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ट्रेन से कटे किशोर की शिनाख्त, पढ़ाई के बोझ से दी जान

Written By Bureau News on Tuesday, September 23, 2014 | 7:13 PM

  भदोही।। रविवार को टृेन से गिरकर घायल हुये किशोर की वाराणसी ले जाते समय मौत हो गयी। मृत किशारे जौनपुर जनपद के रामपुर थाना क्षेत्र के धनुहा गांव का बताया जा रहा है।
   बता दें कि रविवार की देर शाम 14 वर्षीय किशोर का दाहिना पैर टृेन से कट गया था उसके सिर में भी गहरी चोट आयी थी। टृेन दुर्घटना के घण्टों बाद तक किशोर वहीं छटपटाता रहा। घटना के काफी देर बाद पहंुची रेलवे पुलिस उसे उठाकर एमबीएस ले गयी। जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद वाराणसी रेफर कर दिया। वाराणसी ले जाते समय अधिक खून बह जाने से उसकी मौत हो गयी।
   जानकारी के अनुसार धनुहा गांव निवासी उक्त किशोर अभिषेक तिवारी पुत्र सतीश तिवारी उर्फ गुल्लर रामपुर के धनुहा स्थित एक हिन्दी मीडियम स्क्ूल में पढ़ता था। गत वर्ष उसका नाम अच्छी शिक्षा के लिये भदोही के एक अंग्रेजी माध्यम स्कूल में लिखा दिया। वह पढ़ने में थोड़ा कमजोर था जिसके कारण वह खुद को उपेक्षित महसूस करने के साथ परिवार वालो की बातें भी सुननी पड़ती थी। रविवार को हुई कुछ कहासुनी को लेकर वह मानसिक दबाव में आ गया और सायकिल द्वारा भदोही पहुंच गया। आनन्द नगर रेलवे फाटक के पास उसने शायद टृेन से कटकर जान देने की कोशिस की लेकिन टृेन आते देखकर घबरा गया और बचने का प्रयास किया। लेकिन उसका पैर रेल की पहियों की चपेट में आकर कट गया। साथ ही उसके सिर पर भी गम्भीर चोंटें आयी। जिसके कारण अत्यधिक खून बहने से उसकी मौत हो गयी। इसके साथ ही लोगों के अंदर की संवेदन हीनता भी उजागर हुई। यदि उक्त किशोर को लोग तमाशाई बनकर देखने के बजाय समय से अस्पताल पहंचाये होते तो शायद उसकी जान बच सकती थी।
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नवरात्रि क्या है ? वैज्ञानिक और आध्यात्मिक रहस्य


   नवरात्र शब्द से नव अहोरात्रों (विशेष रात्रियां) का बोध होता है। इस समय शक्ति के नव रूपों की उपासना की जाती है। 'रात्रि' शब्द सिद्धि का प्रतीक है।
  भारत के प्राचीन ऋषि-मुनियों ने रात्रि को दिन की अपेक्षा अधिक महत्व दिया है। इसलिए दीपावली, होलिका, शिवरात्रि और नवरात्र आदि उत्सवों को रात में ही मनाने की परंपरा है। यदि रात्रि का कोई विशेष रहस्य न होता, तो ऐसे उत्सवों को रात्रि न कह कर दिन ही कहा जाता। लेकिन नवरात्र के दिन, नवदिन नहीं कहे जाते।
  मनीषियों ने वर्ष में दो बार नवरात्रों का विधान बनाया है। चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नौ दिन अर्थात नवमी तक। और इसी प्रकार ठीक छह मास बाद आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से महानवमी अर्थात विजयादशमी के एक दिन पूर्व तक। परंतु सिद्धि और साधना की दृष्टि से शारदीय नवरात्रों को ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है।
   इन नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति संचय करने के लिए अनेक प्रकार के व्रत, संयम, नियम, यज्ञ, भजन, पूजन, योग साधना आदि करते हैं। कुछ साधक इन रात्रियों में पूरी रात पद्मासन या सिद्धासन में बैठकर आंतरिक त्राटक या बीज मंत्रों के जाप द्वारा विशेष सिद्धियां प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
   किँतु आजकल अधिकांश उपासक शक्ति पूजा रात्रि में नहीं, बल्कि पुरोहित को दिन में ही बुलाकर संपन्न करा देते हैं। अब तो पंडित और साधु-महात्मा भी अब नवरात्रों में पूरी रात जागना नहीं चाहते और न कोई आलस्य को त्यागना चाहता है। मनीषियों ने रात्रि के महत्व को अत्यंत सूक्ष्मता के साथ वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में समझने और समझाने का प्रयत्न किया। रात्रि में प्रकृति के बहुत सारे अवरोध खत्म हो जाते हैं। आधुनिक विज्ञान भी इस बात से सहमत है। हमारे ऋषि-मुनि आज से हजारों वर्ष पूर्व ही प्रकृति के इन वैज्ञानिक रहस्यों को जान चुके थे।
   दिन में आवाज दी जाए तो वह दूर तक नहीं जाएगी, किंतु रात्रि को आवाज दी जाए तो वह बहुत दूर तक जाती है। इसके पीछे दिन के कोलाहल के अलावा एक वैज्ञानिक तथ्य यह भी है कि दिन में सूर्य की किरणें आवाज की तरंगों और रेडियो तरंगों को आगे बढ़ने से रोक देती हैं ।
रेडियो इस बात का जीता-जागता उदाहरण है ।
कम शक्ति के रेडियो स्टेशनों को दिन में पकड़ना अर्थात सुनना मुश्किल होता है, जबकि सूर्यास्त के बाद छोटे से छोटा रेडियो स्टेशन भी आसानी से सुना जा सकता है। वैज्ञानिक सिद्धांत यह है कि सूर्य की किरणें दिन के समय रेडियो तरंगों को जिस प्रकार रोकती हैं, उसी प्रकार मंत्र जाप की विचार तरंगों में भी दिन के समय रुकावट पड़ती है।
   इसीलिए ऋषि-मुनियों ने रात्रि का महत्व दिन की अपेक्षा बहुत अधिक बताया है। जो इस वैज्ञानिक तथ्य को ध्यान में रखते हुए रात्रियों में संकल्प और उच्च अवधारणा के साथ अपने शक्तिशाली विचार तरंगों को वायुमंडल में भेजते हैं, उनकी कार्यसिद्धि अर्थात मनोकामना सिद्धि, उनके शुभ संकल्प के अनुसार उचित समय और ठीक विधि के अनुसार करने पर अवश्य होती है। पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा के काल में एक साल की चार संधियाँ हैं।
   उनमें मार्च व सितंबर माह में पड़ने वाली गोल संधियों में साल के दो मुख्य नवरात्र पड़ते हैं। इस समय रोगाणु आक्रमण की सर्वाधिक संभावना होती है। ऋतु संधियों में अक्सर शारीरिक बीमारियाँ बढ़ती हैं, अत: उस समय स्वस्थ रहने के लिए, शरीर को शुध्द रखने के लिए और तनमन को निर्मल और पूर्णत: स्वस्थ रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया का नाम 'नवरात्र' है। अमावस्या की रात से नवमी की दोपहर तक व्रत नियम चलने से नौ रात यानी 'नवरात्र' नाम सार्थक है।
   यहाँ रात गिनते हैँ, इसलिए इसे नवरात्र कहा जाता है। नौ रात्रियों का समाहार, समूह होने के कारण से द्वन्द समास होने के कारण यह शब्द पुर्लिँग रूप 'नवरात्र' में ही शुद्ध है। इसे नवरात्रि कहना त्रुटिपूर्ण माना गया है।
   हमारे शरीर को नौ मुख्य द्वारों वाला कहा गया है। इसके भीतर निवास करने वाली जीवनी शक्ति का नाम ही दुर्गा देवी है। इन मुख्य इन्द्रियों के अनुशासन, स्वच्छ्ता, तारतम्य स्थापित करने के प्रतीक रूप में, शरीर तंत्र को पूरे साल के लिए सुचारू रूप से क्रियाशील रखने के लिए नौ द्वारों की शुध्दि का पर्व नौ दिन मनाया जाता है ।
   इनको व्यक्तिगत रूप से महत्व देने के लिए नौ दिन नौ दुर्गाओं के लिए कहे जाते हैं। शरीर को सुचारू रखने के लिए विरेचन, सफाई या शुध्दि प्रतिदिन तो हम करते ही हैं, किन्तु अंग-प्रत्यंगों की पूरी तरह से भीतरी सफाई करने के लिए हर छ: माह के अंतर से सफाई अभियान चलाया जाता है ।
   सात्विक आहार के व्रत का पालन करने से शरीर की शुध्दि, साफ सुथरे शरीर में शुध्द बुद्धि, उत्तम विचारों से ही उत्तम कर्म, कर्मों से सच्चरित्रता और क्रमश: मन शुध्द होता है। स्वच्छ मन मंदिर में ही तो ईश्वर की शक्ति का स्थायी निवास होता है।
   नौ द्वार वाले शरीर रुपी दुर्ग के भीतर रहने वाली जीवनी शक्ति रूपी दुर्गा के नौ रूप हैं -
1. शैलपुत्री
2. ब्रह्मचारिणी
3. चंद्रघंटा
4. कूष्माण्डा
5. स्कन्दमाता
6. कात्यायनी
7. कालरात्रि
8. महागौरी
9. सिध्दीदात्री
इनका नौ जड़ी बूटी या ख़ास व्रत की चीजों से भी सम्बंध है, जिन्हेँ नवरात्र के व्रत में प्रयोग किया जाता है -
1. कुट्टू (शैलपुत्री)
2. दूध-दही (ब्रम्हचारिणी)
3. चौलाई (चंद्रघंटा)
4. पेठा (कूष्माण्डा)
5. श्यामक चावल (स्कन्दमाता)
6. हरी तरकारी (कात्यायनी)
7. काली मिर्च व तुलसी (कालरात्रि)
8. साबूदाना (महागौरी)
9. आंवला (सिध्दीदात्री)
क्रमश: ये नौ प्राकृतिक व्रत खाद्य पदार्थ हैं।
   भविष्योत्तर पुराण में और देवी भावगत के अनुसार, बेटों वाले परिवार में या पुत्र की चाहना वाले परिवार वालों को नवमी में व्रत खोलना चाहिए।
   वैसे अष्टमी, नवमी और दशहरे के चार दिन बाद की चौदस, इन तीनों की महत्ता 'दुर्गासप्तशती' में कही गई है।
जय माता दी
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सिर्फ स्वागत ही नहीं, मोदी के खिलाफ प्रदर्शन के लिए भी तैयार है अमेरिका

  वाशिंगटन।। अमेरिका में मोदी विरोधी विभिन्न समूहों द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस माह न्यूयार्क एवं वाशिंगटन की यात्रा के दौरान विरोध रैलियां किये जाने के आसार हैं।
   हाल में गठित एलायंस फार जस्टिस एंड एकाउंटेबिलिटी (एजेए) ने कल घोषणा की थी कि वह मोदी को उस समय काले झण्डे दिखायेगा जब वह 28 सितंबर को न्यूयार्क में मैनहट्टन के मध्य में स्थित मेडीसन स्क्वायर गार्डन की ओर जायेंगे। सिख फार जस्टिस ने भी घोषणा की है कि वह 30 सितंबर को व्हाइट हाउस के समक्ष के एक उद्यान में मोदी को ‘‘अभ्यारोपित’’ करने के लिए ‘‘नागरिक’’ अदालत लगायेंगे। यह काम उस समय किया जायेगा जब प्रधानमंत्री अमेरिकी
   राष्ट्रपति बराक ओबामा से उनके ओवल कार्यालय में मुलाकात कर रहे होंगे।सिख समूह द्वारा जारी एक बयान के अनुसार व्हाइट हाउस के समक्ष पे्रसीडेंट पार्क में ‘‘अभ्यारोपण’’ की कार्यवाही चलाने के लिए अदालत कक्ष की एक प्रतिकृति बनायी जायेगी। एजेए में वे भारतीय अमेरिकी संगठन और व्यक्ति शामिल हैं जो कोएलिशन अगेनस्ड जिनोसाइड (सीएजी) के अंग रहे थे। सीएजी ने मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन्हें अमेरिका का वीजा देने के विरूद्ध सफलतापूर्वक अभियान चलाया था।

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नवरात्र कलश स्थापन का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

   दुर्गा सप्तशती के दुर्गा महात्‍म्य में लिखा है कि जब असुरों के अत्याचार बढ़ने लगे, तो उनसे छुटकारा पाने के लिए सभी देवताओं ने मां शक्ति की उपासना की। देवी ने प्रसन्न होकर चैत्र तथा आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से दशमीपर्यंत देवी पूजन तथा व्रत का विधान बताया। उसी दिन से नवरात्रि का उत्सव मनाने की परंपरा का प्रचलन हुआ। नवरात्रि पूजन की शुरुआत किस प्रकार से करनी चाहिए, इसके क्या नियम हैं? आइए संक्षेप में जानें:
घट पूजन विधि
   आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना चाहिए। यदि ब्रह्म मुहूर्त में संभव न हो, तो यथासंभव प्रात:काल में स्नान करें। घर के ही किसी पवित्र स्थान पर मिट्टी से वेदी बनाएं। उस वेदी में जौ और गेहूं दोनों को मिलाकर बोना चाहिए। उसी वेदी पर या उसके समीप ही पृथ्वी का पूजन करें।शास्त्रों में कहा गया है कि इस पूजित स्थान पर सोने, चांदी, तांबे या मिट्टी का कलश स्थापित करना चाहिए।
   कलश में रोली से स्‍वास्तिक का चिन्ह बनाएं और कलश के गले में मौलि लपेटें। कलश स्थापित किए जाने वाली भूमि अथवा चौकी पर रोली या हल्दी से अष्टदल कमल बनाएं। तत्पश्चात उस पर कलश स्थापित करें। कलश में जल भरें। जल में चंदन, पंच-पल्लव, दूर्वा, पंचामृत, सुपारी, साबुत हल्दी, कुश, गोशाला या तालाब की मिट्टी डालें। तत्पश्चात कलश को वस्त्र से अलंकृत करें। इसके बाद कलश पर चावल या जौ से भरे पात्र स्थापित करें। अब उस पर लाल वस्त्र लपेटे हुए नारियल को रखें।
कलश पर नारियल का महत्व और प्रभाव
   सामान्यतौर पर लोग कलश पर खड़े नारियल की स्थापना करते हैं, परंतु यह शास्त्रसम्मत नहीं है। इससे हमें पूर्णफल की प्राप्ति नहीं होती। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है: "अधोमुखं शत्रु विवर्धनाय, ऊर्ध्वस्य वस्त्रं बहुरोग वृध्यै। प्राचीमुखं वित विनाशनाय, तस्तमात् शुभं संमुख्यं नारीकेलं"।
  अर्थात् नारियल का मुख नीचे की तरफ रखने से शत्रु में वृद्धि होती है। नारियल का मुख ऊपर की तरफ रखने से रोग बढ़ते हैं, जबकि पूर्व की तरफ नारियल का मुख रखने से धन का विनाश होता है।
  इसलिए नारियल की स्थापना सदैव इस प्रकार करनी चाहिए कि उसका मुख साधक की तरफ रहे। ध्यान रहे कि नारियल का मुख उस सिरे पर होता है, जिस तरफ से वह पेड़ की टहनी से जुड़ा होता है। अत: नारियल का मुख हमेशा अपनी तरफ रखकर ही उसकी स्थापना करनी चाहिए।
मां दुर्गा और अन्य देवताओं की पूजा विधि
   कलश स्थापना के बाद गणेश पूजन करें। तत्पश्चात वेदी के किनारे पर देवी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके लिए आपको चाहिए कि सबसे पहले आसन पर बैठकर निम्‍न मंत्र को `ॐ केशवाय नम:, ॐ माधवाय नम:, ॐ नारायणाय नम:’ बोलते हुए जल से तीन बार आचमन करें। फिर जल लेकर हाथ धो लें।
   हाथ में चावल एवं फूल लेकर अंजुलि बांधकर देवी का ध्यान करें-आगच्छ त्वं महादेवि। स्थाने चात्र स्थिरा भव। यावत पूजां करिष्यामि तावत त्वं सन्निधौ भव।।' श्री जगदम्बे दुर्गा देव्यै नम:।' दुर्गादेवी-आवाहयामि! इसके बाद फूल और चावल चढ़ाएं।
   'श्री जगदम्बे दुर्गा देव्यै नम:' आसनार्थे पुष्पानी समर्पयामि। मंत्र को बोलते हुए मां भगवती को आसन दें। श्री दुर्गा देव्यै नम: पाद्यम, अर्घ्य, आचमन, स्नानार्थ जलं समर्पयामि। बोलते हुए आचमन करें। इसके बाद `श्री दुर्गा देवी दुग्धं समर्पयामि।' मंत्र को बोलते हुए दूध चढ़ाएं। `श्री दुर्गा देवी दही समर्पयामि।' अब दही चढ़ाएं। `श्री दुर्गा देवी घृत समर्पयामि।'
   अब घी चढ़ाएं। श्री दुर्गा देवी मधु समर्पयामि। शहद चढ़ाएं। श्री दुर्गा देवी शर्करा समर्पयामि। इसी तरह शक्‍कर, पंचामृत, गंधोदक, वस्‍त्र, सौभाग्य सूत्र, पुष्प, माला, नैवेद्यम, ताम्बूलं आदि जो भी चीजें हैं, उक्त मंत्र को बोलते हुए चढ़ाएं। इसके पश्चात् दुर्गासप्तशती अथवा रामायण का पाठ करें। पाठ करने के बाद देवी की आरती करके प्रसाद बांटें। फिर कन्या भोजन कराएं। इसके बाद स्वयं फलाहार ग्रहण करें।
घट स्थापन मुहूर्त
  घट स्थापन मुहूर्त प्रतिपदा को सूर्योदय से 10 घटी तक अथवा अभिजित मुहूर्त में घटस्थापन करने का विधान है।
  इस वर्ष 25 सितंबर 2014 को प्रात: 6:14 से 07:14 के मध्य घट स्थापन करें अथवा अभिजित मुहूर्त में घट स्थापना करें, जिसका समय मध्याह्न 11:49 से 12:36 तक रहेगा।
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गौरी गणेश पर अपने नेता के बयान से बुरी फंसी BSP

   लखनऊ।। रविवार को पार्टी के कार्यक्रम में देवी-देवताओं की पूजा न करने की सलाह देकर बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव बुरे फंस गए हैं। बीजेपी नेता आशुतोष त्रिपाठी ने मौर्य के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाते हुए प्रतापगढ़ के सीजेएम कोर्ट में परिवाद दाखिल किया है। सोमवार को मौर्य के बयान की चर्चा आम हुई तो बीएसपी ने भी पार्टी प्रमुख मायावती की ओर से बयान जारी कर पूरे प्रकरण से पल्ला झाड़ लिया।
   पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मौर्य द्वारा पूजा पाठ आदि के संबंध में कही गई बातें उनकी अपनी निजी राय और प्रतिक्रिया है। यह बीएसपी की प्रतिक्रिया नहीं है। मायावती ने साफ किया कि अपने देश में अलग अलग धर्मों को मानने वाले सर्वसमाज के लोगों के रहन सहन, शादी विवाह, पूजा पाठ और उनकी संस्कृति आदि के तौर तरीकों का भी आदर करते हुए पार्टी उसमें दखल देने के खिलाफ है।
   उन्होंने कहा कि बीएसपी बाबा साहेब द्वारा संविधान में दिखाए गए रास्ते पर चलने वाली सर्वसमाज की हितैषी मानवतावादी विचारधारा वाली पार्टी है। गौरतलब है कि रविवार को लखनऊ में बीएसपी के कार्यक्रम में बोलते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने लोगों को सलाह दी थी कि शादियों में गौरी गणेश की पूजा नहीं होनी चाहिए। यह मनुवादी व्यवस्था में दलितों और पिछड़ों को गुमराह कर उनको शासक से गुलाम बनाने की चाल है। उनकी जबान यहीं नहीं रूकी। मौर्य ने कहा कि गधे को भवानी, चूहे को गणेश और उल्लू को लक्ष्मी की सवारी कह कर पूज सकते हैं लेकिन शूद्र को सम्मान नहीं दे सकते।

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सुप्रीम कोर्ट का आदेश, अब हर एनकाउंटर की होगी जांच


  नई दिल्ली।। सुप्रीम कोर्ट ने कथित फर्जी मुठभेड़ मामलों की स्वतंत्र जांच राज्य पुलिस की सीबीसीआईडी से कराने तथा मुठभेड़ की सत्यता साबित होने तक संबंधित सुरक्षाकर्मियों को वीरता पुरस्कार न देने के निर्देश दिये हैं।
   मुख्य न्यायाधीश आर एम लोढा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खण्डपीठ ने पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टी की याचिका पर आज अपने आदेश में कहा कि फर्जी मुठभेड़ मामलों की स्वतंत्र जांच सीबीसीआईडी से कराई जायेगी। शीर्ष अदालत ने मानवाधिकार आयोग को भी आगाह किया कि वह प्रत्येक मामले में तब तक हस्तक्षेप न करे, जब तक मुठभेड़ के फर्जी होने की आशंका प्रबल न हो।
   न्यायालय ने अपने दिशा निर्देश में कहा है कि सरकार उन सुरक्षाकर्मियों को तब तक वीरता पुरस्कार न दे, जब तक संबंधित मुठभेड़ की सत्यता स्थापित न हो जाये। न्यायालय ने मुठभेड़ में इस्तेमाल हथियारों को तत्काल जमा कराये जाने के भी निर्देश दिये हैं।

3:59 PM | 0 comments | Read More

सेलिब्र‍िटी बनने के जूनून में इस महिला ने जुड़वाया तीसरा ब्रेस्ट (स्तन)

   कहते है अपनी मंज़िलों को पाने के लिए इंसान का जुनूनी होना आवश्यक है लेकिन कभी कभी जब इस जूनून की दिशा भटक जाती है तो ये इंसान से बड़े ही अजीबो-गरीब काम करवा देती है, ऐसे काम जिनकी की हम कल्पना भी नहीं कर सकते है। ऐसा ही एक हैरतअंगेज कारनामा एक अमेरिकी महिला ने कर दिखाया। सेलिब्र‍िटी बनने और M TV रियलिटी शो में भाग लेने के जूनून के चलते इस महिला ने सर्जरी कराकर तीसरा ब्रेस्‍ट (स्तन) जुड़वाया है।

मसाज थेरेपिस्‍ट है महिला :-
   फ्लोरिडा की रहने वाली, 21 साल की जैस्‍मीन ट्राइडेवल पेशे से मसाज थेरेपिस्‍ट है। इनकी दिले तम्मना है की यह M TV के सुपर हिट रियलिटी शो में भाग ले पाए। अपने इसी ख़्वाब को पूरा करने के लिए उन्होंने यह सब कुछ किया है। ताकि यूनिक होने के कारण उन्हें इस रियलिटी शो में भाग लेने के लिए बुलाया जाए। जैस्‍म‍िन ने सर्जरी के बाद की तस्‍वीरें फेसबुक पर पोस्‍ट की हैं साथ ही उन्‍होंने यूट्यूब पर वीडियो भी डाला है। उसने अपने फेसबुक पेज पर यह भी लिखा है की उसकी यह भी इच्‍छा है कि वह पुरुषों को आकर्षक न दिखे ताकि कोई उन्‍हें डेट के लिए प्रपोज न करे।
12 लाख रुपए हुए है खर्च :-
   कुछ महीने पहले कराई गई इस सर्जरी के लिए उन्‍होंने 20 हजार डॉलर यानी करीब 12 लाख रुपए खर्च किए हैं। इस ऑपरेशन के लिए उन्‍होंने करीब 2 साल तक पैसे बचाए। तीसरे ब्रेस्‍ट को जैस्‍म‍िन के सीने के बीच में लगाया गया है। इसे सिलिकॉन इम्‍प्‍लांट और पेट से ली गईं स्‍क‍िन टिशूज की मदद से डिवेलप किया गया।
   जैस्‍म‍िन ने बताया कि ऑपरेशन से पहले उन्‍होंने 50 से ज्‍यादा डॉक्‍टरों से संपर्क किया, जिसके बाद उन्‍हें वह सर्जन मिला, जिसने इस सर्जरी के लिए हामी भरी। जैस्‍म‍िन ने कहा, वाकई किसी ऐसे शख्‍स को ढूंढना मुश्‍कि‍ल था क्‍योंकि यह नैतिकता के खिलाफ है। डॉक्टर का नाम गुप्त रखा गया है।
 
परिवार वाले है नाराज़ :-
   सर्जरी के बाद से वह अपनी ड्रेसेज खुद ही बनाती हैं। मीडिया रिपोटर्स के मुताबिक, जैस्‍म‍िन के पैरंट्स उससे खुश नहीं हैं। उनकी मां और बहन उनसे बात नहीं कर रहीं। वहीं, उनके पिता शर्मसार महसूस कर रहे हैं।
असली ब्रेस्‍ट जैसा ही एहसास :-
जैस्म‍िन का कहना है की तीसरा ब्रेस्‍ट बिलकुल असली लगता है तथा उसे इसके साथ कोई परेशानी नहीं है।
फिल्‍मों में भी दिखाया गया है ट्रिपल ब्रेस्‍ट :-
  हॉलीवुड एक्‍शन स्‍टार अर्नाल्‍ड शॉजनेगर की फिल्‍म 'टोटल रिकॉल' में एक महिला को तीन ब्रेस्‍ट के साथ दिखाया गया था। 2012 में एक्‍टर कॉलीन फरेल को लेकर जब इस फिल्‍म का रीमेक तैयार किया गया, तो उसमें भी एक ऐसी महिला दिखाई गई।
  तीन स्तन वाली महिला जैस्‍मीन ट्राइडेवल का वीडियो (Video of Weird Woman Jasmine Tridevil with three tits)
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ATM ने उगले 24 लाख, फिर क्या हुआ ?

चारों और इन लड़कों की ईमानदारी की चर्चा
   हैदराबाद।। तीन छात्र एटीएम से पैसे निकालने के लिए गए। हाथ लगने से एटीएम से 500 के नोटों का बंडल बाहर आ गया। अंदर थे 24 लाख रुपये। कोई और होता तो शायद इन पैसों के लेकर चंपत हो जाता लेकिन ईमानदार छात्रों ने पुलिस को बुला लिया।
   मामला हैदराबाद का है जिसके सामने आने के बाद से इन छात्रों की चर्चा और तारीफ दोनों हो रही है। खैर, आज के दौर में जब लोग पैसों के लिए अपनों के खून के प्यासे हों, ऐसे में कोई लाखों रुपये सामने देखकर भी लालच में न पड़े तो आश्चर्य होना लाजमी है।
   खबर के मुताबिक इन तीनों छात्रों ने एटीएम कियोस्क से निकले 24 लाख रुपयों को अपने पास न रखकर पुलिस को जानकारी दी और संभावित लूट को भी टालने का काम किया।
   डीसीपी ने बताया कि यदि छात्रों ने इस बारे में पुलिस को जानकारी नहीं दी होती तो पूरा पैसा चोरी हो सकता था। उन्होंने कहा कि छात्रों द्वारा समय पर जानकारी देने से संभावित लूट को टाला जा सका। पुलिस ने तीनों दोस्तों की ईमानदारी और नेकनियती की सराहना की है।




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बालों में रूसी से परेशान हैं तो ये उपाय हैं मददगार



  बालों में रूसी की समस्या इस मौसम में जितनी आम है, उतना ही कठिन इससे पूरी तरह छुटकारा पाना। स्काल्प की त्वचा के छोटे-छोटे टुकड़े, जिसे हम रूसी कहते हैं, बालों से जुड़ी कई बड़ी समस्याओं का सबब हो सकते हैं।
  ऐसे में इस समस्या की जटिलता के आधार पर इसके उपचार के विकल्प भी कई हैं।
   बहुत अधिक रूखी व बहुत अधिक तैलीय त्वचा, बालों में फंगल संक्रमण, सफाई की कमी, त्वचा संबंधी रोग जैसे कई कारण होते हैं जिससे रूसी होने का रिस्क बढ़ता है।
  मुंबई के कॉस्मेटिक सर्जरी एंड स्किन इंस्टिट्यूट के एमडी व कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. मोहन थॉमस से जानिए, इसके उपचार के प्रभावी उपायों के बारे में।

नींबू का इस्तेमाल करें
   नींबू के गुण त्वचा की सफाई से लेकर वजन घटाने तक के लिए अहमियत रखते हैं। ऐसे में बालों में रूसी की समस्या से छुटकारे का भी यह कारगर और सुलभ उपाय है।
  बाल गीले करके एक नींबू का रस स्काल्प पर अच्छी तरह लगाएं और पांच मिनट तक छोड़ दें। इसे पानी से साफ करें।
  हफ्ते में दो बार स्काल्प पर नींबू लगाने से बालों में रूसी की समस्या दूर हो जाएगी। इसमें मौजूद साइट्रिक एसिड अच्छा क्लींजर है।

मेथी
  मेथी का सेवन शरीर की कई समस्याओं से लड़ने में मददगार है। मेथी दाना में प्रोटीन और अमीनो एसिड अच्छी मात्रा में होते हैं जो बालों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए जरूरी हैं। मेथी दाना के सेवन से बाल जड़ों से मजबूत होते हैं जिससे स्काल्प में रूसी नहीं होती। साथ ही इसमें लेसिथिन नामक रसायन होता है जो बालों को मजबूत बनाने में मददगार है।
   मेथी के सेवन के अलावा, इसका पैक भी बना सकते हैं। इससे न सिर्फ बालों से रूसी दूर होंगी बल्कि बालों की अच्छी कंडिशनिंग होगी।

बेकिंग सोडा व सिरका
   बेकिंग सोडा के इस्तेमाल से भी रूसी दूर हो सकती है। इसका पेस्ट बनाने के लिए एक चम्मच बेकिंग सोडा लें और इसमें थोड़ा पानी मिलाकर पेस्ट बनाएं व बालों की जड़ों में लगाएं। तीन मिनट बाद बाल धो लें।
  बेकिंग सोडा बालों की गंदगी साफ करता है और केमिकल्स का असर खत्म करता है। हफ्ते में एक बार इसके इस्तेमाल से आप रूसी से छुटकारा पा सकते हैं।
  सिरके के इस्तेमाल से बी बालों से रूसी दूर की जा सकती है। आधा बाल्टी गुनगुने पानी में पांच मिलीलीटर सिरका ‌मिलाएं. अब शैंपू करें और बाल धोने के बाद सिरके वाले पानी से बाल साफ करें। हफ्ते में दो बार इस मुस्खे को अपनाने से आराम मिलेगा।

एस्पिरिन और नीम
   एस्पिरिन न केवल पेनकिलर के रूप में प्रभावी है बल्कि बालों के लिए भी फायदेमंद है। एक एस्पिरिन को पीस लें और शैंपू में मिलाकर बालों को इससे धोएं। इस प्रक्रिया को सप्ताह में कम से कम तीन बार दोहराएं। अगर कुछ हर्बल ट्राइ करना चाहते हैं तो नीम भी रूसी दूर करने में मददगार है। आधा कम पानी नीम की चार प‌ित्तयां उबाल लें और रात भर छोड़ दें। बालों को इससे साफ करें और फिर शैंपू का इस्तेमाल करें। हफ्ते में तीन बार कम से कम इसका इस्तेमाल करने से रूसी की समस्या खत्म हो जाएगी।



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पुलिस थाने के अंदर खुलेआम इस्लाम का प्रचार...

   शुरू में एक सच्ची घटना जान लीजिए, ताकि आप आसानी से समझ सकें कि “सेकुलरिज़्म” किस तरह से इस देश को तोड़ने और देशद्रोहियो की मदद कर रहा है. कुछ दिनों पहले की ही घटना है उत्तरप्रदेश के वाराणसी शहर से भगाकर लाई गई एक लड़की के बारे में उसके माता-पिता को जानकारी मिली कि वह कर्नाटक के मंगलोर शहर में है. यह जानकारी भी उन्हें तब मिली, जब उसे भगाकर लाने वाले अली मोहम्मद नामक आदमी ने उनसे फिरौती माँगना शुरू किया. लड़की के परिवार ने उसका पता लगाया और कर्नाटक के पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट लिखवाई. कर्नाटक पुलिस ने लड़की को बरामद किया और थाने में लाकर सभी के सामने उसे पुनः हिन्दू धर्म में शामिल करवाया. लेकिन जैसा कि हमेशा से होता आया है, तथाकथित सेकुलर मीडिया ने अपनी घृणित हताशा और मंदबुद्धि के चलते इस बात पर हंगामा खड़ा कर दिया कि पुलिस के संरक्षण में “सेकुलरिज़्म खतरे में है” (ठीक उसी प्रकार जैसे मस्जिदों से अक्सर नारा दिया जाता है, इस्लाम खतरे में है). इस सेकुलर मीडिया ने अपना दबाव इतना अधिक बढ़ाया कि सरकार को इस मामले में चार पुलिसकर्मियों को निलंबित करना पड़ा. ये तो सिर्फ एक घटना है, ऐसी कई घटनाएँ हो चुकी हैं, जहाँ पुलिस का मनोबल तोड़ने की सोची-समझी चालें चली जा रही हैं.
   अब एक नया मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस के जवानों का ही इस्लामीकरण शुरू किया जा रहा है. कर्नाटक में नवनिर्वाचित कांग्रेस सरकार की नाक के नीचे, धर्म परिवर्तन की कोशिशें खुलेआम शुरू हो चुकी हैं. ऐसी ही एक असंवैधानिक घटना को कर्नाटक के एक स्थानीय अखबार ने “लाईव” कैमरों पर पकड़ा.इस्लामिक गतिविधियों का बड़ा केन्द्र बन चुके कर्णाटक के मैंगलोर शहर में एक संगठित जेहादी गिरोह ने समाज, व्यवस्था और विशेषकर पुलिस सिस्टम को प्रदूषित करने का अभियान चलाया हुआ है, ताकि खाड़ी से मिलने वाले पैसों के जरिये भारत में भी उनकी देशद्रोही गतिविधियाँ चलती रहें.

   प्रस्तुत चित्र उसी मीडिया वेबसाइट से लिए गए हैं. चित्र में दिखाई दे रहा शख्स है मोहम्मद ईशाक, जो स्वयं को हिन्दू धर्म से इस्लाम में धर्म परिवर्तित कहता है और अपना पूर्व नाम गिरीश बताता है. ये व्यक्ति अपनी मीठी-मीठी बातों से न सिर्फ सामाजिक संगठनों में बल्कि कुछ हिन्दू संगठनों में भी अपनी घुसपैठ बना चुका है. हिंदुओं के भोलेपन और उदारता का फायदा उठाते हुए, इसे जहाँ भी मौका मिलता है, ये कुरान बाँटने लगता है और धर्म प्रचार शुरू कर देता है. इशाक मोहम्मद “स्ट्रीट-दावाह” नामक संस्था की मैंगलोर शाखा का प्रमुख है. स्ट्रीट-दावाह नामक संस्था, सड़क पर आते-जाते राहगीरों को कुरआन बाँटने का कार्य करती है तथा सड़कों पर ही रहने वाले गरीबों और बच्चों को इस्लाम का “ज्ञान” देती है. पिछले कुछ माह में मोहम्मद ईशाक ने कर्नाटक के सैकड़ों थानों में दिनदहाड़े जाकर सभी के सामने इस्लाम का प्रचार किया, थाने में ऑन-ड्यूटी पुलिस अधिकारियों को कुरान और हदीस बाँटी. लेकिन हमारे तथाकथित सेकुलर मीडिया ने इस पर चूं भी नहीं की.अक्सर श्रीराम सेना और बजरंग दल को गरियाने वाले, रोटी और टोपी जैसे फालतू मुद्दों पर दिन-रात छाती पीटने वालों तथा संघ को कोसने वाले मीडिया में बैठे कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों को इसमें कोई आपत्ति नज़र नहीं आई.
   तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल के कई थानों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी धर्म-परिवर्तित हो चुके हैं. हिन्दू जनजागृति समिति ने सबूतों के साथ ऐसे पुलिसकर्मियों की शिकायत की तो उन्हीं के कार्यकर्ताओं को फर्जी धाराओं में फंसाकर अंदर कर दिया गया. “कथित मुख्यधारा” का मीडिया लगातार ऐसे मुद्दों को छिपा जाता है, सोशल मीडिया पर गाहे-बगाहे ऐसे मुद्दों बाकायदा तस्वीरों सहित दिखाए जाते हैं. कर्नाटक सरकार को पुलिस थानों में ऐसे खुलेआम जारी धर्म प्रचार और कुरआन बाँटने की जाँच करनी चाहिए, तथा जो पुलिसकर्मी इसमें सहयोगी हैं उन्हें बर्खास्त किया जाना चाहिए.



(Suresh Chiplunkar)
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भिखारियों एवं दरिद्रों के लिए पुनर्वास गृह स्थापित किये जायेंगे

भिखारियों एवं निर्धन व्यक्तियों का पुनर्वास अधिनियम 25 सितम्बर से प्रभावी
   जयपुर।। राज्य में भिखारियों के पुनर्वास हेतु राजस्थान रिहेबलीटेशन ऑफ बैगर और इण्डिजेट्स एट 25 सितम्बर, 2014 से प्रभावशील हो जायेगा।
   सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक श्री सुआलाल ने बताया कि इस अधिनियम के लागू होने से भिखारियों एवं दरिद्रों के लिए पुनर्वास गृह स्थापित किये जायेंगे। इन पुनर्वास गृहों में आवास एवं भोजन तथा अन्य सुविधायें निःशुल्क देय होगी। नगरीय विकास विभाग एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग परस्पर समन्वय स्थापित कर भिखारियों के पुनस्र्थापन हेतु राज्य में प्रथम चरण में सम्भागीय मुख्यालयों जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, कोटा व भरतपुर एवं अलवर जिले के अलावा दो प्रमुख धार्मिक स्थलों जहां पर भिखारियों की संख्या अधिक है पर 100-100 व्यक्तियों की क्षमता के भिखारियों एवं दरिद्रों के पुनर्वास गृह स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से संचालित किये जायेंगे।
   उन्होंने बताया कि पुनर्वास गृहों में स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से नशा मुक्ति प्रकोष्ठ भी स्थापित किये जायेंगे ताकि भिखारियों में पनप रही नशे की लत से उन्हें निजात दिलवाई जा सके। उन्होंने बताया कि भिखारियों या दरिद्रों के पुनर्वास हेतु इन्हें पुनर्वास गृहों में ही इनकी योग्यता एवं इच्छा के अनुरूप स्वरोजगार के लिये प्रशिक्षण दिया जायेगा ताकि वे समाज की मुख्य धारा के साथ जुड़ सकें।
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पुनर्जन्म से जुडी 10 सच्ची घटनाए


(10 Real Incident About Reincarnation) :
पुनर्जन्म सच या भ्रम :
   जैसे भूत, प्रेत, आत्मा, से जुडी घटनाएं हमेशा से एक विवाद का विषय रही है वैसे हि पुनर्जन्म से जुड़ी घटनाय और कहानिया भी हमेशा से विवाद का विषय रही है। इन पर विश्वास और अविश्वास करने वाले, दोनो हि बड़ी संख्या मे है, जिनके पास अपने अपने तर्क है। यहुदी, ईसाईयत और इस्लाम तीनो सम्प्रदाय पुनर्जन्म मे यकीन नहि करते है, इसके विपरीत हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म पुनर्जन्म मे यकीन करते है। हिंदू धर्म के अनुसार मनुष्य का केवल शरीर मरता है उसकी आत्मा नहीं। आत्मा एक शरीर का त्याग कर दूसरे शरीर में प्रवेश करती है, इसे ही पुनर्जन्म कहते हैं। हालांकि नया जन्म लेने के बाद पिछले जन्म कि याद बहुत हि कम लोगो को रह पाती है। इसलिए ऐसी घटनाएं कभी कभार ही सामने आती है। पुनर्जन्म की घटनाएं भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों मे सुनने को मिलती है।
पुनर्जन्म के ऊपर हुए शोध :
   पुनर्जन्म के ऊपर अब तक हुए शोधों मे दो शोध (रिसर्च) बहुत महत्त्वपूर्ण है। पहला अमेरिका की वर्जीनिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक डॉ. इयान स्टीवेन्सन का। इन्होने 40 साल तक इस विषय पर शोध करने के बाद एक किताब "रिइंकार्नेशन एंड बायोलॉजी" लीखी जो कि पुनर्जन्म से सम्बन्धित सबसे महत्तवपूर्ण बुक मानी जाती है। दूसरा शोध बेंगलोर की नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसीजय में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट के रूप में कार्यरत डॉ. सतवंत पसरिया द्वारा किया गया है। इन्होने भी एक बुक "श्क्लेम्स ऑफ रिइंकार्नेशनरू एम्पिरिकल स्टी ऑफ केसेज इन इंडिया" लिखी है। इसमें 1973 के बाद से भारत में हुई 500 पुनर्जन्म की घटनाओ का उल्लेख है।
  गीताप्रेस गोरखपुर ने भी अपनी एक किताब 'परलोक और पुनर्जन्मांक' में ऐसी कई घटनाओं का वर्णन किया है। हम उनमे से 10 कहानियां यहां पर आपके लिए प्रस्तुत कर रहे है।
पहली घटना -
   यह घटना सन 1950 अप्रैल की है। कोसीकलां गांव के निवासी भोलानाथ जैन के पुत्र निर्मल की मृत्यु चेचक के कारण हो गई थी। इस घटना के अगले साल यानी सन 1951 में छत्ता गांव के निवासी बी. एल. वाष्र्णेय के घर पुत्र का जन्म हुआ। उस बालक का नाम प्रकाश रखा गया। प्रकाश जब साढ़े चार साल का हुआ तो एक दिन वह अचानक बोलने लगा- मैं कोसीकलां में रहता हूं। मेरा नाम निर्मल है। मैं अपने पुराने घर जाना चाहता हूं। ऐसा वह कई दिनों तक कहता रहा।
   प्रकाश को समझाने के लिए एक दिन उसके चाचा उसे कोसीकलां ले गए। यह सन 1956 की बात है। कोसीकलां जाकर प्रकाश को पुरानी बातें याद आने लगी। संयोगवश उस दिन प्रकाशकी मुलाकात अपने पूर्व जन्म के पिता भोलानाथ जैन से नहीं हो पाई। प्रकाश के इस जन्म के परिजन चाहते थे कि वह पुरानी बातें भूल जाए। बहुत समझाने पर प्रकाश पुरानी बातें भूलने लगा लेकिन उसकी पूर्व जन्म की स्मृति पूरी तरह से नष्ट नहीं हो पाई।
   सन 1961 में भोलनाथ जैन का छत्ता गांव जाना हुआ। वहां उन्हें पता चला कि यहां प्रकाश नामक का कोई लड़का उनके मृत पुत्र निर्मल के बारे में बातें करता है। यह सुनकर वे वाष्र्णेय परिवार में गए। प्रकाश ने फौरन उन्हें अपने पूर्व जन्म के पिता के रूप में पहचान लिया। उसने अपने पिता को कई ऐसी बातें बताई जो सिर्फ उनका बेटा निर्मल ही जानता था।
दूसरी घटना :
   यह घटना आगरा की है। यहां किसी समय पोस्ट मास्टर पी.एन. भार्गव रहा करते थे। उनकी एक पुत्री थी जिसका नाम मंजु था। मंजु ने ढाई साल की उम्र में ही यह कहना शुरु कर दिया कि उसके दो घर हैं। मंजु ने उस घर के बारे में अपने परिवार वालों को भी बताया। पहले तो किसी ने मंजु की उन बातों पर ध्यान नहीं दिया लेकिन जब कभी मंजु धुलियागंज, आगरा के एक विशेष मकान के सामने से निकलती तो कहा करती थी- यही मेरा घर है।
   एक दिन मंजु को उस घर में ले जाया गया। उस मकान के मालिक प्रतापसिंह चतुर्वेदी थे। वहां मंजु ने कई ऐसी बातें बताई जो उस घर में रहने वाले लोग ही जानते थे। बाद में भेद चला कि श्रीचतुर्वेदी की चाची (फिरोजाबाद स्थित चौबे का मुहल्ला निवासी श्रीविश्वेश्वरनाथ चतुर्वेदी की पत्नी) का निधन सन 1952 में हो गया था। अनुमान यह लगाया गया कि उन्हीं का पुनर्जन्म मंजु के रूप में हुआ है।
तीसरी घटना :
   सन 1960 में प्रवीणचंद्र शाह के यहां पुत्री का जन्म हुआ। इसका नाम राजूल रखा गया। राजूल जब 3 साल की हुई तो वह उसी जिले के जूनागढ़ में अपने पिछले जन्म की बातें बताने लगी। उसने बताया कि पिछले जन्म में मेरा नाम राजूल नहीं गीता था। पहले तो माता-पिता ने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया लेकिन जब राजूल के दादा वजुभाई शाह को इन बातों का पता चला तो उन्होंने इसकी जांच-पड़ताल की।
   जानकारी मिली कि जूनागढ़ के गोकुलदास ठक्कर की बेटी गीता की मृत्यु अक्अक्टूबर 1 559 में हुई थी। उस समय वह ढाई साल की थी। वजुभाई शाह 1965 में अपने कुछ रिश्तेदारों और राजूल को लेकर जूनागढ़ आए। यहां राजून ने अपने पूर्वजन्म के माता-पिता व अन्य रिश्तेदारों को पहचान लिया। राजूल ने अपना घर और वह मंदिर भी पहचान लिया जहां वह अपनी मां के साथ पूजा करने जाती थी।
चौथी घटना :
   मध्य प्रदेश के छत्रपुर जिले में एम. एल मिश्र रहते थे। उनकी एक लड़की थी, जिसका नाम स्वर्णलता था। बचपन से ही स्वर्णलता यह बताती थी कि उसका असली घर कटनी में है और उसके दो बेटे हैं। पहले तो घर वालों ने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया लेकिन जब वह बार-बार यही बात बोलने लगी तो घर वाले स्वर्णलता को कटनी ले गए। कटनी जाकर स्वर्णलता ने पूर्वजन्म के अपने दोनों बेटों को पहचान लिया। उसने दूसरे लोगों, जगहों, चीजों को भी पहचान लिया।
    छानबीन से पता चला कि उसी घर में 18 साल पहले बिंदियादेवी नामक महिला की मृत्यु दिल की धड़कने बंद हो जाने से मर गई थीं। स्वर्णलता ने यह तक बता दिया कि उसकी मृत्यु के बाद उस घर में क्या-क्या परिवर्तन किए गए हैं। बिंदियादेवी के घर वालों ने भी स्वर्णलता को अपना लिया और वही मान-सम्मान दिया जो बिंदियादेवी को मिलता था।
पांचवी घटना :
   सन 1956 की बात है। दिल्ली में रहने वाले गुप्ताजी के घर पुत्र का जन्म हुआ। उसका नाम गोपाल रखा गया। गोपाल जब थोड़ा बड़ा हुआ तो उसने बताया कि पूर्व जन्म में उसका नाम शक्तिपाल था और वह मथुरा में रहता था, मेरे तीन भाई थे उनमें से एक ने मुझे गोली मार दी थी। मथुरा में सुख संचारक कंपनी के नाम से मेरी एक दवाओं की दुकान भी थी।
   गोपाल के माता-पिता ने पहले तो उसकी बातों को कोरी बकवास समझा लेकिन बार-बार एक ही बात दोहराने पर गुप्ताजी ने अपने कुछ मित्रों से पूछताछ की। जानकारी निकालने पर पता कि मथुरा में सुख संचारक कंपनी के मालिक शक्तिपाल शर्मा की हत्या उनके भाई ने गोली मारकर कर दी थी। जब शक्तिपाल के परिवार को यह पता चला कि दिल्ली में एक लड़का पिछले जन्म में शक्तिपाल होने का दावा कर रहा है तो शक्तिपाल की पत्नी और भाभी दिल्ली आईं।
   गोपाल ने दोनों को पहचान लिया। इसके बाद गोपाल को मथुरा लाया गया। यहां उसने अपना घर, दुकान सभी को ठीक से पहचान लिया साथ ही अपने अपने बेटे और बेटी को भी पहचान लिया। शक्तिपाल के बेटे ने गोपाल के बयानों की तस्दीक की।
छठवी घटना :
   न्यूयार्क में रहने वाली क्यूबा निवासी 26 वर्षीया राचाले ग्राण्ड को यह अलौकिक अनुभूति हुआ करती थी कि वह अपने पूर्व जन्म में एक डांसर थीं और यूरोप में रहती थी। उसे अपने पहले जन्म के नाम की स्मृति थी। खोज करने पर पता चला कि यूरोप में आज से 60 वर्ष पूर्व स्पेन में उसके विवरण की एक डांसर रहती थी।
   राचाले की कहानी में सबसे आश्चर्यजनक बात यह थी कि जिसमें उसने कहा था कि उसके वर्तमान जन्म में भी वह जन्मजात नर्तकी की है और उसने बिना किसी के मार्गदर्शन अथवा अभ्यास के हाव-भावयुक्त डांस सीख लिया था।
सातवी घटना :
   पुनर्जन्म की एक और घटना अमेरिका की है। यहां एक अमेरिकी महिला रोजनबर्ग बार-बार एक शब्द जैन बोला करती थी, जिसका अर्थ न तो वह स्वयं जानती थी और न उसके आस-पास के लोग। साथ ही वह आग से बहुत डरती थी। जन्म से ही उसकी अंगुलियों को देखकर यह लगता था कि जैसे वे कभी जली हों।
   एक बार जैन धर्म संबंधी एक गोष्ठी में, जहां वह उपस्थित थी, अचानक रोजनबर्ग को अपने पूर्व जन्म की बातें याद आने लगी। जिसके अनुसार वह भारत के एक जैन मंदिर में रहा करती थी और आग लग जाने की आकस्मिक घटना में उसकी मृत्यु हो गई थी।
आठवी घटना :
   जापान जैसे बौद्ध धर्म को मानने वाले देशों में पुनर्जन्म में विश्वास किया जाता है। 10 अक्टूबर 1815 को जापान के नकावो मूरा नाम के गांव के गेंजो किसान के यहां पुत्र हुआ। उसका नाम कटसूगोरो था। जब वह सात साल का हुआ तो उसने बताया कि पूर्वजन्म में उसका नाम टोजो था और उसके पिता का नाम क्यूबी, बहन का नाम फूसा था तथा मां का नाम शिड्जू था।
   6 साल की उम्र में उसकी मृत्यु चेचक से हो गई थी। उसने कई बार कहा कि वह अपने पूर्वजन्म के पिता की कब्र देखने होडोकूबो जाना चाहता है। उसकी दादी (ट्सूया) उसे होडोकूबो ले गई। वहां जाते समय उसने एक घर की ओर इशारा किया और बताया कि यही पूर्वजन्म में उसका घर था।
   पूछताछ करने पर यह बात सही निकली। कटसूगोरो ने यह भी बताया कि उस घर के आस-पास पहले तंबाकू की दुकानें नहीं थी। उसकी यह बात भी सही निकली। इस बात ये सिद्ध होता है कि कटसूगोरो ही पिछले जन्म में टोजो था।
नौवी घटना :
   थाईलैंड में स्याम नाम के स्थान पर रहने वाली एक लड़की को अपने पूर्वजन्म के बारे में ज्ञात होने का वर्णन मिलता है। एक दिन उस लड़की ने अपने परिवार वालों को बताया कि उसके पिछले जन्म के मां-बाप चीन में रहते हैं और वह और वह उनके पास जाना चाहती है।
   उस लड़की को चीनी भाषा का अच्छा ज्ञान भी था। जब उस लड़की की पूर्वजन्म की मां को यह पता चला तो वह उस लड़की से मिलने के लिए स्याम आ गई। लड़की ने अपनी पूर्वजन्म की मां को देखते ही पहचान लिया। बाद में उस लड़की को उस जगह ले जाया गया, जहां वह पिछले जन्म में रहती थी।
   उससे पूर्वजन्म से जुड़े कई ऐसे सवाल पूछे गए। हर बार उस लड़की ने सही जवाब दिया। लड़की ने अपने पूर्व जन्म के पिता को भी पहचान लिया। पुनर्जन्म लेने वाले दूसरे व्यक्तियों की तरह इस लड़की को भी मृत्यु और पुनर्जन्म की अवस्थाओं के बीच की स्थिति की स्मृति थी।
दसवी घटना :
   सन 1963 में श्रीलंका के बाटापोला गांवमें रूबी कुसुमा पैदा हुई। उसके पिता का नाम सीमन सिल्वा था। रूबी जब बोलने लगी तो वह अपने पूवर्जन्म की बातें करने लगी। उसने बताया कि पूर्वजन्म में वह एक लड़का थी। उसका पुराना घर वहां से चार मील दूर अलूथवाला गांव में है। वह घर बहुत बड़ा है। उसने यह भी बताया कि पूर्वजन्म में उसकी मृत्यु कुएं में डुबने से हुई थी।
   रुबी के पुराने माता-पिता पुंचीनोना को ढूंढ निकालना मुश्किल नहीं था। उन्होंने बताया कि उनका बेटा करुणासेना 1956 में मरा था। उन्होंने उसके कुएं में डूब जाने की घटना और दूसरी बातें भी सच बताई और कहा कि लड़की की सारी बातें बिलकुल सच है।
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''भगत सिंह 'बेगुनाह' ! साबित भारतीय वकील?''

   नई दिल्ली।। ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सांडर्स की हत्या में शहीद-ए-आजम भगत सिंह को फांसी दिए जाने के खिलाफ नागरिक अधिकारों के लिए काम करने वाला एक संगठन पाकिस्तान के लाहौर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर चुका है। इस याचिका में कहा गया है कि भगत सिंह को दी गई फांसी एक न्यायिक हत्या थी। इस संगठन ने भगत सिंह को बेगुनाह साबित करने के लिए अभियान छेड़ रखा है और इस काम में भारतीय वकीलों से मदद चाहता है। भगत सिंह को महज 23 साल की उम्र में मार्च 1931 में सजा-ए-मौत दी गई थी। अपनी मुहिम में शुरुआती सफलता के बाद संगठन के कुछ सदस्य लाहौर हाई कोर्ट में उनकी याचिका लड़ने के लिए भारतीय वकीलों से मदद की उम्मीद लेकर दिल्ली आए हैं। लाहौर हाईकोर्ट ने संगठन की याचिका पर स्थानीय पुलिस से उस एफआईआर को खोजने का निर्देश दिया, जो साल 1928 में दर्ज की गई थी। इस साल मई में यह बात सामने आई कि उस एफआईआर में शहीद-ए-आजम का नाम नहीं था। एफआईआर में उन परिस्थितियों के बारे में जिक्र है, जिसमें ब्रिटिश पुलिस अधिकारी की 1928 में हत्या हुई थी। पाकिस्तान में भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के अध्यक्ष इम्तियाज कुरैशी ने एफआईआर की कॉपी हासिल करने का बाद बताया था कि एफआईआर 17 दिसंबर 1928 को शाम साढ़े चार बजे लाहौर के अनारकली थाने में दर्ज कराई गई थी, जिसमें 2 अज्ञात लोगों पर सांडर्स की हत्या का आरोप लगाया गया था। शिकायतकर्ता इसी थाने का एक अधिकारी था और मामले का चश्मदीद भी था। उसके मुताबिक जिस शख्स का उसने पीछा किया वो पांच फीट पांच इंच लंबा था, हिंदू चेहरा, छोटी मूंछें और दुबली पतली और मजबूत काया थी। वह सफेद रंग का पायजामा, भूरे रंग की कमीज और काले रंग की छोटी टोपी पहने हुए था। मामला आईपीसी की धारा 302, 120 और 109 के तहत दर्ज किया गया था। संगठन के एक सदस्य कुरैशी ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के वकील नफीस अहमद सिद्दीकी को इस मामले में पाकिस्तान में चल रही आदालती कार्यवाही की जानकारी दी। उन्होंने नफीस अहमद से भारत के एक वकीलों की टीम तैयार करने की अपील की, जो भगत सिंह को बेकसूर साबित करने के लिए लाहौर हाई कोर्ट में बहस कर सकें।


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केकड़ी में हुस्न के मायाजाल में फंसाकर हो रही लूट

   केकड़ी।। केकड़ी शहर में इनदिनों एक युवती अपने हुस्न के मायाजाल में फंसाकर लड़कों को कुछ इस तरह लूट रही हैं कि उन्हे इस मायाजाल से निकलने के लिये लाखों रूपयों का सौदा उस लड़की के साथ करना पड़ रहा हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार केकड़ी की यह युवती पहले लड़कों से आंखेचार करती हैं और फिर आगे होकर ही उनसे बातचीत करने लगती हैं और बातों ही बातों में अपने नंबर भी लड़के को दे देती हैं और फोन करने की कहकर वहां से चली जाती हैं। लड़के भी जवानी के जोश में होश नहीं संभाल पाते और लड़की को फोन करते हैं तो बातों का सिलसिला शुरू हो जाता हैं। लड़की एक दो दिन लड़के से अच्छी बातें करती हैं और दोनों मिलने का निर्णय लेते हैं फिर दोनों का मिलन भी भरपूर होता हैं उसके ठीक बाद लड़की लड़को को फोन कर धमकाना शुरू कर देती हैं। सुत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मिलने का स्थान लड़की ही तय करती हैं और लड़के को बताती हैं और उस स्थान पर पहले ही कैमरे लगा देती हैं जिससे उन दोनों की पूरी रिकार्डिंग उस कैमरे में कैद हो जाती हैं। इन्ही रिकार्डिंग के जरिये यह युवती लड़के को ब्लेकमैल करना शुरू कर देती हैं और पैसों की मांग करती हैं।
    यदि लड़का पैसे देने में आनाकानी करता हैं तो यह युवती इतनी चालाक व चतुर हैं कि सीधे थाने पहुंच जाती हैं और बलात्कार की रिपोर्ट दे देती हैं,हालांकि पुलिस मामले में एएफआईआर दर्ज नहीं करती उससे पहले ही समझोता भी हो जाता हैं और यह समझोता होता हैं लाखों रूपयों का। क्यूं कि यह युवती केकड़ी के सर्मद्ध व ख्यातिप्राप्त लोगों के लड़कों को ही अपने हुस्न के मायाजाल में फंसाती हैं जिसके चलते बदनामी के डर से लड़के व उनके परिजन जैसे-तैसे मामले को रफा दफा करने में लग जाते हैं जिसके लिये उन्हे लाखों रूपये बहाने पड़ते हैं। हालांकि केकड़ी में अब इस युवती को लगभग सभी ब्लेकमैलर के रूप में जानने लगे हैं फिर भी हर 15 दिनों में यह किसी ना किसी नये बकरे को हलाल कर ही देती हैं। अब देखना यह होगा कि बार-बार थाने में जाकर रिपोर्ट लिखवाने वाली इस युवती पर क्या पुलिस कोई कार्यवाही करेगा ? क्या पुलिस पूरे मामले की पड़ताल में जुटेगा कि आखिर कैसे एक युवती बार-बार बलात्कार जैसे संगीन मामले में भिन्न-भिन्न व्यक्तियों की रिपोर्ट लिखवाने आती हैं ? फिलहाल यह भविष्य की गर्भ में हैं।
 
(पीयूष राठी)





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बालोतरा का पुलिस थाना बना अपराधियो के लिये ऐशगाह


    बालोतरा।। बालोतरा का पुलिस थाना अब अपराधियो के लिये ऐशगाह बन गया है। बालोतरा थाने में फरियादियो ओर पीडि़त लोगो को राहत मिले या नही मिले पर अपराधियो के लिये लागत मुल्य से कुछ अधिक कीमत पर सभी सुविधांए थाने में सहज ही उपलब्ध हो रही है। थाने के हवालात में बंद केदियो के लिये घर के खाना उपलब्ध करवाना हो या बीड़ी-सीगरेट- गुटखां सब कुछ टेक्स देने पर सेल में होम डीलीवरी आ जाता है। सोमवार की शाम को बालोतरा पुलिस जब वाहन चोर गिरोह को पकड़ने के मामले में अपनी तारिफ के कसीदे पढ रही थी उस समय दुसरी ओर थाने के हवालात में बंद वाहन चोर बीडि़या फूंक कर गम को गलत करने में लगे हुए थे। अचानक केमरे का फ्लेश सेल में पड़ने पर बीड़ी पी रहे अपराधी घबरा गये ओर बीड़ी को छूपा दिया। सेल के बाहर ताला रखने वाले स्थान पर भी माचिस की दो डिब्बीयां रखी हुई थी। सेल में बीड़ी पीते अपराधी के केमरे में केद होने से गेट पर तैनात संतरी भी हड़बड़ा गया। संतरी को पूछा गया कि सेल मे बीड़ी कैसे पहुची तो उसने कहा कि उसे पता नही है, क्योकि वो तो अभी - अभी आया है। वही मामले में बालोतरा पुलिस के आला अधिकारी भी किसी प्रकार की टिप्पणी करने से बच रहे है। ऐसे में बालोतरा थाने में राम राज्य है ऐसा कहा जाये तो अतिश्योक्ति नही होगी।




11:41 AM | 0 comments | Read More

जाने Heart Attack के आयुर्वेदिक ईलाज को




   भगवान न करे कि आपको कभी जिंदगी मे heart attack आए ! लेकिन अगर आ गया तो आप जाएँगे डाक्टर के पास ! और आपको मालूम ही है एक angioplasty आपरेशन आपका होता है! angioplasty आपरेशन मे डाक्टर दिल की नली मे एक spring डालते हैं ! उसको stent कहते हैं ! और ये stent अमेरिका से आता है और इसका cost of production सिर्फ 3 डालर का है ! और यहाँ लाकर लाखो रुपए मे बेचते है आपको ! 
   आप इसका आयुर्वेदिक इलाज करे बहुत बहुत ही सरल है ! पहले आप एक बात जान ली जिये ! angioplasty आपरेशन कभी किसी का सफल नहीं होता !! क्यूंकि डाक्टर जो spring दिल की नली मे डालता है !! वो spring बिलकुल pen के spring की तरह होता है ! और कुछ दिन बाद उस spring की दोनों side आगे और पीछे फिर blockage जमा होनी शुरू हो जाएगी ! और फिर दूसरा attack आता है ! और डाक्टर आपको फिर कहता है ! angioplasty आपरेशन करवाओ ! और इस तरह आपके लाखो रूपये लुट जाते है और आपकी ज़िंदगी इसी मे निकाल जाती है ! ! !

अब पढ़िये इसका आयुर्वेदिक इलाज !!
   हमारे देश भारत मे 3000 साल एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे उनका नाम था महाऋषि वागवट जी ! उन्होने एक पुस्तक लिखी थी जिसका नाम है अष्टांग हृदयम!! और इस पुस्तक मे उन्होने ने बीमारियो को ठीक करने के लिए 7000 सूत्र लिखे थे ! ये उनमे से ही एक सूत्र है !!
   वागवट जी लिखते है कि कभी भी हरद्य को घात हो रहा है ! मतलब दिल की नलियो मे blockage होना शुरू हो रहा है ! तो इसका मतलब है कि रकत (blood) मे acidity(अमलता ) बढ़ी हुई है !

अमलता आप समझते है ! जिसको अँग्रेजी मे कहते है acidity !! अमलता दो तरह की होती है ! एक होती है पेट कि अमलता ! और एक होती है रक्त (blood) की अमलता !!
   आपके पेट मे अमलता जब बढ़ती है ! तो आप कहेंगे पेट मे जलन सी हो रही है !! खट्टी खट्टी डकार आ रही है ! मुंह से पानी निकाल रहा है ! और अगर ये अमलता (acidity)और बढ़ जाये ! तो hyperacidity होगी ! और यही पेट की अमलता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त मे आती है तो रक्त अमलता(blood acidity) होती !!
    और जब blood मे acidity बढ़ती है तो ये अमलीय रकत (blood) दिल की नलियो मे से निकल नहीं पाता ! और नलिया मे blockage कर देता है ! तभी heart attack होता है !! इसके बिना heart attack नहीं होता !! और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं ! क्यूंकि इसका इलाज सबसे सरल है !!

इलाज क्या है ?
   वागबट जी लिखते है कि जब रकत (blood) मे अमलता (acidty) बढ़ गई है ! तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो छारीय है ! आप जानते है दो तरह की चीजे होती है ! अमलीय और छारीय !!
(acid and alkaline )

अब अमल और छार को मिला दो तो क्या होता है ! ?????
((acid and alkaline को मिला दो तो क्या होता है )?????

neutral होता है सब जानते है !!
   तो वागबट जी लिखते है ! कि रक्त कि अमलता बढ़ी हुई है तो छारीय(alkaline) चीजे खाओ ! तो रकत की अमलता (acidity) neutral हो जाएगी !!! और फिर heart attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं !! ये है सारी कहानी !!

  अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजे है जो छारीय है और हम खाये ? आपके रसोई घर मे सुबह से शाम तक ऐसी बहुत सी चीजे है जो छारीय है ! जिनहे आप खाये तो कभी heart attack न आए !
   सबसे ज्यादा आपके घर मे छारीय चीज है वह है लोकी !! english मे इसे कहते है bottle gourd !!! जिसे आप सब्जी के रूप मे खाते है ! इससे ज्यादा कोई छारीय चीज ही नहीं है ! तो आप रोज लोकी का रस निकाल-निकाल कर पियो !! या कच्ची लोकी खायो !!
   स्वामी रामदेव जी को आपने कई बार कहते सुना होगा लोकी का जूस पीयों- लोकी का जूस पीयों ! 3 लाख से ज्यादा लोगो को उन्होने ठीक कर दिया लोकी का जूस पिला पिला कर !! और उसमे हजारो डाक्टर है ! जिनको खुद heart attack होने वाला था !! वो वहाँ जाते है लोकी का रस पी पी कर आते है !! 3 महीने 4 महीने लोकी का रस पीकर वापिस आते है आकर फिर clinic पर बैठ जाते है !
   वो बताते नहीं हम कहाँ गए थे ! वो कहते है हम न्योर्क गए थे हम जर्मनी गए थे आपरेशन करवाने ! वो राम देव जी के यहाँ गए थे ! और 3 महीने लोकी का रस पीकर आए है ! आकर फिर clinic मे आपरेशन करने लग गए है ! और वो आपको नहीं बताते कि आप भी लोकी का रस पियो !!
    रामदेव जी बताते है वे भी वागवट जी के आधार पर ही बताते है !! वागवतट जी कहते है रकत की अमलता कम करने की सबे ज्यादा ताकत लोकी मे ही है ! तो आप लोकी के रस का सेवन करे !!

कितना करे ? रोज 200 से 300 मिलीग्राम पियो !!

कब पिये ?
   सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद ) पी सकते है !! या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते है !!
   इस लोकी के रस को आप और ज्यादा छारीय बना सकते है ! इसमे 7 से 10 पत्ते के तुलसी के डाल लो
तुलसी बहुत छारीय है !! इसके साथ आप पुदीने से 7 से 10 पत्ते मिला सकते है ! पुदीना बहुत छारीय है ! इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले ! ये भी बहुत छारीय है !
   लेकिन याद रखे नमक काला या सेंधा ही डाले ! वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले !! ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है !!!!
   तो मित्रो आप इस लोकी के जूस का सेवन जरूर करे !! 2 से 3 महीने आपकी सारी heart की blockage ठीक कर देगा !! 21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा !!!
   कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी !! घर मे ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा !! और आपका अनमोल शरीर और लाखो रुपए आपरेशन के बच जाएँगे !!



11:36 AM | 0 comments | Read More

क्या आप जानते है : मूत्र से तैयार होगी बिजली

   इंग्लैंड।। दुनिया भर में रिसर्चर कोशिश कर रहे हैं कि जितना हो सके अक्षय ऊर्जा के स्रोतों को इस्तेमाल किया जा सके। इस दिशा में इंग्लैंड के रिसर्चर अब मूत्र को इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। दक्षिण पश्चिमी इंग्लैंड में ब्रिस्टल रोबोटिक्स प्रयोगशाला 'वेट लैब' में प्रवेश करने पर शौचालय जैसी गंध आती है। इस प्रोजोक्ट पर
   काम कर रहे वैज्ञानिक लोआनिस लेरोपोलोस के मुताबिक यह रिसर्च में इस्तेमाल हो रहे एजेंट्स की गंध है। वैज्ञानिक इस बात को पहले से जानते हैं कि सूक्ष्म जीव विद्युत पैदा कर सकते हैं। ये सूक्ष्म जीव जब खाद्य पदार्थों का विघटन करते हैं तो इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन मुक्त होते हैं। इनकी मदद से विद्युत सर्किट में विद्युत प्रवाह संभव है।
   पिछले एक दशक से लेरोपोलोस यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इससे रोबोट्स को फायदा हो सकता है, लेकिन हाल ही में उन्होंने महसूस किया कि मूत्र से विद्युत निर्माण भी संभव हो सकता है। उन्होंने बताया, 'रिसर्चरों ने पिछले दस सालों में घास, घोंघे का कवच, मरे हुए कीड़ों और सड़े हुए फलों का इस्तेमाल किया। लेकिन हाल में जब उन्होंने यही प्रयोग मूत्र के साथ किया तो परिणाम चौंकाने वाले थे। उन्होंनो पाया कि सूक्ष्म जीवाणुओं में जब ताजा मूत्र मिलाया जाता है तो तीन गुना ज्यादा ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने एक आसान सा सिस्टम तैयार किया। उन्होंने यूरिनल को जीवाणुओं से गुजारते हुए यूएसबी पोर्ट से कनेक्ट किया। उन्होंने पाया कि मोबाइल फोन जैसे छोटे उपकरणों को चार्ज करने के लिए प्रयाप्त ऊर्जा का उत्पादन हो पाया। उनकी इस खोज से खुश होकर बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने इस अविष्कार को असल दुनिया में इस्तेमाल योग्य बनाने के लिए प्रयोगशाला को आर्थिक मदद देने की मंजूरी दी। लेरोपोलोस के मुताबिक वे कोशिश कर रहे हैं कि वे इसे बड़े स्तर पर सुचारू बना सकें।
   गेट्स फाउंडेशन ने रिसर्चरों की टीम को भारत जाकर इस यंत्र को दिखाने के लिए भी मदद दी है। इस खोज को 'यूरीनेक्ट्रिसिटी' नाम दिया गया है। 'वॉटर एड अमेरिका' संस्था की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सरीना प्रबासी के मुताबिक यूरीनेक्ट्रिसिटी विकासशील इलाकों में सेहत और स्वास्थ संबंधी मामलों में भी मददगार साबित हो सकती है। ग्रामीण इलाकों में मल, मूत्र और कचरे से निपटना भी बड़ी समस्या है। उनके मुताबिक इस दिशा में भी लोगों को राहत मिलेगी। ब्रिस्टल में ही यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट इंग्लैंड के प्रोफेसर जॉन ग्रीनमैन ऐसे सूक्ष्म जीवों पर काम कर रहे हैं जो पानी को साफ कर सकें। अगर इन दो तकनीकों को मिला दिया जाए तो भविष्य के लिए 'सुपर टॉयलेट' का निर्माण हो सकता है।
   ग्रीनमैन के मुताबिक मूत्र को फसल पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। लेकिन अगर इसे सूक्ष्म जीवों द्वारा की जाने वाली विघटन प्रक्रिया से गुजारा जाए तो एक तरफ तो विद्युत पैदा की जा सकती है, दूसरे इस प्रक्रिया से होकर निकलने वाला पानी काफी साफ होता है जिसे फसल के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। संभव है कि कई लोगों को यह तकनीक बहुत न भाए क्योंकि मल मूत्र के बारे में लोगों की धारणाएं अच्छी नहीं हैं। लेकिन अगर इससे पर्यावरण और मानव जाति को फायदा हो, तो हो सकता है लोगों की इस पर आपत्ति भी समय के साथ खत्म हो जाए।
11:32 AM | 0 comments | Read More

नैतिकता के पैमाने से टीओआई और दीपिका दोनों ही बाहर

   टाइम्स ऑफ इंडिया के ऑनलाइन एंटरटेनमेंट सेक्शन पर डाले गए वीडियो और ट्वीट पर अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की आपत्ति के बाद उपजा विवाद अभी थमा नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया बचाव में अपने तर्क दे रहा है और दीपिका पादुकोण अपने तर्क पर अडिग हैं। ग्लैमर की दृष्टि से टाइम्स ऑफ इंडिया सही नजर आ रहा है और एक स्त्री के नजरिये से अभिनेत्री दीपिका पादुकोण सही नजर आ रही है, लेकिन नैतिकता के मापदंड पर दोनों ही खरे उतरते नजर नहीं आ रहे हैं।
   टाइम्स ऑफ इंडिया और अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के विवाद की बात करने से पहले जया बच्चन की बात करते हैं। पिछले दिनों हुए एक इवेंट में एक फोटो जर्नलिस्ट ने ऐश्वर्या राय से यह कह दिया कि ऐश्वर्या एक पोज दे दीजिए, इस पर जया बच्चन भड़क ही नहीं गईं, बल्कि यह तक कह दिया कि क्या ऐश्वर्या-ऐश्वर्या बुला रहे हो, तुम्हारी क्लास में पढ़ती थी क्या?, इसी तरह एक बार ऐश्वर्या राय को ऐश बुलाने पर उनके पति अभिषेक बच्चन ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए कह दिया था कि ऐश नहीं, ऐश्वर्या है नाम, जबकि ऐश्वर्य राय, उनके पति अभिषेक बच्चन और ससुर अमिताभ बच्चन साथ फिल्म कर चुके हैं और कजरारे-कजरारे जैसा सुपर हिट गाना देकर लाखों लोगों की सीटियाँ बटोर चुके हैं। उस गाने पर सीटियाँ बजते समय अच्छा लग रहा था, क्योंकि टीआरपी बढ़ रही थी, जिससे पैसा मिलता है और जब काम निकल गया, तब अचानक यह आशा करने लगे कि लोग अब वो सब ध्यान में भी न लायें।
   इसी तरह पिछले साल अभिनेत्री कैट्रीना कैफ और अभिनेता रणबीर कपूर के कुछ निजी फोटो किसी तरह लीक हो गये थे, तब दीपिका पादुकोण ने कहा था कि एक पब्लिक फिगर होने के नाते कैट को खुद सावधान रहना चाहिए था। इसके बाद एक फिल्म के प्रमोशन इवेंट में कैट्रीना ने फोटोग्राफर्स से निवेदन किया कि वे जब तक कुर्सी पर बैठें, तब तक उनकी कोई फोटो न क्लिक की जाये। कैट्रीना की भावनाओं को फोटोग्राफर्स ने समझा और उनके तब तक फोटो न खींचें, जब तक कैट्रीना स्वयं फोटो देने को तैयार नहीं हो गईं।
   अब बात करते हैं टाइम्स ऑफ इंडिया और अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के विवाद की, तो सबसे पहले तो टाइम्स ऑफ इंडिया ने निःसंदेह गलत किया। साइट पर लोगों को खींचने के लिए इस तरह की हरकतें इतने बड़े मीडिया समूह को तो बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए। गोला और तीर बनाना किसी भी तरह सही नहीं ठहराया जा सकता। दीपिका की आपत्ति टाइम्स ऑफ इंडिया के प्रति सही भी है, लेकिन वह स्वयं को जिस तरह पेश कर रही हैं, वो उनकी ओर से अति कही जा सकती है, क्योंकि व्यक्ति के तौर पर दीपिका ऐसी शख्सियत नहीं हैं, जिसे लोग चरित्रवान के तौर पर आदर्श मानें।
   पब्लिक डोमेन में उनके ऐसे-ऐसे फोटो और ऐसे-ऐसे किस्से मौजूद हैं, जिन्हें भारतीय समाज में अच्छी नजर से नहीं देखा जाता। उनके वे फोटो परिवार के लोग साथ बैठ कर नहीं देख सकते। कानूनी दृष्टि से वे बालिग हैं, स्वतंत्र हैं, कलाकार हैं, लेकिन बात नैतिकता की होगी, तो वे भी पूरी तरह खरी उतरती नजर नहीं आ रही हैं। दीपिका ने फेसबुक पर लिखा कि “करैक्टर की डिमांड होती है कि मुझे सिर से लेकर पैर तक ढके रहना है या पूरी तरह नग्न होना है। ऐसा करना या न करना मेरी च्वाइस पर निर्भर करता है। समझिए कि यह “रोल” है न कि “रीयल”। और यह मेरा काम है कि जो रोल मैंने चुना है, उसे मैं पूरी तरह से निभाऊं।”, इस पर टाइम्स ऑफ इंडिया ने जवाब दिया है कि “दीपिका, हम आपके “रील” बनाम “रीयल” के तर्क को स्वीकार करते हैं, लेकिन उसका क्या, जब आपने कई बार स्टेज पर नाचते हुए, मैगजीन कवर्स के लिए पोज करते हुए या मूवीज के प्रमोशनल फंक्शंस पर फोटो शूट करवाते हुए ऑफ स्क्रीन अंग प्रदर्शन किया है?, उस वक्त आप क्या “रोल” निभा रही होती हैं? यह पाखंड क्यों ?
   टाइम्स ऑफ इंडिया ने सवाल सही किया है, इसी तरह सवाल यह है कि दीपिका और उन जैसी तमाम अभिनेत्रियाँ ऐसे रोल करती ही क्यूं हैं, जिनमें एक सीमा से अधिक शरीर से कपड़े हटाने पड़ते हैं? टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपने बचाव में यह भी लिखा है कि ऑन लाइन वर्ल्ड अखबारों से बहुत अलग है और यहां पर सनसनीखेज हेडलाइन्स बड़ी सामान्य सी बात हैं, तो सवाल यह उठता है कि इस सामान्य सी बीमारी की गिरफ्त में टाइम्स ऑफ इंडिया क्यूं आया? टाइम्स ऑफ इंडिया ने यह सवाल भी अच्छा किया है कि इवेंट्स में ली गईं तस्वीरों को पहले उन्हें दिखाया जाये और फिर छापा जाये क्या? जाहिर है कि यह संभव ही नहीं है, इसका एक ही समाधान है कि दीपिका सहित तमाम अन्य अभिनेत्रियाँ रील और रीयल लाइफ में ऐसे कपड़े पहनें, जिनके फोटो देखते समय वे स्वयं असहज महसूस न करें।
   फिल्म कैरियर शुरू करने वाले तमाम अभिनेता व अभिनेत्री अच्छे अखबारों और मैगजीन में अपनी स्टोरी और फोटो प्रकाशित कराने के लिए सैटिंग करते नजर आते हैं। आज कल तो खबर प्लांट करने वाली एजेंसी भी हैं, जो तमाम तरह की कहानियाँ गढ़ कर टीआरपी दिलाती हैं। दीपिका की ही बात करें, तो उन्होंने भी शराब के एक ब्रैंड के लिए 'कैलेंडर गर्ल' के रूप में अपने कैरियर का शुभारंभ किया था। अब अचानक उनमें स्त्री भाव उत्पन्न हो गया और स्त्री की गरिमा से पूरे प्रकरण को जोड़ने लगी हैं, तो ऐसा थोड़े ही होता है। समाज किसी के बारे में ऐसे ही कोई सोच नहीं बना लेता। हाव-भाव, चाल-ढाल ही नहीं, बल्कि संपूर्ण व्यक्तित्व से इमेज बनती है और उनकी इमेज एक आदर्श स्त्री वाली नहीं, बल्कि सेक्सी हिरोइन वाली है, जिसके बारे में अन्य तमाम तरह के किस्से भी अखबारों और मैगजीन में आये दिन छपते रहते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया का दीपिका के फोटो पर गोला और तीर बनाना गलत है, लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया भी सानिया मिर्जा के फोटो के साथ ऐसी हरकत नहीं कर सकता। क्यूं नहीं कर सकता?, यह दीपिका सहित अन्य तमाम अभिनेत्रियों के लिए आत्म मंथन का विषय हो सकता है। यह विवाद आज नहीं, तो कल थम जायेगा, लेकिन इस विवाद से एक सकारात्मक बात निकली है कि फिल्म लाइन से जुड़े लोग इस बिंदु पर एक बार सोचें कि वे टीन एजर्स के साथ संपूर्ण समाज को क्या दे रहे हैं?

(बी.पी. गौतम)
स्वतंत्र पत्रकार

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भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर फैलाये जा रहे भ्रम से सावधान

Written By Bureau News on Monday, September 22, 2014 | 8:08 PM

  (1) विवादित मुख्य क्षेत्र का नाम चुमार सेक्टर है।  (विवादित चीन की ओर से बताया जाने वाला) इस पूरे क्षेत्र में भारतीय सेना का कब्ज़ा है चीन इस जगह अपना कब्ज़ा बताता है, अभी यह क्षेत्र पूर्णतया भारतीय जवानो के कब्जे में है यहाँ पर चीनी सैनिक निर्माण कराने की कोशिश कर रहे है, सेना के उच्च अधिकारियों के बीच कल तक‪ ‎दो फ्लैग मीटिंग‬ हो चुकी है, चुमार क्षेत्र से चीनी सेना दो सौ मीटर दूर है भारतीय सीमा में कदापि नहीं है, हाँ उनके द्वारा दबाब बनाया जा रहा है दोनों सेनाओं के पाँच सौ सैनिक इस क्षेत्र में मौजूद है (चुमार लेह से करीब 300 किलोमीटर दूर पास हिमांचल की सीमा पर स्थित है) यह पहला भरम फैलाया जाता है कि चीन की सेना अंदर घुस आयी है।
(2)  लद्दाख के ‪‎डेमचक‬ में चीनी खाना बदोश जाति 'रेबोस' के कुछ लोग सीमा के अंदर आ गए है लेकिन उनको हटा दिया गया है वहाँ स्थिति तनाव पूर्ण है लेकिन नियंत्रण में है क्षेत्र पर भारतीय सेना का कब्ज़ा है लेकिन चीनी सेना से किसी प्रकार का भय भी नहीं है भारतीय जवान मोर्चा टक्कर से लिए है।  
अब क्या है भारत सरकार के प्रयास ?
1. अमेरिकन ग्लोबमास्टर फाईटर की तैनाती की जा रही है जो पूर्वती युद्ध में सबसे बड़ी कमी थी की खाद्य रसद और अन्य चीजे पहाड़ी क्षेत्र में नहीं जा पा रही थी वह समस्या खतम हो गयी है यह फाईटर प्लेन इसी काम के लिए है।
2. चीन और भारतीय उभय समुद्री क्षेत्र में जापानी ‪एम्फीबियास‬ लड़ाकू विमान (समुन्दर के शहंशाह विमान की तैनाती से पुरानी सैन्य अक्षमता दूर हो गयी है भारत हर तरह से जबाब देने में सक्षम है, सरकार पर अपना भरोसा बनाए रहें हमारी सरकार है कभी देश का जानबूझ कर अहित नहीं करेगी।
    भ्रम फैलाने वालों से बचें जो कश्मीर को जनमत संग्रह का विषय बताते है, वो चीन की सेना के भारत में घुसने का इन्तजार करते है और भयंकर खुशी मनाते है आप इनकी निम्न प्रकृति समझे जो देश पे संकट आने पर प्रसन्न होते है।




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अलका लांबा के खिलाफ मानहानि का केस करेंगे बिन्नी

   नई दिल्ली।। आम आदमी पार्टी की मेंबर और डूसू की पूर्व अध्यक्ष रह चुकीं अलका लांबा और पार्टी से निकाले जा चुके लक्ष्मी नगर के विधायक विनोद कुमार बिन्नी के बीच फेसबुक पर टिप्पणी को लेकर शुरू हुआ विवाद कोर्ट तक पहुंचता नजर आ रहा है। अलका लांबा ने इस मामले में पुलिस कंप्लेंट दर्ज कराते हुए बिन्नी के
   खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं, बिन्नी ने इसे अपनी मानहानि का मामला बताते हुए सोमवार को अलका लांबा के खिलाफ कोर्ट में मानहानि का केस दाखिल करने की बात कही। रविवार को बिन्नी ने इस मामले पर सफाई दी। दूसरी ओर 'आप' के महिला मोर्चे की कार्यकर्ताओं ने अलका के खिलाफ कथित रूप से बिन्नी की फेसबुक पर की गई अश्लील टिप्पणियों के खिलाफ बिन्नी के घर के बाहर प्रदर्शन किया। बिन्नी का दावा है कि यह प्रदर्शन पुलिस से इजाजत लिए बिना किया गया है।
   इस गैरकानूनी प्रदर्शन के खिलाफ भी उन्होंने न्यू अशोक नगर थाने में शिकायत दर्ज करवाते हुए प्रदर्शनकारियों को लीड कर रहीं महिला मोर्चे की अध्यक्ष बंदना कुमारी व अन्य के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। शुक्रवार को अलका लांबा ने कोटला मुबारकपुर थाने में कंप्लेंट दर्ज कराई थी कि बिन्नी समेत कुल 37 लोगों ने फेसबुक पेज पर उनके खिलाफ लिखी गईं अश्लील टिप्पणियों को लाइक और शेयर किया है। इनमें बिन्नी का नाम भी शामिल था। अलका के अलावा 'आप' ने भी अश्लील टिप्पणी के पीछे बिन्नी का हाथ होने की आशंका जताई थी।
   इस पर रविवार को सफाई देते हुए बिन्नी ने बताया कि किसी ने फेसबुक पर उनके नाम से फर्जी प्रोफाइल बना रखा है, जिसकी शिकायत उन्होंने पुलिस में दे दी थी। उन्होंने सीबीआई, सीआईडी व फेसबुक समेत कुछ अन्य एजेंसियों को इस संबंध में शिकायत दर्ज कराते हुए फर्जी अकाउंट बंद करवाने की मांग भी की थी।
8:03 PM | 0 comments | Read More

महाराष्ट्र में गठबंधन का झंझट

   पश्चिम बंगाल की तरह महाराष्ट्र भी ऐसा राज्य है जहां की पार्टियां दूसरे राज्यों की पार्टियों से ज्यादा संगठित और कैडर बेस्ड है. शिवसेना हो.. मनसे हो.. बीजेपी हो एनसीपी हो आरपीआई हो या फिर कांग्रेस .. जमीनी स्तर तक इनके संगठन हैं. यही वजह है कि गठबंधन को लेकर इतनी रस्साकस्सी हो रही है.
   हर पार्टी पर अपने कार्यकर्ताओं और जमीनी नेताओं का दबाव है. हर दल के कार्यकर्ता यही चाहते हैं कि चुनाव अकेले ही लड़ा जाए.. ताकि ज्यादा से ज्यादा नेताओं को चुनाव लड़ने का मौका मिले.. चुनाव से पहले की यह मानसिकता होती है कि हर पार्टी और नेता को लगता है कि वो आसानी से चुनाव जीत सकता है. महाराष्ट्र में किचकिच की सबसे बड़ी वजह यह है कि हर पार्टी को पता है कि किसी भी पार्टी को अकेले बहुमत नहीं मिलने वाला है.. इसलिए जिसके पास ज्यादा सीटें होगी चुनाव के बाद वो उतना ही महत्वपूर्ण होगा.. क्योंकि चुनाव के बाद किसकी सरकार बनेगी किस पार्टी का मुख्यमंत्री होगा ये अभी कोई नहीं बता सकता.. क्योंकि गठबंधन का असली खेल चुनाव के बाद खेला जाएगा...
  कांग्रेस का मनोबल टूटा हुआ है.. यही वजह है कि एनसीपी ने दबाव बढ़ा दिया है.. उनका तर्क है कि वो लोकसभा में ज्यादा सीटे लाई है इसलिए पार्टी को ज्यादा से ज्यादा सीट मिलना चाहिए.. वहीं काग्रेस को पता है कि नतीजे के बाद एनसीपी साथ रहेगी या नहीं इस पर कोई भरोसा नहीं किया जा सकता है इसलिए कांग्रेस ज्यादा सीटें नहीं देना चाहती.
   शिवसेना अब तक गठबंधन में बड़े भाई का रोल अदा करती रही.. लेकिन बाला साहेब के जाने के बाद शिवसेना वो पार्टी नहीं रही जो वो हुआ करती थी.. इस सच्चाई को उद्दव ठाकरे कबूल नहीं करना चाहते हैं.. वो अपने बेटे को भविष्य के मुख्यमंत्री के रुप में देखना चाहते हैं इसलिए उन्हें बीजेपी को बराबरी का दर्जा देने में गुरेज है. साथ ही उन्हें यह डर भी सता रहा है कि अगर दोनों ही पार्टी बराबर सीटों पर लड़ी तो बीजेपी के पास ज्यादा सीटें आ जाएगी. मुख्यमंत्री फिर बीजेपी का बन जाएगा. दोनों के बीच अगर कोई सुलह होती है तो वो इसी बात पर होगी कि चुनाव में जीतने के बाद मुख्यमंत्री शिवसेना का होगा.. अगर इस पर बीजेपी नहीं मानती है तो गठबंधन का टूटना तय है.
   यह अमित शाह के लिए परीक्षा की घड़ी है. एक तरफ नितिन गडकरी हैं जो गठबंधन के समर्थक नहीं है.. वो चाहते हैं कि बीजेपी अकेले ही सभी सीटों पर लड़े.. और चुनाव के बाद जिस किसी पार्टी समर्थन मिले उसे लेकर सरकार बनाई जाए. दूसरी तरफ 25 साल का गठबंधन है. पार्टी बंटी हुई है.. ज्यादातर कार्यकर्ता चाहते हैं कि शिवसेना से अलग होकर चुनाव लड़ा जाए. उन्हें विश्वास है कि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी..और सरकार बनाने के लिए आजाद होगी. साथ ही शिवसेना से उनका सदा के लिए पिंड छूट जाएगा.
   अमित शाह की परेशानी ये है कि अगर वो अकेले लड़ने का फैसला करते हैं तो उनकी नेतृत्वक्षमता पर सवाल उठेगा कि वो 25 साल के गठबंधन को एकजुट रखने में विफल हो गए.. और अगर वो गठबंधन के लिए हामीं भरते हैं तो उनपर महाराष्ट्र के नेताओं और कार्यकर्ताओं की उम्मीदों पर पानी फेरने का आरोप लगेगा.. मतलब यह कि अमित शाह एक ऐसी परिस्थिति में फंसे हैं जिसमें वो चित भी हारेंगे और पट भी हारेंगे..
   अगर महाराष्ट्र में बीजेपी सरकार बना लेती है. तो उपचुनावों में हारने का दाग एक झटके में धुल जाएगा और कहीं अगर बीजेपी हार गई तो मीडिया बीजेपी की उल्टी गिनती शुरु कर देगा. .

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धर्मरक्षा समितियां रखेगी गरबा मण्डलों पर निगरानी

   धार।। धर्मजागरण के विभाग संयोजक गोपाल शर्मा ने बताया कि 25 सितम्बर से प्रारम्भ होने जा रहे नवदुर्गा उत्सव के दौरान गरबा मण्डलो पर धर्मरक्षा समितियां निगरानी रखेगी। उन्होने बताया कि गरबा स्थल पर मुस्लिम समुदाय के युवा अकेले नही आ सकेगें। यदि उन्हें गरबा देखना है तो माँ-बहनो को साथ लाना होगा। यह व्यवस्था जिले में सभी गरबा मण्डलों पर लागू होगी। गरबा मण्डलों को भी सावधानी रखने के लिए कहा गया है।
6:31 PM | 0 comments | Read More

शादी-विवाह में गौरी-गणेश की पूजा न करें: स्वामी प्रसाद मौर्य


   लखनऊ।। बसपा के राष्ट्रीय महासचिव व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपील की है कि शादी-विवाह में गौरी-गणेश की पूजा न करें। यह मनुवादी व्यवस्था में दलितों व पिछड़ों को गुमराह कर उनको शासक से गुलाम बनाने की चाल है।
    उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में इंसान का स्थान नहीं है। इस धर्म में अनुसूचित जातियां, जनजातियां व पिछड़े सब शूद्र हैं। ये ढोल, गंवार, शूद्र, पशु...गाने वाले हैं। पूजंहि विप्र सकल गुणहीना.. का उपदेश देने वाले हैं।
   उन्होंने कहा कि ये सुअर को वराह भगवान कहकर सम्मान दे सकते हैं। गधे को भवानी, चूहे को गणेश, उल्लू को लक्ष्मी व कुत्ते को भैरो की सवारी कहकर पूज सकते हैं, लेकिन शूद्र को सम्मान नहीं दे सकते। स्वामी प्रसाद रविवार को सीतापुर रोड के नजदीक ताड़ीखाना में कर्पूरी ठाकुर भागीदारी महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
   मौर्य ने सम्राट महापदमनंद व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर का उदाहरण देते हुए कहा कि वास्तव में हम शासक हुआ करते थे लेकिन मनुवादियों ने ‘डिवाइड एंड रूल’ का फार्मूला अपनाया, जिससे गुलाम बन गए।
  उन्होंने कहा कि इन्होंने एससी, एसटी व ओबीसी को अलग-अलग कर जातियों में बांट दिया। हम इनके तिकड़म के शिकार होते रहे। नंद, सविता व सेन समाज के लोगों को समझाने वाले अंदाज में मौर्य ने कहा कि ये गोबर के टुकड़े पर सिंदूर चढ़वाते हैं, पान-सुपारी चढ़वाते हैं..यहां तक कि पैसा भी चढ़वाते हैं। ...हमारे समाज के डॉक्टर हों या इंजीनियर अथवा प्रोफेसर.. ये चढ़ा भी देते हैं। चढ़वाने वाले कौन होते हैं, अंगूठा टेक... हम उनकी मानते रहे वे ठगते रहे।
  मौर्च ने कहा, '...पर गौर करने वाली बात ये है कि मनुवादी व्यवस्था के लोगों ने शूद्रों का दिमाग नापने के लिए गोबर, गणेश का सहारा लिया। ऐसे डॉक्टर, इंजीनियर होने से क्या मतलब जो यह दिमाग न लगाए कि क्या गोबर का टुकड़ा भगवान के रूप में हमारा कल्याण कर सकता है? क्या पान-सुपारी खा सकता है? क्या पैसे ले सकता है। क्या पत्थर की मूर्ति दूध पी सकती है? उन्होंने ऐसा करवाकर बुद्धि नाप ली और मान लिया कि इनसे जो चाहो कराया जा सकता है।'
   मौर्य ने कहा कि पहले बाबा साहब अंबेडकर फिर कांशीराम और अब मायावती दलितों व पिछड़ों को सम्मान दिलाने की लड़ाई लड़ रही हैं। आज सिर्फ वैचारिक रूप से ही बात करने की जरूरत नहीं है। उसे व्यवहारिक रूप से जीवन में उतारने की भी जरूरत है।
  उन्होंने कहा कि यहां बुद्ध की बात और वहां गौरी-गणेश? यदि स्वाभिमान व सम्मान चाहते हैं तो अपने रास्ते पर चलें, दूसरे के नहीं, दूसरे के रास्ते पर चले तो वे लूटते रहेंगे। उन्होंने सवाल किया कि क्या वे अपना शादी-विवाह करेंगे तो उनकी बातों का अनुपालन करेंगे? हो सकता कि किसी शादी में मैं आ भी जाऊं।
  मौर्य ने कहा कि 1980 में इलाहाबाद में पढ़ाई के दौरान मैं इस नतीजे पर पहुंचा कि धर्म के नाम पर गोरखधंधा, लूट चल रहा था। मैंने तय किया कि जिस व्यवस्था में बदहाली है, उसमें कोई संस्कृति, अनुष्ठान व कार्यक्रम नहीं कराऊंगा। जिस व्यवस्था ने हजारों साल तक शूद्र बनाकर रखा हमने 1980 में बहिष्कार कर दिया।
   मौर्य ने पिछड़ों व दलितों की एकता के सियासी फायदे पर नजर गड़ाते हुए कहा कि मनुवादियों की भाषा में दलित व पिछड़े सब शूद्र हैं तो फिर इन्हें अलग क्यों रहना चाहिए। एससी, एसटी व ओबीसी मूल रूप से सब एक हैं। पिछड़े जाति के तमाम लोगों ने अपने नाम केसाथ क्षत्रिय जोड़ने के चक्कर में अपना नुकसान किया। जब जागरूक हुए तो अधिकार मिलने लगा।
6:08 PM | 0 comments | Read More

करोड़पति बनने के लिए उमड़ी भीड़

केबीसी ऑडिशन में एक भी प्रतिभागी नहीं बना विजेता
  अमेठी।। चर्चित टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति का आडिशन गौरीगंज के जवाहर नवोदय विद्यालय में आयोजित हुआ। शो में शामिल होने के लिए सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटी। लेकिन जिले का एक भी प्रतिभागी आगे के लिए क्वालीफाई नहीं कर सका। विद्यालय के बहुउद्देशीय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। पहले लोगों के पास बनाए गए और बाद में नाम व उम्र लिखकर एक बाक्स में पर्चियां डाली गई। पर्चियों के आधार पर चार-चार लोगों को लकी ड्रा के हिसाब से बुलाया गया। पहले राउंड में आए आठ लोगों में से स्क्रीन पर आए एंट्री सवाल का जवाब देने के लिए बजर दबाना था। सबसे पहले बजर दबाने वाले को जवाब का मौका दिया गया। हालांकि उन्होंने सही जवाब दिया। 
   लेकिन हाट सीट पर वे एक भी सवाल का जवाब नहीं दे सके। वहीं अगले राउंड में भी यही हाल रहा। तीनों राउंड तक एक भी प्रतिभागी हाट सीट से किसी भी सवाल का सही जवाब नहीं दे सके। हाट सीट तक पहुंचने वाले सभी प्रतिभागियों को एक-एक कलाई घड़ी सोनी टीवी की ओर से दी गई। शो को अमिताभ बच्चन की तरह होस्ट करने के लिए शिक्षिका अपर्णा यादव व एक अन्य युवक को भी एक-एक घड़ी दी गई। इस मौके पर जितेंद्र, पीके शुक्ला, डा.प्रीतम सिंह, एसपी सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे। नवोदय विद्यालय में आयोजित केबीसी ऑडिशन में सवालों के जवाब देने के लिए बजर के सामने खड़े चुने गए प्रतिभागीकेबीसी कार्यक्रम में शामिल लोग
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साक्षी महाराज के क्षेत्र के मदरसों में साथ पढ़ रहे हिंदू-मुस्लिम

   शुक्लागंज।। मुस्लिम मदरसों को कथित रूप से आतंक सिखाने का अड्डा बताने वाले उन्नाव के बीजेपी सांसद साक्षी महाराज के अपने संसदीय क्षेत्र के शुक्लागंज कस्बे में दो मदरसे ऐसे हैं जहां हिंदू बच्चे भी पढ़ते हैं। यही नहीं, इन मदरसों में आधे से अधिक शिक्षक भी हिंदू है। इस मदरसे में कुछ साल पहले तक संस्कृत भी पढ़ाई जाती थी लेकिन अब
   बच्चों के रुचि न लेने के कारण संस्कृत की पढ़ाई बंद कर दी गई है। उन्नाव जिले का एक छोटा कस्बा है शुक्लागंज, जिसकी सीमायें कानपुर से बिल्कुल सटी हुई हैं। यहां गंगा नदी के किनारे गंगाघाट के पास दो मदरसे हैं। पहला मदरसा नियाजुल उलूम निस्वा और दूसरा दारूल उलूम जियाउल इस्लाम मदरसा। इन दोनो मदरसों में कोई धर्म की दीवार नही है। यहां पढ़ने वाले छात्र और पढाने वाले शिक्षक मुस्लिम और हिंदू दोनों धर्मो के हैं। यहां हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, अरबी सभी भाषाएं पढ़ाई जाती हैं।
   हिंदू बच्चों को उर्दू और अरबी नही पढ़ाई जाती। तीन साल पहले तक यहां अरबी भाषा के साथ संस्कृत भाषा भी पढ़ाई जाती थी लेकिन बच्चों के अभिभावकों के रुचि न लिए जाने के कारण संस्कृत की पढ़ाई बंद हो गई है। वैसे संस्कृत भाषा के शिक्षक अभी भी हैं जो अब हिंदी पढ़ाने का काम कर रहे हैं।
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मोटापा एवं अनेक रोगों से मुक्त होने का अचूक उपाय

मेथी दाना -250 ग्राम,
अजवाइन-100 ग्राम,
काली जीरा-50 ग्राम।
    उपरोक्त तीनो चीज़ों को साफ़ करके हल्का सा सेंक लें ,फिर तीनों को मिलाकर मिक्सर मेंइसका पॉवडरबना लें और कांच की किसी शीशी में भर कर रख लें । रात को सोते समय 1/2 चम्मच पॉवडर एक गिलास कुनकुने पानी के साथ नित्य लें ,इसके बाद कुछ भी खाना यापीना नहीं है ।इसे सभी उम्र के लोग ले सकते हैं फायदा पूर्ण रूप से 80-90 दिन में हो जायेगा ।
लाभ :-
   इस चूर्ण को नित्य लेने से शरीर के कोने -कोने में जमा पड़ी सभी गंदगी (कचरा )मल और पेशाब द्वारा निकलजाता है,
-फ़ालतू चर्बी गल जाती है,
-चमड़ी की झुर्रियां अपने आप दूर हो जाती है, और शरीर तेजस्वी और फुर्तीला होजाता है।
अन्य लाभ इस प्रकार हैं
1. गठिया जैसा ज़िद्दी रोग दूर हो जाताहै ।
2. शरीर की रोग प्रतिकारक शक्ति को बढ़ाता है ।
3. पुरानी कब्ज़ से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है ।
4. रक्त -संचार शरीर में ठीक से होने लगता है, शरीर की रक्त - नलिकाएं शुद्ध हो जाती हैं, रक्त में सफाई और शुद्धता की वृद्धि होती है।
5. ह्रदय की कार्य क्षमता में वृद्धिहोती है ,कोलेस्ट्रोलकम होता है, जिस से हार्ट अटैक का खतरा नहीं रहता |
6. हड्डियां मजबूत होती हैं ,कार्य करने की शक्तिबढ़ती हैं, स्मरण शक्ति में भी वृद्धि होतीहै। थकान नहीं होती है ।
7. आँखों का तेज़ बढ़ता है, बहरापन दूर होता है, बालों का भी विकास होता है,दांत मजबूत होते हैं।
8. भूतकाल में सेवन की गयी एलोपैथिकदवाओं के साइड -इफेक्ट्स से मुक्ति मिलती है।
9. खाना भारी मात्रा में या ज्यादाखाने के बाद भी पच जाता है (इसका मतलब येनहीं है कि आप जानबूझ कर ज्यादा खा ले) ।
10. स्त्रियों का शरीर शादी के बादबेडौल नहीं होता, शेप में रहता है, शादी के बाद होने वालीतकलीफें दूर होती हैं।
11. चमड़ी के रंग में निखार आता है, चमड़ी सूख जाना, झुर्रियां पड़ना आदि चमड़ी के रोगों से शरीर मुक्त रहता है ।
12. शरीर पानी, हवा, धूपऔर तापमान द्वारा होने वाले रोगों से मुक्त रहता है
13. डाइबिटीज़ काबू में रहती है, चाहें तोइसकी दवा ज़ारी रख सकते हैं।
14. कफ से मुक्ति मिलती है, नपुंसकता दूर होती है, व्यक्ति का तेज़ इस से बढ़ता है, जल्दी बुढ़ापा नहीं आता। उम्र बढ़ जाती है |
15. कोई भी व्यक्ति, किसी भी उम्र का हो, इस चूर्ण का सेवन कर सकता है, मात्रा का ध्यान रखें।




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धार्मिक स्थल की आड़ में हो रहा भूमि पर कब्जा

चौकी पुलिस को ग्रामीणों ने दिया शिकायती पत्र
   बांसी/ललितपुर।। धार्मिक स्थलों की आड़ में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा जारी है। बांसी स्थित ग्रामसभा की बेशकीमती जमीन पर कुछ लोग एक धार्मिक स्थल का निर्माण करवा रहे हैं। ग्रामीणों ने बांसी चौकी पुलिस को शिकायती पत्र देकर निर्माणाधीन धार्मिक स्थल हटवाने की मांग की।
    बांसी चौकी पुलिस को दिए गए शिकायती पत्र में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं व ग्रामीणों ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पीछे ग्रामसभा की बेशकीमती जमीन खाली पड़ी हुई है।
    यहां कुछ लोग धार्मिक स्थल बनाने में जुट गए। मौके पर पहुंचे ग्राम प्रधान ने भी बताया कि उक्त जमीन बालिका इंटर कालेज के लिए प्रस्तावित है। इसलिए किसी प्रकार का निर्माण कार्य कराना अवैध है। ग्रामीणों ने बताया कि अगर निर्माणाधीन स्थल नहीं हटाया गया तो आंदोलन किया जाएगा।
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सोयाबीन के है कुछ खास लाभ


    सोयाबीन दाल की एक ऐसी किस्म, जो प्रोटीन से भरपूर है, सोयाबीन है। अधिक मात्रा में प्रोटीन होने के कारण इसका पोषक मान बहुत अधिक होता है। प्रोटीन के साथ-साथ इसमें विटामिन और खनिज तथा विटामिन ‘बी’ काॅमप्लेक्स और विटामिन ‘ई ’ काफी अधिक मात्रा में होता है, जो शरीर निर्माण के लिए आवश्यक एमिनो ऐसिड प्रदान करते हंै। हकीकत तो यह है कि सोयाबीन में दूध, अंडा तथा मांस से भी अधिक प्रोटीन होता है।
-सोयाबीन में लाभदायक रसायन तथा, सैपोनिन, साइटोस्टेरोल तथा फेनोलिक एसिड जैसे कैंसर विरोधी, हृदयाघात विरोधी तथा स्वास्थ्यवर्धक तत्व होते हैं।
-इसमें स्तन कैंसर रोकने तथा अन्य स्वास्थ्य लाभ करवाने वाले गुण होते हैं।
-सोयाबीन के बीजों को अंकुरित कर खाने से त्वचा का रंग साफ होता है, शारीरिक वृद्धि तेजी से होती है, कब्ज दूर होता है |
-मधुमेह, त्वचा रोग, हृदय रोग, कैंसर, रक्ताल्पता में यह लाभकारी है।
- त्वचा रोग: सोयाबीन के बीजों को अंकुरित कर खाने से एग्ज़िमा और अन्य त्वचा रोग ठीक होते हैं।
-मधुमेह: सोयाबीन का दूध पीने से, या अंकुरित सोयाबीन खाने से मधुमेह के रोगियों को लाभ होता है, क्योंकि इसमें स्टार्च नहीं के बराबर होता है।
-रक्ताल्पता: सोयाबीन में लोहा भी बहुत अधिक मात्रा में होता है। इसलिए रक्त की कमी को पूरा करने में यह अधिक लाभकारी है। जिन रोगियों की पाचन शक्ति कमजोर है, उन्हें सोयाबीन के दूध का उपयोग करना चाहिए।
-हृदय रोग: क्योंकि सोयाबीन में कोलेस्ट्रोल नहीं होता, इसलिए हृदय रोगियों के लिए सोयाबीन लाभकारी है। दिल को ताकत देता है।
-यदि व्यक्ति इसका नियमित सेवन करें तो लंबे समय तक युवा भी बना रह सकता है।
-रजोनिवृत्ति के दौरान सोयाबीन खाएं |
- १० किलो गेहू के आटे में १ किलो सोयाबिन का आटा मिलाने से शक्ति वर्धक बन जाता है |
दूध बनाना -
    दूध बनाने के लिए सोयाबीन को कम से कम 12 घंटे भिगो कर, फिर उसका छिलका उतार कर, अच्छी तरह महीन पीस कर पेस्ट बना कर, 3 गुना पानी मिला कर, मंदी आंच पर गर्म करें। उसके बाद महीन कपड़े में छान लेने से दूध तैयार हो जाता है। यह दूध गाय के दूध की तुलना में किसी प्रकार से कम नहीं। बच्चों के लिए यह अत्यंत पौष्टिक है। आंतों को स्वस्थ रखने के लिए यह दूध अत्यंत उपयोगी है। इसकी दही भी स्वास्थ्यवर्धक है।



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भाजपा ने ठुकराया उद्घव ठाकरे का फार्मूला

25 साल पुराने गठबंधन में पड़ रही रार
   नई दिल्ली।। महाराष्ट्र में शिव सेना और भाजपा के बीच तकरार बढ़ गई है और भाजपा ने सीटों के बंटवारे को लेकर उद्धव ठाकरे का नया फॉर्मूला ठुकरा दिया है। शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने 25 साल पुराने गठबंधन को बचाने के लिए अंतिम कोशिश के रूप में एक नया फॉर्मूला दिया था।
  उन्होंने शिव सेना के 151 और भाजपा के 119 सीटों पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था. बाक़ी 18 सीटें वह सहयोगी दलों को देने के लिए तैयार थे। शिव सेना प्रमुख ने कहा कि लोकसभा चुनावों के दौरान उनकी पार्टी ने भाजपा की बात मानी थी इसलिए विधानसभा चुनाव में भाजपा को हमारी बात माननी चाहिए।


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हमें भारत ही रहना है, चीन नहीं बनना - नरेंद्र मोदी

   नई दिल्ली।। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी दौरे से पहले सीएनएन को दिए खास इंटरव्यू में जोर देकर कहा कि यह युग एशिया का है। उन्होंने कहा कि भारत कभी चीन के बराबर था। इसके साथ ही पीएम ने यह भी जोड़ा का भारत और चीन फिलहाल एक रफ्तार से विकास की राह पर हैं। पीएम ने कहा, 'एक वक्त था जब भारत को
   सोने की चिड़ियां कहा जाता था। भारत को कुछ और बनने की जरूरत नहीं है। भारत को भारत रहना जरूरी है। इस देश को कभी सोने की चिड़ियां कहा जाता था। हम हमारा देश नीचे आया है। हम पहले जहां थे वहां से फिसले हैं। लेकिन एक बार फिर से हमें ऊपर जाने का मौका मिला है।' मोदी से सीएनएन पत्रकार फरीद जकारिया ने पूछा था कि क्या भारत चीन बनना चाहता है? इस पर मोदी ने बिल्कुल साफ कहा कि नहीं भारत को भारत ही रहने की जरूरत है।
   जकारिया ने पूछा कि क्या इंडिया चीन से जीडीपी के लेवल पर मुकाबला कर पाएगा? इस पर मोदी ने कहा, 'यदि आप पांचवीं और 10वीं शताब्दी के डीटेल देखें तो पता चलेगा कि भारत और चीन एक रफ्तार विकास की राह पर थे। ग्लोबल जीडीपी में दोनों देशों का योगदान समान रूप में बढ़ रहा था और समान रूप में गिर रहा था। एक बार फिर से एशिया का वक्त आ गया है। इंडिया और चीन दोनों तेजी से एक साथ विकास कर रहे हैं। पीएम बनने के बाद से मोदी उद्यमियों को जोरदार तरीके से आकर्षित कर रहे हैं। मोदी ने कहा कि मुझे लोगों और उनकी प्रतिभा पर काफी भरोसा है। उन्होंने कहा, 'मुझे पक्का भरोसा है कि इंडिया के लोगों में भरपूर प्रतिभा है। अपनी क्षमता पर मुझे कोई शक नहीं है। मुझे 1.25 अरब आबादी की उद्यमशीलता प्रकृति पर गहरी आस्था है। इनमें जबर्दस्त क्षमता है और मैं पूरी तरह से प्रतिबद्ध हूं कि इस क्षमता के दोहन के लिए रोडमैप तैयार किया जाए।

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दाद- खाज हो जाएगा जड़ से साफ आजमाएं ये घरेलु उपाय

  स्कीन से जुड़ी बीमारियां भी कई बार गंभीर समस्या बन जाती है। ऐसी ही एक समस्या है एक्जीमा या दाद पर होने वाली खुजली और जलन दाद से पीडि़त व्यक्ति का जीना मुश्किल कर देती है। अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा ही है तो अपनाएं ये आयुर्वेदिक टिप्स

- दाद पर अनार के पत्तों को पीसकर लगाने से लाभ होता है।
- दाद को खुजला कर दिन में चार बार नींबू का रस लगाने से दाद ठीक हो जाते हैं।
- केले के गुदे में नींबू का रस लगाने से दाद ठीक हो जाता है।
- चर्म रोग में रोज बथुआ उबालकर निचोड़कर इसका रस पीएं और सब्जी खाएं।
- गाजर का बुरादा बारीक टुकड़े कर लें। इसमें सेंधा नमक डालकर सेंके और फिर गर्म-गर्म दाद पर डाल दें।
- कच्चे आलू का रस पीएं इससे दाद ठीक हो जाते हैं।
- नींबू के रस में सूखे सिंघाड़े को घिस कर लगाएं। पहले तो कुछ जलन होगी फिर ठंडक मिल जाएगी, कुछ दिन बाद इसे लगाने से दाद ठीक हो जाता है।
- हल्दी तीन बार दिन में एक बार रात को सोते समय हल्दी का लेप करते रहने से दाद ठीक हो जाता है।
- दाद होने पर गर्म पानी में अजवाइन पीसकर लेप करें। एक सप्ताह में ठीक हो जाएगा।
- अजवाइन को पानी में मिलाकर दाद धोएं।
- दाद में नीम के पत्तों का १२ ग्राम रोज पीना चाहिए।
- दाद होने पर गुलकंद और दूध पीने से फायदा होगा।
- नीम के पत्ती को दही के साथ पीसकर लगाने से दाद जड़ से साफ हो जाते है।
- किसी लोहे की कढ़ाई में 250 मी.ली. सरसों का तेल डालकर उसे उबाला जाये और जब तेल गर्म होकर उबलने लगे तो उसमे 50 ग्राम ताज़ी हरी नीम की पत्तियाँ डाल दे और जब नीम की पत्तियाँ जल कर काली पड़ने लगे तो कढ़ाई को आंच से उतार ले और ठंडा होने पर तेल को छानकर किसी बोतल में रख लें. इसे तेल को प्रतिदिन 3-4 बार एक्जिमा पर लगाने से लाभ मिलता है.
- 20 ग्राम नारियल के तेल में 1 ग्राम देसी कपूर मिलाकर घोल ले. इस तेल को खाज खुजली पर लगाने से लाभ मिलता है. इसी तेल को रात सोते समय दाद पर लगाने से कुछ ही दिनों में दाद ठीक हो जाता है.


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पीलिया का अनोखा इलाज

   असाध्य बीमारियों के इलाज के लिए लोगों का झाड़-फूँक, टोने-टोटके तथा देवी-देवताओं का सहारा लेना एक आम बात है। आज हम आपको आस्था और अंधविश्वास की कड़ी में एक ऐसी जगह ले चलते हैं, जहाँ पीलिया का इलाज करने का एक अनूठा तरीका अपनाया जाता है।
   पीलिया से ग्रस्त मरीजों की भीड़ का यह नजारा किसी डॉक्टर के क्लिनिक का नहीं बल्कि एक मंजीत पाल सलूजा की दुकान का है जो अपनी अनूठी विद्या से पीलिया दूर करने का दावा करते हैं। वे मरीजों के कान पर कागज का कोन बनाकर लगाते हैं और मोमबत्ती के सहारे कागज को जलाते हैं और साथ-साथ गुरुवाणी का उच्चारण करते जाते हैं। मंजीत जी इलाज के पहले गणेशजी की पूजा करना नहीं भूलते। जला हुआ कोन जब कान से हटाया जाता है तो कान के आसपास पीले रंग का पदार्थ इकट्‍ठा हो जाता है। मंजीत पाल के अनुसार यह पीलिया है, जो मरीज के शरीर से बाहर निकलता है।
   उपचार हेतु पहले दिन आने वाले मरीज को साथ में हार-फूल, अगरबत्ती और नारियल लाना आवश्यक होता है। साथ ही यहाँ आने वाले लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार यहाँ चढ़ावा रखकर जाते हैं। मंजीत का कहना है कि वे मरीजों को नि:शुल्क सेवा प्रदान करते हैं। चढ़ावा तो मरीजों की श्रद्धा का प्रतीक मात्र है।
  यहाँ आने वाले मरीजों को भी डॉक्टरी इलाज से ज्यादा इस विद्या पर अधिक विश्वास है। उनका मानना है कि दवा के साथ दुआ के असर से ही इस बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है।
   गुरुवाणी का उच्चारण करते हुए मरीजों का इलाज करने वाले मंजीत का कहना है कि हमारे परिवार को इस विद्या का ज्ञान भगवान की देन है। उनके पिता व दादाजी भी इस अनूठी विद्या से लोगों के दर्द को दूर किया करते थे। वे यहाँ आने वाले मरीजों को एक विशेष दवा, जो कि आयुर्वेदिक और होम्योपैथी दवा का मिश्रण होती है, के ड्राप्स भी पिलाते हैं। वे रोजाना करीब 80 से 90 लोगों का इलाज करने का दावा करते हैं। उनका यह भी कहना है कि वे मरीज को केवल देखकर ही यह अनुमान लगा लेते हैं कि पीलिया उतरने में कितना समय लगेगा।
   मंजीत पाल सलूजा के अनुसार यहाँ डॉक्टरों द्वारा भेजे गए मरीजों के अलावा कई डॉक्टर्स स्वयं यहाँ आकर खुद को व परिजनों का भी इलाज कराते हैं। पीलिया जैसी असाध्य बीमारी के इलाज हेतु इस तरह की विद्या पर विश्वास करना लोगों के अंधविश्वास को प्रकट करता है या इस विद्या के पीछे किसी वैज्ञानिक तरीका होने का अंदाज लगाया जा सकता है।



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पूर्ण शिक्षा बंद का ऐलान

   शिमला।। एसएफआई और विद्यार्थी परिषद ने ज्वाइंट फ्रंट ने पूर्ण शिक्षा बंद का ऐलान कर दिया है, जिसके चलते विश्वविद्यालय और पूरे प्रदेश भर के महाविद्यालयों के छात्रों से आंदोलन में सहयोग देने के लिए अनिश्चितकाल तक कक्षाओं में न जाने और कक्षाओं का बहिष्कार करने को कहा गया है। यह लड़ाई छात्र संगठनों और सरकार के बीच की लड़ाई बन गई है और छात्र संगठन इस लड़ाई को तब तक लड़ेंगे, जब तक कि प्रदेश सरकार छात्रों के समक्ष झुक नहीं जाती और फैसलों को नहीं मानती। एसएफआई और एबीवीपी द्वारा छात्र विरोधी निर्णयों के खिलाफ आंदोलन को मजबूती प्रदान करने के लिए साझा मंच बना लिया है। ज्वाइंट को-आर्डिनेशन कमेटी बनने के बाद पहली बार मीडिया को एक साथ संबोधित करते हुए एक पत्रकारवार्ता के दौरान एसएफआई के राज्य सचिव मुनीष शर्मा और एबीवीपी की प्रांत सचिव आशीश सिक्टा ने ज्वाइंट फ्रंट की तरफ से इन छात्र विरोधी निर्णयों के खिलाफ लड़ने का ऐलान किया। अपने आंदोलन की आगामी रणनीति के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि 26 सितंबर को अपना रोष प्रकट करने के लिए प्रदेशव्यापी रैली निकालेंगे। 
   एसएफआई और एबीवीपी का मानना है कि वे छात्र विरोधी निर्णयों पर चलाए गए इस आंदोलन को लेकर समय-समय पर रणनीति बनाते रहेंगे, जिसमें आगामी समय में अगर मांगें नहीं मानी जाती हैं तो प्रदेश भर में चक्का-जाम और जेल भरो आंदोलन चलाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।छह सदस्यों की नियुक्तिएसएफआई और एबीवीपी द्वारा बनाई गई ज्वाइंट को-आर्डिनेशन कमेटी में एसएफआई के मुनीष शर्मा, दिनेश मेहता, राहुल चौहान और एबीवीपी के आशीश सिक्टा, सन्नी शुक्ला और नवनीत कौशल छात्र नेता शामिल होंगे। एनएसयूआई से भी इस ज्वाइंट फ्रंट में शामिल होने की अपील की जा रही है, जिसे लेकर अब तक एनएसयूआई ने हामी नहीं भरी।हल्के में न ले सरकारएबीवीपी और एसएफआई ने प्रदेश सरकार को चेताया है कि छात्रों के आंदोलन को हल्के में लेने की भूल सरकार न करे। छात्र संगठन इस आंदोलन को उग्र करते हुए पूरा हिमाचल जाम करने का भी दम रखते हैं और अगर जरूरत पड़ी तो पूरे प्रदेश में गिरफ्तारियां देने से भी छात्र संगठन पीछे नहीं हटेंगे।मुख्यमंत्री के बयान की निंदा एसएफआई और एबीवीपी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री फीस वृद्धि को लेकर जिस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं, यह उन्हें शोभा नहीं देता। छात्र संगठन फीस वृद्धि पर आम छात्रों और उनके अभिभावकों को अपने आंदोलन में जोड़कर तब तक इस आंदोलन को लड़ेंगे, जब तक छात्र हित में फैसला नहीं होता और संयुक्त रूप से चलाए गए इस आंदोलन का आगाज सोमवार से पूरे प्रदेश में कर दिया जाएगा।
3:04 PM | 0 comments | Read More

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