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मौखिक तलाक के खिलाफ हैं 92 फीसद महिलाएं: सर्वे

Written By News Today Time on Thursday, August 27, 2015 | 9:27 PM

    नई दिल्ली।। देश में बड़ी तादात में मुस्लिम महिलाओं का मानना है कि तीन बार तलाक बोलने से रिश्ता खत्म होने का नियम एकतरफा है। इस पर प्रतिबंध लगना चाहिए। अपनी तरह के पहले अध्ययन में सामने आए नतीजों के मुताबिक देश में करीब 92.1 फीसद महिलाओं ने कहा कि इस परंपरा को खत्म किया जाना चाहिए।
    यही नहीं, मुस्लिम समुदाय में स्काइपी, ईमेल, मेसेज और वाट्सऐप के जरिये दिए जाने वाले तलाक ने इन चिंताओं को और भी बढ़ाने का काम किया है। देश के 10 राज्यों में मुस्लिम पर्सनल लॉ में सुधार के लिए काम करने वाले भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन नाम के एनजीओ की ओर से किए गए सर्वे में 4,710 महिलाओं से बात की गई।
     सर्वे के मुताबिक देश की अधिकतर मुस्लिम महिलाएं आर्थिक और सामाजिक तौर पर काफी पिछड़ी हैं। करीब आधी से अधिक मुस्लिम महिलाओं की 18 साल से पहले ही शादी हो गई। इन महिलाओं को घरेलू हिंसा का भी सामना करना पड़ा। सर्वे में शामिल 91.7 फीसद महिलाओं ने कहा कि वह अपने पतियों के दूसरी शादी करने के खिलाफ हैं।
    अध्ययन में शामिल में 73 फीसद महिलाओं ऐसी थीं, जिनके परिवार की सालाना आय 50 हजार रुपए से कम है, जबकि 55 फीसद की शादी 18 वर्ष की उम्र से पहले ही हो गई थी। सर्वे में संपत्ति के मामले में भी मुस्लिम महिलाओं का पिछड़ापन उजागर हुआ, आंकड़ों के मुताबिक 82 फीसद महिलाओं के नाम कोई संपत्ति नहीं है।
    अधिकतर महिलाओं की शिक्षा भी न के समान थी। अध्ययन करने वाली जाकिया सोमन ने बताया कि साल 2014 में महिला शरिया अदालत में 235 केस आए थे, जिनमें से 80 फीसद केस मौखिक तलाक के थे।
    सर्वे में शामिल 93 फीसद महिलाओं ने माना कि तलाक से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए, जबकि 83 फीसद ने माना कि मुस्लिम फैमिली लॉ को वर्गीकृत करने से न्याय मिल सकेगा।



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सपा विधायक इरफान सोलंकी के भाई ने दारोगा को पीटा

    लखनऊ।। कानपुर में समाजवादी पार्टी के विधायक हाजी इरफान सोलंकी के बाद अब उनके भाई पर भी सत्ता का जोरदार नशा चढ़ा है। कानपुर मेडिकल कालेज के डॉक्टरों के साथ मारपीट करने के कारण चर्चा में आए इरफान सोलंकी के भाई उनके दो कदम आगे निकल गये हैं। छोटे भाई ने कानपुर में एक दारोगा के साथ मारपीट की है। दारोगा ने विधायक के भाई और गनर के खिलाफ मामला दर्ज कराने के लिए तहरीर दी है। सावन का सोमवार होने के कारण आज कानपुर में कई क्षेत्र को वाहनों के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया है। इसी में से एक सिद्धनाथ मंदिर मार्ग पर विधायक के छोटे भाई फैजान वाहन ले जाने की जिद कर रहे थे। इनको प्रशिक्षु दारोगा ने रोका तो यह उनको इतना नागवार लगा कि उन्होंने दारोगा की वर्दी पर हाथ डाल दिया। फैजान ने प्रशिक्षु दारोगा देवेन्द्र सिंह यादव के साथ जमकर मारपीट की और वर्दी फाडऩे के बाद बिल्ला तक नोंच लिया। इतना ही नहीं फैजान के गनर ने भी दारोगा को पीटा। 
    पीडि़त दरोगा देवेन्द्र सिंह यादव ने आरोपियों के खिलाफ चकेरी थाना में तहरीर दी है। एक भाई ने आरटीओ के ड्राइवर को पीटा था कानपुर में हैलट हास्पिटल के डॉक्टरों को पीटने के साथ पुलिस से भी लाठीचार्ज करवाने वाले विधायक हाजी इरफान सोलंकी के बाद अब उनके छोटे भाई ने कानपुर के संभागीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) के ड्राइवर को बंधक बनाकर 15 मई को जमकर पीटा था। हैलट हास्पिटल के सामने गाड़ी में हल्की सी टक्कर लगने के बाद इरफान सोलंकी ने जिस तरह से सत्ता का नशा दिखाया था, उनके भाई तो उनसे भी आगे निकल गये। भाई ने ड्राइवर को बंधक बनाकर काफी देर तक मारने के बाद फिर सड़क पर दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। हैलट हास्पिटल के सामने ही स्वरूपनगर थाना है, लेकिन विधायक के भाई का रंग ही जुदा था। उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था। विधायक के भाई का नाम शादाब है। काफी पिटने के बाद भी हिम्मत कर ड्राइवर इस घटना की रिपोर्ट दर्ज कराने स्वरुप नगर थाने में डटा रहा।
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हां करके फंसा पाक: वार्ता से डर नहीं लगता साहब, डोभाल से डर लगता है

    पाकिस्तान को अब अपनी हर समस्या की जड़ में NSA अजीत डोभाल नजर आने लगे हैं, तो ये अचरज की बात नहीं है।
    पाकिस्तानी मीडिया NSA स्तर की वार्ता को लेकर घबराया हुआ है। ये घबराहट बेवजह भी नहीं है। दरअसल, रूस के उफा में जब अजीत डोभाल की मौजूदगी में NSA स्तर की वार्ता पर सहमति बनी थी, तभी भारत ने पहला राउंड जीत लिया था।
    भारत और पाकिस्तान के बीच NSA स्तर की वार्ता उस मौके पर होने जा रही है, जब दोनों देशों के बीच नियंत्रण रेखा और सरहद पर जबरदस्त तनाव है। पाकिस्तान की तरफ से बार-बार सीज फायर का उल्लंघन हो रहा है।
    लेकिन, पिछले कुछ हफ्ते में भारत ने पाकिस्तान की बेवजह की गोलीबारी का जैसा मुंहतोड़ जवाब दिया है, उससे पाकिस्तान हैरान है। पाकिस्तानी मीडिया के जानकार इस बहस में उलझे हैं कि भारत के सख्त रुख के पीछे और कोई नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाकार अजीत डोभाल ही हैं।
   पाकिस्तान को अब अपनी हर समस्या की जड़ में NSA अजीत डोभाल नजर आने लगे हैं, तो ये अचरज की बात नहीं है। दरअसल NSA स्तर की वार्ता से पहले ही पाकिस्तान का आत्मविश्वास हिल गया है।


(Sanjay Dwivedy)
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सरेबाजार लगे पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे!


    पहले आजादी के जश्न के दौरान एक कॉलेज के बाहर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाकर हालात बिगाड़ने का प्रयास किया। फिर गुरुवार को बाजार में पुलिस के सामने खुलेआम पाक के समर्थन में नारेबाजी की।
    पुलिस ने पांच नामजद समेत दस अभियुक्तों के खिलाफ देशद्रोह और भड़काऊ नारेबाजी कर सौहार्द बिगाड़ने के आरोप में मुकदमा कायम कर दो को मौके से गिरफ्तार कर लिया।
    उधर, घटना के बाद से ही इलाके में तनाव व्याप्त है। घटना थाना जवां क्षेत्र के कस्बा बरौली की है। पहला मामला गत 15 अगस्त का है। बरौली स्थित एक इंटर कॉलेज में आजादी का जश्न मनाया जा रहा था।
    तभी एक समुदाय विशेष के कुछ युवक आ गए। उन्होंने छात्रओं पर फब्तियां कसीं। इस पर लोगों ने विरोध किया, तो युवक पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। हालांकि बाद में पुलिस भी पहुंची और मामला रफा-दफा हो गया।
   गुरुवार को बरौली इलाके के काफी संख्या में लोग जिला मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने डीएम डॉ. बलकार सिंह से मिलकर वहां के हालात से अवगत कराया। डीएम ने सीओ सिटी (तृतीय) राजीव कुमार सिंह को जांच के लिए मौके पर भेजा।
    उधर, सीओ जवां एसओ के साथ कस्बा बरौली पहुंचे और मामले की जानकारी लेनी शुरू की। पुलिस के मुताबिक तभी वहां पर आरोपी आ गए और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। इस पर बाजार में भगदड़ जैसे हालात पैदा हो गए और तनाव फैल गया। इस पर पुलिस तुरंत हरकत में आ गई।
   एसओ जवां मो. असलम ने कहा कि थाना जवां में पांच नामजद समेत दस लोगों के खिलाफ मुकदमा कायम कर दो अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है। यह लोग सरेआम बाजार में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे। अन्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी को दबिशें जारी हैं।
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पांच रुपये में पेट भरेगी दादी की रसोई


    नोएडा।। महंगाई की मार से आम जनता की कमर टूटी जा रही है। गरीबों के नसीब में भरपेट भोजन मयस्सर नहीं हो रहा है। ऐसे वक्त में अगर कोई पांच रुपये में गरीबों को भरपेट भोजन कराने की व्यवस्था कर दे तो वह गरीबों के लिए कोई बड़ा मसीहा ही हो सकता है।
    आज के जमाने में पांच रुपये में भरपेट भोजन की बात सुनकर भले ही आपको अपने कानों पर भरोसा न हो रहा हो, लेकिन यह सच है। गरीबों को पांच रुपये में पहली बार भरपेट भोजन कराने का बीड़ा उठाया है, जिले के समाजसेवी अनूप खन्ना ने।
    दादी की रसोईं के नाम से वह आज दोपहर 12 बजे से सेक्टर-29 स्थित गंगा कांप्लेक्स से अपने इस सराहनीय कदम की शुरुआत करने जा रहे हैं। सफलता मिलने पर जिले के बाकी प्रमुख स्थानों पर भी दादी की रसोई नजर आएगी।
    दादी की रसोई में फिलहाल गरीबों को पांच रुपये में देसी घी का तड़का लगी दाल, चावल और अचार मिलेगा। रसोईं के सफल होने पर इसी कीमत पर इसमें कुछ और रोटी, सब्जी जैसे कुछ और भोज्य पदार्थ भी बढ़ाए जाएंगे। उत्तराखंड में जब भीषण तबाही का आलम था, तो अनूप खन्ना यह खबर सुनते ही अपने कुछ साथियों को लेकर रातोंरात राहत सामग्र्री के साथ वहां फंसे लोगों की मदद करने पहुंच गए थे।
    समाज सेवी अनूप खन्ना का कहना है कि मेरी दादी मां सरोजनी खन्ना ने एक बार मुझसे कहा कि अब तो मैं सिर्फ खिचड़ी खाती हूं, मेरे ऊपर होने वाले खर्च में काफी बचत होती है, उससे गरीबों को खाना खिलाओ। दादी की बात मानकर मैंने यह कदम उठाया है। सफल होने पर पूरे जिले में इस तरह की रसोई खुलेगी।



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गोवा के पूर्व सीएम के रिश्‍तेदारों के घर ईडी ने मारे छापे

    पणजी।। लुइस बर्जर रिश्वत मामले में गुरुवार को गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत और उनके संबंधियों के यहां पर प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने छापेमारी की है। इस मामले में कामत को कल निचली अदालत से मिली अग्रिम जमानत के खिलाफ गोवा पुलिस ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इससे पहले कामत करीब दो हफ्ते तक अंतरिम जमानत पर थे।
    साल 2010 में अमेरिका के लुइस बर्जर के अधिकारियों से रिश्वत लेने का आरोप था। लुइस बर्जर के अधिकारियों ने अमेरिकी अदालत में कहा था कि उन्होंने 2010 में गोवा में जेआईसीए के तहत एक जल परियोजना में परामर्श का ठेका हासिल करने के लिए एक भारतीय मंत्री को रिश्वत दी थी। उस समय राज्य में कांग्रेस की सरकार थी और कामत मुख्यमंत्री थे।











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80 फुट ऊंचे तार पर चल रचाया ब्याह



    अनोखे तरीके से प्यार का इजहार और विवाह रचाने के किस्से तो आपने बहुत सुने होंगे। आज हम फिर एक विचित्र तरीके से संपन्न हुए विवाह के बारे में बता रहे हैं।
    जी हां, इंग्लैंड में रहने वाले 37 वर्ष के क्रिस बुल और 25 वर्षीय फोबे बेकर ने 80 फुट की ऊंचाई पर हवा में लटकते तारों पर विवाह की रस्मों को पूरा किया और एक दूसरे के जीवन साथी बन गये।
    इस अनोखे विवाह समारोह में करीब 100 मेहमान शामिल हुए। रस्मों को पूरा कराने वाले रजिस्ट्रार जमीन से मेगाफोन के जरिये शादी की रस्मों को संपन्न करवा रहे थे। शादी के जोड़े ने हवा में ही एक दूसरे को अंगूठी पहनायी।
    बेकर ने बताया कि जिस दिन से बुल मिला था, इस तरह से शादी करना हमारा सपना था। बुल ने ही मुझे तारों पर चलना सिखाया। ऊंचे तारों पर चलकर शादी करना परंपरा है, लेकिन इंग्लैंड में ऐसा पहले कभी नहीं किया गया। बुल को रस्सी पर चलने का 15 वर्षों का पेशेवर अनुभव है। बुल ने बताया कि रस्सी पर चलते हुए हवा में शादी करना मेरा सपना था। मगर, मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे कभी ऐसी लड़की मिलेगी। मैं ऊंचाई पर हवा में अपनी शादी को सेलिब्रेट करना चाहता था।
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तो क्या सितंबर में चांद के लाल होते ही तबाह हो जाएगी दुनिया!

    न्यूयॉर्क।। अमेरिका में इन दिनों सितंबर में चांद के खून की तरह लाल हो जाने और धरती पर भयानक भूकंप के आने की अटकलें लग रही हैं। दरअसल, यहां दो ईसाई संतों ने भविष्यवाणी की है कि धरती सितंबर में नष्ट होने की कगार पर पहुंच जाएगी और इसके लिए चंद्रमा के रंग का लाल होना महज इसकी सूचना देना भर होगा।
    दोनों ईसाई संतों का दावा है कि पिछले 18 माह से चंद्रमा का रंग लाल हो रहा है, जो 28 सितंबर को पूरी तरह से लाल हो जाएगा। इसके बाद धरती पर भयानक भूकंप आएंगे, जो जीजस क्राइस्ट के धरती पर आने की सूचना देंगे। ये वो समय होगा, जब धरती पर भयानक भूकंप के झटके होंगे, जो अरब देशों में युद्ध की स्थिति पैदा कर तीसरे विश्वयुद्ध की ओर धकेल देगी।
    फिलहाल, दोनों को अमेरिकी पुलिस ने अफवाहें फैलाने के आरोप में हिरासत में ले लिया है। दोनों इसाई कैथलिक संतों का दावा है कि चांद के लाल होने की घटना 2000 साल में एक बार होती है। दोनों का नाम मार्क ब्लिज्ट और जॉन हेगी बताया जा रहा है। दोनों का कहना है कि 'ब्लड मून' की स्थिति से इजरायल और यहूदियों पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।
    दोनों का दावा है कि 22 से 28 सितंबर के बीच धरती पूरी तरह से गर्म होती जाएगी, जिसके परिणाम स्वरूप बड़े भूकंप के झटके आएंगे। दोनों का दावा है कि इससे पहले 1948 में जब 'ब्लड मून' की स्थिति बनी थी, तो इजरायल का जन्म हुआ था। वहीं, 1967 में जब ये स्थिति बनीं, तो इजरायल ने येरूशलम में कब्जा जमाया था। इस बार 28 सितंबर को 'खूनी चांद' धरती पर पैगंबर की वापसी का संकेत देगा। हेगी खुद मेगाचर्चा नाम के संस्था के संस्थापक हैं और 'फोर ब्लड मून्स' नाम की किताब लिख चुके हैं, जो न्यूयॉर्क में बेस्टसेलर रही है।
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सांप का जहर मारने वाला 'सीरम' कुछ इस तरह से तैयार किया जाता है

Written By News Today Time on Wednesday, August 26, 2015 | 3:02 PM

    प्रयोगशालाओं में अनगिनत प्रयोग करने पर यह पाया गया है कि यदि किसी जानवर के खून में थोड़ा - थोड़ा करके सांप का ज़हर सुई देकर प्रविष्ठ कराया जाए और रोज इस विष की मात्रा क्रमश: बढ़ाई जाए, तो कुछ ही दिनों में उस जानवर के खून में यह गुण आ जाएगा कि यदि उसे सचमुच कोई सांप काट ले, तब भी उसे कुछ न हो। ऐसी दशा में पहुंचे जानवर के खून से ही सांप का जहर मारने वाला 'सीरम' तैयार किया जाता है। 
     इस सीरम को तैयार करने के लिए वास्तव में सैंकड़ों स्वस्थ सांपों की जरूरत होती है। इन सांपों को शीशे के हवादार बक्सो में पाला जाता है और समय—समय पर उनका जहर निकाल कर आगे की प्रक्रिया सम्पन्न करने के लिए प्रयोगशाला में भेज दिया जाता है।
    भारत में इस प्रकार की एकमात्र प्रयोगशाला मुम्बई में है, जिसे 'हाफकिन इंस्टीट्यूट' के नाम से जाना जाता है। यहां पर लगभग 200 प्रकार के सांपों को पाला जाता है और सावधानीपूर्वक उनका जहर निकाला जाता है। इस इंस्टीट्यूट में यूं तो भारत में पाए जाने वाले लगभग सभी प्रकार के जहरीले सांप पाले जाते हैं, किन्तु 'करैत' सांप नहीं मिलता है। क्योंकि करैत सांप की प्रकृति इस तरह की होती है कि यदि उसे कैद करके पिंजड़े में रखा जाए, तो वह कुछ ही दिनों में मर जाता है।
      सांप का जहर निकालने के लिए उसे एक छड़ी की मदद से बाहर निकाला जाता है और फिर उसे सावधानी से मुंह के पास पकड़कर एक बारीक झिल्‍ली चढ़े शीशे के प्‍याले के पास लाया जाता है। सांप गुस्से में जोरों से प्‍याले में अपने दांत गड़ाने की कोशिश करता है, जिससे उसका जहर प्‍याले में इकट्ठा हो जाता है। इस प्रक्रिया से जहर निकालने पर प्‍याले में सांप के मुंह का फेन भी इकट्ठा हो जाता है, जिसे बाद में अलग कर दिया जाता है।
     अमेरिका में वैज्ञानिकों ने विद्युत धारा के द्वारा सांप का जहर निकालने की विधि ईजाद की है। इस विधि में सांप के सिर पर 10 वोल्‍ट की शॉक दिया जाता है, जिससे उसके विष ग्रन्थि सम्‍बंधी स्‍नायु प्रभावित होते हैं और उनमें संकुचन होने के कारण जहर अपने आप सांप के मुंह से बाहर आ जाता है। इस विधि का आविष्‍कार करने वाले डॉक्‍टर जान्‍सन का मानना है कि इससे सांपों को कोई तकलीफ नहीं होती, जबकि शीशे के प्‍याले में जहर निकालने की परम्‍परागत विधि में उन्‍हें बेहद तकलीफ सहनी पड़ती है।
   प्रयोगशाला में सांप के विष को दुहने के बाद उसे कसौली, हिमांचल प्रदेश स्थित गवर्नमेन्‍ट प्रयोगशाला 'सेन्‍ट्रल रिसर्च इंस्‍टीट्यूट' भेज दिया जाता है, जहां पर उसे शोधित करके एंटीवेनम का निर्माण किया जाता है।
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किराये के घर को बनाया मस्जिद, कमरा खाली कराने गई पुलिस पर किया हमला

Written By News Today Time on Tuesday, August 25, 2015 | 9:09 PM


   नई दिल्ली।। पूर्वी दिल्ली के मंडावली में एक पुलिस दल पर कुछ लोगों द्वारा हमला किए जाने के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है। घटना रविवार शाम की है। शनिवार दोपहर को पुलिस के पीसीआर दल को उक्त इलाके में लड़ाई की एक शिकायत मिली थी। जब पुलिस दल बताई गई जगह पर पहुंचा तब स्थानीय लोगों ने उनपर मस्जिद को गिराने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
     उधर, पुलिस दल का दावा है कि मंडावली के नेहरू कैंप में जिस 8×10 स्क्वेयर फुट के विवादित क्षेत्र का इस्तेमाल धार्मिक जगह के तौर पर किया जा रहा था वह पहले से ही क्षतिग्रस्त था। पुलिस का दावा है कि उन्होंने विवादित स्थल को हाथ भी नहीं लगाया है।
क्या है मामला
    एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पूरी घटना के बारे में बताते हुए कहा कि मस्जिद के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा विवादित कमरा एक व्यक्ति का था। उसने अपना कमरा किसी और धर्म को मानने वाले एक परिवार को किराये पर दिया था। पिछले 2 महीने से उक्त कमरे का इस्तेमाल एक मस्जिद के तौर पर होने लगा है।
     आरोप है कि जब कमरे के मालिक ने किरायेदारों को कमरा खाली करने के लिए कहा तो उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। इसी बात पर मकान मालिक और किरायेदार के बीच में बहस और लड़ाई शुरू हो गई, जिसकी सूचना पुलिस को दी गई थी। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर पूरा मामला जानने के बाद मकान मालिक के पक्ष में फैसला दिया।
ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी पर हमला
    इस घटना के बाद रविवार को शाम के समय जब हेड कॉन्स्टेबल सोमपाल और कॉन्स्टेबल अजित मंडावली पुलिस स्टेशन की ओर जा रहे थे तब उन्होंने गौर किया कि कुछ लोग हाथ में डंडे और पत्थर लेकर उन दोनों का पीछा कर रहे हैं। लोगों ने पुलिस की गाड़ी पर पत्थर फेंके, जिसमें 2 कॉन्स्टेबल घायल हो गए। हमले की इस घटना के बाद पुलिस ने इलाके में जगह-जगह छापेमारी की। एक महिला सहित 12 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस ने सभी पकड़े गए लोगों पर दंगा-फसाद करने, डाका डालने और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी पर हमला करने का मामला दर्ज किया है।
    हेड कॉन्स्टेबल सोमपाल, जो कि पकड़े गए 12 लोगों के खिलाफ लिखवाई गई शिकायत में शिकायतकर्ता हैं, का कहना है कि पीछा कर रहे लोगों ने उनपर और अजित पर पत्थर फेंककर हमला किया और उन्हें मारा भी। दोनों पुलिसकर्मियों को चोटें आई हैं।
    पुलिस ने विवादित कमरे में रह रहे किरायेदारों अजमेरी और नूर-उन्हूदा को भी गिरफ्तार किया है। किरायेदारों का आरोप है कि पुलिस ने शाम को उनके कमरे पर आकर प्रार्थना में बाधा खड़ी की। उनका यह भी कहना है कि कमरे को पिछले 5 महीने से मस्जिद के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था।
    स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने उक्त कमरे में घुसकर इबादत से जुड़ी चीजें बाहर फेंक दी। उनका दावा है कि पुलिस ने कमरे को क्षति भी पहुंचाई। पुलिस दल पीडब्ल्यूडी की जमीन पर बनी एक मस्जिद को गिराने की कोशिश कर रही थी।
सरकारी जमीन हथियाने की कोशिश
    एक अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा, ‘उक्त कमरा अवैध है और उसे PWD की जमीन पर बनाया गया है। वह कोई मस्जिद या धार्मिक जगह नहीं थी। वह बस एक कमरा था, जिसका इस्तेमाल पिछले कुछ दिनों से धार्मिक गतिविधियों माध्यम से सरकारी जमीन हथियाने की कोशिश की जा रही है।
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जमशेदपुर आम्बगान मस्जिद कमिटी के अनुमति के बिना मस्जिद के अहाते में चल रहा अवैध लॉज

    जमशेदपुर।। आमबगान मस्जिद के अहाते में बिना अनुमति के अवैध लॉज चलाया जारहा है,कमिटी ने सक्ची थाना को कई बार इसकी सूचना दी है इसके बावजूद लॉज को बंद करने की कोई कार्यवाई नहीँ की जासकी है.आज आमबगान कमिटी ने इस बात की जानकारी दी है. कमिटी ने यह भी बताया है की मस्जिद के 18 दूकानदार मस्जिद कमिटी को मात्र 500 रूपये किराया देते हैं और दूकान को किराया पर 5000-7000 रुपये वसूलते हैं.मस्जिद कमिटी ने मस्जिद अहाते में खान प्रॉपर्टी के नौशाद खान द्वारा पिछले 2 वर्षों से 2 दुकनों का किराया और बिजली बिल का भुगतान नहीँ करने की बात कही है. मस्जिद कमिटी के अध्यक्ष अब्बास अंसारी ने कहा है की मस्जिद कमिटी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष की नियुक्ति नहीँ होने के कारण अब तक कमिटी का audit अब तक नहीँ कराया है जल्द ही सारी कागजी कार्यवाई पूरी कर ली जायेगी.आज के प्रेस कान्फरेन्स में मस्जिद कमिटी के सचिव परवेज़ खालिद, मोहम्मद रफीक, सैयद कलीम, और अख्तर अली मुख्य रुप से मौजूद थे.
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घमंड की राजनीती से ऊपर उठे प्रदेश में बीजेपी

अन्यथा रहीम के दोहे “रहिमन धागा प्रेमका न तोड़ो चत्ख्ये टूटे से फिर न जुड़े ..जुड़े गाठ पडजाये “ सत्य होता नज़र आएगा
  २००३ के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में, उमा भारती के नेतृत्व में भाजपा ने तीन-चौथाई बहुमत प्राप्त किया और प्रदेश की बागडोर अपने नेतृत्व में ली। कुछ समय बाबूलाल गौर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे ...और फिर बीजेपी ने 29 नवंबर, 2005 को बाबूलाल गौर के स्थान पर राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज सिंह चोहान को बागडोर दी उस के बाद लगातार प्रदेश में बीजेपी काबिज़ हे, लेकिन शिवराज सिंह के विचारो से इन ९ साल ९ महीनो में बीजेपी का जीत का घमंड इतना बढ़ गया हे, की उसका कार्यकर्ता हो या पार्षद हो या नेता सभी अपने जीत की मग्रुर्ता में चूर हे और हर वर्ग कही न कही वक्त के इंतजार में घात लगाये बैठा हे मगरूर बीजेपी के नेता आम जनता को अब सिर्फ वोट बैंक समझ ने में लगे हे ....और बीजेपी अपने घोषणा पत्र में किये गये वादों से भटक गयी हे। 
   प्रदेश में बीजेपी के पास सिर्फ कांग्रेस के आरोपों के खंडन के सिवा विकास का कोई मुद्दा ही नहीं रहा है।  कांग्रेस आरोप लगाती हे और बीजेपी उसका खंडन करती नज़र आती हे विकास के नाम पर सिर्फ इन १२ सालो में इक्का - दुक्का विकास हुआ और मुख्यमंत्री निवेश पर पंचायते या जम्बूरी मैदान में सम्मलेन और विकास यात्राए है वही धरातल पर विकास के नाम पर कोरा सन्नाटा पसरा हुआ हे। 
   अगर बीजेपी इसी तरह जीत के घमंड में चूर रही तो हो सकता हे की प्रदेश में ३ पार्टी अस्तित्व में आजाये अगर बीजेपी को अपना अस्तित्व बचाना हे तो विकास यात्रा, सम्मलेन और पंचायतो ऊपर उठ कर जन्नत का विकास और प्रदेश के भविष्य की तरफ ध्यान देना होगा अन्यथा रहीम के दोहे “रहिमन धागा प्रेमका न तोड़ो चत्ख्ये टूटे से फिर न जुड़े ..जुड़े गाठ पडजाये “ सत्य होता नज़र आएगा .....................
(राजेंद्र सिंह जादौन)
8:31 PM | 0 comments | Read More

पति का कत्ल कर शव के साथ दो रात सोई, कारण जानेंगे तो रह जाएंगे हैरान

    नई दिल्ली।। शराबी पति की बुरी आदतों-हरकतों ने महिला को इस कदर परेशान किया कि उसने दिल दहलाने वाली घटना को अंजाम दे दिया। महिला ने पहले पति को गला दबाकर मार डाला। इसके बाद शव पहले बेड में छिपाया फिर दो दिन व दो रात इंतजार करने के बाद शव सेफ्टी टैंक में डाल दिया।

     हैरान करने वाली बात तो यह है कि किसी को शक न हो, इसलिए बच्चों को ऊपर वाले कमरे में सुलाकर खुद कमरे में पति के साथ सोती थी। घटना साउथ वेस्ट दिल्ली के नजफगढ़ की है। यहां पत्नी सीमा (34) ने पति श्री ओम भारद्वाज (40) की हत्या करके शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की। बदबू आने से राज खुला।
   बताया तो यह भी जा रहा है कि कई दिन बीत जाने के बाद जब उसे अपनी गलती महसूस हुई तो सीमा ने अपनी जेठानी और भाई को मामले के बारे में बता दिया। फिर जेठानी और भाई ने नजफगढ़ पुलिस को इस मामले की जानकारी दी।
     पुलिस पुछताछ में महिला ने खुलासा किया है कि वह नशे का आदी था। वह अक्सर मारपीट करता था। महिला के सब्र का बांध 15 अगस्त को टूट गया। पति ओम भारद्वाज से तंग आकर महिला ने 15 अगस्त को उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद शव बेड में छिपा दिया। एक दिन तक शव बेड में छिपाए रखा।
    महिला का इरादा शव को पुख्ता तरीके से ठिकाने लगा का था, इसलिए 16 अगस्त को सुबह बच्चों को स्कूल भेज दिया। दोपहर होते-होते पानी के सेफ्टी टैंक में शव डालकर ऊपर से सीमेंटेड करवा दिया। मामला खुल न जाए, इसलिए वह इतने दिन तक घर में ही रही।
     सेफ्टी टैंक से बदबू आने लगी तो डर की वजह से उसने यह बात अपने जेठ और जेठानी को बताई। इसके बाद महिला का भाई और जेठ बाबा हरिदास नगर पुलिस स्टेशन गए और पूरा मामला पुलिस को बताया। महिला को हिरासत में ले लिया गया है।
शराब के नशे में हैवान बन जाता थाः पत्नी
   पुलिस पूछताछ में सीमा ने यह बताया है कि उसका पति ओम भारद्वाज ड्राइवर था और शराब पीने का आदि था। रोज-रोज झगड़ा करता था। कई बार वह हैवानियत की हदें भी पार कर जाता था। इसी बात से वह परेशान रहती थी।
तिल-तिल मरने से अच्छा था यह करना
    सीमा के मुताबिक, पति ने उसकी जिंदगी नर्क से भी बदतर बना दी थी। सब्र जवाब दे गया तो पति को ही खत्म करने की योजना बना ली। 15-16 अगस्त की रात में गला दबाकर पति की हत्या कर दी और लाश को बेड में डाल दिया। जब अगले दिन बच्चे स्कूल गए लाश को निकाल कर सेफ्टी टेंक में डाल दिया। पुलिस को 20 फुट गहरे सेफ्टी टैंक में शव निकलने में कई घंटे लग गए।
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डीमेट मामला:10,000 करोड़ के घोटाले का आरोप - MBBS के 5000 एडमिशन संदेह में

    भोपाल।। प्रदेश के निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में एडमिशन के लिए होने वाली डीमेट परीक्षा पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख से कॉलेज संचालकों में हड़कंप मच गया है। इसके तहत 2006 से अब तक प्राइवेट मेडिकल व डेंटल कॉलेजों की एमबीबीएस की 5000 और पीजी कोर्स की 1600 सीटों पर हुए एडमिशन संदेह के घेरे में आ गए हैं। कोर्ट ने गुरुवार को कहा था कि व्यापमं से भी बदतर हो सकता है डीमेट घोटाला। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ ही सीबीआई को भी नोटिस भेजे हैं। व्यापमं घोटाले के व्हिसल ब्लोअर आनंद राय का आरोप है कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों ने 10 साल में एडमिशन के नाम पर गैरकानूनी ढंग से 10 हजार करोड़ रुपए वसूले हैं। यह काला धन है। कॉलेज संचालकों ने इसकी कोई रसीद भी नहीं दी है।
     दलालों के जरिए एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में एडमिशन में 13 साल से गड़बड़ियां हो रही है हाईकोर्ट में एक हजार से ज्यादा शिकायतें हुई हैं। पर कॉलेज संचालक हाईकोर्ट के नोटिस की भी अनदेखी करते रहे हैं। 2003 से हो रही गड़बड़ियां डॉ. आनंद राय के मुताबिक 2003 से गड़बड़ियां शुरू हो गई थी। डीमेट 2006 में शुरू हुआ। चार साल में राज्य कोटे की सीटों में से 47% पर अवैध तरीके से प्रवेश दिए गए। 2010 से 2013 तक 1533 सीटों में से 721 सीटें पर अवैध प्रवेश हुए। 
721 सीटों पर एडमिशन निरस्त कर डिग्री जब्त करने की मांग :
   हाईकोर्ट ने गड़बड़ियां रोकने के लिए डीमेट की आंसरशीट की स्कैनिंग क्लासरूम में कराने का आदेश दिया है। इस वजह से एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट डेंटल एंड मेडिकल कॉलेज ने डीमेट परीक्षा स्थगित कर दी है। फिलहाल नई तारीख तय नहीं हुई है। इस बीच दलाल की एक छात्रा से बातचीत का ऑडियो हाईकोर्ट में पेश हुआ। अभय चोपड़ा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर निजी मेडिकल कॉलेजों में राज्य कोटे की सीटों पर गलत तरीके से हुए 721 एडमिशन रद्द कर डिग्री जब्त करने की मांग की है।


6:30 PM | 0 comments | Read More

80 फुट ऊंचे तार पर चल रचाया ब्याह



   अनोखे तरीके से प्यार का इजहार और विवाह रचाने के किस्से तो आपने बहुत सुने होंगे। आज हम फिर एक विचित्र तरीके से संपन्न हुए विवाह के बारे में बता रहे हैं। जी हां, इंग्लैंड में रहने वाले 37 वर्ष के क्रिस बुल और 25 वर्षीय फोबे बेकर ने 80 फुट की ऊंचाई पर हवा में लटकते तारों पर विवाह की रस्मों को पूरा किया और एक दूसरे के जीवन साथी बन गये।
   इस अनोखे विवाह समारोह में करीब 100 मेहमान शामिल हुए। रस्मों को पूरा कराने वाले रजिस्ट्रार जमीन से मेगाफोन के जरिये शादी की रस्मों को संपन्न करवा रहे थे। शादी के जोड़े ने हवा में ही एक दूसरे को अंगूठी पहनायी।
    बेकर ने बताया कि जिस दिन से बुल मिला था, इस तरह से शादी करना हमारा सपना था। बुल ने ही मुझे तारों पर चलना सिखाया। ऊंचे तारों पर चलकर शादी करना परंपरा है, लेकिन इंग्लैंड में ऐसा पहले कभी नहीं किया गया। बुल को रस्सी पर चलने का 15 वर्षों का पेशेवर अनुभव है। बुल ने बताया कि रस्सी पर चलते हुए हवा में शादी करना मेरा सपना था। मगर, मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे कभी ऐसी लड़की मिलेगी। मैं ऊंचाई पर हवा में अपनी शादी को सेलिब्रेट करना चाहता था।
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जाने आखिर क्यों है दुबई दुनिया के लिए ख़ास ?

   दुबई।। शेख इस देश का राजा है। ऐसा राजतन्त्र जिसे हम लोकतान्त्रिक प्राणी तानाशाही कहते है।
   कोई भी तानाशाही में यकीन नही रखता है, लेकिन अगर देखें तो तानाशाही ने दुबई को जन्नत बना दिया। आइये जानते है क्या है दुबई की खासियत:-
-100 % रोजगार।
-विश्व की सबसे अच्छी कानून व्यवस्था।
-विश्व स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं, हर किसी के लिए।
करप्शन फ्री देश।
-न्यूनतम रिश्वतखोरी। 
-विश्वस्तर की हर सुविधा।
-न्यूनतम नशाखोरी।
-कानून तक हर किसी की पहुँच।
-कोई धार्मिक उन्माद नही।
-बलात्कार की एक नाकाम कोशिश आखिरी बार 2007 में हुई थी। आरोपी पठान अगले शुक्रवार को चौराहे पर लटकता हुआ पाया गया था।
-एक बैंक डकैती हुई थी (नाकाम ) 2005 में। सब के सब आरोपियों को गोली मार दी गयी थी।
-ज्यादातर शो रूम्स में कांच की ही दीवारें होती है। लोहे के भरी भरकम शटर नही।
-किसी भी पब्लिक ऑफिस में आप लाइन नही लगा सकते, अपनी आटोमेटिक अपॉइंटमेंट पर्ची लो और सोफे पर बैठकर इंतज़ार करो। आपका नंबर बोलकर बुलाया जायेगा।
-रोड एक्सीडेंट होने पे चंद ही मिंटो में एम्बुलेंस, फिर पुलिस, सिविल डिफेन्स और अगर जरूरत पड़े तो हेलीकाप्टर एम्बुलेंस भी हाजिर।
-आधी रात को भी पश्चिमी औरतें स्कर्ट में घूमती है लेकिन क्या मजाल कि कोई छेड़छाड़ हो जाये। 999 में बस फोन घुमा दो। फोन काटने से पहले ही पुलिस हाजिर।
-ये वो देश है जहाँ का राष्ट्रपति भी बिना सुरक्षा के अकेला निकल जाता है। ये वो देश है जहाँ लोग अपने मुल्क को अपना मुल्क समझते है।
-पुलिस न भी मौजूद हो लेकिन अगर आप कुछ भी गलत करते हुए पकड़े गए तो आपकी खैर नही।
-यहाँ के निवासी इस मुल्क की हर चीज को अपनी पर्सनल प्रॉपर्टी मानते है और उसका ख्याल रखते है।
    दूसरी और हमारा कथित लोकतंत्र है की खामिया ही खामिया। लिस्ट केजरीवाल के आरोपों से भी लम्बी होगी। आँखे बंद करके सोचना शुरू कर दो।
    अब दिल कहता है की काश ये सिस्टम इंडिया में भी होता। लोकतंत्र तो एक ढकोसला है। हर पांच साल बाद एक लोल्लिपोप थमा देते है और खुद नेता लोगो का खून चूसते है।
इति सिंघम!

(डॉ कुलवीर सिंघ)
6:27 PM | 0 comments | Read More

‘PAK की पार्टी से भी गठबंधन कर सकते हैं नीतीश’ – JDU विधायक

neeraj650_081815113020    आरा।। जनता दल युनाइटीड के बागी विधायक नीरज कुमार बबलू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सहरसा में होने वाली परिवर्तन रैली में बीजेपी का आईडी कार्ड गले में लटकाकर घूमते देखे गए। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को तानाशाह बताया।
‘PAK की पार्टी से भी गठबंधन कर सकते हैं नीतीश’
     नीरज ने बिहार चुनाव के लिए हुए महागठबंधन पर भी निशाना साधा। लालू यादव के साथ मिलकर चुनाव लड़ने को लेकर उन्होंने कहा कि नीतीश अब पाकिस्तान की किसी भी पार्टी से भी गठबंधन कर सकते हैं। नीरज ने जल्द ही बीजेपी में शामिल होने की पुष्टि की है।
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भाजपा ने दिखाया आइना, दिया 16 सीटों का ऑफर

     बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा को महज 102 सीटें लड़ने की नसीहत देने वाले रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा को पार्टी ने मात्र 16 सीटों का ऑफर देकर उन्हें सियासी जमीन का आइना दिखाया है।
    कहा जा रहा है कि इस ऑफर के बाद से कुशवाहा के तेवर चढ़े हुए हैं। केंद्र सरकार में राज्य मंत्री का दर्जा देने के बाद अब भाजपा उन्हें ज्यादा वजन देने के मूड में नहीं है।
   बताया जा रहा है कि रोजाना की बयानबाजी से भाजपा आलाकमान कुशवाहा से नाखुश है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा ने कुशवाहा की सियासी जमीन का पूरा फीडबैक जुटाया है।
     बीते दिनों संपन्न विधान परिषद चुनाव में भी उनके उम्मीदवार फेल रहे थे। बावजूद उसके गठबंधन सहयोगी के तौर पर उपेंद्र कुशवाहा भाजपा पर दबाव बनाकर अधिक सीट हासिल करने के मकसद से मीडिया में लगातार बयानबाजी कर रहे हैं।
    उनकी बयानबाजी भाजपा नेतृत्व को रास नहीं आ रही है। कुशवाहा ने दो दिन पहले ही भाजपा को नसीहत देते हुए कहा है कि बिहार की 243 सीटों में भाजपा को सिर्फ 102 सीटों में उम्मीदवार उतारने चाहिए।
   शेष बाकी सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ देनी चाहिए। उन्होंने अपने दल आरएलएसपी के लिए 67 सीटें और रामविलास पासवान की पार्टी लेाजपा के लिए 74 सीटों की मांग की है। जबकि भाजपा की मंशा अपने दम पर 150 से सीटें से ज्यादा पर खुद मैदान में उतरने की है।



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कराची और इस्लामाबाद में दाऊद के पास महलनुमा कोठी समेत नौ घर

    नई दिल्ली।। पाकिस्तान के कराची और इस्लामाबाद शहरों में दाऊद इब्राहिम के कुल नौ घर हैं। इनमें से चार घर तो कराची के पॉश क्लिफ्टन इलाके में हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नौ घरों में से दाऊद का एक ठिकाना पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के बेटे बिलावल भुट्टो जरदारी के कराची में क्लिफ्टन स्थित घर के करीब है। यह घर दाऊद ने दो साल पहले खरीदा था।
    पाकिस्तानी एनएसए सरताज अजीज को देने के लिए भारत सरकार की ओर से तैयार डोजियर में दाऊद इब्राहिम के इन नौ ठिकानों का विस्तृत ब्योरा है। बताया जाता है कि वह इन्हीं नौ घरों में से अपना ठिकाना बदलता रहता है। बिलावल के पास स्थित नए घर को सितंबर 2013 में खरीदा गया था। यह दाऊद ने अपने इलाज में सहूलियत के लिए जियाउद्दीन अस्पताल के पास खरीदा है।
कराची में दाऊद के यह है ठिकाने :-
1.) डी-13, ब्लाक-4, कराची डेवलेपमेंट अथारिटी, एससीएच-5, क्लिफ्टन, कराची
2.) शिरीन जिन्ना कालोनी, जियाउद्दीन अस्पताल के करीब, क्लिफ्टन, कराची
3.)6ए, खयाबान तंजीम, फेज-5, डिफेंस हाउसिंग एरिया, कराची
4.) मोइन पैलेस, दूसरी मंजिल, अब्दुल्लाह शाह गाजी दरगाह के पास, क्लिफ्टन, कराची।
5.) इस्लामाबाद से बीस किमी दूर इस्लमाबाद-मुरी रोड पर आइएसआइ का सेफ हाउस है। यह सेफ हाउस भाउभन हिल पर स्थित है।
6.) 6/2, स्ट्रीट नंबर 22, हाउस नंबर- 29, मारागल्ला रोड, इस्लामाबाद
7.) 17 सीपी बाजार सोसाइटी, ब्लाक 7-8, आमिर खान रोड, कराची
8.) 8वीं मंजिल, मोहरान स्क्वायर, परदेसी हाउस-3 के करीब, तवर एरिया, क्लिफ्टन, कराची
9.) नूरियाबाद के पर्वतीय इलाके में एक महलनुमा कोठी, कराची


3:06 PM | 0 comments | Read More

'नेहरू ना होते तो कश्मीर में नहीं होती धारा 370''

     कोलकाता।। लंबे समय से कश्मीर में चली आ रही धारा 370 की समस्या पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का बड़ा बयान आया है। कश्मीर नीति पर सवालिया निशान लगाते हुए अमित शाह ने स्पष्ट कहा है कि नेहरू की जगह सरदार पटेल होते तो यह समस्या रहती ही नहीं।
    शाह ने नेहरू के बारे में ये बड़ा बयान अपने कोलकाता दौर पर बुधवार को दिया है। शाह ने कहा कि जब सभी राजों रजवाड़ों को भारत में जोड़ा गया था तब हर राज्य पर 370 धारा लगी थी ये सिर्फ जम्मू काश्मीर के लिए नहीं थी। इस दौरान अमित शाह ने कहा कि अंग्रेजों ने रजवाड़ों को स्वतंत्र कर दिया था, लेकिन उस वक्त सरदार पटेल ने पूरे देश को एक करके मजबूत करने का काम किया था।
     शाह ने कहा कि 370 के चलते कश्मीर की समस्या बनी रह गई, उन्होंने कहा कि युद्ध के चलते कश्मीर की संविधान सभा नहीं बन पाई और धारा 370 स्थाई हो गई। उस वक्त नेहरू और अब्दुल्ला के बीच बातचीत हुई और वहीं से जम्मू-कश्मीर की समस्या शुरू हो गई।
पश्चिम बंगाल में है खौफ का माहौल
     अपने पिछले दौरे में नरम रूख अख्तियार करने वाले भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बुधवार को ममता बनर्जी सरकार पर करारा प्रहार किया। शाह ने कहा कि जिस उम्मीद के साथ जनता ने यहां तृणमूल कांग्रेस को सत्ता सौंपी, वैसा कुछ नहीं हुआ।
   राज्य सरकार के प्रति जनता में घोर निराशा है। रोज बम धमाके हो रहे हैं। इस तरह की घटनाओं से यहां खौफ का माहौल है। भाजपा अध्यक्ष बुधवार को महानगर के एक पांच सितारा होटल में इंडियन चेंबर ऑफ कामर्स की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।
3:05 PM | 0 comments | Read More

शिव आज भी इंसान बनकर धरती पर घूम रहे है..जानें कैसे ?

     शिव का अघोरी रूप सबसे खूबसूरत माना जाता है। अघोरी शिव के रूप की पूजा आप भी करते हैं। सावन की सोमवारी पूजा हो, शिवरात्रि या आम दिनों की शिव पूजा भांग और धतूरे को शिव की सबसे प्रिय वस्तु मानकर हर शिव-भक्त शिवलिंग पर जरूर चढ़ाता है। पुराणों के अनुसार शिव के इस रूप को औघड़ या अघोरी बोला जाता है, भांग-धतूरे के नशे में मदमस्त रूप।
     आपको जानकर हैरानी होगी कि शिव का यह रूप आज भी धरती पर मौजूद है। वह हमारे ही बीच लेकिन आम जिंदगी और आम इंसानों से दूरी बनाकर रहता है। मुश्किल से पूरे हिंदुस्तान में 5-6 से ऐसे शिव रूप हैं। पर आप उसे पहचानेंगे कैसे?
     इलाहाबाद में ….(माघ)…मेला के बारे में तो जानते ही होंगे आप। माघ मेला में आए नागा साधु इस मेले का खास आकर्षण होते हैं। आज के जमाने में भी इनके बदन पर कपड़े नहीं होते और नंगे बदन पर गंगा तट पर घूमा करते हैं। ये अघोरी साधु हैं। ये विरले ही आपको किसी आबादी वाले इलाके में दिखेंगे और अगर दिख गए तो लोगों को अपनी ताकत से खत्म कर डालने के लिए डराते ही दिखेंगे।
    लाल आंखें, हुक्का पीते हुए, राख से सने, नंगे बदन ये साधु श्मशानों में रहते हैं। इन्हें जीने के लिए किसी सुख-सुविधा की जरूरत नहीं। यहां तक खाने-पीने के लिए कंकाल की खोपड़ी ही इनका प्लेट और कंकाल की खोपड़ी ही इनका ग्लास है। इनका विश्वास होता है कि दुनिया में कोई भी चीज गंदी नहीं हो सकती है क्योंकि हर चीज भगवान ब्रह्मा का बनाया हुआ है उतना ही शुद्ध-स्वच्छ है जितना कोई और चीज।
     आपको शायद एक बार यह सोचकर घिन आए कि ये गाय का मांस छोड़कर सभी कुछ खाते हैं यहां तक कि आदमी का मांस भी। अघोर तंत्र सिद्धि के लिए ये श्मशानों में रहते हैं। इनकी एक साधना है श्मशान में रहना और लाशों पर खड़े रहकर साधना करना। एक अघोरी बनने के लिए लाशों को अपने ऊपर से गुजारना इनके लिए सबसे जरूरी माना जाता है। जो राख ये शरीर पर मलते हैं या जिन राखों को अपने शरीर के ऊपर उड़ेलते हैं वह भी श्मशान में जलाई हुई लाश की राख ही होती है। सड़ी हुई लाश का खुली आग में भूना हुआ मांस खाना भी इनकी साधना का एक हिस्सा है। शराब, भांग पीना इन साधुओं के लिए निषेध नहीं बल्कि जरूरी है। श्मशान में रहते हुए लाशों का मांस खाना और शराब, भांग, गांजा पीना इनकी साधना से जुड़ा हुआ है। पर ये लाशें आती कहां से हैं? किसी का कत्ल तो नहीं करते ये?
     आज भी किसी 5 साल से कम उम्र के बच्चे, सांप काटने से मरे हुए लोगों, कई बार धार्मिक कार्य में होने वाले खर्च में पैसे न खर्च कर पाने की स्थिति में होने के कारण गरीबों का, आत्महत्या किए लोगों का शव जलाया नहीं जाता बल्कि दफनाया या गंगा में प्रवाहित कर कर दिया जाता है। पानी में प्रवाहित ये लाश डूबने के बाद हल्के होकर पानी में तैरने लगते हैं। अक्सर अघोरी तांत्रिक इन्हीं शवों को पानी से ढूंढ़कर निकालते और अपनी तंत्र सिद्धि के लिए प्रयोग करते हैं।
     शिव के पांच चेहरे माने जाते हैं जिसके एक चेहरे का नाम ‘अघोर’ है. ‘घोर’ का शाब्दिक अर्थ है ‘घना’ जो अंधेरे का प्रतीक है और ‘अ’ मतलब ‘नहीं’। इस तरह अघोर का अर्थ हुआ जहां कोई अंधेरा नहीं, हर ओर बस प्रकाश ही प्रकाश है। शिव का सबसे चमकीला रूप ‘अघोरी’ कहलाता है। अघोरी मतलब घने अंधेरे को हटाने वाला। अंधेरे का अर्थ भय भी हो सकता है। इस तरह यह अघोर रूप उस भय से मुक्त कराने वाला भी है, अघोरी जो हर घोर (अंधेरे की तरह दिखने वाले भय को हटा दे)। शिव का यह अघोरी रूप सबसे खूबसूरत माना जाता है। इस रूप में शिव औघड़ भी कहलाते हैं जो दुनिया से विरक्त, अपनी ही साधना में लीन आत्मा का प्रतीक है।
अघोरी साधु शिव की साधना करते हैं और दुनिया से दूर वीराने में रहते हैं। इनके रहने की खास जगह है श्मशान क्योंकि यहां शिव और पार्वती का वास माना जाता है। जिस भी चीज या काम को दुनिया निषेध मानती है अघोरी साधु उसे ही कर ब्रह्मा के हर रूप में भगवान का वास होने, उसके पवित्र होने की बात कहते हैं; जैसे, लाशों को अपने ऊपर से गुजारना, लाशों की राख से नहाना, श्मशान में रहना आदि।
     शिव की साधना करने वाले ये साधु खुद को शिव का रूप बताते हैं और शिव की कृपा प्राप्त होने की बातें कहकर लोगों को नुकसान पहुंचाने के नाम पर डराते भी हैं। हालांकि यह सच इससे बहुत अलग है।
     अघोरियों का जीवन बहुत मुश्किल होता है। सभी साधु इस साधना को पूरा नहीं कर पाते। पूरे भारत में ऐसे मात्र 1500 अघोरी साधु हैं। पर वास्तव में ये अघोरी ‘साधु’ नहीं, बल्कि काला जादू करने वाले ‘अघोरी तांत्रिक’ होते हैं।श्मशान में लाशों के ऊपर सिद्धियों की साधना करना दरअसल आत्माओं को वश में करने और काला जादू तंत्र विद्या की साधना होती है। लोगों का ऐसा मानना है कि अघोरी साधु हमेशा गंदे होते हैं पर यह भी गलत है। जरूरी नहीं कि अघोरी साधु गंदे ही हों बल्कि वे साफ-सुथरे होंगे और आपको पता भी नहीं चलेगा। कहते हैं पूरे भारत में असली अघोरी साधु मात्र 5 से 6 ही हैं लेकिन वे ऐसे कहीं आपको नहीं मिलेंगे क्योंकि वे शिव साधना में हमेशा लीन रहते हैं !!!


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जाने सेंधा नमक कितना फायदेमंद है हमारे शरीर के लिए



   क्या आप जानते हैं कि इसका सेवन हमारे लिए कितना फायदेमंद होता है, आइए हम आपको बताते हैं सेंधा नमक हमारे शरीर के लिए कितना फायदेमंद है. 
पेट की बीमारियों सहित सेंधा नमक के हैं अनेक फायदे
    सेंधा नमक का सेवन ज्यादातर लोग व्रत के दौरान करते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि इसका सेवन हमारे लिए कितना फायदेमंद होता है, आइए हम आपको बताते हैं सेंधा नमक हमारे शरीर के लिए कितना फायदेमंद है।
सेंधा नमक के फायदें
    रॉक साल्ट (सेंधा नमक) सिर्फ खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाता, बल्कि इसका उपयोग कई तरह के उपचार में भी किया जाता है। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज आदि बीमारियों में डॉक्टर नमक के इस्तेमाल पर ध्यान रखने की सलाह देते हैं। जबकि सेंधा नमक के उपयोग से रक्तचाप नियन्त्रण में रहता है। साथ ही यह डेड स्किन को दूर करने से लेकर बॉडी को रिफ्रेश तक करने में सेंधा नमक बहुत ही उपयोगी होता है।
एक्टिव और फिट रखता है
   रॉक साल्ट में लगभग 84 प्रकार के ऐसे मिनरल्स मौजूद होते हैं, जो सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं। खासतौर से इसमें मौजूद मैग्नीशियम और कैल्शियम बहुत ही लाभ पहुंचाते हैं। ये बॉडी को फिट रखने के लिए सबसे जरूरी तत्व माने जाते हैं। सेंधा नमक को खाने में शामिल करके बॉडी को एक्टिव और फिट रखा जा सकता है।बहुत ही कम लोग इस बात से वाकिफ होंगे कि सेंधा नमक सांसों से जुड़ी कई प्रकार की समस्याओं को दूर करता है। अस्थमा से जूझ रहे मरीजों को सेंधा नमक का सेवन जरूर करना चाहिए।
मेटाबॉलिज्म सही रखता है
    सेंधा नमक के सेवन से मेटाबॉलिज्म का लेवल सही बना रहता है, जो पूरी बॉडी के फंक्शन के लिए जिम्मेदार होता है। सेंधा नमक शरीर में पानी की उचित मात्रा को भी बनाए रखता है। इससे बॉडी को हाइड्रेट रहती है, साथ ही डाइजेशन भी सही रहता है। खाने में इसे शामिल करके ब्लड सर्कुलेशन को भी सही रखा जा सकता है। सही ब्लड सर्कुलेशन कई सारी बीमारियों को दूर रखने में मददगार होता है।
मूड को सही रखता है
     सेंधा नमक बॉडी में ऑक्सीजन की उचित मात्रा को भी बनाए रखता है। बॉडी में ऑक्सीजन के सही फ्लो से कई बीमारियां दूर रहती हैं। इससे सीजनल बुखार में भी राहत मिलती है।रॉक साल्ट लैम्पस में मौजूद अरोमा बॉडी और दिमाग को रिलैक्स करता है। इससे तनाव, चिंता जैसी समस्याएं कोसों दूर रहती हैं।
भूख को बढ़ाता है
    भूख न लगने की समस्या को भी सेंधा नमक खाकर दूर किया जा सकता है। इसकी चुटकी भर मात्रा खाने से डाइजेशन सही रहता है।खाने-पीने में लापरवाही और गड़बड़ी से अपच, कब्ज, गैस और एसिडिटी की समस्या आम बात है। यह कई बीमारियों का कारण बनती है। ऐसी किसी भी समस्या को दूर करने के लिए खाने के बाद सेंधा नमक का सेवन करना फायदेमंद रहेगा।
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झूठे राहुल की कांग्रेस ने हड़पी किसानों की 65 एकड़ जमीन'

    अमेठी।। नेहरू-गांधी परिवार के गढ़ अमेठी में पैठ बनाने की कोशिश में जुटीं केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को 'झूठा' बताते हुए उन पर किसानों की 65 एकड़ जमीन हड़पने का आरोप लगाया है। हालांकि कांग्रेस ने इस आरोप को बेबुनियाद करार दिया है।
    स्मृति रविवार को उत्तर प्रदेश के अमेठी में एक रैली को संबोधित कर रहीं थीं। उन्होंने दावा किया कि सम्राट साइकिल फैक्टरी के लिए किसानों से 65 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई थी, जिसे इस साल 24 फरवरी को गांधी परिवार द्वारा संचालित राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट को बेच दिया गया।
    उन्होंने कहा 'झूठे नरेंद्र मोदी नहीं, बल्कि राहुल गांधी हैं। अमेठी में किसानों की 65 एकड़ जमीन हड़पना इसका सबूत है।' उन्होंने कहा कि किसानों की यह जमीन साइकिल फैक्टरी के लिए अस्सी के दशक में अधिग्रहीत की गई थी। क्या वह फैक्टरी लगी, क्या किसी को नौकरी मिली, उस जमीन का क्या हुआ?
   स्मृति ने कहा 'कोई बोलने की हिम्मत नहीं कर सकता, लेकिन यह स्टॉम्प पेपर पर है। जमीन राजीव गांधी ट्रस्ट ने खरीदी।'
राहुल पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि डेढ़ मिनट तक बयान देना आसान है, लेकिन संसद में डेढ़ घंटे की बहस में बिना पर्ची बोलना कठिन।
वहीं कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने स्मृति ईरानी के आरोपों को नकारते हुए उसे बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा, 'मैं नहीं समझता हूं कि सम्राट साइकिल के बंद होने तथा कोर्ट के आदेश से नीलामी में जमीन खरीदने के बीच कोई संबंध है।' उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री 'गैर जिम्मेदाराना' तरीके से ऐसा आरोप लगा रही हैं।
     अमेठी आईं स्मृति ने सबसे पहले मटियारी कला गांव में भाजपा के दिवंगत नेता संतबक्स सिंह के परिवार को सांत्वना दी। इसके बाद वह अमेठी पहुंचीं। यहां 25 हजार महिलाओं का प्रधानमंत्री जीवन सुरक्षा बीमा योजना के तहत एक वर्ष के प्रीमियम का तीन लाख का चेक सौंपा।
राहुल से कभी भी बहस को हूं तैयार
    मीडिया से बातचीत में स्मृति ने कहा कि मैं राहुल गांधी से कभी भी बहस करने को तैयार हूं। प्रदेश सरकार पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश संभावनाओं का प्रदेश है। यहां विकास का स्तर खराब है। बिजली, पानी, सड़क सब की स्थिति दयनीय है।
निभाती रहूंगी दीदी का रिश्ता
    उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि अमेठी के लोगों ने उन्हें दीदी कहा था, वह इस रिश्ते को लगातार निभा रही हैं। इसे तब तक निभाती रहेंगी, जब तक यहां से कांग्रेस समाप्त नहीं हो जाती और अंतिम घर तक विकास नहीं पहुंच जाता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अमेठी के लिए वो काम किए हैं जो कांग्रेस की तीन पीढिय़ां नहीं कर पाईं। उन्होंने कहा कि अक्टूबर में फिर आऊंगी और लोगों को दस लाख रुपये का बिना गारंटी का लोन दिलाने की कोशिश करूंगी।
    'राहुल गांधी भूमि अधिग्रहण का जिस आधार पर विरोध कर रहे हैं, उसी आधार पर उन्हें सम्राट साइकिल की जमीन किसानों को लौटा देनी चाहिए।'-स्मृति ईरानी
    'मैं नहीं समझता हूं कि सम्राट साइकल के बंद होने व कोर्ट के आदेश से नीलामी में जमीन खरीदने के बीच कोई संबंध है।' -अभिषेक मनु सिंघवी, कांग्रेस प्रवक्ता



  
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मोतिहारी में रोका गया नीतीश का काफिला, हंगामा-लाठीचार्ज

    मुजफ्फरपुर।। मोतिहारी के हरसिद्धि प्रखंड क्षेत्र के अरेराज-छपवा पथ पर सोमवार को आशा संघ के लोगों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफिले को कनछेदवा में रोक दिया। काफी देर हंगामा होता रहा। इसके बाद पहुंची फोर्स ने लाठीचार्ज कर सीएम के काफिले को सुरक्षित आगे बढ़ाया।
    सीएम सम्राट अशोक क्लब के तत्वावधान में सिसवा कोरड़ में आयोजित महात्मा बुद्ध की प्रतिमा का अनावरण व कनछेदवा उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित समारोह को संबोधित करने हरसिद्धि पहुंचे थे। सिसवा कोरड़ से मंत्री अवधेश कुशवाहा के यहां जाने के क्रम में समारोह स्थल के सामने आशा संघ के सदस्यों ने इस बात के लिए उनके काफिले को रोका कि क्या उन्हें सभा में शामिल होने का भी अधिकार नहीं है।
     आशा को उग्र होता देख जिलाधिकारी अनुपम कुमार पहुंचे उन्होंने समझाने की कोशिश की। लेकिन वे नहीं मानी। फिर जैसे ही महिलाओं ने काफिले को रोका पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इसके बाद भगदड़ मच गई। घटना में कई आशाओं को हल्की चोट आई है। कुछ देर के हंगामे के बाद मुख्यमंत्री के काफिले को रवाना किया जा सका।
बिहार बढ़ेगा बिहारियों के बूते : नीतीश
     मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार बढेगा बिहारियों के बल पर। हमारा इतिहास गौरवशाली है। यहीं से पूरी दुनियां को शासन प्रणाली मिली है। हम राजनीति में रहकर भी उनकी तरह नहीं है। मुख्यमंत्री मोतिहारी जिले के हरसिद्धि प्रखंड के कनछेदवा उच्च माध्यमिक विद्यालय में सम्राट अशोक क्लब के तत्वावधान में आयोजित प्रथम सम्राट बुद्ध विहार लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे।
    सीएम ने सधे अंदाज में राजनीतिक विरोधियों को निशाने पर लिया। उनके काफिले को रोकने वाली आशाओं को कहा- जब दिल्लीवाले आएं तो उनके सामने अपनी बात रखिए। हमारे हाथ में जितना है उतना कर दिया है। आशा का फुल फर्म बताते हुए कहा आपको जो मिलता है वह प्रोत्साहन राशि है।
   आपके मामले में केंद्र ही कुछ कर सकता है। आप आवेदन दें हम केंद्र को भेज देंगे। अब जब दिल्ली के लोग आएं तो उनके सामने अपनी बात रखिएगा। वैसे भी हमने दस साल में जो करना था कर दिया। चार दिन में माडल कोड लग जाएगा। फिर मौका मिलेगा तो करेंगे।




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अातंकवाद पर वार्ता से भागा पाक, अजीज नहीं आएंगे भारत

Written By News Today Time on Sunday, August 23, 2015 | 9:16 PM

      नई दिल्ली।। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की वार्ता में आतंकवाद पर पोल खुलने से सहमा पाकिस्तान आखिरकार बातचीत की मेज पर बैठने से पहले ही भाग गया। भारत के दो-टूक जवाब से तिलमिलाए इस्लामाबाद ने एनएसए सरताज अजीज का दौरा रद कर दिया है। शनिवार देर रात पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि भारत द्वारा शर्तें रखे जाने के कारण एनएसए स्तर की बातचीत नहीं हो सकती है। पाकिस्तानी उच्चायोग ने हुर्रियत नेताओं का रिसेप्शन भी रद कर दिया है। इससे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट कर दिया था कि भारत आतंकवाद के अलावा और किसी दूसरे मुद्दे पर चर्चा नहीं करेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने बातचीत रद करने के पाकिस्तान के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।
अजीज को करारा जवाब
    भारत के साथ बातचीत में कश्मीर के मुद्दा होने के सरताज अजीज के दावे की धज्जियां उड़ाते हुए सुषमा ने कहा कि यह उफा में दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच बनी सहमति के खिलाफ है। उन्होंने विस्तार से बताया कि 1998 से 2012 तक चले समग्र वार्ताक्रम के कुल आठ मुद्दों में कश्मीर भी शामिल था, लेकिन आतंक और ङ्क्षहसा के कारण यह परवान नहीं चढ़ सका। इसी कारण उफा में दोनों प्रधानमंत्रियों ने सबसे पहले आतंकवाद और ङ्क्षहसा पर बात करने का फैसला किया। इसके लिए एनएसए स्तर पर बातचीत करना तय हुआ।
हुर्रियत राग से भारत खफा
    पाकिस्तान ने एक सुनियोजित रणनीति के तहत वार्ता से पीछे हटने के लिए हुर्रियत कांफ्रेंस के नेताओं को अजीज से मुलाकात की खातिर दिल्ली आमंत्रित किया। इस वजह से भारत पिछले साल भी पाकिस्तान के साथ विदेश सचिव स्तरीय वार्ता रद कर चुका था। इस बार भी पाक द्वारा हुर्रियत को महत्व दिए जाने से भारत खफा हो गया। सुषमा ने साफ कर दिया कि पाकिस्तान यदि हुर्रियत नेताओं से मिलने और कश्मीर मुद्दे को उठाने की जिद पर कायम रहता है, तो कोई बातचीत नहीं होगी। उन्होंने अल्टीमेटम देते हुए कहा कि फैसला पाकिस्तान को करना है। उसके पास केवल आज रात का समय है।
पीछे क्यों हटा पाक
    सरताज अजीज ने मीडिया के सामने बलूचिस्तान व पाकिस्तान के अन्य हिस्से की आतंकी घटनाओं में रॉ के शामिल होने का डोजियर दिखाया था। सुषमा ने इसका करारा जबाव देते हुए कहा कि उनके पास सिर्फ डोजियर है। हमारे पास तो जिंदा आतंकी नावेद है। पाकिस्तान के डोजियर को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि इसे मीडिया के सामने लहराया नहीं जाता है। यदि अजीज भारत आते तो नावेद को लेकर जवाब देना उनके लिए मुश्किल हो जाता।
   'भारत ने वार्ता के लिए कोई पूर्व शर्त नहीं रखी थी। हमने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान को शिमला समझौते और उफा में बनी सहमति का सम्मान करना चाहिए।' -विकास स्वरूप, रात 11 बजे 'आप आना चाहते हैं। हम बुलाना चाहते हैं। सरताज अजीज साहब तीसरे को पक्षकार मत बनाइए। आतंकवाद से आगे का दायरा नहीं बढ़ाइए। आपका स्वागत है। आप आइए।' -सुषमा स्वराज, दोपहर बाद चार बजे
   'भारत के साथ आतंकवाद सहित सभी जरूरी मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। यह कौन नहीं जानता कि कश्मीर जरूरी मुद्दों में शामिल है। इसके बिना कोई भी बातचीत संभव नहीं है।' -सरताज अजीज, दोपहर डेढ़ बजे



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सरकारी खर्च पर मौज करते है अलगाववादी


     कश्मीर के अलगावादी नेताओं की पाकिस्तानी अधिकारियों से सरकारी खर्च पर मुलाकात होती रही है। हुर्रियत समेत तमाम अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा के अलावा होटल बिल का भी भुगतान जम्मू कश्मीर सरकार करती है।
    इस बार भी अलगाववादी नेताओं की पाकिस्तान के सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीत से मुलाकात होती है तो बिल का भुगतान सरकारी खाते में ही जाएगा।
   कश्मीर में अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा पर सालाना औसतन ११२ करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इसमें उनकी दिल्ली यात्रा भी शामिल रही है।
गृहमंत्रालय को भेजा विवरण
   जम्मू कश्मीर सरकार द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी पहले इस बाबत विवरण भेजा गया है। अलगाववादी नेताओं के होटल बिल पर पांच साल में २१ करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
    इस तरह सालाना औसतन चार करोड़ रुपये अलगाववादी नेताओं के होटल बिल पर खर्च होते हैं। इसमें से कुछ उन होटल कमरों का किराया भी शामिल है जो कश्मीर घाटी में अलगावादी नेताओं के नाम स्थाई रूप से आरक्षित कराए गए हैं।
    पाकिस्तान उच्चायोग के बुलावे पर दिल्ली आने पर होटल बिल भी इस खर्च में शामिल हो जाता है। जम्मू कश्मीर सरकार के दस्तावेज कहते हैं कि पांच साल में अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा पर ५६० करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
५०० निजी अंगरक्षक और १००० सुरक्षा गार्ड तैनात
   जम्मू कश्मीर सरकार इस संबंध में अलगाववादी नेताओं के नाम सहित उनपर हो रहे खर्च का ब्योरा उपलब्ध कराने से परहेज करती रही है।
    सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस सबंध में जम्मू कश्मीर विधानसभा को भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा में निजी अंगरक्षक के रूप में लगभग ५०० और उनके आवासों पर सुरक्षा गार्ड के रूप में लगभग १००० जवान तैनात हैं।
    केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जम्मू सरकार को विशेष सुरक्षा संबंधी खर्चों के लिए पांच साल में ७२०७ करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं।
गैर राजनीतिक लोगों को विशेष सुरक्षा
   पिछले वित्तीय वर्ष में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मद में २८७ करोड़ दिए थे। इस मद की राशि का भी उपयोग अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा पर खर्च होती रही है।
   जम्मू कश्मीर के २२ जिलों में ६६९ राजनीतिक और गैर राजनीतिक लोगों को विशेष सुरक्षा दी गई है। इनमें से २९४ गैर सूचीकृत लोग हैं।
   सूत्रों के मुताबिक इस गैर सूचीकृक व्यक्तियों में अलगावादियों को शामिल किया गया है। सुरक्षा प्राप्त ४८१ लोगों को पांच साल में ७०८ वाहन उपलब्ध कराए गए हैं ।
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चपरासी के 34 पदों के लिए 75 हजार आवेदन, घबराकर की परीक्षा स्थगित.....

    रायपुर।। प्रदेश में बेरोजगारी का आंकड़ा देखकर आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग इतना घबराया कि परीक्षा स्थगित करनी पड़ गई। दरअसल, चपरासी के 34 पदों के लिए विभाग ने आवेदन मंगाए थे। इसके लिए इंजीनियरिंग और एमएससी जैसे उच्च शिक्षित 75 हजार बेरोजगार टूट पड़े। आखिरकार परीक्षा स्थगित करनी पड़ी। फिलहाल नई तिथि घोषित नहीं की गई है। आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय द्वारा पहली दफा चपरासी के 34 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। ग्रुप डी का पद होने के कारण विभाग की ओर से सीधी भर्ती की जा रही है। इसके लिए 30 अगस्त को परीक्षा होनी थी। संचालनालय के अफसरों को उम्मीद भी नहीं थी कि चपरासी के 34 पदों के लिए कुछ सौ या हजार से ज्यादा आवेदन आएंगे। जब आवेदन आने शुरू हुए तो अधिकारी-कर्मचारियों को पसीना छूटना शुरू हुआ। अंतिम तिथि तक चपरासी बनने के लिए 75 हजार बेरोजगार युवकों ने आवेदन किया है। इस आंकड़े को देखकर अफसर इसलिए भी परेशान हो गए, क्योंकि इतनी संख्या में परीक्षा में बैठाने के लिए उन्होंने व्यवस्था भी नहीं की थी। ऐसी स्थिति में बेरोजगार अभ्यर्थियों को रायपुर बुलाने पर बड़ा बवाल मच सकता था और लॉ एंड आर्डर बिगड़ने की स्थिति आती। इस वजह से संचालनालय ने परीक्षा स्थगित करने में ही अपनी भलाई समझी।
     34 पदों के लिए 75 हजार आवेदन आने की उम्मीद नहीं थी। इतनी संख्या में आवेदकों के लिए व्यवस्था भी नहीं थी। इस वजह से परीक्षा स्थगित कर दी गई है। इसकी अगली तिथि जल्द ही घोषित की जाएगी।
- अमिताभ पण्डा,
    अब परीक्षा की अगली तारीख क्या होगी, यह तय करने में भी अधिकारी परेशान हो रहे हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि 75 हजार के बैठने की व्यवस्था करना आसान नहीं होगा। पहले ही स्क्रूटनी करने के संबंध में भी विचार किया जा रहा है, जिससे भीड़ थोड़ी कम हो।


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जेल में घुसते ही बीमार हो गए भाजपा विधायक

    ग्वालियर।। न्यायालय से भगोड़ा घोषित होने के बाद समर्पण करने वाले टीकमगढ़ के भाजपा विधायक केके श्रीवास्तव की जेल में घुसते ही तबीयत खराब हो गई और उन्हें ग्वालियर रिफर कर दिया गया। सूत्रों का आरोप है कि यह सबकुछ फिक्सिंग के तहत हो रहा है। इस तरह विधायक महोदय अस्पताल में आराम करेंगे और रिकार्ड में जेल दिखाई देगी।
जानिए, पूरा मामला
    दरसअल, 20 अगस्त 2014 को विधायक सहित उनके पांच साथियों ने जनपद कार्यालय पहुंचकर सीईओ उदयराज सिंह से मारपीट की थी। इसके बाद उनका अपहरण कर लिया था. मामला दर्ज होने के बाद से विधायक श्रीवास्तव फरार चल रहे थे। जिनकी राजनैतिक रसूख के चलते गिरफ्तारी नही हो पाई थी।
    फरियादी सीईओ की सुनवाई पर कोर्ट ने विधायक के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था, लेकिन पुलिस गिरफ्तार करने में नाकाम रही। शहर के कोतवाली टीआई एमएम शर्मा ने वारंट कोर्ट को वापस कर दिया था। जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया था।
    जिसके बाद बचने के लिए फरार विधायक श्रीवास्तव ने सीजेएम कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। फरारी के दौरान ही विधायक के वकील ने हाईकोर्ट के समक्ष भी अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई, लेकिन वहां भी जस्‍टिस जीएस सोलंकी की सिंगल बेंच के समक्ष सुनवाई हुई। जिसमें सीईओ की तरफ से वकील मनीष तिवारी ने अग्रिम जमानत अर्जी का विरोध किया था।
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डिलीवरी के दौरान पेट में ही दो भागो में बट गया नवजात

परिजनों ने डाक्टरो और नर्स पर लगाया लापरवाही का आरोप
      शाहजहाँपुर।। जिला अस्पताल में डाक्टर की लापरवाही से एक नवजात बच्चे की पेट में ही मौत हो गई। डिलीवरी के दौरान बच्चे का सिर बाहर आ गया, लेकिन धड अन्दर ही रह गया। जानकारी होने पर परिजनों ने जिला अस्पताल में जमकर हंगामा काटा। महिला की हालत बिगड़ने पर परिजन उसे प्राइवेट नर्सिंग होम ले गए जहाँ आपरेशन के बाद नवजात के धड को पेट से बाहर निकाला जा सका। पति ने नर्स व डाक्टर के खिलाफ कोतवाली में तहरीर दी है।
     थाना सदर बाजार अंतर्गत मोहल्ला दिलाजक निवासी हेमन्त कुमार की पत्नी गीता देवी को आज प्रसव पीड़ा होने पर उसे परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। हेमन्त ने बताया कि स्टाफ ने पहले उनकी पत्नी को भर्ती करने से इंकार कर दिया फिर 10 हजार रूपये की डिमांड की, जिसको लेकर उसकी कहासुनी हो गई। वहां मौजूद अन्य लोगो ने बमुश्किल से उन्हें शांत करवाया। तब जाकर गीता देवी को भर्ती किया गया। डिलीवरी के दौरान बच्चे का सिर बाहर निकल आया जबकि धड अन्दर ही रह गया। स्टाफ द्वारा परिजनों को जब यह बता बताई गई तो वह लोग आग बबूला हो उठे। उन्होंने लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। महिला के पेट में बच्चे का धड रह जाने से उसकी हालत बिगड़ने लगी। परिजन उसे लेकर शहर के एक प्राइवेट नर्सिंग होम पहुंचे जहाँ डाक्टर ने आपरेशन के बाद धड को निकाल कर महिला की जान बचा ली। हेमन्त कुमार ने जिला महिला अस्पताल स्टाफ के खिलाड़ कोतवाली में लापरवाही का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है।
1:35 PM | 0 comments | Read More

सोनोग्राफी मशीन में जीपीएस सिस्टम लगाना हुआ अनिवार्य

सोनोग्राफी करने वाले चिकित्सक स्वयं हस्ताक्षर करेंगे
   बांसवाड़ा।। माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ में विचाराधीन प्रकरण में अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के क्रम में दिनांक 15 अप्रेल 2015 को पारित आदेश में कोई भी सोनोग्राफी मशीन दिनांक 15 जुलाई 2015 के पश्चात् बिना जीपीएस सिस्टम के क्रय, विक्रय नहीं की जा सकेंगी।
    पीसीपीएनडीटी के जिला नोडल अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि सभी मशीनों में जीपीएस सिस्टम लगाना अनिवार्य किया गया है। प्रदेश में कहीं भी बिना जीपीएस सिस्टम के लगी मशीन प्राप्त होने पर संबंधित कंपंनी के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। विभाग के द्वारा बांसवाड़ा जिले में स्थापित समस्त पंजीकृत संस्थानों एवं सोनोग्राफी मशीन विक्रेता को सोनोग्राफी मशीन में जीपीएस सिस्टम लगे हुए ही मशीन को क्रय एवं विक्रय करने के निर्देश प्रदान किए गए है। बिना जीपीएस मशीन लगी सोनोग्राफी मशीन प्राप्त होने पर संस्थान का लाईसेन्स भी रद्द किया जा सकता है। सोनोग्राफी मशीनों में जीपीएस सिस्टम लगा होने से उनको टे्रक किया जाना आसान रहेगा एवं सोनोग्राफी मशीन की वास्तविक लोकेशन का पता लग सकेगा। यदि किसी सोनोग्राफी मशीन को रजिस्र्टड स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता है, तो तुरंत उसकी लोकेशन विभाग को प्राप्त हो सकती है एवं संस्थान मालिक के विरुद्ध कार्यवाही की जा सकती है। प्रत्येक सोनोग्राफी मशीन को खरीदने व बेचने वाली मशीनों की रिपोर्ट भी समुचित प्राधिकारी को प्रस्तुत करनी आवश्यक है।
    उन्होंने बताया कि साथ ही माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों की अनुपालना में सोनोग्राफी केन्द्र पर सोनोग्राफी करने पर दी जाने वाली सोनोग्राफी रिपोर्ट के साथ ही विभाग के द्वारा जारी सोनोग्राफी केन्द्र के पंजीकरण प्रमाण पत्र की छाया प्रति भी संलग्न कर देनी होगी। सोनोग्राफी रिपोर्ट पर सोनोग्राफी करने वाले चिकित्सक स्वयं हस्ताक्षर करेंगे तथा रिपोर्ट पर डिजिटल हस्ताक्षर मान्य नहीं होंगे। उक्त प्रकरण में पारित निर्णय की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सा विभाग के विशिष्ट 7ाासन सचिव एवं राज्य समुचित प्राधिकारी द्वारा परिपत्र जारी किया गया है। परिपत्र में इस बाबत् राज्य के सभी सोनोग्राफी संस्थानों को इस आदेश की पालना करने हेतु निर्देश जारी किए गए है। माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के उक्त आदेश की पालना नहीं करने वाले सोनोग्राफी केन्द्रों के विरुद्ध कार्यवाही करने हेतु कहा गया है।
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दुनिया की टॉप-500 यूनिवर्सिटीज की रैंकिंग में सिर्फ एक भारतीय यूनिवर्सिटीज

Written By News Today Time on Saturday, August 22, 2015 | 6:58 PM

    लंदन।। भारत की एकमात्र यूनिवर्सिटी ने दुनिया की टॉप-500 यूनिवर्सिटीज की रैंकिंग में जगह बना पाई है। इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ सायेंस (IISc), बेंगलुरु ने इस लिस्ट में 301-400 के बीच है। खास बात यह है कि 2003-2004 में भी इस रैंकिंग में जगह बनाने वाली भारत की एकमात्र यूनिवर्सिटी IISc ही थी लेकिन तब उसकी रैंक 200 के आसपास थी, जिसमें इस बार जोरदार गिरावट आई है। शंघाई की जियाओ तोन यूनिवर्सिटी द्वारा 2015 ऐकडैमिक रैंकिंग ऑफ वर्ल्ड यूनिवर्सिटीज (ARWU) ने यह जानकारी दी है।
    टॉप-10 की लिस्ट में अकेले आठ यूनिवर्सिटीज अमेरीका की हैं जबकि दो यूके की हैं। टॉप-100 में 51 संस्थान अमेरिका के हैं। लगातार 13वें साल हार्वर्ड यूनिवर्सिटी टॉप पर है, जबकि टॉप-10 की अन्य यूनिवर्सिटीज में स्टैनफर्ड, एमआईटी, ब्रिकली, कैम्ब्रिज, प्रिंसटन, कैलटेक, कोलंबिया, शिकागो और ऑक्सफर्ड हैं।
   यूरोपीय यूनिवर्सिटीज में स्विट्जरलैंड के ईटीएच ज्यूरिख (20वां स्थान) को यूरोप में पहला स्थान, यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन (35वां स्थान), डेनमार्क ने फ्रांस की पियरे ऐंड मैरी क्यूरी (36वां स्थान) को पछाड़कर यूरोप में दूसरा स्थान हासिल किया है।
    यूनिवर्सिटी ऑफ तोक्यो (21वां स्थान) और क्योतो यूनिवर्सिटी (26वां स्थान) ने एशिया में अपनी टॉप पोजिशन बरकरार रखी है। ओसेनिया में यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न (44वां स्थान) टॉप पर है।
    यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ वॉरविक (92वां स्थान) ने पहली बार टॉप-100 की लिस्ट में जगह बनाई है। 2015 में टॉप-500 की लिस्ट में 11 यूनिवर्सिटीज ने जगह बनाई, जिनमें से ऑस्ट्रेलिया की क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलजी और ईरान की शैरिफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलजी ने इस लिस्ट में पहली बार जगह बनाई है।
    ARWU द्वारा हर साल 1200 यूनिवर्सिटीज को रैंकिंग दी जाती है जिनमें से बेस्ट 500 यूनिवर्सिटीज की लिस्ट प्रकाशित की जाती है। दुनिया की यूनिवर्सिटीज की रैंकिग करते समय ARWU जिन महत्वपूर्ण पैरामीटर्स को ध्यान में रखता है उनमें एलुमिनी और नोबेल प्राइज और फील्ड मेडल्स जीतने वाले स्टाफ की संख्या, थॉमसन रॉयटर्स द्वारा चुने गए उच्चस्तरीय रिसर्चर्स, नेचर ऐंड सायेंस जर्नल्स में प्रकाशित हुए आर्टिकल्स की संख्या और एक यूनिवर्सिटी के प्रति व्यक्ति प्रदर्शन शामिल हैं। भारत इन सभी मापदंडों में बुरी तरह फेल रहा।
   रिपोर्ट में कहा गया है, ‘भारत एशिया का सोया हुए शेर है। यूनिवर्सिटी सेक्टर में रिसर्च पिछले दो दशक से स्थिर रहा है, जिसमें अब तेजी आ रही है, लेकिन इसे एशिया नॉलेज हब बनने में अभी लंबा वक्त लगेगा। दुनिया भर की कुल 800 यूनिवर्सिटीज ने इसमें ऐनालिसिस के लिए अपना डेटा भेजा था जिनमें से 20 भारत की थीं लेकिन दुनिया की टॉप-100 यूनिवर्सिटीज में एक भी भारतीय यूनिवर्सिटी जगह नहीं बना पाई ।
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मोदी से मुलाकात के बाद बलवंत ने पहनी चप्पल

    जयपुर।। राजस्थान भीलवाड़ा के बलवंत कुमावत ने शुक्रवार को यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद चप्पल पहन ली।
    बलवंत ने प्रतिज्ञा की थी कि जब तक मोदी प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे तब तक वह चप्पल नहीं पहनेंगे। शुक्रवार को पीएम मोदी ने बलवंत से मुलाकात कर उन्हें बधाई दी और उनसे खुद चप्पल पहनने की अपील की।
   साथ ही बलवंत को देश हित में कार्य करने की सलाह दी। यह भी कहा कि वह ऐसी प्रतिज्ञा न करे, जिससे शारीरिक कष्ट हो।
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खाकी देखकर चुप हुआ महिला को गंदी गालियां देने वाला तोता

    पुणे।। अपनी तरह के एक अनोखे मामले में एक वृद्धा ने अपने सौतेले बेटे के तोते पर गाली देने का आरोप लगाया। वृद्धा के आरोप पर अपने मालिक के साथ पुलिस के सामने पेश हुए तोते ने चुप्पी साध ली। वृद्धा की परेशानी को देखते हुए पुलिस ने तोते को वन विभाग के अधिकारियों को सौंप दिया।
    महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के राजुरा पुलिस थाने में एक वृद्ध महिला जनाबाई सखरकर ने शिकायत दर्ज कराई कि उसके सौतेले बेटे सुरेश ने अपने तोते को उसे देखते ही गाली देने के लिए सिखाया है। महिला का कहना है कि जब भी वह उसके पास से गुजरती हैं, तोता उसे अपशब्द बोलने लगता है।
    उनकी शिकायत पर पुलिस ने जनाबाई की उपस्थिति में सुरेश और उसके तोते 'हरियल' को थाने में बुलाया। तोता शायद खाकी वर्दी को देखकर सजग था इसलिए उसने पुलिस थाने में महिला के पास जाने पर कुछ भी नहीं बोला।
   पुलिस इंस्पेक्टर पीएस डोंगरे ने बताया कि महिला और उनके सौतेले बेटे के बीच भूमि को लेकर विवाद चल रहा है। हमने तोते पर ध्यान दिया, लेकिन उसने एक भी शब्द नहीं बोला।
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OMG: खाप पंचायत ने गैंगरेप करने और नंगा करके घुमाने का सुनाया फरमान

   बुलंदशहर।। एक तुगलकी फरमान खाप की ओर से आया है, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे। यूपी के बागपत जिले की खाप पंचायत ने एक लड़के को जाट की लड़की से प्रेम करने और उसे घर से भगाकर ले जाने की सजा उसके घरवालों को सुनाई है। खाप पंचायत ने फरमान जारी कर कहा कि लड़के की दो बहनों के साथ बलात्कार कर उन्हें निर्वस्त्र घुमाया जाए। इस फैसले के बाद से लड़के का परिवार दहशत में है।
    इस फैसले के बाद खौफ में बागपत का यह परिवार घर छोड़कर इधर-उधर भटकने को मजबूर है। इस बीच लड़के की बहन ने सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा की गुहार लगाई है जिसके बाद कोर्ट ने यूपी सरकार और पुलिस महानिदेशक, बागपत के एसपी तथा दिल्ली पुलिस समेत अन्य को नोटिस जारी किया है।
क्या है पूरा मामला
    पीड़ित परिवार जाटव (अनुसूचित जाति) समुदाय से है। लड़की के भाई को जाट समुदाय की एक लड़की से प्यार हो गया। संबंध सार्वजनिक होने पर लड़की के परिवार वालों ने गत 10 फरवरी को हरियाणा में उसकी शादी कर दी। लेकिन वह 22 अप्रैल को ससुराल छोड़कर मायके आ गई और अपने प्रेमी के साथ भाग गई। हालांकि लड़की के परिवार वालों के दबाव में प्रेमी युगल ने दो मई को दिल्ली के महरौली थाने में समर्पण कर दिया।
   इसके बाद खाप ने पंचायत ने लड़के के परिवार वालों को सजा सुनते हुए उसकी बहनों के साथ गैंगरेप कर गांव में नंगा घुमाने का फरमान सुनाया है। बस यहीं से लड़के के परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा।
   क्या आजाद भारत की यही तस्वीर है ? जहां खाप जैसी पंचायतें आए दिन बेतुका फरमान जारी करती रहती हैं।

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ललितगेट : RSS ने गोविंदाचार्य के बयान से खुद को अलग किया

    नई दिल्ली।। ललितगेट मुद्दे को लेकर गोविंदाचार्य की ओर से नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना किए जाने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कहा है कि गोविंदाचार्य ने जो कुछ कहा, वे उनके निजी विचार हैं। संघ ने यह भी कहा कि वह सार्वजनिक तौर पर अपने विचार व्यक्त नहीं करता और उसने किसी को भी विचारक नियुक्त नहीं कर रखा है।
    आरएसएस के संयुक्त महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने कहा, गोविंदाचार्य की ओर से जो कुछ भी कहा गया है वो उनकी निजी राय है और वह ऐसा करने का अधिकार रखते हैं। ये विचार आरएसएस के नहीं हैं।
    उन्होंने कहा कि देश में हजारों स्वयंसेवक हैं और हर किसी को अपनी खुद की राय रखने का अधिकार है, लेकिन वो राय संघ की नहीं होगी। संघ के भीतर कोई पद नहीं रखने वाले लोग संगठन का विचार व्यक्त नहीं कर सकते।
    उल्लेखनीय है कि गोविंदाचार्य ने एनडीटीवी इंडिया से खास बातचीत में कहा था कि ललित मोदी कांड में केंद्र सरकार को नैतिकता से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए और आरोपी मंत्रियों को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।
    गोविंदाचार्य ने कहा कि ललित मोदी कांड में फंसे मंत्रियों को बचाने की कोशिश जनता में सरकार के इक़बाल को कम कर रही है। ललित मोदी कांड में गोविंदाचार्य ने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर चुटकी लेते हुए कहा था कि लगता है कि वो (प्रधानमंत्री) चुप रहना सीख रहे हैं। (


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वो डोजियर देंगे, हम जिंदा इंसान देंगे'

    नई दिल्ली।। भारत पाकिस्तान के बीच दिल्ली में होने वाली वार्ता को लेकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने प्रेस कॉफ्रेंस की। उन्होंने कहा कि भारत-पाक की बीच हर बातचीत वार्ता नहीं है। सुषमा ने कहा कि अगर पाकिस्तान नहीं मानता है तो बात नहीं होगी। उन्होंने कहा कि पाक के पास आज रात तक का वक्त है।
    सुषमा स्वराज ने कहा कि अटल जी के समय शुरू हुई थी वार्ता। हर वार्ता का एक संदर्भ होता है। 8 मुद्दों पर शुरू हुई थी वार्ता। सुषमा ने साफ कर दिया कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर विदेश सचिव ही करेंगे बातचीत। प्रेस कॉफ्रेंस में विदेश मंत्री द्वारा कही गईं मुख्य बातें-
उन्होंने कहा कि आगरा वार्ता पर पाक ने ही डाला था अड़ंगा।
आतंक और बातचीत एक साथ नहीं हो सकती।
उफा में कंपोजिट डॉयलाग की बहाली नहीं हुई।
    आतंकवाद, सीमा विवाद पर अलग-अलग बातचीत की सहमति बनी थी। उफा के बाद नवाज शरीफ की आलोचना हुई थी। सुषमा ने कहा कि 'वो डोजियर देंगे हम जिंदा इंसान देंगे'।
    एनएसए से सिर्फ आतंकवाद पर बातचीत की सहमति हुई थी। बातचीत के न्यौते पर 22 दिन बाद जवाब मिला। सीजफायर पर डीजीएमओ स्तर की बातचीत होनी थी । इसका जवाब आजतक नहीं मिला। एनएसए स्तर की बातचीत के लिए 14 अगस्त को जवाब मिला। उफा के बाद 91 बार सीजफायर का उल्लंघन हुआ। हमारे ऊपर बातचीत रद्द करने का दबाव था।
   भारत भाग नहीं रहा है। बातचीत का माहौल बन रहा है। आतंकवाद के अलावा किसी और मुद्दे पर बात नहीं। बातचीत पर तीसरा पक्ष स्वीकार नहीं। शिमला समझौते के तहत ही बातचीत होगी।
    हमारी कोई शर्त नहीं है। तीसरे मुल्क में बातचीत नहीं होगी। वो आना चाहते हैं। हम बुलाना चाहते हैं। आतंकवाद के अलावा किसी और मुद्दे पर बात नहीं होगी।
   सुषमा ने कहा कि उफा में कश्मीर का कई जिक्र नहीं था। पाकिस्तान को शिमला समझौते ख्याल रखना चाहिए। डोजियर एक गंभीर विषय होता है। डोजियर का लेना देना चलते चलते नहीं होता है। हमारे पास जिंदा सबूत नावेद है।
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मैं अयोध्या हूं…...मैं होता तो अयोध्या इस क़दर सिसकती ना रहती

मैं अयोध्या हूं…...राजा राम की राजधानी अयोध्या…।
य     हीं राम के पिता दशरथ ने राज किया…यहीं पर सीता जी राजा जनक के घर से विदा होकर आईं। यहीं श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ। यहीं बहती है सरयू, लेकिन अब नदी की मस्ती भी कुछ बदल-सी गई है। कहां तो कल तक वो कल-कल कर बहती थी और आज, जैसे धारा भी सहमी-सहमी है…धीरे-धीरे बहती है। पता नहीं, किस कदर सरयू प्रदूषित हो गई है…कुछ तो कूड़े-कचरे से और उससे भी कहीं ज्यादा सियासत की गंदगी से। सच कहती हूं…आज से तेईस साल पहले मेरा, अयोध्या का कुछ लोगों ने दिल छलनी कर दिया…वो मेरी मिट्टी में अपने-अपने हिस्से का खुदा तलाश करने आए थे…।
ऐसा पहली बार नहीं हुआ…
     सैकड़ों साल से मज़हबों के नाम पर कभी हिंदुओं के नेता आते हैं, तो कभी मुसलमानों के अगुआ आ धमकते हैं…वो ज़ोश से भरी तक़रीरे देते हैं…अपने-अपने लोगों को भड़काते हैं और फिर सब मिलकर मेरे सीने पर घाव बना जाते हैं…। कभी हर-हर महादेव की गूंज होती है, तो कभी अल्ला-हो-अकबर की आवाज़ें आती हैं….
    लेकिन ये आवाज़ें, नारा-ए-तकबीर जैसे नारे अपने ईश्वर को याद करने के लिए लगाए जाते हैं…? पता नहीं…ये तो ऊंची-ऊंची आवाज़ों में भगवान को याद करने वाले जानें, लेकिन मैंने, अयोध्या ने तो देखा है…अक्सर भगवान का नाम पुकारते हुए आए लोगों ने खून की होलियां खेली हैं…और हमारे घरों से मोहब्बत लूट ले गए हैं। जिन गलियों में रामधुन होती थी…जहां ईद की सेवइयां खाने हर घर से लोग जमा होते थे…वहां अब सन्नाटा पसरा रहता है…वहां नफ़रतों का कारोबार होता है।
    किसी को मंदिर मिला, किसी को मसज़िद मिली…हमारे पास थी मोहब्बत की दौलत, घर को लौटे, तो तिज़ोरी खाली मिली। छह दिसंबर, 1992 को अयोध्या में जो कुछ हुआ…हो गया पर वो सारा मंज़र अब तक याद आता है…और जब याद आता है, तो थर्रा देता है। धर्म के नाम पर जो लोग लड़े-भिड़े, उनकी छातियां चौड़ी हो जाती हैं…कोई शौर्य दिवस मनाता है, कोई कलंक दिवस, लेकिन अयोध्या के आम लोगों से पूछो–वो क्या मनाते हैं, क्या सोचते हैं। बाकी मुल्क के बाशिंदे क्या जानते हैं…क्या चाहते हैं? वो तो आज से सत्रह साल पहले का छह दिसंबर याद भी नहीं करना चाहते, जब एक विवादित ढांचे को कुछ लोगों ने धराशायी कर दिया था। हिंदुओं का विश्वास है कि विवादित स्थल पर रामलला का मंदिर था। वहां पर बनेगा तो राम का मंदिर ही बनेगा…। मुसलिमों को यकीन है कि वहां मसज़िद थी।
     जिन्हें दंगे करने थे, उन्होंने घर जलाए, जिन्हें लूटना था, वो सड़कों पर हथियार लेकर दौड़े चले आए। नफरतों का कारोबार उन्होंने किया…और बदनाम हो गई अयोध्या…मैंने क्या बिगाड़ा था किसी का?
    मेरी गलियों में ही बौद्ध और जैन पंथ फला-फूला। पांच जैन तीर्थंकर यहां जन्मे। इनके मंदिर भी तो बने हैं यहां. वो लोग भला क्यों नहीं झगड़ते। नहीं…मैं ये नहीं चाहती कि वो भी अपने मज़हब के नाम पर लड़ाइयां लड़ें, लेकिन मंदिर और मसजिद के नाम पर तो कितनी बड़ी लड़ाई छिड़ गई है।
    आज, इस पहर, जैसे फिर वो मंज़र आंख के सामने उभर आया है…एक मां के सीने में दबे जख्म हरे हो गए हैं, कल फिर सारे मुल्क में लोग अयोध्या का नाम लेंगे…कहेंगे, इसी जगह मज़हब के नाम पर नफ़रत का तमाशा देखने को मिला था।
     हमारे नेता तरह-तरह के बयान देते हैं। मुझे कभी हंसी आती है, तो कई बार मन करता है–अपना ही सिर धुन लूं। एक नेता कहती हैं—विवादित स्थल पर कभी मस्जिद नहीं थी, इसीलिए हम चाहते हैं कि वहां भव्य मंदिर बने। वो इसे जनता के आक्रोश का नाम देती हैं। उमा भारती ने साफ़ कहा है कि वो ढांचा गिराने को लेकर माफ़ी नहीं मांगेंगी, चाहे उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया जाए।
    सियासतदानों की ज़ुबान के क्या मायने हैं, वही जानें–वही समझें, ना अयोध्या समझ पाती है, ना उसके मासूम बच्चे। राम के मंदिर के सामने टोकरियों में फूल बेचते मुसलमानों के बच्चे नहीं जानते कि दशरथ के बेटे का मज़हब क्या था, ना ही सेवइयों का कारोबार करने वाले हिंदू हलवाइयों को मतलब होता है इस बात से कि बाबर के वशंजों से उन्हें कौन-सा रिश्ता रखना है और कौन-सा नहीं। वो तो बस एक ही संबंध जानते      हैं—मोहब्बत का!
खुदा ही इंसाफ़ करेगा उन सियासतदानों का, जो मेरे घर, मेरे आंगन में नफ़रत की फसल बोकर चले गए? मैं देखती हूं…मेरी बहनें–दिल्ली, पटना, काशी, लखनऊ…सबकी छाती ज़ख्मी है।
एक नेता कहती हैं—जैसे 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिखों के ख़िलाफ़ नफ़रत फैली थी और कत्ल-ए-आम हुए थे, वैसे ही तो छह दिसंबर, 1992 को विवादित ढांचा गिरा दिया ….अयोध्या में मौजूद कुछ लोग जनविस्फोट को कैसे रोक पाते?
वो बताएं….सड़कों पर निकले हुए लोग एक-दूसरे को देखकर गले लगाने को क्यों नहीं मचल पड़ते। क्यों नहीं उनके मन में आता–सामने वाले को जादू की झप्पी देनी है। क्या नफ़रतों के सैलाब ही उमड़ते हैं? बसपा की नेता, उप्र की मुख्यमंत्री मायावती कांग्रेस को दोष देती हैं…कांग्रेस वाले बीजेपी पर आरोप मढ़ते हैं। बाला साहब ठाकरे कहते हैं…1992 में हिंदुत्ववादी ताकतें एक झंडे के तले नहीं आईं…नहीं तो मैं भी अयोध्या आता।
मुझ पर, अयोध्या पे शायद ही इतने पन्ने किसी ने रंगे हों, लेकिन हाय री मेरी किस्मत…मेरी मिट्टी पर छह दिसंबर, 1992 को जो खून बरसा, उसके छींटों की स्याही से हज़ारों ख़बरें बुन दी गईं। किसने घर जलाया, किसके हाथ में आग थी…मुझको नहीं पता। हां! एक बात ज़रूर पता है…मेरे जेहन में है…खयाल में है…विवादित ढांचे की ज़मीन पर कब्जे को लेकर सालों से पांच मुक़दमे चल रहे हैं…।
     पहला मुक़दमा तो 52 साल भी ज्यादा समय से लड़ा जा रहा है, यानी तब से, जब जंग-ए-आज़ादी के जुनून में पूरा मुल्क मतवाला हुआ था। अफ़सोस…मज़हब का जुनून भी देशप्रेम पर भारी पड़ गया। मुझे पता चला है कि कई मामले 6 दिसम्बर 1992 को विवादित ढांचा गिराए जाने से जुड़े हैं। क्या कहूं…या कुछ ना कहूं…चुप रहूं, तो भी कैसे? मां हूं…मुझसे अपनी ऐसी बेइज़्ज़ती देखी नहीं जाती। कहते हैं—23 दिसंबर 1949 को विवादित ढांचे का दरवाज़ा खोलने पर वहां रामलला की मूर्ति रखी मिली थी। मुसलिमों ने आरोप लगाया था–रात में किसी ने चुपचाप ये मूर्ति वहां रख दी थीं।
     किसे सच कहूं और किसे झूठा बता दूं…दोनों तेरे लाल हैं, चाहे हिंदू हों या फिर मुसलमान…मैं बस इतना जानना चाहती हूं कि नफ़रत की ज़मीन पर बने घर में किसका ख़ुदा रहने के लिए आएगा?
     23 दिसंबर, 1949 को ढांचे के सामने हज़ारों लोग इकट्ठा हो गए. यहां के डीएम ने यहां ताला लगा दिया। मैंने सोचा—कुछ दिन में हालात काबू में आ जाएंगे…लेकिन वो आग जो भड़की, वो फिर शांत नहीं हुई। अब तक सुलगती जा रही है और मेरे सीने में कितने ही छाले बनाती जा रही है…। 16 जनवरी, 1950 को गोपाल सिंह विशारद, दिगंबर अखाड़ा के महंत और राम जन्मभूमि न्यास के तत्कालीन अध्यक्ष परमहंस रामचंद्र दास ने अर्ज़ी दी कि रामलला के दर्शन की इजाज़त मिले। अदालत ने उनकी बात मान ली और फिर यहां दर्शन-पूजा का सिलसिला शुरू हो गया। एक फ़रवरी, 1986 को यहां ताले खोल दिए गए और इबादत का सिलसिला ढांचे के अंदर ही शुरू हो गया।
     हे राम! क्या कहूं…अयोध्या ने कब सोचा था कि उसकी मिट्टी पर ऐसे-ऐसे कारनामे होंगे। 11 नवंबर, 1986 को विश्व हिंदू परिषद ने यहीं पास में ज़मीन पर गड्ढे खोदकर शिला पूजन किया। अब तक अलग-अलग चल रहे मुक़दमे एक ही जगह जोड़कर हाईकोर्ट में एकसाथ सुने जाएं। किसी और ने मांग की—विवादित ढांचे को मंदिर घोषित कर दिया जाए। 10 नवंबर 1989 को अयोध्या में मंदिर का शिलान्यास हुआ और 6 दिसंबर 1992 को वो सबकुछ हो गया…जो मैंने कभी नहीं सोचा था…। कुछ दीवानों ने वो ढांचा ही गिरा दिया…जिसे किसी ने मसज़िद का नाम दिया, तो किसी ने मंदिर बताया। मैं तो मां हूं…क्या कहूं…वो क्या है…। क्या इबादतगाहों के भी अलग-अलग नाम होते हैं? इन सत्रह सालों में क्या-क्या नहीं देखा…क्या-क्या नहीं सुना…क्या-क्या नहीं सहा मैंने। मैं अपनी भीगी आंखें लेकर बस सूनी राह निहार रही हूं…क्या कभी मुझे भी इंसाफ़ मिलेगा? क्या कभी मज़हब की लड़ाइयों से अलग एक मां को उसका सुकून लौटाने की कोशिश भी होगी?
    1993 में यूपी सरकार ने विवादित ढांचे के पास की 67 एकड़ ज़मीन एक संगठन को सौंप दी..। 1994 में सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला रद कर दिया। अदालत ने ध्यान तो दिया था मेरे दिल का…मेरे जज़्बात का…इंसाफ़ के पुजारियों ने साफ़ कहा था… मालिकाना हक का फ़ैसला होने से पहले इस ज़मीन के अविवादित हिस्सों को भी किसी एक समुदाय को सौंपना `धर्मनिरपेक्षता की भावना‘ के अनुकूल नहीं होगा। इसी बीच पता चला कि उत्तर प्रदेश सचिवालय से अयोध्या विवाद से जुड़ी 23 फा़इलें ग़ायब हो गईं। क्या-क्या बताऊं…! मज़हब को लेकर फैलाई जा रही नफ़रत मैं बरसों-बरस से झेल रही हूं। 1528 में यहां एक मसज़िद बनाई गई। 1853 में पहली बार यहां सांप्रदायिक दंगे हुए।
    1859 में अंग्रेजों ने बाड़ लगवा दी। मुसलिमों से कहा…वो अंदर इबादत करें और हिंदुओं को बाहरी हिस्से में पूजा करने को कहा। हाय रे…क्यों किए थे अंग्रेजों ने इस क़दर हिस्से? ये कैसा बंटवारा था…उन्होंने जो दीवार खींची…वो जैसे दिलों के बीच खिंच गई। 1984 में कहा गया–यहां राम जन्मे थे और इस जगह को मुक्त कराना है। हिंदुओं ने एक समिति बनाई और मुसलमानों ने इसके विरोध में बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति गठित कर डाली। 1989 में विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर निर्माण के लिए अभियान तेज़ कर दिया और विवादित स्थल के नज़दीक राम मंदिर की नींव डाल दी। 1990 में भी विवादित ढांचे के पास थोड़ी-बहुत तोड़फोड़ की गई थी। 1992 में छह दिसंबर का दिन…मेरे हमेशा के लिए ख़ामोशियों में डूब जाने का दिन…अपने-अपने ख़ुदा की तलाश में कुछ दीवानों ने मुझे शर्मसार कर दिया। विवादित ढांचे को गिरा दिया गया। अब कुछ लोग वहां मंदिर बनाना चाहते हैं…तो कुछ की तमन्ना है मसज़िद बने…। मैं तो चाहती हूं…कि मेरे घर में, मेरे आंगन में मोहब्बत लौट आए।
     बीते सालों में मैंने बहुत-से ज़ख्म खाए हैं…सारे मुल्क में 2000 लोगों की सांसें हमेशा के लिए बंद हो गईं…कितने ही घरों में खुशियों पर पहरा लग गया। ऐसा भी नहीं था कि दंगों और तोड़फोड़ के बाद भी ज़िंदगी अपनी रफ्तार पकड़ ले। 2001 में भी इसी दिन खूब तनाव बढ़ा…जनवरी 2002 में उस वक्त के पीएम ने अयोध्या समिति गठित की…पर हुआ क्या??? क्या कहूं…!!! मेरी बहन गोधरा ने भी तो वही घाव झेले हैं…फरवरी, 2002 में वहां कारसेवकों से भरी रेलगाड़ी में आग लगा दी गई। 58 लोग वहां मारे गए। किसने लगाई ये आग…। अरे! हलाक़ तो हुए मेरे ज़िगर के टुकड़े ही तो!! मां के बच्चों का मज़हब क्या होता है? बस…बच्चा होना!!
    अब तक तमाम सियासतदां मेरे साथ खिलवाड़ करते रहे हैं। फरवरी, 2002 में एक पार्टी ने यकायक अयोध्या मुद्दे से हाथ खींच लिया…। जैसे मैं उनके लिए किसी ख़िलौने की तरह थी। जब तक मन बहलाया, साथ रखा, नहीं चाहा, तो फेंक दिया। आंकड़ों की क्या बात कहूं…कितनी तस्वीरें याद करूं…जो कुछ याद आता है…दिल में और तक़लीफ़ ताज़ा कर देता है। क्या-क्या धोखा नहीं किया…किस-किस ने दग़ा नहीं दी।
     अभी-अभी लिब्राहन आयोग ने रिपोर्ट दी है..कुछ लोगों को दंगों का, ढांचा गिराने का ज़िम्मेदार बताया है…सुना है…उन्हें सज़ा देने की सिफ़ारिश नहीं की गई है। गुनाह किसने किया…सज़ा किसे मिलेगी…पता नहीं…पर ये अभागी अयोध्या…अब भी उस राम को तलाश कर रही है…जो उसे इंसाफ़ दिलाए।
    कोई कहता है—अगर मेरे खानदान का पीएम होता, तो ढांचा नहीं गिरता…कोई कहता है—अगर मैं नेता होती, तो मंदिर वहीं बनता…कहां है वो…जो कहे…

मैं होता तो अयोध्या इस क़दर सिसकती ना रहती…
मैं होती, तो मोहब्बत इस तरह रुसवा नहीं होती.......!!
चौपाल


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