच भारत में पांच वनडे, एक टी20 और तीन टेस्ट खेलने थे लेकिन अपने आंतरिक भुगतान विवाद के कारण टीम चार वनडे के बाद दौरा रद्द करके चली गई। कार्यसमिति की बैठक वेस्टइंडीज के खिलाफ कार्रवाई और मुआवजे की रकम तय करने के बारे में फैसले के लिए बुलाई गई थी।
   कैरेबियाई खिलाडिय़ों की 17 अक्तूबर को धर्मशाला में वनडे खेलने के लिए काफी मनौव्वल करनी पड़ी थी। उन्होंने बीसीसीआई को दौरा बीच में रद्द करने के बारे में वही सूचित किया था।
    पटेल ने पहले ही संकेत दे दिया था कि बीसीसीआई वेस्इंडीज बोर्ड के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा था ,'' हमें वेस्टइंडीज के दौरा बीच में रद्द करने के फैसले से काफी नुकसान हुआ है। हम उसके मुआवजे की मांग करेंगे और आईसीसी के समक्ष भी यह मसला रखेंगे। वेस्टइंडीज के क्रिकेट बोर्ड द्वारा दिए गए नए करार से खफा था जो उन्हें भारत पहुंचने के बाद दिए गए। वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड और प्लेयर्स एसोसिएशन के बीच हुए नए करार के तहत क्रिकेटरों के वेतन में 75 प्रतिशत की कटौती हो रही है।

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रोक के बावजूद बाजार में बिक रहे चायना के पटाखे, प्रशासन कर रही है अनदेखी

   धार/सरदारपुर।। राजगढ़ में मेला मैदान के समीप मार्केटिंग सेासायटी में पटाखा बाजार भले ही लगा हो पर दुकानों पर चायना के पटाखे मिलने लगे हैं। जबकि चायना के पटाखों पर रोक है। खिलौना दुकानदार चायना के पटाखे के बेच रहे हैं।चायना में बने पटाखों की बिक्री पर रोग लगा दी है। केंद्र सरकार ने माना है कि चायना से पटाखे चोरी छुपे लाए जा रहे हैं। ये कभी भी जानलेवा साबित हो सकते हैं।
   दूसरी तरफ यदि स्थानीय अधिकारियों की बात करें तो वे अभी सख्ती नहीं दिख रहे है जबकि उदारहण के तोर पर अनेक हादसे देखने को मिल रहे जहा पटाखा दुकान लगी है। ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का सपना मेक इन इडिया का है ओर वह कैसे पुरा होगा। चायना के पटाखे पर विस्फोटक एक्ट 2008 के तहत कारवाई करना चाहिए। 
 
 
(अक्षय भण्डारी)
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निजी कंपनियों को कोयला खानों की ई-नीलामी के लिए राष्ट्रपति का अध्यादेश जारी

    नई दिल्ली।। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने निजी कंपनियों को कोयला ब्लाकों की ई-नीलामी के लिए अध्यादेश को आज अपनी संस्तुति प्रदान कर दी। मंत्रिमंडल ने कल ही राष्ट्रपति से इसकी सिफारिश की थी। उच्चतम न्यायालय ने पिछले महीने दिए एक फैसले में वर्ष 1993 के बाद आवंटित 214 कोयला खानों के आवंटन रद्द कर दिए है। न्यायालय के इस निर्णय से उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनजर सरकार ने अध्यादेश लाने का कदम उठाया है। सरकार के इस कदम को कोयला क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने की बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है। इसमें बिजली, इस्पात जैसे कोयले की खपत वाली निजी कंपनियों को अपने इस्तेमाल के लिए कोयला उत्खनन हेतु कोयला ब्लाकों के लिए नीलामी में बोली लगाने का मौका मिलेगा। इसके अलावा इसमें केन्द्र और राज्य सरकार के उपक्रमों को कोयला खानों का सीधे खान आवंटन का प्रावधान होगा। राष्ट्रपति के पे्रस सचिव वेणु राजामणि ने आज यहां कहा, ''राष्ट्रपति ने अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
    अध्यादेश जारी होने के बाद केन्द्र और राज्य सरकारों के एनटीपीसी और राज्य विद्युत बोर्डों जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को कोयला खानों का सीधे आवंटन किया जाएगा। सरकार ने कहा है कि वह सीमेंट, इस्पात और बिजली क्षेत्र में काम करने वाली निजी कंपनियों के लिए ई--नीलामी में काफी संख्या में कोयला खानों को रखेगी। वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कल शाम मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कहा कि ई--नीलामी पूरी तरह से पारदर्शी होगी और इसे तीन से चार माह में पूरा कर लिया जाएगा। इससे मिलने वाली पूरी राशि उस राज्य सरकार को जाएगी जहां कोयला खान स्थित होगी। झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ राज्यों को इसका बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है जबकि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश को भी फायदा होगा। जेटली ने कहा कि अदालत द्वारा जिन कंपनियों को दोषी करार दिया गया है उन्हें छोड़कर अन्य सभी कंपनियों को नीलामी में भाग लेने की अनुमति होगी और किसी को भी पहले इनकार का कोई अधिकार नहीं होगा। बोली लगाने वाली कंपनियां ई-नीलामी की उल्टी बोली प्रतिस्पर्धा में भाग लेंगी। 
    उल्लेखनीय है कि इससे पहले चयन समिति प्रणाली के जरिए आवंटित कोयला खानों के तौर तरीकों को लेकर सवाल उठे हैं। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक :कैग: की रिपोर्ट में इन खानों के आवंटन में गड़बड़ी होने का आरोप लगाया गया और इससे सरकारी खजाने को 1.86 लाख करोड़ रूपए के नुकसान का अनुमान व्यक्त किया गया। मामला न्यायालय में पहुंच गया और उसके बाद शीर्ष अदालत ने पिछले महीने फैसला सुनाते हुए वर्ष 1993 के बाद आवंटित 218 में से 214 खानों का आवंटन रद्द कर दिया।

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महाराष्ट्र व हरियाणा विस चुनाव में नोटा दबाने वाले मतदाताओं की संख्या में इजाफा

    मुंबई/चंडीगढ़।। महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के दौरान मुंबई में 'इनमें से कोई नहीं (नोटा) बटन दबाने वाले मतदाताओं की संख्या में 2014 लोकसभा चुनावों की तुलना में काफी बढोत्तरी दर्ज हुई है। मुंबई की कुल 36 विधानसभा सीटों पर 65 हजार 735 मतदाताओं ने अपने अपने क्षेत्रों में सभी मतदाताओं को खारिज करते हुए मतदान केन्द्र पर जाकर ईवीएम के नोटा बटन को दबाया जबकि अप्रैल मई में हुए आम चुनावों में नोटा का विकल्प चुनने वाले 52 हजार 952 मतदाता थे। पूरे महाराष्ट्र में नोटा विकल्प चुनने वाले मतदाताओं की संख्या विधानसभा चुनावों में माकपा, समाजवादी पार्टी, स्वाभिमानी शेतकारी पक्ष, राष्ट्रीय समाज पक्ष और अन्य छोटे दलों को मिले वोटों से ज्यादा है। महाराष्ट्र में, पश्चिमी महाराष्ट्र की तुलना में मराठवाड़ा के ग्रामीण क्षेत्रों में नोटा विकल्प खासा लोकप्रिय दिखा। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में कुल योग्य आठ करोड़ 25 लाख 91 हजार 826 मतदाताओं में से 0.9 प्रतिशत यानी चार लाख 60 हजार 741 मतदाताओं ने नोटा बटन दबाया। मुंबई की चांदीवली सीट पर 4653 मतदाताओं ने नोटा को चुना जो महानगर में किसी भी सीट पर सबसे ज्यादा आंकड़ा रहा। इस सीट पर पूर्व मंत्री और कांग्रेसी उम्मीदवार मोहम्मद आरिफ नसीम खान ने 29469 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। इसके बाद, विखरोली सीट पर 3251 मतदाताओं ने नोटा दबाया। इस सीट पर शिवसेना के सुनील राउत ने 25 हजार 339 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। मुंबादेवी सीट पर नोटा दबाने वालों की संख्या सबसे कम 802 रही। इस सीट पर कांग्रेस के अमीन पटेल 8513 मतों के अंतर से विजई रहे। गौरतलब है कि पिछले वर्ष सितंबर में उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद, चुनाव आयोग ने ईवीएम मशीन के सबसे आखिर में नोटा बटन को जोड़ा था।
हरियाणा में 53 हजार मतदाताओं ने दबाया नोटा का बटन
    हरियाणा में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में विभिन्न क्षेत्रों के 53 हजार 613 से अधिक मतदाताओं ने राजनीतिक दल के नेताओं को निरस्त करते हुए ईवीएम मशीन में नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) का बटन दबाया। निर्वाचन कार्यालय से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 90 हजार विधानसभा सीटों वाले राज्य हरियाणा में नोटा का चयन करने वाले मतदाताओं की संख्या कुलमतों की 0.4 फीसदी है। दबवाली विधानसभा सीट में 1,549 मतदाताओं ने सभी प्रत्याशियों को नापसंद करते हुए नोटा को ही बेहतर विकल्प माना। दबवाली सीट से आईएनएलडी पार्टी के वरिष्ठ नेता अजय सिंह चौटाला की पत्नी नैना सिंह चौटाला ने कांग्रेस के वीके सिंह को आठ हजार 545 मतों से हराया। बवानी खेड़ा (एलसी) सीट से सबसे कम 169 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना। बावनी खेड़ा से भाजपा प्रत्याशी विशम्भर सिंह ने आइएनएलडी के प्रत्याशी दया मुर्तना को पराजित किया। दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे भूपेंद्रर सिंह हुड्डा के विधानसभा क्षेत्र गढ़ी संपला किलोई में कुल 402 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया। हुड्डा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी आईएनएलडी के प्रत्याशी सतीश कुमार नंदल को 47 हजार 185 वोटों से हराया। राज्य में 47 सीटें जीतकर भाजपा पहली बार सरकार बना रही है।


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आईएएस खेमका बोले, मोदी सरकार करेगी घोटालेबाजों पर कार्रवाई

   नईदिल्ली।। हरियाणा और महाराष्ट्र में भाजपा सरकार गठन से पहले ही केन्द्र में मोदी सरकार के सामने भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई का दबाव बनने लगा है। सीनियर आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने केन्द्र में मोदी सरकार से पूछा कि क्या वह लाइसेंस-ट्रांसफर में धांधली को रोक पाएगी और भ्रष्टाचार करने वालों पर कार्रवाई करेगी? याद रहे कि अशोक खेमका ने ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के विवादित जमीन सौदे को रद्द किया था। वह अपनी ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं। 
   अपनी ईमानदारी के कारण उन्हें कई तबादले और जान से मारने की धमकी तक झेलनी पड़ी है। वर्ष 1991 के हरियाणा कैडर के अधिकारी खेमका अब तक 44 विभागों में तैनात किए जा चुके है। फिलहाल वह हरियाणा के आर्काइव्स और आॢकयोलॉजी विभाग के महानिदेशक हैं। गौरतलब है कि चुनाव से पहले बीजेपी ने वाड्रा डील को आधार बनाकर कांग्रेस पर खूब हमले किए थे। अब सत्ता में आने के बाद उस पर नैतिक रूप से वाड्रा मामले की जांच कराने का दबाव तो बन ही गया है। कैप्टन अभिमन्यु का कहना है कि जमीन घोटाले में जांच कराना भाजपा के एजेंडे में सबसे ऊपर है।

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हरियाणा की नई सरकार क्या वाड्रा का भूमि सौदा रद्द करेगी ?

    चंडीगढ़।। हरियाणा में भाजपा द्वारा बहुमत हासिल करने के बाद अब यह सवाल उठ रहे है कि क्या नई सरकार विवादास्पद राबर्ट बाड्रा भूमि सौदे को रद्द करेगी? उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हिसार की एक चुनावी रैली में कहा था कि वे यह अच्छी तरह जानते है कि चुनाव के बाद दामाद जी को अवैध सौदे के लिए क्लिसरेंस नहीं मिलेगा, लिहाजा चुनाव प्रक्रिया के दौरान ही उन्होंने सौदे को वैद्य बनाने का निर्णय लिया। आयोग ने यह पाया है कि आदर्श आचार संहिता प्रभावशीन होने से पहले ही सौदे को बैद्य कर दिया गया था, लेकिन मोदी के भाषण का सारांश यही था कि वाड्रा की स्काय लाइट हास्पिटलिटी और गुडगांव में डीएलएफ के बीच 58 करोड़ का सौदा ही हरियाणा में कांग्रेस के कुशासन को सबसे बड़ा प्रतीक बन गया। 
    सूत्रों का कहना है कि नई सरकार शिखोपुर गांव की तीन एकड़ जमीन के सौदे को रद्द कर सकती हैं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि सरकार सौदा रद्द करना चाहती है तो सरल तरीका यही है कि मुख्य सचिव कार्यालय से यह आदेश जारी करे कि गुडगांव के डिपुटी कमिश्नर द्वारा भूमि सौदा की स्वीकृति देने वाला उनका 16 जुलाई 2014 का आदेश निरस्त किया जाता हैं।

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परस्पर अवैध लाभ पहुंचाने के मामले में श्रीनिवासन, अन्य आरोपी अदालत में हुए पेश

  हैदराबाद।। लाभ के बदले में वाईएसआर प्रमुख जगनमोहन रेड्डी की कंपनियों में निवेश करने से जुड़े मामले में इंडिया सीमेंट्स के प्रबंध निदेशक और आईसीसी अध्यक्ष एन श्रीनिवासन तथा अन्य आरोपी आज यहां विशेष सीबीआई अदालत में पेश हुए। इस मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर को होगी। आंध्रप्रदेश के पूर्व मंत्री सविता रेड्डी, जगन के वित्तीय सलाहकार वी विजय साई रेड्डी, उद्योगपति निम्मगड्डा प्रसाद और कुछ आईएएस अधिकारी भी अदालत में पेश हुए और उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस मामले में विभिन्न पहलुओं में दर्ज 11 आरोपपत्रों में ए सभी नामजद हैंं।
    मामले के मुख्य आरोपी जगनमोहन आज नहीं पेश हुए। उन्हें और गैरहाजिर रहे कुछ अन्य आरोपियों का उनके वकीलों ने प्रतिनिधित्व किया। जगनमोहन इस समय आंध्र प्रदेश में कडप्पा जिले की पुलिवेंदुला विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। अदालत ने कल जगनमोहन को अदालत में निजी पेशी से छूट दे दी थी क्योंकि उन्होंने इस संबंध में दायर अर्जी में कहा था कि वह आंध्र्रप्रदेश के चक्रवात प्रभावित जिलों का दौरा कर रहे हैं।

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श्रम मंत्री ने किया बोनस के लिए वेतन सीमा बढ़ाए जाने का समर्थन

    नई दिल्ली।। श्रम एवं रोजगार मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बोनस के दायरे में और कर्मचारियों को लाने के लिए वेतन सीमा में उपयुक्त वृद्धि का समर्थन किया है।
    उन्होंने उद्योग एवं ट्रेड यूनियनों से श्रम मुद्दों के निपटान में संतुलन बरतने को भी कहा है। 'पेमेंट आफ बोनस एक्टÓ, 1965 में संशोधन को लेकर आयोजित त्रिपक्षीय चर्चा की अध्यक्षता करते हुए तोमर ने कल कहा कि इस अधिकार के लिए वेतन सीमा की मौजूदा प्रणाली को समय-समय पर बढ़ाया जाना चाहिए।
    इस संदर्भ में उन्होंने योग्यता सीमा मौजूदा 10,000 रूपए से बढ़ाकर 18,000 रूपए प्रति महीने तथा बोनस की अधिकतम सीमा के आकलन का वर्तमान आधार प्रतिमाह 3,500 रूपए से बढ़ाकर 6,000 रूपए करने के लिए 'पेमेंट आफ बोनस एक्टÓ, 1995 में संशोधन के प्रस्ताव पर चर्चा की। इस सिफारिश को श्रम पर स्थाई समिति ने जनवरी में मंजूरी दे दी है। ट्रेड यूनियन बोनस भुगतान के लिए शंर्तों को हटाए जाने की मांग करते रहे हैं। उनका कहना है कि वर्तमान में छोटे पद पर कार्यरत कर्मचारी का वेतन भी सीमा से अधिक है और इसीलिए सीमा का कोई मतलब नहीं रह गया है।

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स्वच्छ भारत अभियान विशिष्ठ लोगों के फोटो खिंचवाने का मौका - आप

    नई दिल्ली।। आम आदमी पार्टी (आप) ने राष्ट्रीय राजधानी में 'अस्वच्छ हालात' को लेकर दिल्ली नगर निगमों पर निशाना साधते हुए कहा है कि स्वच्छ भारत अभियान 'विशिष्ठ लोगों के लिए फोटो खिंचावने का एक मौका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बीते दो अक्तूबर को इस अभियान की शुरूआत की गई थी। इसके बाद से आप दिल्ली में तीनों नगर निगमों के महापौरों को गंदगी के स्थानों की तस्वीरें भेज रही है। 
    आप ने मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के मुकाबले अपने स्तर से सफाई अभियान शुरू किया है। पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा, ''आप की राय है कि इस अभियान के शुरू होने के तीन सप्ताह से कम समय में यह स्पष्ट हुआ है कि इसका मकसद सिर्फ विशिष्ठ लोगों के फोटो खिंचवाने का मौका है। उधर, पार्टी ने लोगों से अपील की है कि दिवाली को शोर-गुल से मुक्त बनाएं और फिर प्रकाश के इस पर्व का लुत्फ उठाएं।
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जानिए गाय की किन दो चीजों में निवास करती हैं देवी लक्ष्मी :

    हिंदू धर्म में गाय को बहुत ही पवित्र और शुभ माना गया है। अनेक धर्म ग्रंथों में गाय को मोक्ष प्रदान करने वाली बताया गया है। मान्यता है कि गाय में देवी महालक्ष्मी का भी वास होता है। इस संदर्भ में एक कथा महाभारत के अनुशासन पर्व में पितामह भीष्म ने धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई है। उसी के अनुसार, गाय के गोबर व मूत्र में देवी लक्ष्मी का निवास बताया गया है। यही कारण है कि गाय के गोबर और मूत्र को बहुत ही पवित्र माना गया। यह पूरा प्रसंग इस प्रकार है-
पितामह भीष्म ने ये बताया था युधिष्ठिर को
    एक समय की बात है, लक्ष्मी ने मनोहर रूप धारण करके गायों के एक झुंड में प्रवेश किया, उनके सुंदर रूप को देखकर गायों ने पूछा कि- देवी। आप कौन हैं? और कहां से आई हैं। तुम पृथ्वी की अनुपम सुंदरी जान पड़ती हो। सच-सच बताओ, तुम कौन हो और कहां जाओगी ?
   तब लक्ष्मी ने कहा- गायों। तुम्हारा कल्याण हो, मैं इस जगत में लक्ष्मी के नाम से प्रसिद्ध हूं। सारा जगत मेरी कामना करता है। मैंने दैत्यों को छोड़ दिया, इससे वे सदा के लिए नष्ट हो गए और मेरे ही आश्रय में रहने के कारण इंद्र, सूर्य, चंद्रमा, विष्णु, वरूण तथा अग्नि आदि देवता सदा आनंद भोग रहे हैं। जिनके शरीर में मैं प्रवेश नहीं करती, वे नष्ट हो जाते हैं। अब मैं तुम्हारे शरीर में निवास करना चाहती हूं।
- देवी लक्ष्मी की यह बात सुनकर गायों ने कहा- तुम बड़ी चंचला हो, कहीं भी नहीं ठहरती। इसके सिवा तुम्हारा बहुतों के साथ एक सा संबंध है, इसलिए हमको तुम्हारी इच्छा नहीं है। तुम्हारी जहां इच्छा हो चली जाओ। तुमने हमसे बात की, इतने ही से हम अपने को कृतार्थ मानती हैं।
   गायों के ऐसा कहने पर लक्ष्मी ने कहा- तुम यह क्या कहती हो, मैं दुर्लभ और सती हूं फिर भी तुम मुझे स्वीकार नहीं करती, इसका क्या कारण है। देवता, दानव, मनुष्य आदि उग्र तपस्या करके मेरी सेवा का सौभाग्य प्राप्त करते हैं। अत: मुझे स्वीकार करो। संसार में कोई मेरा अपमान नहीं करता।
   गायों ने कहा- हम तुम्हारा अपमान या अनादर नहीं करतीं, केवल तुम्हारा त्याग कर रही हैं और वह भी इसलिए कि तुम्हारा चित्त चंचल है, तुम कहीं भी जमकर नहीं रहती। अब बहुत बातचीत से कोई लाभ नहीं है, तुम जहां जाना चाहती हो, चली जाओ।
   लक्ष्मी ने कहा- गायों। तुम दूसरों को आदर देने वाली हो, यदि तुम मुझे त्याग दोगी तो सारे जगत में मेरा अनादर होने लगेगा, इसलिए मुझ पर कृपा करो। मैं तुमसे सम्मान चाहती हूं, तुम लोग सदा सबकी कल्याण करने वाली, पवित्र और सौभाग्यवती हो। मुझे आज्ञा दो, मैं तुम्हारे शरीर के किस भाग में निवास करूं?
   गायों ने कहा- यशस्विनी। हमें तुम्हारा सम्मान अवश्य करना चाहिए। अच्छा, तुम हमारे गोबर और मूत्र में निवास करो, क्योंकि हमारी ये दोनों वस्तुएं परम पवित्र हैं।
   लक्ष्मी ने कहा- धन्य भाग। जो तुम लोगों ने मुझ पर अनुग्रह किया। मैं ऐसा ही करूंगी। मैं सदैव तुम्हारे गोबर और मूत्र में निवास करूंगी।
    सुखदायिनी गायों। तुमने मेरा मान रख लिया, अत: तुम्हारा कल्याण हो।


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